‘रीढ़ की हड्डी’ जगदीशचंद्र माथुर द्वारा लिखित एक व्यंग्यात्मक एकांकी है।
इसमें विवाह, स्त्री-शिक्षा, पुरुषप्रधान सोच और समाज की रूढ़िवादी मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है।
रामस्वरूप अपनी बेटी उमा का विवाह गोपालप्रसाद के बेटे शंकर से करना चाहते हैं।
गोपालप्रसाद पढ़ी-लिखी लड़की को पसंद नहीं करते। इसलिए रामस्वरूप उमा की शिक्षा
छिपाने की कोशिश करते हैं। बातचीत के दौरान उमा को वस्तु की तरह परखा जाता है।
इससे वह नाराज़ हो जाती है और अपने विचार स्पष्ट रूप से रखती है।
उमा बताती है कि लड़की भी सम्मान, भावनाओं और स्वतंत्र विचारों वाली इंसान है।
वह शंकर के नैतिक साहस की कमी पर भी सवाल उठाती है। अंत में गोपालप्रसाद और
शंकर वहाँ से चले जाते हैं। एकांकी स्त्री-सम्मान, शिक्षा और आत्मविश्वास का संदेश देती है।
शीर्षक का अर्थ: यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ आत्मसम्मान, साहस और नैतिक दृढ़ता
का प्रतीक है। उमा में आत्मबल है, जबकि शंकर में अपने विचारों पर खड़े होने का साहस नहीं है।
लेखक परिचय
जगदीशचंद्र माथुर हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार और एकांकीकार थे।
उनका जन्म 1917 में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय
से शिक्षा प्राप्त की और भारतीय सिविल सेवा में कार्य किया। उन्होंने आकाशवाणी तथा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में भी महत्त्वपूर्ण पदों पर काम किया।
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘भोर का तारा’, ‘कोणार्क’, ‘ओ मेरे सपने’, ‘शारदीया’ और
‘पहला राजा’ शामिल हैं। उनका निधन 1978 में हुआ।
मुख्य पात्र
पात्र
परिचय
उमा
शिक्षित, आत्मसम्मानी और साहसी लड़की।
रामस्वरूप (बाबू)
उमा के पिता, जो समाज के दबाव में अपनी बेटी की शिक्षा छिपाते हैं।
प्रेमा
उमा की माँ।
शंकर
गोपालप्रसाद का बेटा, जिसमें नैतिक साहस की कमी है।
गोपालप्रसाद
शंकर के पिता, जो लड़कियों की शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी विचार रखते हैं।
रतन
रामस्वरूप का घरेलू सहायक।
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
शरीर के एक आवश्यक अंग का
व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर: (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का।
कारण: एकांकी में रीढ़ की हड्डी साहस, आत्मसम्मान और सही बात पर डटे रहने का प्रतीक है।
2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
पात्रों की भाषा और हास्य पर
विवाह और अशिक्षा पर
समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर: (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर।
कारण: लेखक लड़कियों की शिक्षा का विरोध करने और विवाह में उन्हें वस्तु की तरह परखने वाली सोच पर व्यंग्य करते हैं।
3. ‘घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं’ यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
अनुभव और विवेक की कमी
चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर: (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता।
कारण: शंकर अपने विचारों के अनुसार खड़ा नहीं हो पाता और उसमें साहस की कमी दिखाई देती है।
4. ‘जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।’ उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर: (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना।
कारण: उमा शिक्षा के कारण अपने अधिकारों और विचारों को साहस से व्यक्त करती है।
5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर: (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
कारण: दोनों समाज की पुरानी सोच और विवाह से जुड़ी अपेक्षाओं से प्रभावित हैं।
6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
औपचारिक और शुष्क
स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
भावुक और संक्षिप्त
उत्तर: (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण।
कारण: पात्रों के संवाद सामान्य बोलचाल जैसे हैं और उनमें सामाजिक कुरीतियों पर व्यंग्य है।
मेरी समझ मेरे विचार
1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए। (संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर: रामस्वरूप अपनी बेटी को कॉलेज में पढ़ाते हैं, लेकिन विवाह के समय उसकी शिक्षा छिपाना चाहते हैं। वे आधुनिक शिक्षा को स्वीकार करते हैं, फिर भी समाज के डर से गोपालप्रसाद के सामने अपनी बेटी की योग्यता बताने से बचते हैं। इससे उनके विचारों का अंतर्द्वंद्व दिखाई देता है।
2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर: उमा के लिए रीढ़ की हड्डी आत्मसम्मान और नैतिक साहस का प्रतीक है। शंकर के लिए यह उसकी नैतिक कमजोरी और साहस की कमी को उजागर करती है।
3. ‘मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।’ प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर: इससे पता चलता है कि उस समय कई लोग लड़कियों की पढ़ाई को आवश्यक नहीं मानते थे। स्त्रियों की शिक्षा को लेकर समाज में रूढ़िवादी विचार प्रचलित थे।
4. लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
उत्तर: लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि रीढ़ की हड्डी आत्मसम्मान और नैतिक साहस का प्रतीक है। शंकर में साहस की कमी है, जबकि उमा अपने सम्मान के लिए आवाज़ उठाती है। दूसरा शीर्षक ‘उमा का आत्मसम्मान’ हो सकता है क्योंकि एकांकी में उमा की साहसी सोच मुख्य है।
एकांकी की पड़ताल
आगे ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
एकांकी का नाम
रीढ़ की हड्डी।
लेखक का नाम
जगदीशचंद्र माथुर।
पात्र
उमा, रामस्वरूप, प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद और रतन।
परिवेश/देश-काल
एक भारतीय मध्यमवर्गीय परिवार का घर, जहाँ विवाह के लिए लड़के वाले लड़की को देखने आते हैं।
रंग-निर्देश/मंच-निर्देश
मंच पर घर का कमरा दिखाया जा सकता है, जहाँ रामस्वरूप और प्रेमा मेहमानों के आने की तैयारी कर रहे हैं।
संवाद-निर्देश
पात्रों के बोलने के ढंग, हाव-भाव और प्रतिक्रिया से उनके विचार तथा स्वभाव स्पष्ट होते हैं।
समस्या
लड़कियों की शिक्षा के प्रति भेदभावपूर्ण सोच और विवाह में लड़की को वस्तु की तरह परखना।
संवाद
उमा का कहना कि लड़कियों के भी दिल और भावनाएँ होती हैं, एक महत्त्वपूर्ण संवाद है।
मुख्य विचार
स्त्री-सम्मान, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नैतिक साहस का महत्त्व।
समाधान/परिणाम
उमा अन्यायपूर्ण व्यवहार का विरोध करती है और अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता नहीं करती। गोपालप्रसाद और शंकर वहाँ से चले जाते हैं।
अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए। (संकेत– (i) समूह बनाइए और उचित हाव-भाव द्वारा उस दृश्य का अभिनय कीजिए। (ii) आप अपनी आवश्यकता के अनुसार दिए गए रंग-निर्देश में परिवर्तन भी कर सकते हैं।)
प्रस्तुति के लिए सुझाव: उमा और गोपालप्रसाद के बीच बातचीत वाला दृश्य चुनिए। एक विद्यार्थी उमा, दूसरा गोपालप्रसाद, तीसरा शंकर और अन्य विद्यार्थी रामस्वरूप तथा प्रेमा की भूमिका निभाएँ। संवाद स्पष्ट बोलें और पात्रों के अनुसार हाव-भाव रखें।
मेरी टिप्पणी
‘जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं— यानी बैकबोन, बैकबोन!’ उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है। ‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। … अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर: उमा की टिप्पणी शंकर के कमजोर चरित्र पर व्यंग्य करती है। शंकर अपने विचारों और व्यवहार के लिए स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेता। उमा बताती है कि केवल पढ़ाई या अच्छे परिवार से होना पर्याप्त नहीं है; व्यक्ति में साहस, आत्मसम्मान और सही बात का समर्थन करने की क्षमता भी होनी चाहिए।
तुलना और विचार
1. ‘गोपालप्रसाद : भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।’ एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
उत्तर: गोपालप्रसाद लड़कियों की अधिक पढ़ाई को पसंद नहीं करते, जबकि लड़कों की पढ़ाई को महत्त्व देते हैं। वे चाहते हैं कि बहू सुंदर हो, लेकिन अधिक पढ़ी-लिखी न हो। यह भेदभावपूर्ण सोच है। शिक्षा का अधिकार लड़के और लड़की दोनों को समान रूप से मिलना चाहिए।
2. ‘मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।’ एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी? (संकेत– शिक्षा, परिवार का व्यवहार आदि)
उत्तर: उमा आत्मसम्मानी, साहसी, शिक्षित और स्वतंत्र विचारों वाली लड़की है। वह अन्याय और भेदभाव सहन नहीं करती। उसकी शिक्षा ने उसे सोचने-समझने और अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने की क्षमता दी है।
एकांकी का विस्तार
1. एकांकी के अंत में रतन कहता है— ‘बाबूजी, मक्खन…’ और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा? (संकेत– हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि)
उत्तर: लेखक ने अंत में हास्य और व्यंग्य उत्पन्न करने के लिए यह संवाद रखा है। गंभीर घटना के बाद रतन की साधारण-सी बात नाटक को रोचक बनाती है। यह समाज की दिखावे वाली सोच पर भी हल्का व्यंग्य है।
2. एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
उत्तर: यदि परदा दोबारा उठे, तो उमा अपने माता-पिता से कह सकती है कि विवाह में लड़की की शिक्षा और सम्मान को महत्त्व दिया जाना चाहिए। रामस्वरूप अपनी गलती समझकर उमा का समर्थन कर सकते हैं। परिवार आगे से उसके लिए ऐसा रिश्ता खोजने का निर्णय ले सकता है जहाँ उसकी शिक्षा और विचारों का सम्मान हो।
व्याकरण की बात — मेरे शब्द
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
नमूने के रूप में पाँच शब्द, उनके अर्थ और वाक्य दिए गए हैं। आप एकांकी से दूसरे शब्द भी चुन सकते हैं।
रूढ़िवादी: पुरानी मान्यताओं को बिना सोचे मानने वाला। वाक्य: रूढ़िवादी सोच समाज की प्रगति में बाधा बन सकती है।
आत्मसम्मान: अपने मान और गरिमा का सम्मान। वाक्य: हमें अपने आत्मसम्मान की रक्षा करनी चाहिए।
व्यंग्य: किसी कमी या बुराई को चुटीले ढंग से प्रकट करना। वाक्य: लेखक ने समाज की बुराइयों पर व्यंग्य किया है।
दृढ़ता: अपने निश्चय पर मजबूती से टिके रहना। वाक्य: उमा ने दृढ़ता से अपनी बात रखी।
प्रगतिशील: नई और अच्छी सोच अपनाने वाला। वाक्य: प्रगतिशील समाज सभी को समान अवसर देता है।
भाषा में मुहावरे
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए—
1. “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है— खाली हाथ।”
मुहावरा:भीगी बिल्ली की तरह — डरा हुआ या सहमा हुआ। नया वाक्य: गलती पकड़े जाने पर वह भीगी बिल्ली की तरह खड़ा रहा।
2. “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
मुहावरा:मुँह फुलाना — नाराज़ होकर चुप बैठना। नया वाक्य: खिलौना न मिलने पर बच्चा मुँह फुलाकर बैठ गया।
3. “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
मुहावरा:किस मर्ज की दवा — किस काम के या किस उपयोग के। नया वाक्य: यदि तुम मदद ही नहीं करोगे, तो किस मर्ज की दवा हो?
4. “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
मुहावरा:सिर चढ़ाना — अधिक लाड़-प्यार करके किसी को मनमाना बना देना। नया वाक्य: बच्चों को इतना सिर नहीं चढ़ाना चाहिए कि वे बड़ों की बात न सुनें।
5. “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
मुहावरा:सब कुछ उगल देना — सारी बात बता देना। नया वाक्य: पूछने पर उसने सारी योजना उगल दी।
6. “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
मुहावरा:काँटों में घसीटना — कठिन या परेशानी वाली स्थिति में डालना। नया वाक्य: तुमने मुझे सबके सामने सवाल पूछकर काँटों में घसीट दिया।
7. “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
मुहावरा:इज्जत उतारना — अपमान करना। नया वाक्य: किसी की गलती पर सबके सामने उसका अपमान करके उसकी इज्जत नहीं उतारनी चाहिए।
8. “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
मुहावरा:मुँह छिपाकर भागना — शर्मिंदा होकर चले जाना। नया वाक्य: अपनी गलती सामने आने पर वह मुँह छिपाकर चला गया।
संदर्भ में शब्द
‘बाप शेर है तो लड़का सवा शेर।’ एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
उत्तर: हमारे विद्यालय के शिक्षक बहुत अच्छे वक्ता हैं, लेकिन उनके विद्यार्थी ने प्रतियोगिता में उनसे भी अच्छा भाषण दिया। सच है, गुरु शेर है तो शिष्य सवा शेर।
आप भी संवाददाता
1. मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
संवाददाता: उमा जी, आपने विवाह के लिए आए लोगों के सामने अपनी बात क्यों रखी? उमा: क्योंकि मुझे लगा कि मुझे एक इंसान के बजाय वस्तु की तरह परखा जा रहा है। मैं अपने सम्मान और शिक्षा के बारे में चुप नहीं रहना चाहती थी।
संवाददाता: रामस्वरूप जी, आपने उमा की शिक्षा छिपाने की कोशिश क्यों की? रामस्वरूप: मुझे समाज की पुरानी सोच और रिश्ता टूटने का डर था।
संवाददाता: गोपालप्रसाद जी, क्या लड़कियों की शिक्षा लड़कों से कम महत्त्वपूर्ण है? गोपालप्रसाद: मेरे विचार पुराने हैं और मैं लड़कियों की अधिक पढ़ाई को लेकर संकोच करता हूँ।
संवाददाता का निष्कर्ष: इस घटना से स्पष्ट होता है कि लड़कियों की शिक्षा और सम्मान को समान महत्त्व मिलना चाहिए।
2. मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
लाइव रिपोर्ट: नमस्कार! मैं इस समय रामस्वरूप जी के घर पर मौजूद हूँ। यहाँ शंकर और उनके पिता गोपालप्रसाद विवाह के संबंध में आए हैं। बातचीत के दौरान लड़कियों की शिक्षा को लेकर रूढ़िवादी विचार सामने आ रहे हैं। अब उमा कमरे में आई हैं। उनसे उनकी शिक्षा और रुचियों के बारे में पूछा जा रहा है। उमा को यह व्यवहार अपमानजनक लगता है और वह स्पष्ट कहती हैं कि लड़कियों की भी भावनाएँ और आत्मसम्मान होता है। वह शंकर के साहस पर भी सवाल उठाती हैं। अंततः गोपालप्रसाद और शंकर वहाँ से चले जाते हैं। यह घटना हमें समानता, शिक्षा और आत्मसम्मान का महत्त्व समझाती है।
भाषा संगम
‘मक्खन वाले की दुकान दूर है’ नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
दिए गए शब्दों के कुछ उदाहरण:
हिंदी — मक्खन
संस्कृत — नवनीतम्
पंजाबी — मक्खण
मराठी — लोणी
गुजराती — माखण, नवनीत
बांग्ला — माखन, ननी
तेलुगु — वेन्नै
तमिल — वेण्णै
कन्नड़ — वेण्णे
इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर का नमूना: अंग्रेज़ी में मक्खन को Butter कहते हैं।
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
हिंदी वाक्य: मक्खन वाले की दुकान दूर है। निर्देश: विद्यार्थी इस वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखें।
रंगीन अभ्यास-पत्र — स्वयं हल करें
कक्षा: 9 | विषय: हिंदी गंगा | पाठ: रीढ़ की हड्डी
पहले सभी प्रश्न स्वयं हल करें। उत्तर-कुंजी सबसे अंत में दी गई है।
भाग A — सही विकल्प चुनिए
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के लेखक कौन हैं?
(क) प्रेमचंद (ख) जगदीशचंद्र माथुर (ग) महादेवी वर्मा (घ) हरिशंकर परसाई
उमा किस गुण के कारण अन्य पात्रों से अलग दिखाई देती है?
(क) डर (ख) आत्मसम्मान और साहस (ग) लालच (घ) आलस्य
गोपालप्रसाद किस बात के विरोधी हैं?
(क) लड़कों की शिक्षा (ख) संगीत (ग) लड़कियों की अधिक शिक्षा (घ) विवाह
एकांकी में ‘रीढ़ की हड्डी’ किसका प्रतीक है?
(क) नैतिक साहस (ख) धन (ग) सुंदरता (घ) ऊँचाई
भाग B — सही या गलत लिखिए
उमा अपनी शिक्षा और विचारों को लेकर आत्मविश्वास रखती है।
गोपालप्रसाद लड़कियों और लड़कों की शिक्षा को समान मानते हैं।
एकांकी में सामाजिक रूढ़ियों पर व्यंग्य किया गया है।
भाग C — संक्षिप्त उत्तर दीजिए
उमा को गोपालप्रसाद और शंकर का व्यवहार क्यों बुरा लगा?
शंकर के चरित्र की एक कमजोरी लिखिए।
इस एकांकी से आपको क्या शिक्षा मिलती है?
भाग D — विचार आधारित प्रश्न
आपके विचार से विवाह में लड़की की शिक्षा और इच्छा का सम्मान क्यों आवश्यक है?
यदि आप उमा की जगह होते, तो अनुचित व्यवहार होने पर क्या करते?
अभ्यास-पत्र की उत्तर-कुंजी
(ख) जगदीशचंद्र माथुर
(ख) आत्मसम्मान और साहस
(ग) लड़कियों की अधिक शिक्षा
(क) नैतिक साहस
सही
गलत
सही
उमा को बुरा लगा क्योंकि उसे एक इंसान के बजाय वस्तु की तरह परखा जा रहा था और उसकी शिक्षा तथा भावनाओं का सम्मान नहीं किया जा रहा था।
शंकर में नैतिक साहस और स्वतंत्र रूप से सही बात कहने की क्षमता की कमी है।
हमें लड़कियों और लड़कों को समान समझना चाहिए तथा शिक्षा, आत्मसम्मान और स्वतंत्र विचारों का सम्मान करना चाहिए।
विवाह जीवन का महत्त्वपूर्ण निर्णय है। लड़की की शिक्षा, इच्छा और सम्मान का ध्यान रखना आवश्यक है ताकि संबंध समानता और आपसी समझ पर आधारित हो।
मैं शांतिपूर्वक अपनी बात रखता/रखती, अनुचित व्यवहार का विरोध करता/करती और अपने सम्मान से समझौता नहीं करता/करती।