Class 6 Hindi मल्हार Chapter 11 चेतक की वीरता – आसान नोट्स, सारांश, शब्दार्थ, NCERT पुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न और worksheet। कविता को सरल भाषा में समझें और परीक्षा की तैयारी करें।
चेतक की वीरता
कक्षा 6 • हिंदी • मल्हार • अध्याय 11
📖 पूरी कविता
रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर
चेतक बन गया निराला था।
राणा प्रताप के घोड़े से
पड़ गया हवा को पाला था।
गिरता न कभी चेतक-तन पर
राणा प्रताप का कोड़ा था।
वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर
या आसमान पर घोड़ा था।
जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।
राणा की पतली फिरी नहीं
तब तक चेतक मुड़ जाता था।
कौशल दिखलाया चालों में
उड़ गया भयानक भालों में।
निर्भीक गया वह ढालों में
सरपट दौड़ा करवालों में।
है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।
थी जगह न कोई जहाँ नहीं
किस अरि-मस्तक पर कहाँ नहीं।
बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।
विकराल बज्र-मय बादल-सा
अरि की सेना पर घहर गया।
भाला गिर गया, गिरा निषंग,
हय-टापों से खन गया अंग।
वैरी-समाज रह गया दंग
घोड़े का ऐसा देख रंग।
🌟 संपूर्ण सारांश – बहुत आसान भाषा में
‘चेतक की वीरता’ कविता में महाराणा प्रताप के वीर घोड़े चेतक की बहादुरी, तेज गति, फुर्ती और निष्ठा का वर्णन किया गया है।
युद्धभूमि में चेतक इतनी तेज गति से दौड़ता था कि उसकी तुलना हवा से की गई है। महाराणा प्रताप की लगाम के बहुत हल्के संकेत को भी चेतक तुरंत समझ जाता था और उसी दिशा में मुड़ जाता था।
चेतक तलवारों, भालों और ढालों के बीच बिना डरे दौड़ता था। वह कभी यहाँ दिखाई देता और अगले ही क्षण दूसरी जगह पहुँच जाता। इससे शत्रु भ्रमित और आश्चर्यचकित हो जाते थे।
कवि ने चेतक की तुलना नदी की लहर, हवा और विकराल वज्र-मय बादल से की है। उसकी तेज टापों और युद्ध-कौशल से शत्रु सेना में हलचल मच जाती थी।
🖼️ कविता से संबंधित वास्तविक चित्र

हल्दीघाटी: राजस्थान का ऐतिहासिक दर्रा, जो महाराणा प्रताप और हल्दीघाटी के युद्ध से जुड़ा है।

महाराणा प्रताप–चेतक स्मारक: उदयपुर के मोती मगरी से जुड़ा ऐतिहासिक स्मारक।

प्रताप स्मारक: हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और चेतक की स्मृति से जुड़ा स्थान।
✍️ कवि से परिचय
वीर रस की कविताओं के लिए चर्चित कवि श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) की सर्वाधिक लोकप्रिय काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ का प्रकाशन सन 1939 में हुआ था।
‘चेतक की वीरता’ कविता ‘हल्दीघाटी’ का ही एक अंश है। ‘हल्दीघाटी’ काव्यकृति ने स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था।
श्यामनारायण पाण्डेय → हल्दीघाटी → वीर रस → चेतक की वीरता
📘 पाठ से – मेरी समझ से
अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करेंगे। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।
(1) चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?
(2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?
💬 पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा में अपने विचार साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
🔗 मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही भावार्थ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
| पंक्तियाँ | भावार्थ |
|---|---|
| 1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था। | 1. शत्रु की सेना पर भयानक वज्र-मय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। |
| 2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था। | 2. हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो। |
| 3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था। | 3. शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। |
| 4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था। | 4. चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था। |
| 5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया। | 5. वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था। |
🏷️ शीर्षक
यह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?
🎵 कविता की रचना
“चेतक बन गया निराला था।”
“पड़ गया हवा का पाला था।”
“राणा प्रताप का कोड़ा था।”
“या आसमान पर घोड़ा था।”
रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।
🔎 शब्द के भीतर शब्द
“या आसमान का घोड़ा था।”
‘आसमान’ शब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छिपे हैं— आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि।
अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए।
| कविता का शब्द | उसके भीतर छिपे शब्द |
|---|---|
| __________ | ________________________ |
| __________ | ________________________ |
| __________ | ________________________ |
| __________ | ________________________ |
| __________ | ________________________ |
🚀 पाठ से आगे – आपकी बात
“जो तनिक हवा से बाग हिली
लेकर सवार उड़ जाता था।”
(क)
‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।
(ख)
कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए।
📚 समानार्थी शब्द
कुछ शब्द समान अर्थ वाले होते हैं, जैसे— हय, अश्व और घोड़ा। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं।
यहाँ पर दिए गए शब्दों से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हों—
| क्रम | शब्द | जो समानार्थी नहीं है |
|---|---|---|
| 1 | हवा, अनल, पवन, बयार | अनल |
| 2 | रण, तुरंग, युद्ध, समर | तुरंग |
| 3 | आसमान, आकाश, गगन, नभचर | नभचर |
| 4 | नद, नाद, सरिता, तटिनी | नाद |
| 5 | करवाल, तलवार, असि, ढाल | ढाल |
अनल = अग्नि
तुरंग = घोड़ा
नभचर = आकाश में विचरण करने वाला
नाद = ध्वनि
करवाल / असि = तलवार
🧩 आज की पहेली – बूझो तो जानें
दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।
बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
बोलो, बोलो— मैं हूँ कौन?
सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।
शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।
🔍 खोजबीन के लिए
📝 कठिन शब्द – आसान अर्थ
| शब्द | आसान अर्थ |
|---|---|
| रण | युद्ध |
| चौकड़ी | घोड़े का उछलते हुए तेज दौड़ना |
| अरि | शत्रु |
| मस्तक | सिर |
| बाग | लगाम |
| सवार | घोड़े पर बैठा व्यक्ति |
| कौशल | कुशलता / हुनर |
| भाला | एक प्रकार का हथियार |
| करवाल | तलवार |
| निर्भीक | बिना डर के |
| हय | घोड़ा |
| विकराल | बहुत भयंकर |
| वज्र-मय | वज्र के समान शक्तिशाली |
| घहरना | गरजना / जोर से छा जाना |
| निषंग | तरकश |
| वैरी | शत्रु |
| दंग | बहुत आश्चर्यचकित |
🎨 कविता की विशेषताएँ
वीर रस तुकांत शैली चित्रात्मक भाषा उपमा अतिशयोक्ति गति रोमांच वीरता🎯 परीक्षा के लिए छोटे प्रश्न-उत्तर
⭐ एक नज़र में पूरा अध्याय
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| कवि | श्यामनारायण पाण्डेय |
| जन्म–मृत्यु | 1907–1991 |
| काव्यकृति | हल्दीघाटी |
| मुख्य पात्र | चेतक और महाराणा प्रताप |
| मुख्य रस | वीर रस |
| मुख्य गुण | वीरता, साहस, गति, फुर्ती, निष्ठा |
| मुख्य संदेश | साहस और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण |
✏️ विद्यार्थी अभ्यास
मुझे कविता में सबसे अच्छा लगा—
चेतक का सबसे अच्छा गुण—
महाराणा प्रताप से मैंने क्या सीखा?
कविता का मेरा पसंदीदा शब्द—
कविता का मेरा पसंदीदा भाव—
✅ उत्तरमाला
उत्तरमाला खोलें
मेरी समझ से
1. चेतक बादल की तरह वज्रपात बनकर शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
2. ‘सवार’ शब्द महाराणा प्रताप के लिए आया है।
मिलकर करें मिलान
1–2, 2–3, 3–4, 4–5, 5–1
तुकांत शब्द
निराला–पाला, कोड़ा–घोड़ा, चालों–भालों, ढालों–करवालों, गया–ठहर गया–घहर गया, निषंग–अंग–दंग–रंग।
समानार्थी नहीं
1. अनल 2. तुरंग 3. नभचर 4. नाद 5. ढाल
मुख्य संदेश
कठिन परिस्थितियों में साहस, निष्ठा, गति और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण बनाए रखना चाहिए।
कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 11 के लिए यह आसान और उपयोगी worksheet अभ्यास के लिए तैयार की गई है।इसमें पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न, शब्दार्थ और समझ पर आधारित प्रश्न शामिल हैं।
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