Class 8 Hindi Malhar Chapter 4 हरिद्वार notes with easy explanations, NCERT book solutions, important questions and revision material for CBSE students.Keywords
Class 8 Hindi Malhar
अध्याय 4 — हरिद्वार
अध्याय का सारांश
“हरिद्वार” भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखा गया एक यात्रा-वृत्तांत है। यह रचना एक पत्र के रूप में लिखी गई है। लेखक ने वर्ष 1871 में हरिद्वार की यात्रा की और वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य, पर्वतों, पेड़-पौधों, पक्षियों, गंगा नदी, घाटों, तीर्थों और अपने अनुभवों का सुंदर वर्णन किया है।
लेखक को हरिद्वार की हरियाली, गंगा का शीतल जल, पर्वतों की सुंदरता और शांत वातावरण बहुत पसंद आया। वे वृक्षों को सज्जन लोगों के समान बताते हैं क्योंकि वृक्ष मनुष्य को फल, फूल, छाया, लकड़ी, पत्ते, जड़ और अन्य अनेक वस्तुएँ देते हैं।
लेखक ने हरिद्वार में सादगीपूर्ण जीवन का अनुभव किया। उन्होंने गंगा के तट पर पत्थर पर बैठकर भोजन किया और इस साधारण भोजन को सोने की थाली के भोजन से भी अधिक सुखद बताया। वहाँ उन्हें ज्ञान, वैराग्य और भक्ति की अनुभूति हुई।
इस पाठ में प्रकृति-प्रेम, सादगी, आध्यात्मिकता, संतोष, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विचार दिखाई देते हैं। पाठ हमें यात्रा के माध्यम से प्रकृति और संस्कृति को समझने तथा उसकी रक्षा करने की सीख देता है।
हर की पैड़ी, हरिद्वार
लेखक परिचय

भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850–1885) हिंदी साहित्य के प्रमुख रचनाकार थे। उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य और हिंदी रंगमंच के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला साहित्यकार माना जाता है।
उन्होंने कविता, नाटक, निबंध, पत्रकारिता और यात्रा-वृत्तांत जैसी अनेक विधाओं में लेखन किया। उन्होंने कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन, हरिश्चंद्र पत्रिका और बालाबोधिनी जैसी पत्रिकाओं से भी जुड़कर हिंदी के विकास में योगदान दिया।
उनकी प्रमुख रचनाओं में सत्य हरिश्चंद्र, भारत-दुर्दशा, अंधेर नगरी और सरयू पार की यात्रा शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
- यह पाठ एक यात्रा-वृत्तांत है।
- यह भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा लिखा गया है।
- पत्र 14 अक्टूबर 1871 ई. से संबंधित है।
- लेखक ने हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन किया है।
- हरिद्वार तीन ओर से हरे-भरे पर्वतों से घिरा बताया गया है।
- गंगा का जल शीतल, स्वच्छ और मधुर बताया गया है।
- लेखक ने वृक्षों को सज्जन और परोपकारी बताया है।
- हर की पैड़ी एक प्रमुख घाट के रूप में वर्णित है।
- लेखक ने गंगा के तट पर भोजन करने का सुख बताया है।
- प्रकृति के बीच लेखक को ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का अनुभव हुआ।
- पाठ में सादगी, संतोष और प्रकृति-प्रेम की भावना है।
- पाठ में प्राचीन हिंदी भाषा की झलक मिलती है।

हरिद्वार में गंगा नदी
मेरी समझ से
निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के समक्ष तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1. “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं” का क्या अर्थ है?
2. “वैराग्य और भक्ति का उदय होता था” इस कथन से लेखक का कौन-सा भाव प्रकट होता है?
3. “पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से बढ़कर था” इस वाक्य का सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष क्या है?
4. “एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।” यह प्रसंग किस मूल्य को बढ़ावा देता है?
5. लेखक का हरिद्वार अनुभव मुख्यतः किस प्रकार का था?
6. पत्र की भाषा का एक मुख्य लक्षण क्या है?
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आपस में चर्चा कीजिए और इनके उपयुक्त संदर्भों से इनका मिलान कीजिए—
| क्रम | शब्द | उपयुक्त संदर्भ |
|---|---|---|
| 1 | हरिद्वार | यह उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थान है। यहाँ से गंगा पहाड़ों को छोड़कर मैदान में आती है। |
| 2 | गंगा | यह भारतवर्ष की एक प्रधान नदी है जो हिमालय से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। |
| 3 | भागीरथ | ये अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे। कहा जाता है कि घोर तपस्या करके ये गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। |
| 4 | चण्डिका | मान्यताओं के अनुसार दुर्गा का एक रूप। |
| 5 | भागवत | यह अठारह पुराणों में से प्रसिद्ध एक पुराण है। इसमें अधिकतर श्रीकृष्ण संबंधी कथाएँ हैं। |
| 6 | दालचीनी | यह एक पेड़ का नाम है। इसकी सुगंधित छाल दवा और मसाले के काम आती है। |
मिलकर करें चयन
(क) पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं— एक सही और एक भ्रामक। अपने समूह में इनपर विचार कीजिए और उपयुक्त निष्कर्ष पर सही का चिह्न लगाइए।
1. पर्वतों पर अनेक प्रकार की वल्ली हरी-भरी सज्जनों के शुभ मनोरथों की भाँति फैलकर लहलहा रही है।
2. बड़े-बड़े वृक्ष भी ऐसे खड़े हैं मानो एक पैर से खड़े तपस्या करते हैं और साधुओं की भाँति घाम, ओस और वर्षा अपने ऊपर सहते हैं।
3. इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।
4. जल यहाँ का अत्यंत शीतल है और मिष्ट भी वैसा ही है मानो चीनी के पने को बरफ में जमाया है।
5. एक दिन मैंने श्री गंगा जी के तट पर रसोई करके पत्थर ही पर जल के अत्यंत निकट परोसकर भोजन किया।
6. निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “यहाँ की कुशा सबसे विलक्षण होती है जिसमें से दालचीनी, जावित्री इत्यादि की अच्छी सुगंध आती है। मानो यह प्रत्यक्ष प्रगट होता है कि यह ऐसी पुण्यभूमि है कि यहाँ की घास भी ऐसी सुगंधमय है।”
(ख) “अहा! इनके जन्म भी धन्य हैं जिनसे अर्थी विमुख जाते ही नहीं। फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।”
सोच-विचार के लिए
(क) “और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ…” लेखक का यह वाक्य क्या दर्शाता है? क्या आपने कभी किसी स्थान को छोड़कर ऐसा अनुभव किया है? कब-कब?
(ख) “पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। एक पैसे को लाख करके मान लेते हैं।” लेखक का यह कथन आज के समाज में कितना सच है? क्या अब भी ऐसे संतोषी लोग मिलते हैं? अपने विचार उदाहरण सहित लिखिए।
(ग) “मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। यह स्थान भी उस क्षेत्र में टिकने योग्य ही है।” आपके विचार से लेखक ने उस स्थान को ‘टिकने योग्य’ क्यों कहा है? उस स्थान में कौन-कौन सी विशेषताएँ होंगी जो उसे ‘टिकने योग्य’ बनाती होंगी? (संकेत— केवल आराम, सुविधा या कोई और कारण भी।)
(घ) “फल, फूल, गंध, छाया, पत्ते, छाल, बीज, लकड़ी और जड़; यहाँ तक कि जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथ पूर्ण करते हैं।” इस वाक्य के माध्यम से आपको वृक्षों के महत्व के बारे में कौन-कौन सी बातें सूझ रही हैं?
अनुमान और कल्पना से
(क) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।” कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार में हैं। आप वहाँ क्या-क्या करना चाहेंगे?
(ख) “जल के छलके पास ही ठंडे-ठंडे आते थे।” कल्पना कीजिए कि आप गंगा के तट पर हैं और पानी के छींटे आपके मुँह पर आ रहे हैं। अपने अनुभवों को अपनी कल्पना से लिखिए।
(ग) “सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।” यदि पेड़-पौधे सच में मनुष्यों की तरह व्यवहार करने लगें तो क्या होगा?
(घ) “यहाँ पर श्री गंगा जी दो धारा हो गई हैं— एक का नाम नील धारा, दूसरी श्री गंगा जी ही के नाम से।” इस पाठ में ‘गंगा’ शब्द के साथ ‘श्री’ और ‘जी’ लगाया गया है। आपके अनुसार उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा?
(ङ) कल्पना कीजिए कि आप हरिद्वार एक श्रवणबाधित या दृष्टिबाधित व्यक्ति के साथ गए हैं। उसकी यात्रा को अच्छा बनाने के लिए कुछ सुझाव दीजिए।
लिखें संवाद
(क) “मेरे संग कल्लू जी मित्र भी परमानंदी थे।” लेखक और कल्लू जी के बीच हरिद्वार यात्रा पर एक काल्पनिक संवाद लिखिए।
लेखक: कल्लू जी, हरिद्वार का प्राकृतिक दृश्य कितना सुंदर है।
कल्लू जी: हाँ, पर्वत, पेड़ और गंगा देखकर मन बहुत प्रसन्न हो रहा है।
लेखक: यहाँ का शांत वातावरण मन को बहुत शांति देता है।
कल्लू जी: सचमुच, यह यात्रा हमेशा याद रहेगी।
(ख) “यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है।” लेखक और प्रकृति के बीच एक कल्पनात्मक संवाद तैयार कीजिए— जैसे पर्वत बोल रहे हों।
पर्वत: यात्री, तुम्हारा हरिद्वार में स्वागत है।
लेखक: तुम्हारी हरियाली देखकर मेरा मन प्रसन्न हो गया।
पर्वत: हमें स्वच्छ और सुरक्षित रखना तुम्हारा भी कर्तव्य है।
लेखक: मैं प्रकृति की रक्षा करने का प्रयास करूँगा।
‘है’ और ‘हैं’ का उपयोग
एकवचन संज्ञा शब्दों के साथ सामान्यतः ‘है’ और बहुवचन संज्ञा शब्दों के साथ ‘हैं’ का प्रयोग होता है। सम्मान प्रकट करने के लिए कभी-कभी एकवचन व्यक्ति के साथ भी ‘हैं’ का प्रयोग किया जाता है। इसे आदरार्थ बहुवचन कहते हैं।
मेरे पिता जी सो रहे हैं।
डॉक्टर साहब बहुत विद्वान हैं।
अब ‘आदरार्थ बहुवचन’ को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए—
1. प्रधानाचार्य जी विद्यालय में नहीं ______________, वे अभी सभा में उपस्थित ______________ ।
2. माता-पिता हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते ______________, हमें उनका कहना मानना चाहिए।
3. मेरी बहन बाजार जा रही ______________ वहाँ से किताबें ले आएगी।
4. बाहर फेरीवाला ______________ ______________। ______________ बुला लाओ।
5. डाकिया जी आए ______________। उन्हें भी बुला लाओ।
6. आप तो बहुत दिन बाद ______________, ______________ का स्वागत है।
7. डॉक्टर साहब बहुत विद्वान ______________, ______________ से परामर्श लेना चाहिए।
8. आपके माता-पिता कहाँ ______________? क्या मैं ______________ से मिल सकता हूँ?
9. ये हमारे हिंदी के अध्यापक ______________, हम ______________ से बहुत-कुछ सीखते-समझते हैं।
10. बंदर पेड़ पर उछल-कूद कर______________ ______________ ।
भावों की पहचान
प्रेम, संतोष, भक्ति, श्रद्धा, वैराग्य, आश्चर्य, करुणा, हास्य, शांति, परोपकार, दया, दुख
नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। सोचिए कि इनमें कौन-सा भाव प्रकट हो रहा है? पहचानिए और चुनकर लिखिए—
| क्रम | पंक्ति | भाव |
|---|---|---|
| 1 | उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था। | संतोष |
| 2 | चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था। | भक्ति और वैराग्य |
| 3 | पंडे भी यहाँ बड़े विलक्षण संतोषी हैं। | संतोष |
| 4 | हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी। | शांति |
| 5 | सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं। | परोपकार |
काल की पहचान
“यहाँ हरि की पैड़ी नामक एक पक्का घाट है और यहीं स्नान भी होता है।” यह वाक्य वर्तमान काल को प्रदर्शित करता है।
(क) नीचे दी गई पाठ की इन पंक्तियों को पढ़कर बताइए, इनमें क्रिया कौन-से काल को प्रदर्शित कर रही है? (भूतकाल/वर्तमान/भविष्य)
| क्रम | पंक्ति | काल |
|---|---|---|
| 1 | निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा। | भविष्य काल |
| 2 | यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है। | वर्तमान काल |
| 3 | वृक्ष ऐसे हैं कि पत्थर मारने से फल देते हैं। | वर्तमान काल |
| 4 | चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था। | भूतकाल |
| 5 | मैं दीवान कृपा राम के घर के ऊपर के बंगले पर टिका था। | भूतकाल |
(ख) अब इन वाक्यों के काल को अन्य कालों में बदलकर लिखिए और नए वाक्य बनाइए।
उदाहरण:
वर्तमान काल: मैं हरिद्वार जाता हूँ।
भूतकाल: मैं हरिद्वार गया था।
भविष्य काल: मैं हरिद्वार जाऊँगा।
पत्र की रचना
“और संपादक महाशय, मैं चित्त से तो अब तक वहीं निवास करता हूँ …”
इस पंक्ति में लेखक संपादक महोदय को संबोधित करके अपनी बात लिख रहे हैं। पत्र के अंत में अपना नाम लिखा जाता है ताकि पत्र पाने वाले को पता चल सके कि पत्र किसने लिखा है।
| पत्र की विशेषताएँ | पत्र से उदाहरण |
|---|---|
| व्यक्तिपरकता | लेखक अपने विचार, अनुभव और भावनाएँ बताते हैं। |
| संवादात्मकता | पत्र पाठक से सीधे संवाद का रूप प्रस्तुत करता है। |
| स्वाभाविक शैली | भाषा भावनाओं के अनुसार स्वाभाविक है। |
| व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन | गंगा के तट पर भोजन करने का अनुभव। |
| अभिवादन या संबोधन | “श्रीमान कविवचन सुधा संपादक महाशय…” |
| हस्ताक्षर | “आपका मित्र — यात्री” |
| उपसंहार और निवेदन | “निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।” |
| मुख्य विषय-वस्तु | हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता, गंगा, पर्वत, जल और यात्रा का वर्णन। |
आपने जो यात्रा-वर्णन पढ़ा है, इसे भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक संपादक को पत्र के रूप में लिखकर भेजा था। आप भी अपनी किसी यात्रा के विषय में अपने किसी परिचित को पत्र लिखकर बताइए।
प्रिय मित्र,
पिछले सप्ताह मैं अपने परिवार के साथ मसूरी गया था। वहाँ के पहाड़ और हरियाली बहुत सुंदर थे। हमने कई सुंदर स्थान देखे। ठंडी हवा और शांत वातावरण मुझे बहुत अच्छा लगा। यह यात्रा मेरे लिए बहुत यादगार रही।
तुम्हारा मित्र
__________
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में ‘हरिद्वार’ से जुड़े शब्द अपने मन से या पाठ से चुनकर लिखिए—
| हरिद्वार से जुड़े शब्द | उदाहरण |
|---|---|
| नदी | गंगा |
| घाट | हर की पैड़ी |
| पर्वत | विल्व पर्वत |
| तीर्थ | कनखल |
| प्रकृति | हरियाली |
| धार्मिक ग्रंथ | भागवत |
| धारा | नील धारा |
लेखन के अनोखे तरीके
(क) ‘हरिद्वार’ पाठ में लेखक ने हरिद्वार के अपने अनुभवों को बहुत ही साहित्यिक और कल्पनाशील भाषा में प्रस्तुत किया है जिसमें कई स्थानों पर उन्होंने तुलनात्मक वाक्यों के माध्यम से दृश्यों का वर्णन किया है।
1. वृक्षों की तुलना साधुओं से की गई है।
2. गंगाजल की मिठास की तुलना चीनी से की गई है।
3. हरियाली की तुलना गलीचे से की गई है।
4. नदी की धारा की तुलना राजा भागीरथ के यश से की गई है।
(ख) प्राचीन हिंदी को आज की हिंदी में लिखिए
1. “इन वृक्षों पर अनेक रंग के पक्षी चहचहाते हैं और नगर के दुष्ट बधिकों से निडर होकर कल्लोल करते हैं।”
2. “वर्षा के कारण सब ओर हरियाली ही दृष्टि पड़ती थी मानो हरे गलीचे की यात्रियों के विश्राम के हेतु बिछायत बिछी थी।”
3. “यह ऐसा निर्मल तीर्थ है कि इच्छा क्रोध की खानि जो मनुष्य हैं सो वहाँ रहते ही नहीं।”
4. “मेरा तो चित्त वहाँ जाते ही ऐसा प्रसन्न और निर्मल हुआ कि वर्णन के बाहर है।”
5. “यहाँ रात्रि को ग्रहण हुआ और हम लोगों ने ग्रहण में बड़े आनंदपूर्वक स्नान किया और दिन में श्री भागवत का पारायण भी किया।”
6. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।”
7. “निश्चय है कि आप इस पत्र को स्थानदान दीजिएगा।”
(ग) प्राचीन वर्तनी और आज की वर्तनी
| पाठ में प्रयुक्त रूप | आज की वर्तनी |
|---|---|
| शिषर | शिखर |
| जात्रियों | यात्रियों |
| वछृ | वृक्ष |
| दकुान | दुकान |
| गं्गा | गंगा |
आपकी बात
1. “मैंने गंगा जी के तट पर रसोई करके … भोजन किया।” क्या आपने कभी खुले वातावरण में या प्रकृति के पास भोजन किया है? वह अनुभव घर के खाने से कैसे भिन्न था?
2. “उस समय के पत्थर पर का भोजन का सुख सोने की थाल के भोजन से कहीं बढ़ के था।” आपके जीवन में ऐसा कोई क्षण आया, जब किसी सामान्य-सी वस्तु ने आपको गहरा सुख दिया हो? उसके बारे में बताइए।
3. “हर तरफ पवित्रता और प्रसन्नता बिखरी हुई थी।” आपको किस स्थान पर पवित्रता और प्रसन्नता का अनुभव होता है? क्या कोई ऐसा स्थान है जहाँ जाते ही मन शांत हो गया हो? उस स्थान की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?
4. पाठ में वर्णित है, यहाँ के वृक्ष “फल, फूल, गंध… जले पर भी कोयले और राख से लोगों का मनोरथपूर्ण करते हैं।” क्या आपके जीवन में कोई पेड़, फूल या प्राकृतिक वस्तु है जिससे आप विशेष जुड़ाव महसूस करते हैं? क्यों?
प्रकृति का सौंदर्य और संरक्षण
“यह भूमि तीन ओर सुंदर हरे-हरे पर्वतों से घिरी है…”
पाठ से आगे: आपने पत्र में पढ़ा कि हरिद्वार का प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इस सौंदर्य को बनाए रखने में प्रत्येक मानव की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस विषय में अपने समूह में चर्चा कीजिए। इसके बाद अपने समूह के साथ मिलकर “तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!” विषय पर जन-जागरूकता पोस्टर बनाइए।
तीर्थ ही नहीं, पृथ्वी भी पावन हो!
नदियों को स्वच्छ रखें।
पेड़-पौधों की रक्षा करें।
प्लास्टिक का कम उपयोग करें।
कूड़ा कूड़ेदान में डालें।
प्रकृति को सुरक्षित रखें।
स्वास्थ्य और योग
“चित्त में बारंबार ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का उदय होता था।”
(क) 5 मिनट ध्यान लगाकर या मौन बैठकर अपने आस-पास की ध्वनियों को सुनिए, अपनी श्वास पर ध्यान दीजिए तथा ध्यान को केंद्रित करने का प्रयास कीजिए। इस अनुभव के विषय में एक अनुच्छेद लिखिए।
(ख) अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में अपने विद्यालय के कार्यक्रमों को बताने के लिए एक ‘सूचना’ लिखिए जिसे सूचना-पट पर लगाया जा सके।
सूचना
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
हमारे विद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। सभी विद्यार्थियों से समय पर उपस्थित होने और योग गतिविधियों में भाग लेने का अनुरोध है।
दिनांक: __________
समय: __________
स्थान: विद्यालय प्रांगण
प्रधानाचार्य
सज्जन वृक्ष
“सज्जन ऐसे कि पत्थर मारने से फल देते हैं।”
आप जानते ही हैं कि पेड़-पौधे हमारे जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। किंतु हमारे ही कार्यों के कारण वे कम होते जा रहे हैं। आइए, पेड़-पौधों को अपना मित्र बनाएँ।
(क) एक पौधा लगाइए और उसकी देखभाल कीजिए ताकि वह कुछ वर्षों में बड़ा पेड़ बन सके। उसे एक नाम दीजिए और उसका मित्र बनिए।
(ख) उसके बारे में अपनी दैनंदिनी में नियमित रूप से लिखिए।
अपने शब्द
“शीतल वायु… स्पर्श ही से पावन करता हुआ संचार करता है।”
आइए, एक रोचक गतिविधि करते हैं। ‘शीतल’ शब्द को केंद्र में रखिए और उसके चारों ओर ये चार बातें लिखिए—
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| शीतल का वाक्य प्रयोग | शीतल वायु मन को प्रसन्न करती है। |
| अर्थ | ठंडा या सुखद |
| समानार्थी शब्द | ठंडा, शीत |
| विपरीतार्थक शब्द | उष्ण, गरम |
अब इसी प्रकार आपके समूह का प्रत्येक सदस्य इस पत्र से एक-एक शब्द चुनकर उसके लिए ऐसा ही शब्द-चित्र बनाए।
यात्रा के व्यय की गणना
इस पत्र में आपने हरिद्वार की एक यात्रा का वर्णन पढ़ा है। मान लीजिए कि आपको अपने मित्रों या अभिभावकों के साथ अपनी रुचि के किसी स्थान की यात्रा करनी है। उस स्थान को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(क) मान लीजिए कि यात्रा के लिए आपको ₹1000 दिए गए हैं। यात्रा, खाना आदि सब मिलाकर एक व्यय विवरण बनाइए।
| खर्च | राशि |
|---|---|
| यात्रा | ₹400 |
| खाना | ₹250 |
| पानी और अन्य आवश्यक वस्तुएँ | ₹100 |
| स्मृति-चिह्न | ₹150 |
| आपातकालीन बचत | ₹100 |
| कुल | ₹1000 |
(ख) मान लीजिए कि आप इस यात्रा में एक छोटी वस्तु (स्मृति चिह्न) खरीदना चाहते हैं। आप क्या खरीदेंगे और क्यों? (संकेत— सोचिए, क्या वह आवश्यक है? बजट कैसे संभालेंगे?)
यात्रा सबके लिए
(क) कल्पना कीजिए कि कुछ मित्रों का समूह यात्रा पर जा रहा है। आप एक मार्गदर्शक या टूरिस्ट गाइड हैं। आप इन सबकी यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे? उपर्युक्त चित्र में सबकी अलग-अलग आवश्यकताएँ हो सकती हैं। इन्हें ध्यान में रखते हुए सोचिए कि वहाँ पहुँचने, घूमने, भोजन आदि में आप कैसे सहायता करेंगे?
(ख) अपने किसी मित्र के साथ बिना बोले संवाद कीजिए— संकेतों से। अब सोचिए कि यात्रा में श्रवणबाधित व्यक्ति के लिए क्या-क्या आवश्यक होगा?
(ग) यात्रा करते हुए ऐतिहासिक धरोहरों या भवनों की सुरक्षा के लिए आप किन-किन बातों का ध्यान रखेंगे?
आज की पहेली
पाठ में से शब्द खोजिए और नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए—
| क्रम | संकेत | उत्तर |
|---|---|---|
| 1 | एक मसाले का नाम | दालचीनी |
| 2 | कपास से जुड़ा एक शब्द | जनेऊ |
| 3 | जहाँ स्नान होता है | घाट |
| 4 | वृक्ष के किसी अंग का नाम | जड़ |
| 5 | एक नगर या तीर्थ का नाम | कनखल |
| 6 | व्यापार से जुड़ा स्थान | दुकान |
| 7 | एक नदी का नाम | गंगा |
| 8 | एक पर्वत का नाम | विल्व पर्वत |
| 9 | एक धार्मिक ग्रंथ का नाम | भागवत |
झरोखे से
भारतेन्दु हरिश्चंद्र द्वारा लिखे एक और पत्र का एक अंश नीचे दिया गया है। इसे पढ़िए और आपस में विचार कीजिए।
हरिद्वार के मार्ग में अनेक प्रकार के वृक्ष और पक्षी देखने में आए। एक पीले रंग का पक्षी छोटा बहुत मनोहर देखा गया। बया एक छोटी चिड़िया है उसके घोंसले बहुत मिले। ये घोंसले सूखे बबूल काँटे के वृक्ष में हैं और एक-एक डाल में लड़ी की भाँति बीस-बीस, तीस-तीस लटकते हैं। इन पक्षियों की शिल्पविद्या तो प्रसिद्ध ही है। इसी से इनका चातुर्य प्रगट है कि सब वृक्ष छोड़ के काँटे के वृक्ष में घर बनाया है। इसके आगे ज्वालापुर और कनखल और हरिद्वार हैं।
खोजबीन के लिए
भारतेन्दु हरिश्चंद्र का एक प्रसिद्ध नाटक है— अंधेर नगरी। इसे पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए और अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
अंधेर नगरी एक प्रसिद्ध नाटक है। विद्यार्थी इसे पढ़कर उसके पात्रों, घटनाओं, भाषा और संदेश पर समूह में चर्चा कर सकते हैं।
अध्याय से सीख
- यात्रा हमें प्रकृति, इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर देती है।
- प्रकृति मनुष्य को शांति और आनंद देती है।
- पेड़-पौधे मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी हैं।
- हमें नदियों और प्राकृतिक स्थानों को स्वच्छ रखना चाहिए।
- सादगी में भी बहुत आनंद मिल सकता है।
- हमें ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा करनी चाहिए।
- दूसरों की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए यात्रा को सभी के लिए सुविधाजनक बनाना चाहिए।
त्वरित पुनरावृत्ति
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| हरिद्वार पाठ के लेखक कौन हैं? | भारतेंदु हरिश्चंद्र |
| पाठ किस विधा में लिखा गया है? | यात्रा-वृत्तांत और पत्र |
| लेखक ने हरिद्वार की यात्रा कब की? | 1871 ई. |
| हरिद्वार की मुख्य नदी कौन-सी है? | गंगा |
| प्रमुख घाट का नाम क्या है? | हर की पैड़ी |
| लेखक ने वृक्षों की तुलना किससे की? | सज्जन और साधुओं से |
| लेखक को गंगा के तट पर भोजन करने में कैसा लगा? | बहुत आनंददायक |
| लेखक के मन में कौन-से भाव उत्पन्न हुए? | ज्ञान, वैराग्य और भक्ति |
| पाठ की भाषा की विशेषता क्या है? | चित्रात्मक, साहित्यिक और प्राचीन हिंदी की झलक वाली |
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