आखिरी चट्टान तक
Class 8 Hindi | यात्रा-वृत्तांत
लेखक — मोहन राकेश
अध्याय का सारांश
‘आखिरी चट्टान तक’ मोहन राकेश का रोचक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें लेखक ने कन्याकुमारी की यात्रा के अनुभवों का वर्णन किया है। वह समुद्र, चट्टानों, लहरों, रेत, सूर्यास्त और सूर्योदय के मनोहारी दृश्यों को बहुत जीवंत ढंग से प्रस्तुत करता है।
लेखक सूर्यास्त देखने के लिए सैंड हिल से आगे कई टीलों को पार करता है। अँधेरा होने पर उसे वापस लौटने में कठिनाई होती है और समुद्र का बढ़ता पानी उसके लिए खतरा पैदा करता है। फिर भी वह साहस और सूझ-बूझ से सुरक्षित लौट आता है।
अगले दिन वह नाव से विवेकानंद चट्टान पर पहुँचकर सूर्योदय देखता है। वहाँ उसकी मुलाकात स्थानीय युवकों से होती है और उसे पता चलता है कि अनेक शिक्षित युवक बेरोजगार हैं। इस प्रकार यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति के सौंदर्य के साथ मानव-जीवन की समस्याएँ भी दिखाई देती हैं।
त्वरित अध्ययन नोट्स
लेखक: मोहन राकेश विधा: यात्रा-वृत्तांत स्थान: कन्याकुमारी मुख्य विषय: यात्रा, प्रकृति, मानव-जीवनमुख्य बिंदु
- लेखक कन्याकुमारी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होता है।
- सूर्यास्त देखने के लिए वह कई रेतीले टीलों को पार करता है।
- बढ़ते अँधेरे और समुद्र के पानी के कारण उसे खतरे का अनुभव होता है।
- वह कठिन परिस्थिति में भी हार नहीं मानता और सुरक्षित लौटता है।
- विवेकानंद चट्टान पर सूर्योदय का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
- स्थानीय शिक्षित युवकों की बेरोजगारी की समस्या भी सामने आती है।
- प्रकृति के साथ लेखक के मन में विस्मय, रोमांच, भय और आत्मचेतना जैसे भाव उत्पन्न होते हैं।
लेखक परिचय — मोहन राकेश
मोहन राकेश का जन्म सन 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी लेखन और यात्रा-वृत्तांत जैसी अनेक विधाओं में साहित्य सृजन किया।
उनकी प्रमुख रचनाओं में आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे, अंधेरे बंद कमरे, अंतराल, न आने वाला कल, क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ, नए बादल, वारिस तथा अन्य कहानियाँ, मोहन राकेश की डायरी और आखिरी चट्टान तक आदि शामिल हैं।
‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कुछ समय तक उन्होंने ‘सारिका’ नामक हिंदी पत्रिका का संपादन भी किया। उनका निधन सन 1972 में हुआ।
यात्रा-वृत्तांत की प्रमुख विशेषताएँ
| तत्व | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|
| दृश्य-वर्णन | समुद्र, चट्टानें, लहरें, आकाश, रेत और रंगों का जीवंत चित्रण। |
| आत्मानुभूति व भावनाएँ | विस्मय, रोमांच, भय, आत्म-संवेदना और अपने अस्तित्व का बोध। |
| सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य | विवेकानंद चट्टान, मंदिर, स्थानीय लोग और धार्मिक परंपराएँ। |
| जीवन-दर्शन | शक्ति का विस्तार, आत्म-चेतना, क्षणभंगुरता और उदासी। |
| रोमांच व संघर्ष | लहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय और सुरक्षित लौटने की चिंता। |
| शैली | सहज, प्रवाहपूर्ण, चित्रात्मक भाषा तथा रूपक, उपमा और प्रतीकों का प्रयोग। |
अभ्यास — मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा?
(क) विवेकानंद चट्टान से
(ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
(ग) पश्चिमी क्षितिज से
(घ) सैंड हिल से
उत्तर: (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
कारण: लेखक कई टीलों को पार करके ऐसे ऊँचे टीले पर पहुँचा जहाँ से पश्चिमी क्षितिज का खुला विस्तार दिखाई दिया।
2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है?
(क) मौन हो जाना
(ख) विस्मित हो जाना
(ग) भ्रमित हो जाना
(घ) आशंकित होना
उत्तर: (ख) विस्मित हो जाना
कारण: प्रकृति के विशाल और अद्भुत दृश्य को देखकर लेखक स्वयं को कुछ समय के लिए भूल गया।
3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है?
(क) करुणा
(ख) विनम्रता
(ग) आत्मीयता
(घ) संतुष्टि
उत्तर: (घ) संतुष्टि
कारण: कठिन प्रयास के बाद लक्ष्य पाने पर लेखक को विशेष संतोष हुआ।
4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है—
(क) बलखाती लहरों का
(ख) सागर की व्यापकता का
(ग) सूर्यास्त के दृश्य का
(घ) पश्चिमी क्षितिज का
उत्तर: (ख) सागर की व्यापकता का
कारण: तीनों ओर फैले अथाह समुद्र को देखकर लेखक को उसकी विशाल शक्ति का अनुभव होता है।
5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि—
(क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
(ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
(ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
(घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
उत्तर: (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
कारण: लेखक ने बाहरी दृश्यों के साथ अपने मन के भावों और अनुभवों को भी प्रस्तुत किया है।
मेरी समझ मेरे विचार
1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?
2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?
3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?
4. यात्रा-वृत्तांत में आए उन दृश्यों के विषय में लिखिए जिनका अनुभव लेखक के लिए बिल्कुल नया था।
5. यात्रा-वृत्तांत से ऐसे दो अंश चुनकर लिखिए जिससे लेखक की मानसिक दृढ़ता और हार न मानने की प्रवृत्ति का पता चलता है।
यात्रा और खोज
संसार में बहुत से लोगों ने लंबी-लंबी यात्राएँ की हैं और अपनी यात्रा से अर्जित ज्ञान और अनुभव से समाज को समृद्ध किया है। पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से कुछ महत्वपूर्ण यात्रा-वृत्तांत और उनके लेखकों के विषय में जानकारी एकत्रित कीजिए और लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक संकेत नीचे दिया गया है।
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान | रचनाकार |
|---|---|---|
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश में स्थित किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन |
मेरे देश की धरती
1. भारत के समुद्री तट पर स्थित अन्य राज्यों के नाम तथा उनकी अवस्थिति को भारत के मानचित्र पर चिह्नित कीजिए।
2. यात्रा करना सभी को अच्छा लगता है। आपके मन में भी कुछ जगहों को देखने की इच्छा अवश्य हुई होगी। अपनी पसंद की उन जगहों की सूची नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार बनाइए।
| पर्यटन स्थल | राज्य जहाँ वह स्थित है | क्षेत्र | जलवायु | घूमने का अनुकूल समय |
|---|---|---|---|---|
| मनाली | हिमाचल प्रदेश | पर्वतीय | ठंडी | अप्रैल–जून |
| गोवा | गोवा | समुद्री | उष्ण | नवंबर–फरवरी |
3. कन्याकुमारी की भौगोलिक स्थिति, परिवेश, महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल एवं जन-जीवन का वर्णन करते हुए बताइए कि वहाँ की स्थिति आपके राज्य अथवा शहर/गाँव से किस प्रकार भिन्न है?
4. इस यात्रा-वृत्तांत में कन्याकुमारी में स्थित चट्टान को आखिरी चट्टान कहा गया है। पुस्तकालय या अन्य स्रोतों तथा समाज विज्ञान के अपने शिक्षक से बातचीत करके पता लगाइए कि वर्तमान समय में भारत का अंतिम छोर (दक्षिणतम बिंदु) किसे माना जाता है। उस स्थान के विषय में लिखिए।
5. इंटरनेट या अन्य किन्हीं माध्यमों से पता लगाइए कि आखिरी चट्टान में वर्णित कन्याकुमारी के विवेकानंद स्मारक चट्टान के स्वरूप में किस प्रकार का विस्तार हुआ है? (संकेत– तिरुवल्लुवल्लुवर की प्रतिमा इत्यादि)
हस्तशिल्प कौशल
1. किसी भी स्थानीय शिल्पकार से बात करके निम्नलिखित बिंदुओं पर जानकारी संग्रहित कीजिए। यह कार्य दो-दो के जोड़़े में कीजिए—
- शिल्प का नाम
- यह कार्य कब से कर रहे हैं?
- इसका प्रशिक्षण कहाँ से लिया?
- शिल्प निर्माण में घर की महिलाओं की साझेदारी
- प्रयुक्त सामग्री, तकनीक, लागत और विपणन
- औपचारिक संस्थागत प्रशिक्षण
2. डिजिटल खरीददारी और ई-वाणिज्य कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने में किस प्रकार उपयोगी है?
3. हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी इकट्ठा कीजिए और अपनी कक्षा में उस पर चर्चा कीजिए।
मिलकर चलें
1. ऐसे साथियों को अगर किसी यात्रा पर जाना हो तो उनके समक्ष किस प्रकार की चुनौतियाँ आ सकती हैं?
2. उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर कुछ ऐसे सुझाव दीजिए जो उनकी यात्रा को सहज बनाने में उपयोगी हों।
3. अपने द्वारा दिए गए सुझावों पर विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक के साथ चर्चा कीजिए और समझिए कि आपके द्वारा सुझाए गए उपाय कितने प्रभावी हैं तथा उनमें और क्या बदलाव किए जा सकते हैं?
4. प्राप्त सुझावों के विषय में कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी चर्चा कीजिए और उनकी राय जानने का प्रयास कीजिए।
प्रकृति की ओर
क्या आपने कभी सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का दृश्य देखा है? अगर नहीं तो एक दिन सुबह जल्दी उठकर उगते सूरज की लालिमा को देखिए और अस्त होते सूर्य के साथ शाम का भी आनंद लीजिए। अब इन दोनों दृश्यों की तुलना करते हुए अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।
अनुभव की साझेदारी
विधा से संवाद के अंतर्गत आपने दिए गए बिंदुओं के माध्यम से यात्रा-वृत्तांत के प्रमुख तत्वों के विषय में जाना और समझा। इन तत्वों को ध्यान में रखकर आप भी अपने घूमे हुए किसी प्रिय स्थान के अनुभवों पर एक यात्रा-संस्मरण लिखिए।
चर्चा-परिचर्चा
• ‘यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं’ विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित कीजिए।
• “एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ।” यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अप्रत्याशित चुनौतियाँ सामने आ जाती हैं। ऐसी किसी स्थिति का सामना करने के लिए व्यक्ति में किन गुणों का होना आवश्यक है? अपने सहपाठियों के साथ मिलकर इस विषय पर चर्चा कीजिए।
• यदि आपके पास भी कोई ऐसा अनुभव हो तो उसे अपने सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।
व्याकरण की बात — क्रिया-विशेषण
‘धीरे-धीरे’ क्रिया की विशेषता बता रहा है। इसलिए यह क्रिया-विशेषण है। क्रिया की विशेषता बताने वाले शब्द क्रिया-विशेषण कहलाते हैं।
नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़कर उनमें क्रिया-विशेषण पदों की पहचान कीजिए तथा दिए गए उदाहरण के अनुसार लिखिए।
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया, जिसकी विशेषता बताई जा रही है |
|---|---|---|
| (क) बलखाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। | हुई | आती थीं |
| (ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। | उस दिशा में | जा रही थीं |
| (ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। | देर तक | देखता रहा |
भाषा संगम
‘नाव’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची आगे दी गई है।
| भाषा | शब्द |
|---|---|
| हिंदी | नाव |
| संस्कृत | नौ, नौका |
| पंजाबी | बेड़ी |
| उर्दू | किश्ती, नाव |
| मराठी | होडी, नाव |
| गुजराती | नाव, होडी |
| नेपाली | नाउ, नौका |
| बंगला | नाओ, नौका |
| असमिया | नाओ |
| तेलुगु | पडव, नाव |
| तमिल | ओडम |
| मलयालम | तोणि |
| कन्नड़ | दोणि |
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘नाव’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
आओ नए वाक्य बनाएँ
पाठ से चुनकर कुछ वाक्य नीचे तालिका में दिए गए हैं। इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों का अर्थ बताते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
| वाक्य | शब्द/पद | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|---|
| तीनों तरफ से क्षितिज तक पानी-पानी था। | क्षितिज | जहाँ आकाश और धरती/समुद्र मिलते हुए दिखाई देते हैं | क्षितिज पर सूरज दिखाई दे रहा था। |
| पीछे दाईं तरफ दूर-दूर हटकर उगे नारियल के झुरमुट नजर आ रहे थे। | झुरमुट | पेड़-पौधों का घना समूह | पेड़ों का झुरमुट बहुत सुंदर लग रहा था। |
| दूर तक एक रेत की लंबी ढलान थी। | ढलान | नीचे की ओर झुका हुआ भाग | पहाड़ की ढलान पर पेड़ लगे थे। |
| पश्चिमी तट के साथ-साथ सूखी पहाड़ियों की एक श्रृंखला दूर तक चली गई थी। | श्रृंखला | एक के बाद एक क्रम में स्थित समूह | पहाड़ों की श्रृंखला दूर तक दिखाई देती थी। |
| सामने फैली रेत के कारण बहुत रूखी, बीहड़ और वीरान लग रही थी। | वीरान | जहाँ कोई व्यक्ति या गतिविधि न हो | वह स्थान रात में वीरान लगता है। |
1. कल्पना कीजिए कि आप अपने परिवार के साथ कहीं घूमने गए हैं। वहाँ आपकी भेंट एक ऐसे यात्री से होती है जिसे आपकी सहायता की आवश्यकता है लेकिन आप दोनों एक-दूसरे की भाषा से अपरिचित हैैं। ऐसे में उस अनजान यात्री की सहायता आप कैसे करेंगे?
2. पधारो म्हारे देश अपने क्षेत्र के महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की एक सूची बनाइए और उनकी विशेषताओं को ध्यान में रखकर एक विवरणिका (ब्रोशर) तैयार कीजिए।
प्रयाग : 1976 — विधा से परिचय
पाठ में निर्मल वर्मा के कुंभ मेले पर आधारित यात्रा-वृत्तांत ‘प्रयाग : 1976’ का एक अंश दिया गया है। इसमें लेखक के रात के अनुभव, आश्रम का वातावरण, चाँदनी, यात्रियों की आवाज़ें और कुंभ मेले की अनुभूति का वर्णन मिलता है।
कुंभ मेले के वृत्तांत का यह अंश आपको रोचक लगा? अब इस यात्रा-वृत्तांत को इंटरनेट, पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरा पढ़िए।
• इस यात्रा-वृत्तांत में उल्लिखित ‘आखिरी चट्टान’ को ‘विवेकानंद चट्टान’ के नाम से भी जाना जाता है। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत के रूप में विवेकानंद के जन्मदिवस 12 जनवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ तथा ‘राष्ट्रीय युवा सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रीय युवा सप्ताह के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ का आयोजन किया जाता है। विवेकानंद के जीवन, लेखन और सामाजिक कार्यों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और कक्षा में चर्चा कीजिए। कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं।
पाठ का त्वरित पुनरावर्तन
| प्रश्न | एक पंक्ति में उत्तर |
|---|---|
| पाठ की विधा क्या है? | यात्रा-वृत्तांत |
| यात्रा का मुख्य स्थान कौन-सा है? | कन्याकुमारी |
| लेखक ने सूर्यास्त कहाँ से देखा? | अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से |
| अँधेरे में लेखक को किस बात का डर लगा? | रेत के टीलों में भटक जाने और समुद्र के बढ़ते पानी का |
| अगले दिन लेखक कहाँ गया? | विवेकानंद चट्टान पर |
| स्थानीय युवकों की प्रमुख समस्या क्या थी? | बेरोजगारी |
| यात्रा-वृत्तांत में प्रकृति के साथ क्या प्रस्तुत हुआ है? | मानव-जीवन और लेखक की आत्मानुभूति |