class 9 hindi vyakarn

कक्षा 9 हिंदी व्याकरण एवं लेखन कौशल

CBSE Class 9 Hindi A and Hindi B – विस्तृत नोट्स, परिभाषाएँ, भेद और उदाहरण

भाग 1: अपठित बोध – हिंदी A एवं हिंदी B

1. अपठित गद्यांश

ऐसा गद्यांश जिसे विद्यार्थी ने पहले न पढ़ा हो और जिसके आधार पर प्रश्नों के उत्तर देने हों, अपठित गद्यांश कहलाता है। इसमें किसी सामाजिक, शैक्षिक, पर्यावरणीय, वैज्ञानिक या सामान्य विषय पर जानकारी दी जा सकती है।

अपठित गद्यांश हल करने की विधि

  1. गद्यांश को एक बार सामान्य अर्थ समझने के लिए पढ़ें।
  2. दूसरी बार पढ़ते समय मुख्य विचार, कारण, परिणाम और उदाहरण पहचानें।
  3. प्रश्न में प्रयुक्त मुख्य शब्दों को ध्यान से देखें।
  4. उत्तर गद्यांश में उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिखें।
  5. उत्तर स्पष्ट, व्याकरण की दृष्टि से सही और प्रश्न के अनुरूप रखें।
  6. उपयुक्त शीर्षक पूछे जाने पर पूरे गद्यांश के केंद्रीय विचार को चुनें।

उदाहरण सहित गद्यांश

पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र होती हैं। वे हमें ज्ञान प्रदान करती हैं और हमारी कल्पनाशक्ति को विकसित करती हैं। अच्छी पुस्तकें हमें जीवन में सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती हैं। नियमित रूप से पढ़ने से हमारी भाषा, शब्दावली और विचार करने की क्षमता में सुधार होता है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को प्रतिदिन कुछ समय पढ़ने के लिए निकालना चाहिए।

प्रश्न 1: पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र क्यों कहलाती हैं?

उत्तर: पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं, कल्पनाशक्ति विकसित करती हैं और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देती हैं।

प्रश्न 2: नियमित रूप से पढ़ने के दो लाभ लिखिए।

उत्तर: इससे भाषा और शब्दावली में सुधार होता है तथा सोचने की क्षमता बढ़ती है।

प्रश्न 3: उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

उत्तर: पुस्तकों का महत्त्व।

2. अपठित काव्यांश

ऐसी कविता या काव्य-पंक्तियाँ जिन्हें पहले न पढ़ा गया हो, अपठित काव्यांश कहलाती हैं। इन्हें पढ़कर कविता का केंद्रीय भाव, संदेश, शब्दार्थ और कवि की भावना समझनी होती है।

काव्यांश हल करने के मुख्य बिंदु

  • कविता को ध्यान से पढ़कर उसका भाव समझें।
  • कवि किस विषय पर जोर दे रहा है, यह पहचानें।
  • कठिन शब्दों का अर्थ पंक्तियों के संदर्भ से समझें।
  • भावार्थ अपने शब्दों में लिखें; पंक्तियों की केवल नकल न करें।
  • यदि संदेश पूछा जाए, तो कविता से मिलने वाली सीख स्पष्ट लिखें।
काव्यांश:
मेहनत से ही राह बनेगी,
आशा से हर सुबह सजेगी।
जो संकट से हार न माने,
मंजिल उसके पास ही आएगी।

केंद्रीय भाव: परिश्रम, आशा और दृढ़ संकल्प से कठिनाइयों का सामना किया जा सकता है।

संदेश: हमें असफलताओं से घबराए बिना लगातार प्रयास करना चाहिए।

शीर्षक: परिश्रम का महत्त्व।

भाग 2: हिंदी A व्याकरण

3. उपसर्ग

वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता उत्पन्न करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। उपसर्ग सामान्यतः स्वतंत्र शब्द नहीं होते।

उपसर्ग के उदाहरण

उपसर्गमूल शब्दबना शब्दअर्थ
असफलअसफलसफल न होना
सुगंधसुगंधअच्छी गंध
दुर्भाग्यदुर्भाग्यबुरा भाग्य
प्रगतिप्रगतिआगे बढ़ना
अनुशासनअनुशासननियमों का पालन
बेईमानबेईमानईमानदारी से रहित
उपकारउपकारभलाई
अपमानअपमानअनादर

उपसर्ग पहचानने का तरीका

शब्द के आरंभ में लगे ऐसे अंश को पहचानें जो मूल शब्द के अर्थ में बदलाव लाता है। उदाहरण के लिए, “सफल” के पहले “अ” लगाने से “असफल” बनता है और अर्थ उलट जाता है।

ध्यान दें: प्रत्येक शब्द को केवल अक्षरों में बाँटकर उपसर्ग तय नहीं करना चाहिए। यह देखना आवश्यक है कि शब्द का निर्माण और अर्थ वास्तव में कैसे हुआ है।

4. प्रत्यय

वे शब्दांश जो किसी मूल शब्द या शब्द-रूप के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, प्रत्यय कहलाते हैं। प्रत्यय लगने से शब्द का अर्थ या उसका व्याकरणिक रूप बदल सकता है।

प्रत्यय के उदाहरण

मूल शब्दप्रत्ययनया शब्द
सुंदरतासुंदरता
मानवतामानवता
अपनापनअपनापन
लिखआवटलिखावट
पढ़आईपढ़ाई
दूधवालादूधवाला
बलवानबलवान

प्रत्यय के प्रमुख प्रकार

  • कृत प्रत्यय: धातु के साथ जुड़कर शब्द बनाते हैं। उदाहरण – लिख + आवट = लिखावट; पढ़ + आई = पढ़ाई।
  • तद्धित प्रत्यय: संज्ञा, विशेषण आदि शब्दों के साथ जुड़कर नए शब्द बनाते हैं। उदाहरण – सुंदर + ता = सुंदरता; अपना + पन = अपनापन।
अंतर: उपसर्ग शब्द के पहले जुड़ता है, जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है।

5. समास

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया समास कहलाती है। समास से बने शब्द को समस्त पद और उसके विस्तार को समास-विग्रह कहते हैं।

समास का प्रकारविशेषताउदाहरणविग्रह
अव्ययीभावपहला पद प्रधान; पूरा पद प्रायः अव्यय की तरह प्रयुक्त होता हैप्रतिदिनप्रत्येक दिन
तत्पुरुषदूसरा पद प्रधान; कारक-चिह्न का लोप होता हैराजपुत्रराजा का पुत्र
कर्मधारयएक पद दूसरे की विशेषता बताता हैनीलकमलनीला है जो कमल
द्विगुपहला पद संख्यावाचक होता हैनवरत्ननौ रत्नों का समूह
द्वंद्वदोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैंमाता-पितामाता और पिता
बहुव्रीहिसमस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता हैदशाननदस मुख हैं जिसके

समास पहचानने की युक्तियाँ

  • विग्रह में “और” आए, तो प्रायः द्वंद्व समास होता है।
  • विग्रह में “का, के, की, से, के लिए” जैसे संबंध छिपे हों, तो तत्पुरुष हो सकता है।
  • पहले पद में संख्या हो और समूह का अर्थ निकले, तो द्विगु की संभावना होती है।
  • समस्त पद किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताए, तो बहुव्रीहि हो सकता है।
समास की पहचान केवल एक संकेत से न करें। समस्त पद का पूरा अर्थ और विग्रह देखकर प्रकार तय करें।

6. वाक्य-भेद – अर्थ की दृष्टि से

वाक्य का अर्थ, भाव या उद्देश्य जिस प्रकार का होता है, उसी के आधार पर वाक्यों का वर्गीकरण किया जाता है।

प्रकारअर्थउदाहरण
विधानवाचकसामान्य कथनपृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
निषेधवाचकनकार या मनाहीमैं आज विद्यालय नहीं जाऊँगा।
प्रश्नवाचकप्रश्न पूछनातुम कहाँ जा रहे हो?
आज्ञावाचकआदेश, निवेदन या सलाहकृपया दरवाज़ा बंद कर दीजिए।
इच्छावाचकइच्छा, आशीर्वाद या कामनाईश्वर तुम्हें सफलता दे।
विस्मयादिबोधकआश्चर्य, हर्ष या शोकवाह! कितना सुंदर दृश्य है!
संदेहवाचकसंदेह या संभावनाशायद आज वर्षा हो।
संकेतवाचकएक कार्य दूसरे पर निर्भर होयदि तुम मेहनत करोगे, तो सफल होगे।

उदाहरण द्वारा परिवर्तन

विधानवाचक – वह समय पर आएगा।
निषेधवाचक – वह समय पर नहीं आएगा।
प्रश्नवाचक – क्या वह समय पर आएगा?
आज्ञावाचक – समय पर आना।
इच्छावाचक – काश! वह समय पर आ जाए।
विस्मयादिबोधक – वाह! वह समय पर आ गया!

7. अलंकार

कविता या साहित्य में भाषा की सुंदरता, प्रभाव और भावों को अधिक प्रभावशाली बनाने वाले विशेष प्रयोग अलंकार कहलाते हैं।

अनुप्रास अलंकार

जब एक ही वर्ण या ध्वनि की आवृत्ति से काव्य में सुंदरता आती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

उदाहरण: चंचल चपला चमक रही।
यहाँ “च” ध्वनि की आवृत्ति है।

उपमा अलंकार

जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरी वस्तु से “सा, सी, समान, जैसे” आदि शब्दों द्वारा की जाती है, वहाँ उपमा अलंकार होता है।

उदाहरण: उसका मुख चाँद-सा सुंदर है।
यहाँ मुख की तुलना चाँद से की गई है।

रूपक अलंकार

जब उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप कर दिया जाता है और दोनों में भेद नहीं बताया जाता, वहाँ रूपक अलंकार होता है।

उदाहरण: जीवन एक संग्राम है।
यहाँ जीवन को सीधे संग्राम कहा गया है।

मानवीकरण अलंकार

जब प्रकृति, पशु या निर्जीव वस्तु को मनुष्य जैसे गुण या कार्य करते हुए दिखाया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।

उदाहरण: फूल हँस रहे हैं और हवा गुनगुना रही है।

अतिशयोक्ति अलंकार

जब किसी बात को प्रभाव उत्पन्न करने के लिए बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाता है, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।

उदाहरण: आँसुओं की नदी बह गई।
यहाँ आँसुओं की मात्रा को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है।

भाग 3: हिंदी B व्याकरण

8. वर्ण-विच्छेद

किसी शब्द को उसके वर्णों में अलग-अलग करके लिखना वर्ण-विच्छेद कहलाता है। इसमें व्यंजनों और स्वरों को अलग पहचानना आवश्यक है।

कमल = क् + अ + म् + अ + ल् + अ
नदी = न् + अ + द् + ई
फल = फ् + अ + ल् + अ

व्यंजन में सामान्यतः अंतर्निहित ‘अ’ स्वर होता है। मात्रा लगने पर स्वर का रूप बदलता है।

कि = क् + इ की मात्रा (ि)
का = क् + आ की मात्रा (ा)
की = क् + ई की मात्रा (ी)
विद्यालय या परीक्षा में वर्ण-विच्छेद लिखते समय अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए मानक रूप का अनुसरण करें।

9. अनुस्वार एवं अनुनासिक

हिंदी में अनुस्वार और अनुनासिक दोनों का संबंध नासिक्य ध्वनि से है, लेकिन इनके चिह्न और प्रयोग अलग हैं।

अनुस्वार (ं)

अनुस्वार को बिंदु से दिखाया जाता है। यह कई शब्दों में नासिक्य व्यंजन की ध्वनि को दर्शाता है।

अंगूर, संसार, संकल्प, संबंध, संगीत।

अनुनासिक (ँ)

अनुनासिक को चंद्रबिंदु से दिखाया जाता है। इसमें स्वर का उच्चारण नासिका की सहायता से होता है।

माँ, चाँद, हँसी, गाँव, आँसू।
अनुस्वारअनुनासिक
चिह्न – ंचिह्न – ँ
उदाहरण – अंग, संबंधउदाहरण – माँ, हँसी

10. नुक्ता

कुछ व्यंजनों के नीचे लगाया जाने वाला बिंदु नुक्ता कहलाता है। इसका उपयोग विशेष ध्वनि दर्शाने के लिए होता है।

सामान्य अक्षरनुक्ता वाला अक्षरउदाहरण
कक़क़लम
खख़ख़बर
गग़ग़ज़ल
जज़ज़मीन
फफ़फ़सल
डड़लड़का
ढढ़पढ़ना

नुक्ता शब्द की सही वर्तनी और उच्चारण को स्पष्ट करता है। कई प्रचलित शब्दों में नुक्ता न लिखने का रूप भी दिखाई देता है, लेकिन परीक्षा में मानक वर्तनी का प्रयोग करें।

11. उपसर्ग और प्रत्यय

उपसर्ग और प्रत्यय शब्द-निर्माण में सहायता करते हैं।

उपसर्गउदाहरणप्रत्ययउदाहरण
अअसफलतासुंदरता
सुसुगंधपनबचपन
प्रप्रगतिआईपढ़ाई
अनुअनुकरणआवटलिखावट
बेबेईमानवानबलवान
पहचान: “असफल” में “अ” पहले लगा है, इसलिए यह उपसर्ग है। “सुंदरता” में “ता” अंत में जुड़ा है, इसलिए यह प्रत्यय है।

12. संधि

दो वर्णों के पास आने पर उनके मेल से होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को संधि कहते हैं। संधि के तीन मुख्य प्रकार हैं।

स्वर संधि

दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं।

विद्या + आलय = विद्यालय
महा + ईश = महेश

व्यंजन संधि

व्यंजन के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं।

सत् + जन = सज्जन
जगत् + नाथ = जगन्नाथ

विसर्ग संधि

विसर्ग (ः) के बाद स्वर या व्यंजन आने पर जो परिवर्तन होता है, उसे विसर्ग संधि कहते हैं।

मनः + योग = मनोयोग
निः + आशा = निराशा

संधि-विच्छेद: संधि से बने शब्द को मूल शब्दों में अलग करना। उदाहरण – विद्यालय = विद्या + आलय।

13. विराम-चिह्न

विराम-चिह्न लिखित भाषा में ठहराव, प्रश्न, भाव और कथन का स्वर स्पष्ट करते हैं।

चिह्ननामप्रयोगउदाहरण
।पूर्ण विरामवाक्य के अंत मेंमैं विद्यालय जाता हूँ।
,अल्प विरामछोटे ठहराव के लिएराम, श्याम और मोहन आए।
;अर्धविरामपूर्ण विराम से छोटा ठहराववह मेहनती है; इसलिए सफल है।
?प्रश्नवाचकप्रश्न के अंत मेंतुम कहाँ रहते हो?
!विस्मयादिबोधकआश्चर्य या भाववाह! कितना सुंदर दृश्य है!
:विवरण चिह्नविवरण शुरू करने से पहलेतीन रंग हैं: लाल, हरा और नीला।
“ ”उद्धरण चिह्नकिसी के कथन को उद्धृत करनाशिक्षक ने कहा, “सत्य बोलो।”
( )कोष्ठकअतिरिक्त जानकारीदिल्ली (भारत की राजधानी) बड़ा शहर है।
—निर्देशक चिह्नविशेष ठहराव या स्पष्टीकरणएक बात याद रखो—मेहनत आवश्यक है।
…लोप चिह्नअधूरे कथन या छोड़े गए अंश के लिएमैं सोच रहा था कि…

भाग 4: हिंदी A लेखन कौशल

14. निबंध-लेखन

किसी विषय पर अपने विचारों, तथ्यों और अनुभवों को क्रमबद्ध तथा विस्तारपूर्वक प्रस्तुत करने वाली रचना निबंध कहलाती है। निबंध में विषय की स्पष्टता, विचारों का क्रम और भाषा की शुद्धता आवश्यक हैं।

निबंध के मुख्य भाग

  1. प्रस्तावना: विषय का परिचय और उसका महत्त्व।
  2. विषय-विस्तार: विषय से जुड़े कारण, प्रभाव, लाभ, हानियाँ और उदाहरण।
  3. उपसंहार: निष्कर्ष, सुझाव या संदेश।

निबंध लिखते समय ध्यान देने योग्य बातें

  • विषय से संबंधित ही लिखें।
  • विचारों को उचित क्रम में रखें।
  • अनावश्यक दोहराव से बचें।
  • सरल और शुद्ध भाषा का प्रयोग करें।
  • विराम-चिह्न और वर्तनी की जाँच करें।
उदाहरण: पर्यावरण संरक्षण
पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है। वायु, जल, मिट्टी, पेड़-पौधे और जीव-जंतु मिलकर हमारे आसपास का प्राकृतिक वातावरण बनाते हैं। स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण आवश्यक है।

आज प्रदूषण, वनों की कटाई, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग और जल की बर्बादी पर्यावरण के लिए गंभीर समस्याएँ हैं। इनके कारण वायु और जल की गुणवत्ता घटती है तथा अनेक जीवों का जीवन प्रभावित होता है।

पर्यावरण की रक्षा के लिए हमें अधिक पेड़ लगाने चाहिए, पानी बचाना चाहिए, प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए और कचरे का सही निपटान करना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

अंततः, पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि हम सभी का कर्तव्य है। प्रकृति की रक्षा करके ही हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं।

15. पत्र-लेखन

पत्र किसी व्यक्ति, अधिकारी या संस्था तक संदेश, अनुरोध, सूचना अथवा विचार पहुँचाने का माध्यम है। पत्र के दो प्रमुख प्रकार हैं।

औपचारिक पत्र

औपचारिक पत्र प्रधानाचार्य, अधिकारी, संपादक या किसी संस्था को लिखा जाता है। इसमें विनम्र भाषा, स्पष्ट उद्देश्य और उचित प्रारूप का प्रयोग होता है।

प्रेषक का पता
दिनांक

सेवा में,
प्राप्तकर्ता का पद और पता

विषय: पत्र लिखने का उद्देश्य

महोदय/महोदया,
पत्र का मुख्य भाग – समस्या, कारण और अनुरोध।

धन्यवाद।
भवदीय/भवदीया
नाम

औपचारिक पत्र का उदाहरण

विषय: विद्यालय के पुस्तकालय में नई पुस्तकें उपलब्ध कराने हेतु।

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
अपने विद्यालय का नाम।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में हिंदी साहित्य, विज्ञान और सामान्य ज्ञान की कुछ नई पुस्तकों की आवश्यकता है। नई पुस्तकों से विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की बेहतर तैयारी करने और सामान्य ज्ञान बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

अतः आपसे अनुरोध है कि पुस्तकालय के लिए उपयोगी नई पुस्तकें उपलब्ध कराने की कृपा करें।

धन्यवाद।
भवदीय,
कक्षा 9 का विद्यार्थी

अनौपचारिक पत्र

अनौपचारिक पत्र मित्रों और परिवार के सदस्यों को लिखा जाता है। इसकी भाषा आत्मीय और सहज होती है।

प्रेषक का पता
दिनांक

प्रिय मित्र/प्रिय भाई/प्रिय बहन,
सप्रेम नमस्कार।
मुख्य भाग – कुशल-क्षेम और पत्र का उद्देश्य।

शेष शुभ। घर में सभी को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र/तुम्हारी मित्र
नाम

16. संवाद-लेखन

दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच किसी विषय पर होने वाली बातचीत को संवाद कहते हैं। संवाद-लेखन में बातचीत को स्वाभाविक और क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

संवाद-लेखन के नियम

  • विषय स्पष्ट होना चाहिए।
  • प्रत्येक वक्ता का नाम लिखें।
  • बातचीत वास्तविक और स्वाभाविक लगे।
  • हर कथन विषय से संबंधित हो।
  • अंत में उचित निष्कर्ष या समाधान हो सकता है।
विषय: परीक्षा की तैयारी
रवि: तुम्हारी परीक्षा की तैयारी कैसी चल रही है?
मोहन: अच्छी चल रही है। मैं रोज़ समय-सारणी के अनुसार पढ़ता हूँ।
रवि: क्या तुमने हिंदी व्याकरण के सभी विषय दोहरा लिए?
मोहन: अधिकतर विषय पूरे हो गए हैं। अब मैं उदाहरणों का अभ्यास कर रहा हूँ।
रवि: क्या तुम कठिन विषयों के लिए शिक्षक की सहायता लेते हो?
मोहन: हाँ, जहाँ समझने में कठिनाई होती है, वहाँ मैं शिक्षक से पूछता हूँ।
रवि: यह अच्छी आदत है। मैं भी नियमित अभ्यास करूँगा।

भाग 5: हिंदी B लेखन कौशल

17. अनुच्छेद-लेखन

किसी एक विषय पर सीमित शब्दों में जुड़े हुए वाक्यों के माध्यम से विचार प्रस्तुत करना अनुच्छेद-लेखन कहलाता है। अनुच्छेद में एक केंद्रीय विचार होता है और सभी वाक्य उसी से संबंधित होते हैं।

अनुच्छेद की संरचना

  • आरंभ: विषय का परिचय दें।
  • मध्य भाग: मुख्य विचार, कारण, उदाहरण और महत्त्व बताएँ।
  • अंत: निष्कर्ष या संदेश दें।
उदाहरण: समय का महत्त्व
समय हमारे जीवन की अमूल्य संपत्ति है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता, इसलिए इसका सही उपयोग करना आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन में समय का विशेष महत्त्व है। नियमित अध्ययन, खेल और विश्राम के लिए समय निर्धारित करने से जीवन में संतुलन बना रहता है। समय-सारणी का पालन करने वाला विद्यार्थी अपने कार्य समय पर पूरा कर सकता है। हमें आलस्य और अनावश्यक कार्यों में समय नष्ट करने से बचना चाहिए। समय का सम्मान करना सफलता की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है।

18. पत्र-लेखन

हिंदी B में पत्र लिखते समय दिए गए विषय, प्राप्तकर्ता और उद्देश्य के अनुसार प्रारूप चुनें। औपचारिक पत्र में स्पष्ट विषय और विनम्र अनुरोध होता है, जबकि अनौपचारिक पत्र में व्यक्तिगत भाव और आत्मीयता होती है।

औपचारिक पत्र का उदाहरण

विषय: विद्यालय के आसपास सफाई करवाने हेतु अनुरोध।

सेवा में,
नगरपालिका अधिकारी महोदय,
नगरपालिका का नाम।

महोदय,
हमारे विद्यालय के आसपास कई स्थानों पर कूड़ा जमा हो जाता है। इससे दुर्गंध फैलती है और विद्यार्थियों तथा स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है।

अतः आपसे अनुरोध है कि विद्यालय के आसपास नियमित सफाई करवाने और कूड़ेदान की व्यवस्था करने की कृपा करें।

धन्यवाद।
भवदीय,
एक विद्यार्थी

19. चित्र-वर्णन

किसी चित्र में दिखाई देने वाले व्यक्ति, वस्तु, गतिविधि और वातावरण का क्रमबद्ध वर्णन चित्र-वर्णन कहलाता है। इसमें कल्पना से ऐसी बातें नहीं जोड़नी चाहिए जो चित्र में दिखाई नहीं देतीं।

चित्र-वर्णन के चरण

  1. चित्र का मुख्य विषय पहचानें।
  2. व्यक्तियों और वस्तुओं की स्थिति देखें।
  3. मुख्य गतिविधियों का वर्णन करें।
  4. वातावरण और दृश्य की विशेषताएँ बताएँ।
  5. अंत में चित्र का संदेश या मुख्य भाव लिखें, यदि उपयुक्त हो।
उदाहरण: पार्क का दृश्य
चित्र में एक सुंदर और हरा-भरा पार्क दिखाई दे रहा है। पार्क में कई पेड़ और रंग-बिरंगे फूल हैं। कुछ बच्चे मैदान में खेल रहे हैं, जबकि कुछ लोग पेड़ों की छाया में बैठे हैं। एक माली पौधों में पानी डाल रहा है। पार्क का वातावरण शांत और स्वच्छ दिखाई देता है। यह दृश्य हमें प्रकृति से प्रेम करने, नियमित व्यायाम करने और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की प्रेरणा देता है।

20. संवाद-लेखन

संवाद-लेखन में दो या अधिक व्यक्तियों की बातचीत को लिखित रूप दिया जाता है। संवाद विषयानुकूल, स्पष्ट और स्वाभाविक होना चाहिए।

विषय: जल संरक्षण
सीमा: आजकल पानी की कमी की खबरें सुनने को मिलती हैं। हमें क्या करना चाहिए?
नेहा: हमें पानी का उपयोग सावधानी से करना चाहिए और नल खुला नहीं छोड़ना चाहिए।
सीमा: क्या वर्षा जल का संग्रह उपयोगी हो सकता है?
नेहा: हाँ, वर्षा जल का संग्रह भविष्य में पानी की जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है।
सीमा: हमें दूसरों को भी पानी बचाने के लिए जागरूक करना चाहिए।
नेहा: बिल्कुल, जल संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।

21. विज्ञापन-लेखन

किसी वस्तु, सेवा, कार्यक्रम या जनहित संदेश की जानकारी लोगों तक आकर्षक और संक्षिप्त रूप में पहुँचाने के लिए विज्ञापन लिखा जाता है।

विज्ञापन के आवश्यक तत्व

  • आकर्षक शीर्षक या नारा।
  • वस्तु, सेवा या कार्यक्रम का नाम।
  • मुख्य विशेषताएँ और लाभ।
  • स्थान, तारीख, समय और संपर्क विवरण, जहाँ आवश्यक हो।
  • संक्षिप्त, प्रभावशाली और शुद्ध भाषा।

विज्ञापन का उदाहरण

पुस्तक प्रेमियों के लिए सुनहरा अवसर!
नगर पुस्तक मेला
कहानी, विज्ञान, सामान्य ज्ञान और साहित्य की अनेक पुस्तकें एक ही स्थान पर।
पढ़ने की आदत बढ़ाएँ और ज्ञान की दुनिया से जुड़ें।
स्थान: नगर पुस्तकालय परिसर
दिनांक: 15 से 18 नवंबर
समय: सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक

जनहित विज्ञापन का उदाहरण

जल है तो कल है!
पानी व्यर्थ न बहाएँ।
नल उपयोग के बाद बंद करें।
वर्षा जल का संग्रह करें।
आज पानी बचाएँ, आने वाला कल सुरक्षित बनाएँ।
परीक्षा में विज्ञापन के लिए जो तथ्य दिए गए हों, उन्हीं का उपयोग करें। अपनी ओर से गलत तारीख, कीमत या संपर्क विवरण न जोड़ें।

भाग 6: महत्त्वपूर्ण पुनरावृत्ति

विषययाद रखने योग्य बात
अपठित गद्यांशउत्तर गद्यांश के आधार पर दें।
अपठित काव्यांशकेंद्रीय भाव और संदेश समझें।
उपसर्गमूल शब्द के पहले जुड़ता है।
प्रत्ययमूल शब्द के अंत में जुड़ता है।
समाससमस्त पद और विग्रह का संबंध समझें।
वाक्य-भेदवाक्य का उद्देश्य और भाव पहचानें।
अलंकारतुलना, आवृत्ति, आरोप या अतिशयोक्ति पहचानें।
वर्ण-विच्छेदशब्द को वर्णों में अलग करें।
अनुस्वारचिह्न – ं
अनुनासिकचिह्न – ँ
नुक्ताकुछ अक्षरों के नीचे लगने वाला बिंदु।
संधिस्वर, व्यंजन और विसर्ग संधि।
विराम-चिह्नवाक्य के अर्थ और ठहराव को स्पष्ट करते हैं।
निबंधप्रस्तावना, विषय-विस्तार, उपसंहार।
पत्रप्राप्तकर्ता के अनुसार औपचारिक या अनौपचारिक प्रारूप।
संवादस्वाभाविक और विषयानुकूल बातचीत।
अनुच्छेदएक केंद्रीय विचार पर संक्षिप्त लेखन।
चित्र-वर्णनचित्र में दिखाई देने वाली बातों का क्रमबद्ध विवरण।
विज्ञापनआकर्षक शीर्षक और संक्षिप्त तथ्यपूर्ण जानकारी।