दो गौरैया
कक्षा 8 हिन्दी मल्हार | पाठ 2 | कहानी

अध्याय का सारांश
‘दो गौरैया’ भीष्म साहनी की एक रोचक और संवेदनशील कहानी है। लेखक के घर में
माँ, पिताजी और लेखक रहते हैं, लेकिन वहाँ अनेक पक्षी और दूसरे जीव-जंतु भी
आते-जाते रहते हैं। इसलिए पिताजी मजाक में कहते हैं कि उनका घर सराय बन गया है।
एक दिन दो गौरैयाँ घर के अंदर आकर पंखे के गोले में अपना घोंसला बना लेती हैं।
पिताजी उन्हें घर से निकालने की बहुत कोशिश करते हैं। माँ उनकी कोशिशों पर
हँसती और मजाक करती रहती हैं। गौरैयाँ बार-बार घर में वापस आती रहती हैं।
अंत में पिताजी घोंसला तोड़ने लगते हैं। तभी उन्हें पता चलता है कि घोंसले में
छोटी-छोटी गौरैयाओं के बच्चे हैं। बच्चों की चीं-चीं सुनकर उनका मन बदल जाता है।
माँ घर के सभी दरवाजे खोल देती हैं और गौरैयों के माता-पिता बच्चों के पास लौट आते हैं।
कमरे में फिर शोर होता है, लेकिन इस बार पिताजी उन्हें देखकर केवल मुसकराते हैं।
कहानी हमें जीव-जंतुओं के प्रति दया, संवेदना, सह-अस्तित्व और प्रेम का संदेश देती है।
साथ ही कहानी में हास्य और व्यंग्य का सुंदर प्रयोग किया गया है।
लेखक परिचय
भीष्म साहनी (1915–2003) हिंदी साहित्य के बहुमुखी प्रतिभा के
लेखक थे। उन्होंने अपनी कहानियों में देश-विभाजन और मानवीय मूल्यों की मार्मिक
अभिव्यक्ति की। उनके प्रसिद्ध उपन्यास तमस पर उन्हें साहित्य
अकादमी पुरस्कार मिला। साहित्य में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें
पद्म भूषण से सम्मानित किया। बच्चों के लिए उन्होंने ‘गुलेल का खेल’ आदि कई
कहानियाँ लिखीं।
मुख्य बिंदु
- पाठ का नाम: दो गौरैया
- लेखक: भीष्म साहनी
- विधा: कहानी
- मुख्य पात्र: माँ, पिताजी, लेखक और दो गौरैयाँ
- मुख्य भाव: जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना और सह-अस्तित्व
- मुख्य संदेश: सभी जीवों के जीवन और उनके घर का सम्मान करना चाहिए।
- कहानी में हास्य और व्यंग्य का सुंदर प्रयोग है।
कठिन शब्दों के सरल अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|
| सराय | यात्रियों के ठहरने का स्थान |
| डेरा डालना | किसी स्थान पर रहना |
| धमा-चौकड़ी | बहुत अधिक भाग-दौड़ और शोर |
| निरीक्षण | ध्यान से देखना और जाँच करना |
| बिछावन | सोने के लिए बिछाई गई वस्तु |
| व्यंग्य | हँसी-मजाक के माध्यम से किसी बात पर चोट करना |
| सहनशीलता | कष्ट सहने की क्षमता |
| तिनके | सूखी घास या पौधों के छोटे टुकड़े |
| अवाक् | बहुत आश्चर्य में चुप हो जाना |
| चुग्गा | पक्षियों का भोजन |
| विस्मय | बहुत अधिक आश्चर्य |
| क्रिया विशेषण | क्रिया के होने का ढंग बताने वाला शब्द |
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि—
• घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
• घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
• पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
• घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
उत्तर: घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं तथा विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं।
(2) कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
• माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
• लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
• जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
• मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
उत्तर: जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे।
(3) गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
• दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
• पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
• दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
• माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
उत्तर: पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया।
(4) माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?
• माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
• माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
• माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
• माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
उत्तर: माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ और उन्हें पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे।
(5) कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
• दूसरों पर निर्भर रहना
• असफलताओं से हार मान लेना
• अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
• संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
उत्तर: अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: अलग-अलग उत्तरों के पीछे अलग-अलग विचार हो सकते हैं। हमें कहानी की घटनाओं और पात्रों के व्यवहार के आधार पर अपने उत्तर का कारण बताना चाहिए।
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | उपयुक्त अर्थ |
|---|
| 1 | वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं! | पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था। |
| 2 | आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। | आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं। |
| 3 | वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते। | चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते। |
| 4 | वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं। | पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं। |
| 5 | पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे। | पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए। |
| 6 | इतने में रात पड़ गई। | कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया। |
| 7 | जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं। | गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों। |
(ख) अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?
उत्तर: मैंने वही अर्थ चुना है जो कहानी के प्रसंग और घटनाओं से सबसे अधिक मेल खाता है। मित्रों के उत्तर अलग हों तो हम पाठ की पंक्तियों को देखकर सही अर्थ पर चर्चा कर सकते हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
अर्थ: माँ समझती थीं कि अब गौरैयाँ इस घर को अपना घर मान चुकी हैं। घोंसला बनाने के बाद उन्हें आसानी से यहाँ से हटाना संभव नहीं होगा।
“एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
अर्थ: पिताजी का विचार था कि यदि गौरैयों को घर में प्रवेश करने से रोक दिया जाए तो वे मजबूर होकर किसी दूसरे स्थान पर चली जाएँगी।
“किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
अर्थ: पिताजी गुस्से में सोच रहे थे कि यदि गौरैयों का घोंसला ही तोड़ दिया जाए तो वे घर में नहीं रह पाएँगी।
सोच-विचार के लिए
(क) आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा— घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तर: मुझे माँ का पात्र अच्छा लगा। वे गौरैयों के प्रति संवेदनशील थीं और उन्हें बार-बार भगाने के बजाय उनके रहने की बात समझ रही थीं। उनका हास्यपूर्ण व्यवहार कहानी को रोचक भी बनाता है।
(ख) लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर: चिड़िया ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बनाया। वह स्थान उसे सुरक्षित और रहने के लिए उपयुक्त लगा होगा।
(ग) क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।
उत्तर: हाँ, पशु-पक्षी भी अपने घर और परिवार से लगाव रखते हैं। कहानी में गौरैयाँ बार-बार अपने घोंसले में लौटती हैं। जब उनके बच्चे दिखाई देते हैं तो उनके माता-पिता तुरंत उनके पास आकर उन्हें चुग्गा खिलाते हैं।
(घ) “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं?
उत्तर: इससे पिताजी के दृढ़ निश्चय, जिद, मेहनत और हार न मानने वाले स्वभाव का पता चलता है।
(ङ) कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया? (संकेत— कहानी में खोजिए कि उन्होंने गाना कब बंद कर दिया?)
उत्तर: जब पिताजी घोंसला तोड़ने लगे, तब गौरैयाँ चहकना बंद करके चुपचाप दीवार पर बैठ गईं। वे अपने घोंसले और बच्चों के लिए चिंतित थीं। बच्चों के सामने आने पर वे फिर चीं-चीं करके उन्हें बुलाने लगीं।
(च) कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।
उत्तर:- खुले दरवाजे से
- दरवाजे के नीचे बची जगह से
- टूटे हुए शीशे वाले रोशनदान से
(छ) इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?
उत्तर: कहानी को लेखक स्वयं सुना रहा है। इसका पता इसलिए चलता है क्योंकि कहानी में ‘मैं’ का प्रयोग हुआ है और लेखक अपने घर तथा अपने माता-पिता की घटनाएँ स्वयं बता रहा है।
(ज) माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर: माँ समझ रही थीं कि गौरैयों ने घर में घोंसला बना लिया है और संभवतः अंडे भी दे दिए हैं। इसलिए वे अपने बच्चों और घोंसले को छोड़कर नहीं जाएँगी।
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?
उत्तर: मैं उन्हें परेशान नहीं करता। उनके लिए पानी और दाने रखता तथा सुरक्षित स्थान पर घोंसला बनाने देता। मैं उनके अंडों और बच्चों को हाथ नहीं लगाता।
(ख) मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों? (प्राणियों के नाम— चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)
उत्तर: यदि कबूतर घर में घुस जाए तो घर के लोग उसे धीरे से बाहर निकालेंगे। यदि मच्छर या कॉकरोच हो तो उन्हें घर से दूर करने के लिए अलग उपाय किए जाएँगे। व्यवहार प्राणी के स्वभाव और उससे होने वाली परेशानी के अनुसार अलग होगा।
(ग) “मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?
उत्तर: लेखक को घोंसले में छिपे नन्हे गौरैया के बच्चों को देखकर हैरानी हुई। उसे पता चला कि गौरैयों ने घोंसले में बच्चे पाल रखे थे।
(घ) “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर: माँ गौरैयों को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहती थीं। उन्हें विश्वास था कि गौरैयाँ जल्दी घर नहीं छोड़ेंगी। इसलिए वे पिताजी की कोशिशों को देखकर हँसती थीं।
(ङ) “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत— आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)
उत्तर: मैंने एक व्यक्ति को देखा जो रास्ते में गिरा हुआ सामान उठाकर उसके मालिक को ढूँढ़ने लगा। उसके व्यवहार से मुझे लगा कि वह ईमानदार और दूसरों की सहायता करने वाला व्यक्ति होगा।
(च) “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर: घर सामान्यतः किसी परिवार का स्थायी निवास होता है। सराय में यात्री कुछ समय के लिए ठहरते हैं। घर में परिवार के सदस्य रहते हैं, जबकि सराय में अलग-अलग लोग आते-जाते रहते हैं।
संवाद और अभिनय
(क) “वे अभी भी झाँके जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं।” नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?
संभावित संवाद:
पहली गौरैया: माँ और पिताजी कहाँ गए?
दूसरी गौरैया: हमें यहाँ बहुत डर लग रहा है।
पहली गौरैया: शायद वे हमारे लिए दाना लेने गए हैं।
दूसरी गौरैया: चलो उन्हें चीं-चीं करके बुलाते हैं।
(ख) “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” घोंसले से झाँकती गौरैयाँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?
संभावित संवाद:
पहली गौरैया: यह आदमी नीचे क्या कर रहा है?
दूसरी गौरैया: लगता है हमें बाहर निकालना चाहता है।
पहली गौरैया: यह हाथ क्यों हिला रहा है?
दूसरी गौरैया: पता नहीं, लेकिन हमें अपने घोंसले में ही रहना चाहिए।
(ग) “एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?
संभावित संवाद:
पहली गौरैया: यह घर काफी सुरक्षित लगता है।
दूसरी गौरैया: हाँ, यहाँ घोंसला बनाने की जगह भी है।
पहली गौरैया: चलो अलग-अलग जगह देखकर देखते हैं।
दूसरी गौरैया: फिर हम यहीं अपना घर बनाएँगे।
(घ) “उनके माँ-बाप झट से उड़ कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चोंचों में चुग्गा डालने लगे।” गौरैयों और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?
संभावित संवाद:
बच्चे: माँ-पिताजी, आप कहाँ चले गए थे?
माँ गौरैया: हम तुम्हारे लिए दाना लेने गए थे।
पिताजी गौरैया: अब हम तुम्हारे पास हैं।
बच्चे: हमें बहुत डर लग रहा था।
माँ गौरैया: अब डरने की जरूरत नहीं है।
बदली कहानी
मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।
उत्तर:
यदि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते, तो पिताजी शायद घोंसला तोड़ देते।
गौरैयाँ कुछ समय तक अपने घोंसले के आसपास मंडरातीं और फिर किसी दूसरे सुरक्षित
स्थान की तलाश करतीं। माँ को पिताजी के इस काम का दुख होता। घर में फिर शांति
हो जाती, लेकिन गौरैयों के जाने से घर पहले जैसा चहल-पहल वाला नहीं रहता।
कहने के ढंग / क्रिया विशेषण
“माँ खिलखिलाकर हँस दीं।”
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं।
कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं।
‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रिया विशेषण शब्द है।
(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
उत्तर: छात्र इस क्रिया विशेषण का प्रयोग करते हुए वाक्य बना सकता है।
उदाहरण: शिक्षक ने बच्चे को झिड़ककर समझाया।
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
उत्तर: माँ ने गंभीरता से अपनी बात समझाई।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।
उत्तर: पिताजी ने गुस्से में अपनी बात कही।
कुछ अन्य क्रिया विशेषण और उनके वाक्य
| क्रिया विशेषण | वाक्य |
|---|
| धीरे से | बच्चे ने दरवाजा धीरे से खोला। |
| जोर से | बच्चे ने जोर से आवाज लगाई। |
| अटकते हुए | वह अटकते हुए उत्तर दे रहा था। |
| चिल्लाकर | उसने चिल्लाकर सबको बुलाया। |
| शरमाकर | बच्ची शरमाकर मुसकराई। |
| सहमकर | बच्चा सहमकर पीछे हट गया। |
| फुसफुसाते हुए | दोनों बच्चे फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे। |
घर के प्राणी
कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?
(क) बिल्ली — ‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) चूहा — अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है।
(ग) चूहा — बाथरूम की टंकी पर चढ़कर बैठता है।
(घ) गौरैयाँ — मकान का निरीक्षण करती हैं और घोंसला बनाकर रहने लगती हैं।
(ङ) गौरैयाँ — घोंसले को सजाती हैं और उसमें अपने बच्चों को पालती हैं।
हेर-फेर मात्रा का
“माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।”
“पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
उपर्युक्त वाक्यों में शब्दों की मात्राओं में थोड़ा अंतर होने से अर्थ बदल जाता है।
| शब्द | अर्थ | वाक्य |
|---|
| नाच | नृत्य | बच्चों ने सुंदर नाच किया। |
| नाचा | नृत्य किया | वह मंच पर नाचा। |
| नचा | नचाया गया | कलाकार ने कठपुतली नचा दी। |
| हार | पराजय / गले का आभूषण | उसने हार स्वीकार नहीं की। |
| हरा | green / पराजित किया | पेड़ के पत्ते हरे हैं। |
| हारा | पराजित हुआ | खिलाड़ी मैच में हारा। |
| पिता | father | मेरे पिता शिक्षक हैं। |
| पीता | पान करता है | वह रोज दूध पीता है। |
| चूक | गलती / अवसर निकल जाना | एक छोटी चूक से उत्तर गलत हो गया। |
| चक | कुम्हार का घूमने वाला पहिया | कुम्हार चक पर मिट्टी का बर्तन बनाता है। |
| नीचा | कम ऊँचाई वाला | यह पेड़ उस पेड़ से नीचा है। |
| नीचे | lower place | किताब मेज के नीचे है। |
| सहसा | अचानक | सहसा तेज आवाज सुनाई दी। |
| साहस | हिम्मत | हमें कठिन समय में साहस रखना चाहिए। |
वाद-विवाद
कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं—
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।”
वाद-विवाद का विषय: “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”
पक्ष में तर्क:- माँ ने कई बार चिड़ियों को बाहर निकालने का उपाय बताया।
- उन्होंने दरवाजा खुला रखने की बात कही ताकि गौरैयाँ बाहर जा सकें।
विपक्ष में तर्क:- माँ पिताजी की कोशिशों पर बार-बार हँसती थीं।
- उन्होंने कहा कि चिड़ियों को मत निकालो।
- अंत में माँ ने सभी दरवाजे खोल दिए ताकि गौरैयाँ और उनके बच्चे सुरक्षित रहें।
कहानी की रचना
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।”
उत्तर: यह पंक्ति बताती है कि कहानी के अंत में पिताजी का दृष्टिकोण बदल गया। पहले वे गौरैयों को घर से निकालना चाहते थे, लेकिन बच्चों को देखकर उनके मन में दया और अपनापन आ गया।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूँढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
उत्तर:- हास्य और व्यंग्य
- रोचक घटनाएँ
- संवादों का सुंदर प्रयोग
- पात्रों के व्यवहार का सजीव वर्णन
- जानवरों को मनुष्यों जैसा व्यवहार करते दिखाना
- अंत में पात्र के दृष्टिकोण में बदलाव
- करुणा और संवेदना का भाव
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी में से उदाहरण |
|---|
| 1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना | जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो। |
| 2. हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना | माँ का यह कहना कि चिड़ियाँ आपस में पूछ रही होंगी कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है। |
| 3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और | पिताजी सोचते थे कि गौरैयाँ घर छोड़ देंगी, लेकिन वे बार-बार वापस आ जाती थीं। |
| 4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना | लेखक ने अनुमान लगाया कि अँगीठी के पीछे बैठने वाला चूहा बूढ़ा है और उसे सर्दी लगती है। |
| 5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना | “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो।” |
| 6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना | पिताजी ने घर को सराय कहा और गौरैयों द्वारा घर देखने को मकान का निरीक्षण कहा। |
| 7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना | “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” |
आपकी बात
(क) “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर: मैंने पक्षियों को दाना चुगते, पानी पीते, उड़ते, घोंसला बनाते और अपने बच्चों को खाना खिलाते देखा है। उनके व्यवहार में प्रेम, अपनापन, सावधानी और खुशी जैसे भाव दिखाई देते हैं।
(ख) “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तर: हाँ, मैं अपने कमरे, किताबों और खेल की वस्तुओं को अपने भाई-बहन के साथ साझा करता हूँ। कभी-कभी छोटी समस्या होती है, लेकिन हम आपस में बात करके बारी तय कर लेते हैं और समस्या हल कर लेते हैं।
(ग) परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तर: हाँ। कभी-कभी हम किसी व्यक्ति को पहली बार देखकर उसके बारे में एक राय बना लेते हैं। बाद में उससे बात करने पर पता चलता है कि वह बहुत अच्छा और मददगार है। तब हमारा दृष्टिकोण बदल जाता है।
पाठ से आगे
“गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
उत्तर: पक्षी दाना चुगते, पानी पीते, घोंसला बनाते, बच्चों को खाना खिलाते और एक-दूसरे को आवाज लगाते दिखाई देते हैं। उनके व्यवहार में प्रेम, चिंता, खुशी और अपनापन दिखाई देता है।
“कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?
उत्तर: मैं घर में कई वस्तुएँ और स्थान परिवार के सदस्यों के साथ साझा करता हूँ। यदि कोई समस्या आती है तो हम आपस में बात करके बारी तय करते हैं और मिल-जुलकर समाधान निकालते हैं।
(ग) परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
उत्तर: हाँ, ऐसा हो सकता है। किसी व्यक्ति के बारे में पहली धारणा गलत हो सकती है। उसके व्यवहार और अच्छे कार्यों को जानने के बाद हमारा विचार बदल सकता है।
चिड़ियों का घोंसला
घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग
तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।
सावधानी: पक्षियों के घोंसलों को हाथ नहीं लगाना चाहिए। इससे पक्षियों, उनके अंडों,
बच्चों और हमें भी खतरा हो सकता है।
(क) अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूँढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी— उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)
नमूना उत्तर:| क्रम संख्या | घोंसले को कहाँ देखा | घोंसला किन चीजों से बनाया गया था | घोंसला खाली था या नहीं | घोंसला किस पक्षी का था |
|---|
| 1 | पेड़ की शाखा पर | सूखी घास और तिनके | नहीं | गौरैया |
| 2 | छज्जे के पास | तिनके और धागे | हाँ | कबूतर |
(ख) विभिन्न पक्षियों के घोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।
उत्तर: प्रस्तुति में अलग-अलग पक्षियों के नाम, उनके घोंसले का स्थान, घोंसला बनाने की सामग्री और घोंसले की विशेषताएँ लिखी जा सकती हैं। पक्षियों के चित्र भी लगाए जा सकते हैं।
मल्हार

“जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”
उत्तर: ‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध रागों में से एक है। इसका संबंध वर्षा ऋतु से माना जाता है। कहानी में गौरैयों की चहचहाहट को मजाकिया ढंग से ‘मल्हार गाना’ कहा गया है।
हास्य-व्यंग्य
“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” माँ ने व्यंग्य से कहा।
व्यंग्य का अर्थ है हँसी-मजाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी, बुराई या विडंबना
को उजागर करना। व्यंग्य में बात को सीधे न कहकर उलटे या संकेतात्मक ढंग से कहा जाता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर:- “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?”
- “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
- “इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत थी। पंखा चला देते, तो ये उड़ जातीं।”
(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।
उत्तर:- “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!” — व्यंग्य
- “चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” — व्यंग्यात्मक हास्य
आज की पहेली
नीचे दी गई चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।
उत्तर: चित्र-पहेली में बिल्ली को केवल खुले रास्ते से आगे बढ़ाते हुए चूहे तक पहुँचाना है। किसी दीवार या बंद रास्ते को पार नहीं करना है।
झरोखे से
विश्व गौरैया दिवस
‘दो गौरैया’ कहानी में दो गौरैयाँ लेखक के घर में बिन बुलाए अतिथि की तरह आती हैं।
आज गौरैया के संरक्षण और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है।
हर वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है।
इसका उद्देश्य गौरैया के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना है।
गौरैयों के लिए सुरक्षित घोंसले की जगह कम होना और शहरीकरण जैसी परिस्थितियाँ
उनके लिए चुनौती बन सकती हैं। इसलिए पक्षियों के लिए सुरक्षित स्थान, पानी और
दाना उपलब्ध कराना उपयोगी है।
साझी समझ — नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग कर इस लेख को पूरा पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर: लेख को पढ़कर चर्चा में गौरैया की घटती संख्या, उनके लिए घोंसले की जगह,
भोजन और सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता जैसे विषयों पर बात की जा सकती है।
पढ़ने के लिए — मित्रलाभ
मित्रलाभ का सरल सारांश
‘मित्रलाभ’ पंचतंत्र की एक प्रसिद्ध कथा है। इसमें लघुपतनक नाम का कौआ,
हिरण्यक नाम का चूहा, मंथरक नाम का कछुआ और चित्रांग नाम का हिरन मित्र बनते हैं।
एक बार कबूतरों का राजा चित्रग्रीव अपने साथियों सहित शिकारी के जाल में फँस जाता है।
सभी कबूतर मिलकर जाल सहित उड़ जाते हैं और हिरण्यक चूहा उनके बंधन काट देता है।
इससे कौआ लघुपतनक चूहे की बुद्धिमानी और सज्जनता से प्रभावित होता है।
बाद में कौआ और चूहा मित्र बन जाते हैं। वे दूसरे स्थान पर जाते हैं जहाँ उनकी
मित्रता मंथरक कछुए और चित्रांग हिरन से भी हो जाती है।
एक दिन चित्रांग हिरन शिकारी के जाल में फँस जाता है। हिरण्यक चूहा उसके जाल को
काटकर उसे बचाता है। बाद में शिकारी मंथरक कछुए को पकड़ लेता है। तीनों मित्र
मिलकर एक योजना बनाते हैं और कछुए को भी बचा लेते हैं।
कहानी का मुख्य संदेश है कि सच्चे मित्र संकट के समय एक-दूसरे की सहायता करते हैं।
मिल-जुलकर काम करने से कठिन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।
मित्रलाभ के मुख्य पात्र
| पात्र | भूमिका |
|---|
| लघुपतनक | कौआ और बुद्धिमान मित्र |
| हिरण्यक | चूहा और जाल काटने वाला मित्र |
| मंथरक | कछुआ और सच्चा मित्र |
| चित्रांग | हिरन और मित्र समूह का सदस्य |
| चित्रग्रीव | कबूतरों का राजा |
| व्याध | शिकारी |
अपने पुस्तकालय में से पंचतंत्र की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।
उत्तर: इस गतिविधि में विद्यार्थी अपनी पसंद की पंचतंत्र की कोई कहानी चुनकर कक्षा में सुनाएँ। कहानी सुनाते समय उसके पात्र, मुख्य घटना और सीख को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।
मित्रलाभ से सीख
- सच्चे मित्र संकट में साथ देते हैं।
- मित्रों की सहायता करने से संबंध मजबूत होते हैं।
- मिल-जुलकर काम करने से कठिन काम आसान हो जाता है।
- बुद्धि और एकता से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
- लोभ से बचना चाहिए।
- संकट के समय घबराने के बजाय सही योजना बनानी चाहिए।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
1. पिताजी अपने घर को सराय क्यों कहते थे?
उत्तर: क्योंकि उनके घर में अनेक पक्षी, चूहे और दूसरे जीव-जंतु रहते और आते-जाते थे।
2. गौरैयों ने अपना घोंसला कहाँ बनाया?
उत्तर: उन्होंने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में अपना घोंसला बनाया।
3. पिताजी गौरैयों को घर से क्यों निकालना चाहते थे?
उत्तर: वे घर में होने वाले शोर और परेशानी के कारण गौरैयों को घर से निकालना चाहते थे।
4. माँ पिताजी की कोशिशों पर क्यों हँसती थीं?
उत्तर: माँ को विश्वास था कि गौरैयाँ अपना घोंसला बनाकर अब आसानी से नहीं जाएँगी। इसलिए उन्हें पिताजी की कोशिशें मजेदार लगती थीं।
5. पिताजी का दृष्टिकोण कब बदल गया?
उत्तर: जब पिताजी ने घोंसले में नन्हे गौरैया के बच्चों को देखा, तब उनका मन बदल गया।
6. कहानी के अंत में पिताजी क्या करते हैं?
उत्तर: वे गौरैयों को घर से निकालना छोड़ देते हैं और उन्हें देखकर मुसकराते हैं।
7. कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर: हमें पशु-पक्षियों के प्रति दया और संवेदना रखनी चाहिए तथा उनके साथ सह-अस्तित्व का भाव रखना चाहिए।
एक नजर में अध्याय
| बिंदु | जानकारी |
|---|
| पाठ | दो गौरैया |
| लेखक | भीष्म साहनी |
| विधा | कहानी |
| मुख्य पात्र | माँ, पिताजी, लेखक और दो गौरैयाँ |
| मुख्य घटना | गौरैयों का घर में घोंसला बनाना |
| संघर्ष | पिताजी का गौरैयों को घर से निकालने का प्रयास |
| बदलाव | गौरैयों के बच्चों को देखकर पिताजी का मन बदलना |
| मुख्य संदेश | जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम, दया और सह-अस्तित्व |
| दूसरा पाठ | मित्रलाभ — पंचतंत्र से |
| मित्रलाभ का संदेश | मित्रता, एकता और सहयोग में शक्ति होती है। |
चित्र: दो गौरैया पुस्तक आवरण के लिए National Book Trust India की उपलब्ध पुस्तक-छवि का प्रयोग किया गया है।
अन्य दृश्य चित्र कहानी के विषय से संबंधित संदर्भ चित्र हैं।