Class 6 Hindi मल्हार Chapter 9 मैया मैं नहिं माखन खायो – आसान नोट्स, सारांश, शब्दार्थ, NCERT पुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न और worksheet। पद को सरल भाषा में समझें और परीक्षा की तैयारी करें।
🌸 हिंदी मल्हार – कक्षा 6
अध्याय 9 – मैया मैं नहिं माखन खायो
कवि – महाकवि सूरदास
Complete Notes • NCERT Questions • Easy Answers • Worksheet
📖 पूरी कविता – सबसे पहले पढ़ें
मैया मैं नहिं माखन खायो।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो।
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।
ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो॥
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।
जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो॥
सूरदास तब बिहसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥
🖼️ कविता से जुड़े चित्र

यशोदा और कृष्ण – ऐतिहासिक भारतीय चित्रकला

यशोदा और कृष्ण – माखन प्रसंग

यशोदा द्वारा माखन मथने का दृश्य
चित्र-सूचना: चित्र केवल पाठ को समझने और दृश्य रूप से जोड़ने के लिए दिए गए हैं। किसी वेबसाइट से चित्र को दोबारा प्रकाशित करने से पहले उसकी वर्तमान लाइसेंस/उपयोग शर्त अवश्य जाँचें।
🌼 अध्याय का सरल सारांश
इस पद में बालक श्रीकृष्ण और उनकी माँ यशोदा के बीच का बहुत ही प्यारा संवाद प्रस्तुत किया गया है। यशोदा को लगता है कि कृष्ण ने माखन खाया है, लेकिन कृष्ण अपनी माँ के सामने सफाई देते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया।
कृष्ण कहते हैं कि वे सुबह गायों के पीछे मधुबन गए थे। वे चार पहर तक बंसीवट में घूमते रहे और शाम को घर लौटे। वे अपनी छोटी बाँहों का तर्क देते हुए कहते हैं कि वे छीके तक पहुँच ही नहीं सकते।
कृष्ण अपने ग्वाल-बाल मित्रों पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने जबरदस्ती माखन उनके मुँह पर लगा दिया। वे माँ को भोली भी कहते हैं और कहते हैं कि वे दूसरों की बातों पर विश्वास कर रही हैं।
अंत में कृष्ण की भोली बातें सुनकर यशोदा हँस पड़ती हैं और उन्हें अपने हृदय से लगा लेती हैं। पद में माँ-बेटे के प्रेम, बाल-क्रीड़ा और कृष्ण की चतुराई का सुंदर चित्रण है।
👨🎨 कवि से परिचय – सूरदास
इस रचना के कवि महाकवि सूरदास हैं। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय मथुरा, गोवर्धन और ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण के गुणगान में भजन गाते हुए बिताया।
सूरदास की रचनाएँ मुख्यतः ब्रजभाषा में हैं। उनकी अधिकांश कविताओं में श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का सुंदर और मनोहारी वर्णन मिलता है। उनकी रचनाएँ आज भी बहुत लोकप्रिय हैं।
📚 महत्वपूर्ण शब्द
मैया माखन गैयन मधुबन बंसीवट पहर छीका ग्वाल-बाल लकुटि-कमरिया भोरी पतियायो बिहसि लपटायो✏️ पाठ से – मेरी समझ से
🤝 मिलकर करें मिलान
| शब्द | अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. जसोदा | यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। |
| 2. पहर | समय मापने की एक इकाई। तीन घंटे का एक पहर होता है। |
| 3. लकुटि कमरिया | लाठी और छोटा कंबल, कमली। |
| 4. बंसीवट | एक वट वृक्ष, जहाँ श्रीकृष्ण के गायों को बुलाने की मान्यता है। |
| 5. मधुबन | मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन। |
| 6. छीको | रस्सियों से बना गोल पात्र जैसा जाल, जिसमें खाने-पीने की वस्तुएँ रखी जाती थीं। |
| 7. माता | जन्म देने वाली, जननी, माँ। |
| 8. ग्वाल-बाल | गाय पालने वालों के बच्चे और श्रीकृष्ण के साथी। |
💬 पंक्तियों पर चर्चा
🧠 सोच-विचार के लिए
🎵 कविता की रचना
कविता की पंक्तियों के अंत में आने वाले शब्दों में समान ध्वनि को तुक कहते हैं।
| शब्द | तुक वाला शब्द |
|---|---|
| पठायो | आयो |
| पायो | लपटायो |
| पतियायो | जायो |
- ब्रजभाषा का प्रयोग।
- श्रीकृष्ण की बाल-लीला का सुंदर वर्णन।
- माँ और पुत्र के प्रेम का चित्रण।
- तुकांत शब्दों का प्रयोग।
- संवादात्मक शैली।
- अंतिम पंक्ति में कवि ने अपना नाम “सूरदास” दिया है।
💭 अनुमान या कल्पना से
🔤 शब्दों के रूप
(क) पद में आए शब्दों के आधुनिक रूप
| पद का शब्द | आज का रूप |
|---|---|
| परे | पड़ा / पड़े |
| छोटो | छोटा |
| बिधि | विधि |
| भोरी | भोली |
| कछु | कुछ |
| लै | ले |
| नहिं | नहीं |
| पाछे | पीछे |
(ख) शब्द और अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| उपजि | उत्पन्न होना |
| जानि | जानकर / समझकर |
| जायो | जन्मा |
| जिय | मन / जी |
| पठायो | भेज दिया |
| पतियायो | विश्वास किया |
| बहियन | बाँह / हाथ |
| बिधि | प्रकार / रीति |
| बिहसिँ | हँसी / मुस्कुराईं |
| भटक्यो | इधर-उधर घूमना |
| लपटायो | मल दिया / लगा दिया |
🔄 वर्ण-परिवर्तन
पद में ऐसे शब्द खोजिए जिनमें ल, र या ड़ जैसे वर्णों में परिवर्तन दिखाई देता है।
📖 पंक्ति से पंक्ति – भावार्थ मिलान
| पंक्ति | सरल भावार्थ |
|---|---|
| 1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। | सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया। |
| 2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो। | चार पहर बंसीवट में घूमने के बाद शाम को घर आया। |
| 3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो। | मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ? |
| 4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो। | मेरे ग्वाल-बाल मित्र मुझसे बैर रखते हैं और उन्होंने जबरदस्ती मेरे मुँह पर माखन लगा दिया। |
| 5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। | माँ, तुम बहुत भोली हो और इनकी बातों पर विश्वास कर लिया। |
| 6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो। | लगता है तुम्हारे मन में कोई भेद आ गया है, इसलिए तुम मुझे पराया समझने लगी हो। |
🌱 पाठ से आगे – आपकी बात
यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।
🏠 घर की वस्तुएँ
छीका
छीका रस्सियों से बना एक घरेलू उपकरण था, जिसमें दूध, दही, मक्खन आदि को ऊँचाई पर सुरक्षित रखने के लिए रखा जाता था।
अन्य घरेलू वस्तुएँ
मटका, घड़ा, चक्की, सिल-बट्टा, परात, चरखी, लकड़ी की मथानी आदि।
✏️ अपने घर की वस्तुओं के नाम लिखिए
| चित्र/वस्तु | हमारे घर में इसे क्या कहते हैं? |
|---|---|
| वस्तु 1 | ________________________ |
| वस्तु 2 | ________________________ |
| वस्तु 3 | ________________________ |
| वस्तु 4 | ________________________ |
🥛 दूध से घी बनने की प्रक्रिया

पारंपरिक तरीके से मथना

दही से मक्खन निकालना
- सबसे पहले दूध को उबालकर ठंडा किया जाता है।
- दूध से दही जमाया जाता है।
- दही को मथकर मक्खन निकाला जाता है।
- मक्खन को गर्म किया जाता है।
- गर्म करने पर घी अलग हो जाता है।
- घी को छानकर साफ पात्र में रखा जाता है।
⏰ समय का माप
🌟 हम सब विशेष हैं
| व्यक्ति | उसकी विशेष क्षमता |
|---|---|
| आपकी | |
| आपके किसी परिजन की | |
| आपके शिक्षक की | |
| आपके मित्र की |
🤝 हम दूसरों की सहायता कैसे कर सकते हैं?
🧩 आज की पहेली – दूध से बनने वाली वस्तुएँ
दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है। नीचे दिए गए संकेतों के आधार पर शब्द पूरे कीजिए।
| संकेत | उत्तर |
|---|---|
| घी – श | ________________________ |
| दूध से बनने वाली मिठाई – म | ________________________ |
| दूध से बनने वाला पेय – ल | ________________________ |
| दूध से बनने वाला खाद्य पदार्थ – प | ________________________ |
🔎 खोजबीन के लिए
सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें और पढ़ें।
अपने समूह में एक रचना चुनकर उसके बारे में निम्न जानकारी लिखिए:
- रचना का नाम – __________________________
- कवि – _________________________________
- मुख्य विषय – ___________________________
- मुझे सबसे अच्छी बात – ___________________
⭐ अतिरिक्त अभ्यास
✅ उत्तरमाला – स्व-जाँच
1. यशोदा।
2. कृष्ण ने कहा कि वे छोटे बालक हैं और उनके छोटे हाथ छीके तक नहीं पहुँच सकते। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाल-बालों ने उनके मुँह पर माखन लगा दिया।
3. छीका रस्सियों से बना ऐसा जाल/पात्र था जिसमें दूध, दही और मक्खन जैसी वस्तुएँ सुरक्षित रखने के लिए ऊँचाई पर लटकाई जाती थीं।
4. ब्रजभाषा।
5. यशोदा हँस पड़ीं और कृष्ण को अपने हृदय से लगा लिया।
6. माँ और पुत्र के बीच प्रेम, अपनापन, विश्वास और स्नेह दिखाई देता है।
⚡ एक मिनट में अध्याय की पुनरावृत्ति
| बिंदु | याद रखें |
|---|---|
| कवि | सूरदास |
| भाषा | ब्रजभाषा |
| मुख्य पात्र | श्रीकृष्ण और यशोदा |
| मुख्य विषय | श्रीकृष्ण की बाल-लीला |
| मुख्य घटना | कृष्ण का माखन खाने से इनकार |
| छीका | खाने-पीने की वस्तुएँ रखने का ऊँचाई पर लटकाया जाने वाला जाल |
| पहर | लगभग 3 घंटे |
| चार पहर | लगभग 12 घंटे |
| अंत | यशोदा कृष्ण को हँसते हुए गले लगा लेती हैं |
कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 9 के लिए यह आसान और उपयोगी worksheet अभ्यास के लिए तैयार की गई है।इसमें पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न, शब्दार्थ और समझ पर आधारित प्रश्न शामिल हैं।
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