ऐसी भी बातें होती हैं | कक्षा 9 हिंदी नोट्स और प्रश्न-उत्तर
100%
ऐसी भी बातें होती हैं
कक्षा 9 हिंदी | लता मंगेशकर से साक्षात्कार
पाठ-सारांश, मुख्य बिंदु और सरल प्रश्न-उत्तर
भाग 1 : पाठ का सारांश
इस पाठ में लेखक यतींद्र मिश्र ने भारत रत्न लता मंगेशकर का साक्षात्कार लिया है।
लता जी अपने पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर से मिले संस्कारों, संगीत-साधना,
परिवार के प्रति जिम्मेदारी और अपने जीवन के संघर्षों के बारे में बताती हैं।
पिता ने उन्हें स्वाभिमान, मेहनत, अनुशासन और सही बात पर डटे रहने की सीख दी।
पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी सँभाली।
कठिन परिस्थितियों में भी वे लगातार मेहनत करती रहीं और अपने परिवार की जरूरतें
पूरी करने का प्रयास करती रहीं।
लता जी पुराने संगीतकारों, रिकॉर्डिंग के कठिन दिनों, कोरस गायकों और भारतीय
त्योहारों की परंपराओं के बारे में भी बताती हैं। उनके अनुसार संगीत में अपार शक्ति
है। वे अपने प्रशंसकों के प्रेम के लिए आभारी हैं और मानती हैं कि शरीर नश्वर है,
लेकिन अच्छे कर्म और नाम लंबे समय तक याद किए जाते हैं।
मुख्य संदेश: मेहनत, स्वाभिमान, परिवार के प्रति कर्तव्य,
सहयोग, विनम्रता और अपनी कला के प्रति समर्पण जीवन को सार्थक बनाते हैं।
पाठ के मुख्य बिंदु
लता मंगेशकर भारत की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका थीं।
उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर ने उन्हें संगीत और जीवन के संस्कार दिए।
उन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाई।
वे स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीवन जीने में विश्वास रखती थीं।
उनका अपने सहयोगियों और कोरस गायकों के साथ आत्मीय संबंध था।
वे भारतीय त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं को महत्व देती थीं।
उनके विचार में संगीत मनुष्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
उनका मानना था कि शरीर नश्वर है, लेकिन काम और नाम याद रह सकते हैं।
लेखक परिचय : यतींद्र मिश्र
यतींद्र मिश्र का जन्म 1977 में अयोध्या, उत्तर प्रदेश में हुआ।
उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया।
उन्हें कविता, संगीत, ललित कलाओं और भारतीय संस्कृति में विशेष रुचि है।
उन्होंने कविता-संग्रहों के साथ संगीत और कलाकारों पर भी लेखन किया है।
प्रमुख व्यक्तित्व और शब्द
शब्द या व्यक्ति
सरल अर्थ
लता मंगेशकर
भारत की प्रसिद्ध गायिका, जिन्हें भारत रत्न मिला।
पंडित दीनानाथ मंगेशकर
लता जी के पिता और संगीत-शिक्षक।
यतींद्र मिश्र
इस साक्षात्कार के लेखक और प्रश्नकर्ता।
स्वाभिमान
अपने सम्मान और आत्मसम्मान के साथ जीना।
पार्श्वगायन
फिल्म के दृश्य के लिए पर्दे के पीछे से गाना।
कोरस
मुख्य गायक के साथ समूह में गाने वाले गायक।
राग
भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वरों का विशेष क्रम और रूप।
मंगलागौर
महाराष्ट्र में विवाह के बाद मनाया जाने वाला पारंपरिक उत्सव।
गुड़ी पड़वा
महाराष्ट्र में मनाया जाने वाला पारंपरिक नववर्ष उत्सव।
हाथ पसारना
किसी से कुछ माँगना या याचना करना।
भाग 2 : अभ्यास — मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प और उनके छोटे-से तर्क दिए गए हैं।
1. लता जी ने अपने पिताजी से क््यया-क््यया सीखा?
(क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
(ख) भय और संशय के साथ जीना
(ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
(घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
उत्तर : (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना।
तर्क: पिता ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ सही बात पर डटे रहना सिखाया।
2. पिताजी की मृत््ययु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का द्योतक है?
(क) संघर्ष (ख) निराशा (ग) भौतिकता (घ) कर्तव्यनिष्ठा
उत्तर : (घ) कर्तव्यनिष्ठा।
तर्क: उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए मेहनत की।
3. “बिल््ककुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है…” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है?
(क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
(ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
(ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
(घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
उत्तर : (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
तर्क: इस उत्सव में महिलाएँ मिलकर गीत गातीं और नृत्य करती थीं।
4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
(क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
(ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
(ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
(घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
उत्तर : (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
तर्क: मनुष्य चला जाता है, लेकिन उसके अच्छे काम और नाम याद रहते हैं।
5. कोरस में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे?
(क) औपचारिक (ख) कामकाजी (ग) आत्मीय (घ) प्रतिस्पर्धात्मक
उत्तर : (ग) आत्मीय।
तर्क: वे कोरस गायिकाओं को अपने परिवार जैसा मानती थीं।
6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
(ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
(ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
(घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
उत्तर : (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
तर्क: लता जी मानती थीं कि संगीत मन पर गहरा प्रभाव डालता है।
7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यतः कैसी है?
(क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
(ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
(ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
(घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
उत्तर : (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की।
तर्क: वे मेहनती, विनम्र और अपने परिवार तथा संगीत के प्रति समर्पित थीं।
मेरी समझ मेरे विचार
1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’… इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत– यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?)
उत्तर: पिता का गंभीर व्यवहार बच्चों को अपनी गलती समझा देता था।
वे बिना डाँटे उन्हें समझाते और फिर खेलने भेज देते थे। इससे अनुशासन के साथ
स्नेह भी दिखाई देता है। बच्चों के मन में डर से अधिक पिता के प्रति सम्मान था।
2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है?
उत्तर: पिता से लता जी ने स्वाभिमान, मेहनत और सही बात पर डटे रहना सीखा।
पिता के निधन के बाद परिवार सँभालना, लगातार मेहनत करना और किसी के आगे हाथ न फैलाना
उनके पिता के संस्कारों का प्रभाव था।
3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है?
उत्तर: लता जी के लिए पिता का नाम आगे बढ़ाने का अर्थ अपनी मेहनत और
संगीत से परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ाना था। इसमें अच्छे संस्कार बनाए रखना और अपने
काम से परिवार को सम्मान दिलाना भी शामिल है।
4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?
उत्तर: लता जी के सहयोगियों और कोरस गायिकाओं के साथ आत्मीय संबंध थे।
वे उनसे प्रेम से मिलतीं, साथ बैठतीं और उन्हें अपने परिवार जैसा मानती थीं।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व/उभरती छवि
साक्षात्कार से चुनी गई पंक्तियों में लता जी के व्यक्तित्व के गुण पहचानिए।
1. “मुझे अपने गाने और रिकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।”
उत्तर: एकाग्रता, समर्पण, साधना और उत्तरदायित्व।
2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।”
उत्तर: दृढ़ता, आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता और स्वाभिमान।
3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।”
उत्तर: विनम्रता और कृतज्ञता।
4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”
उत्तर: दार्शनिकता, स्पष्टता और जीवन की सच्चाई को स्वीकार करना।
मेरे प्रश्न
नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)।
1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था।
प्रश्न 1: मंगलागौर के उत्सव में स्त्रियाँ क्या करती थीं? प्रश्न 2: मंगलागौर का उत्सव भारतीय समाज की किस विशेषता को दर्शाता है?
2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।
प्रश्न 1: पुराने संगीतकारों के संगीत की कौन-सी विशेषता लता जी को अच्छी लगती थी? प्रश्न 2: लता जी ने पुराने और आधुनिक संगीत के बारे में क्या विचार व्यक्त किए?
मेरे अनुभव मेरे विचार
1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों?
नमूना उत्तर: एक बार कक्षा में किसी विद्यार्थी को बिना गलती के दोष दिया जा रहा था।
मैंने सच बताया और उसका साथ दिया। मुझे लगा कि सही बात कहना जरूरी है, भले ही दूसरे
लोग मुझसे सहमत न हों।
2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वत: करते होंगे, उनके विषय में बताइए।
नमूना उत्तर: हमारे परिवार में बड़ों का सम्मान करना, सच बोलना और जरूरतमंदों की
मदद करना सिखाया जाता है। हम इन बातों का पालन बिना याद दिलाए करने का प्रयास करते हैं।
3. “पहले दिन गुड़ी बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए।
नमूना उत्तर: हम दीपावली पर घर की सफाई करते हैं, दीप जलाते हैं, पूजा करते हैं
और परिवार के साथ मिठाइयाँ बाँटते हैं। हम बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं और जरूरतमंदों की
मदद भी करते हैं।
4. “बिल्कुल ठेठ गँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?
नमूना उत्तर: पहले त्योहारों पर लोग मिलकर लोकगीत गाते, पारंपरिक खेल खेलते और
घर पर पकवान बनाते थे। अब कई लोग व्यस्तता के कारण कम समय देते हैं और तैयार वस्तुओं
पर निर्भर रहते हैं। फिर भी कुछ परिवार पूजा, लोकगीत और पारंपरिक पकवानों की परंपरा
बनाए हुए हैं।
साक्षात्कार की पड़ताल
1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:
साक्षात्कार लेने वाले और जिसका साक्षात्कार लिया गया: “यतींद्र मिश्र : दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं…”
प्रश्नोत्तर: “यतींद्र मिश्र : आपके पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर की वे कौन-सी स्मृतियाँ हैं…?”
भावनात्मक वातावरण: पिता की यादों और संगीत के अनुभवों का वर्णन।
आमंत्रण, स्वागत और परिचय: “आप अगर तैयार हों, तो… आपसे प्रश्न पूछना चाहूँगा…”
उत्तर देने की शैली: “जी, जरूर… आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।”
विचार और उदाहरण: पुराने संगीत और रिकॉर्डिंग के तरीकों पर लता जी के विचार।
संस्मरण: बचपन में फिल्मों की नकल करने और नौशाद साहब को मिठाई देने की घटना।
समापन: “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।”
2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है— क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।
उत्तर: यह औपचारिक प्रश्नोत्तर के साथ आत्मीय बातचीत भी है।
लता जी सहजता से अपने अनुभव साझा करती हैं और प्रश्नकर्ता आदर से उनसे बात करता है।
इससे बातचीत में अपनापन दिखाई देता है।
आपका साक्षात्कार
“आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।” प्रस्तुत पाठ में विश्व-प्रसिद्ध व्यक्तित्व का साक्षात्कार दिया गया है। कल्पना कीजिए कि आप भी लता मंगेशकर के इस साक्षात्कार में उपस्थित हैं। आप लता जी से कौन-कौन से अलग प्रश्न पूछते और क्यों?
नमूना उत्तर:
आपको संगीत सीखने की प्रेरणा सबसे अधिक किससे मिली? — आपकी प्रेरणा जानने के लिए।
कठिन समय में आप अपना आत्मविश्वास कैसे बनाए रखती थीं? — जीवन से सीख लेने के लिए।
युवा गायकों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी? — उनसे मार्गदर्शन पाने के लिए।
आपके अनुसार एक अच्छे कलाकार में कौन-से गुण होने चाहिए? — कला और जीवन के महत्व को समझने के लिए।
1. “एक स्टूडियो से दूसरे और तीसरे स्टूडियो के चक्कर में ही पूरा दिन बीत जाता था।” सन 1942 में अपने पिता की मृत्यु के बाद लता मंगेशकर ने अकेले अपनी माँ, छोटे भाई-बहनों की देखभाल की और अपने घर को सँभाला। उस समय उनकी आयु मात्र 13 वर्ष थी। तब महिलाओं का फिल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। उस समय सुबह से रात तक एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो भागते हुए लता जी के एक दिन की कल्पना कीजिए। इस भागदौड़ में वे किन-किन चुनौतियों का सामना करती होंगी? (संकेत– भोजन, यात्रा-भाड़ा, सुरक्षा, थकान आदि)
नमूना उत्तर: लता जी को सुबह जल्दी उठकर काम के लिए तैयार होना पड़ता होगा।
उन्हें एक स्टूडियो से दूसरे स्टूडियो तक यात्रा करनी पड़ती होगी। समय पर भोजन करना,
यात्रा का खर्च सँभालना, सुरक्षित रहना और लगातार गाने के कारण होने वाली थकान से
जूझना उनके लिए कठिन रहा होगा। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी निभाना भी बड़ी चुनौती थी।
2. “पहले के दौर में पुरुष और स्त्री आवाज़ों के कोरस हम लोगों के गीतों के साथ ही रिकॉर्ड होते थे। भले ही वह गाना डुएट हो या फिर कोई सोलो सांग।” अपने घर, आस-पड़ोस, समुदाय, विद्यालय में होने वाले उन कार्यों के विषय में बताइए जिसमें सहयोग और सामूहिकता की आवश्यकता होती है।
नमूना उत्तर: विद्यालय में समूह-परियोजना, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सफाई
अभियान में सहयोग की जरूरत होती है। घर में त्योहार की तैयारी और आस-पड़ोस में
सामाजिक कार्यक्रम भी मिल-जुलकर पूरे किए जाते हैं।
शास्त्रीय संगीत
1. “फिर उसमें लंबी-लंबी रागदारी वाले गायन की भी परंपरा थी।” रागदारी वाले गायन का अर्थ है भारतीय शास्त्रीय संगीत। आपने इस पाठ में संगीत से जुड़े अनेक शब्दों को पढ़ा है। शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों की सहायता से इनके अर्थ और उदाहरण खोजकर लिखिए— राग, सुर, बंदिश, अभंग, सोहर, फाग, बधावा
राग: स्वरों का ऐसा विशेष क्रम जिससे संगीत की धुन बनती है। उदाहरण: राग यमन।
सुर: संगीत में निश्चित ऊँचाई वाला स्वर। उदाहरण: सा, रे, ग, म।
बंदिश: राग में बँधी हुई गीत-रचना। उदाहरण: राग यमन की बंदिश।
अभंग: भक्ति-भाव से जुड़ा मराठी भक्ति गीत। उदाहरण: संत तुकाराम के अभंग।
सोहर: बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला लोकगीत।
फाग: होली के अवसर पर गाया जाने वाला लोकगीत।
बधावा: शुभ अवसर या खुशी पर गाया जाने वाला मंगलगीत।
2. “त्योहारों के संदर्भ में एक बात और ध्यान में आती है कि अधिकांश प्रदेशों में पर्वों व अनुष्ठानों से संदर्भित घर-घर गीत गाए जाने का प्रचलन रहा है।” आपने पढ़ा कि भारत में त्योहारों पर फाग, धमार, सोहर, बधावा, छठ के गीत आदि गाने की परंपरा है। अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले ऐसे गीतों के विषय में अपने घर में पता कीजिए और एक गीत अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
नमूना उत्तर: हमारे क्षेत्र में होली पर फाग, विवाह पर मंगलगीत और धार्मिक
अवसरों पर भजन गाए जाते हैं। ये गीत लोगों को जोड़ते हैं और हमारी सांस्कृतिक परंपरा
को जीवित रखते हैं। अपनी लेखन-पुस्तिका में परिवार से पूछकर अपने क्षेत्र का एक पारंपरिक
गीत लिखें।
साइबर सुरक्षा
“आज, जो स्थिति है और जिस तरह हमारी तकनीक विकसित हो चुकी है, उसमें अगर इन लोगों को काम करने का मौका मिलता, तब तो कमाल ही हो गया होता।”
आज तकनीकी विकास इतना अधिक हो चुका है कि अनेक धोखेबाज/ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके अपनी आवाज़ बदलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करते हैं। कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि साइबर सुरक्षा नियमों का प्रयोग करते हुए इस प्रकार की धोखाधड़ी से किस प्रकार बचा जा सकता है?
उत्तर:
फोन पर पैसे माँगने वाले व्यक्ति की पहचान दूसरे तरीके से जाँचें।
परिवार के सदस्य को वापस उसके जाने-पहचाने नंबर पर फोन करके पुष्टि करें।
OTP, PIN, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी किसी को न दें।
संदेह होने पर जल्दबाजी में पैसे न भेजें और किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से सलाह लें।
साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत बैंक को सूचित करें और भारत के साइबर अपराध पोर्टल
cybercrime.gov.in
पर शिकायत करें।
हम ऐसे भी बोलते हैं
1. “वे बस हमको गंभीरता से देखते थे… मगर हम सभी समझ जाते थे कि हमको बुलाया किसलिए गया है।” क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो बिना कुछ बोले सिर्फ नजरों या संकेतों (हाव-भाव) से ही आपको समझा देता है? उस अनुभव के विषय में बताइए।
नमूना उत्तर: मेरी माँ कई बार केवल अपने हाव-भाव से मुझे समझा देती हैं कि
मुझे कोई काम करना है या शांत रहना है। उनके संकेतों को मैं अनुभव से समझ जाता/जाती हूँ।
2. यदि कोई व्यक्ति बिना बोले (संकेत भाषा में) आपको कुछ समझा रहा है, तो वह आपके साथ और आप उसके साथ कैसा व्यवहार करेंगे? (संकेत– धैर्य, जिज्ञासा, समानुभूति आदि)
उत्तर: मैं धैर्य से उसके संकेतों को समझने का प्रयास करूँगा/करूँगी।
जरूरत होने पर विनम्रता से पूछूँगा/पूछूँगी और सम्मानपूर्वक व्यवहार करूँगा/करूँगी।
किसी की बोलने या संवाद करने की शैली का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।
रचनात्मक लेखन
1. “अगर हम समय के चक्र (टाइम मशीन) को घुमाकर सन 1949-50 में ले जाएँ”, कल्पना कीजिए कि आपके पास टाइम मशीन है। 1940–50 के दशक में जाकर लता जी से मिलिए और उनके साथ बिताए गए एक दिन का वर्णन डायरी के रूप में लिखिए। उस समय की वेशभूषा, भोजन, संगीत आदि का वर्णन अवश्य कीजिए।
नमूना डायरी: दिनांक: 15 जुलाई 1949
आज मैं अपनी टाइम मशीन से 1949 में पहुँचा/पहुँची और लता जी से मिला/मिली।
उन्होंने सादगी से मेरा स्वागत किया। उस समय महिलाएँ साड़ी पहनती थीं और घर में
पारंपरिक भोजन बनाया जाता था। मैंने देखा कि संगीत की रिकॉर्डिंग के लिए कलाकारों को
बहुत मेहनत करनी पड़ती थी। लता जी अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित थीं।
उनसे मिलकर मैंने मेहनत, अनुशासन और अपने लक्ष्य के प्रति लगन की सीख ली।
2. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” कल्पना कीजिए कि यह लता जी का अंतिम संदेश है— आप उस पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया एक अनुच्छेद के रूप में व्यक्त कीजिए।
नमूना उत्तर: लता जी के शब्द हमें जीवन की सच्चाई समझाते हैं।
मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन उसके अच्छे कार्य और मधुर स्वर लंबे समय तक लोगों के
दिलों में रहते हैं। उनकी आवाज़ ने अनेक लोगों को खुशी और प्रेरणा दी। हम उनके संगीत,
विनम्रता और समर्पण को हमेशा याद रखेंगे।
व्याकरण की बात — मुहावरे
इनका प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए—
मुहावरा
अर्थ
वाक्य
हाथ में आना
प्राप्त होना
कई दिनों की मेहनत के बाद मुझे अच्छी पुस्तक हाथ में आई।
हाथ का मैल होना
धन को अस्थायी या बहुत महत्वहीन समझना
उसके लिए धन हाथ का मैल है, वह जरूरतमंदों की मदद करता है।
हाथ से हाथ मिलाना
सहयोग करना
सभी विद्यार्थियों ने सफाई अभियान में हाथ से हाथ मिलाया।
हाथ साफ करना
चोरी करना; किसी काम में निपुण होना भी
चोर ने दुकान में हाथ साफ कर दिया।
हाथ से निकल जाना
नियंत्रण से बाहर हो जाना या अवसर खो देना
समय पर तैयारी न करने से अच्छा अवसर हाथ से निकल गया।
हाथ धो बैठना
किसी चीज से वंचित हो जाना
लापरवाही के कारण वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा।
हमारी भाषाएँ
1. “‘गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन’। मतलब गाँव तो बह जाता है, लेकिन जो नाम है, वह रह जाता है।” आपने एक कहावत और उसका हिंदी में अर्थ पढ़ा। इस कहावत के अर्थ को अपने घर या क्षेत्र की भाषा अथवा भाषाओं में लिखिए।
नमूना उत्तर: हिंदी में इसका भाव है—“शरीर चला जाता है, लेकिन अच्छे कर्मों से
बना नाम रह जाता है।” अपने घर की भाषा में इस कहावत का प्रचलित रूप परिवार के बड़ों से
पूछकर लिख सकते हैं।
2. लता जी ने मराठी कहावत को हिंदी में समझाया। अब आप अपनी मातृभाषा की कोई कहावत चुनिए और उसका हिंदी में अनुवाद कीजिए। अनुवाद के बाद भाव में क्या परिवर्तन आया? लिखिए।
नमूना उत्तर: कहावत: “जैसी करनी, वैसी भरनी।”
अर्थ: मनुष्य को अपने कर्मों के अनुसार ही परिणाम मिलता है।
यह कहावत हिंदी में भी प्रचलित है, इसलिए अनुवाद करने पर इसके भाव में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता।
3. एक ‘सेतुचित्र’ बनाइए जिसमें दो किनारे हों— एक किनारे पर हिंदी और दूसरे किनारे पर अपने घर या क्षेत्र की भाषा। दोनों किनारों के बीच में ऐसे शब्द लिखिए जो दोनों भाषाओं में समान अर्थ रखते हैं।
नमूना उत्तर: हिंदी और मराठी के बीच समान या मिलते-जुलते शब्दों के उदाहरण:
नाम–नाव, माता–माता, मित्र–मित्र, फल–फळ। चित्र में दोनों भाषाओं को दो किनारों पर
लिखकर बीच में शब्दों को जोड़ने वाली रेखाएँ बनाएँ।
भाषा से जुड़ी गतिविधियाँ
1. ‘नाम रह जाएगा’ वाक्य के लिए एक सुंदर पोस्टर बनाइए।
नमूना सामग्री: शीर्षक—“नाम रह जाता है…” नीचे लिखें: “अच्छे कर्म, सच्चाई और प्रेम से ऐसा नाम बनता है जिसे लोग हमेशा याद रखते हैं।”
2. भाषा-वृक्ष बनाइए।
नमूना: जड़ में “भारतीय संस्कृति” लिखें। तने और शाखाओं पर हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि भाषाएँ लिखें। प्रत्येक शाखा पर उस भाषा का एक सुंदर शब्द जोड़ें।
3. समूह में मिलकर किसी विषय पर एक छोटा समाचार बुलेटिन तैयार कीजिए जिसमें हिंदी, अंग्रेजी और किसी क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग हो।
नमूना विषय: “कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं।” समूह के सदस्य अलग-अलग भाषाओं में एक-दो वाक्य बोल सकते हैं।
4. भाषाई स्मृति पोटली
नमूना: परिवार में बोली जाने वाली पाँच भाषाओं के शब्द और उनके अर्थ कार्ड पर लिखें। उदाहरण: नमस्ते, नमस्कार, वणक्कम, सत श्री अकाल, सलाम।
5. स्वर-कोलाज
नमूना: लता जी के जीवन, संगीत-साधना, मेहनत, विनम्रता और प्रेरक विचारों से जुड़े चित्र तथा वाक्य एक चार्ट पर सजाएँ।
6. समय-रेखा
नमूना: समय-रेखा में 1929—जन्म, बचपन—संगीत की शिक्षा, 1940 के दशक—फिल्मी संगीत में कार्य की शुरुआत, 2001—भारत रत्न, 2022—निधन लिखें।
भाषा संगम
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘संगीत’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर: पंजाबी में ਸੰਗੀਤ, उर्दू में موسیقی (मौसीकी), तमिल में சங்கீதம் और तेलुगु में సంగీతం जैसे शब्द प्रयुक्त होते हैं।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
नमूना उत्तर (मराठी): “त्या दिवशी घरात संगीताची मैफल होती.”
हिंदी अर्थ: “उस दिन घर में संगीत की सभा थी।”
लता मंगेशकर से जान-पहचान
1. “जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तब मुझे भी ऐसे ही मेडल मिलेंगे।” लता जी ने बचपन में मेडल पाने की कल्पना की और जीवन में अनगिनत पुरस्कार और मेडल प्राप्त भी किए। पता कीजिए कि उन्होंने जीवन-भर में कौन-कौन से ‘मेडल’ और पुरस्कार प्राप्त किए?
उत्तर: लता मंगेशकर को भारत रत्न (2001), पद्म भूषण (1969),
पद्म विभूषण (1999), दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (1989) और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
सहित अनेक सम्मान मिले। उन्हें कई फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुए।
2. पाठ में लता मंगेशकर ने कई फिल्मों और गीतों का उल्लेख किया है। इंटरनेट की सहायता से इनमें से किसी एक फिल्म और गीत को देखकर उसके विषय में अपने विचार लिखिए। आपको यह फिल्म और गीत कैसा लगा और क्यों?
नमूना उत्तर: मैंने फिल्म ‘महल’ का गीत “आएगा आने वाला” चुना।
लता जी की आवाज़ में मधुरता और रहस्य का सुंदर मेल है। गीत सुनते समय पुराने हिंदी
सिनेमा की अलग शैली का अनुभव होता है। उनकी आवाज़ गीत के भाव को प्रभावशाली बनाती है।
3. अब आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी की सहायता से लता मंगेशकर द्वारा गाया हुआ गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’ सुन सकते हैं।
गीत सुनें:ऐ मेरे वतन के लोगो नमूना प्रतिक्रिया: यह देशभक्ति गीत सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है।
लता जी की भावपूर्ण आवाज़ देश के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता जगाती है।
त्वरित पुनरावृत्ति
पाठ का प्रकार: साक्षात्कार
लेखक: यतींद्र मिश्र
मुख्य व्यक्तित्व: लता मंगेशकर
पिता: पंडित दीनानाथ मंगेशकर
मुख्य जीवन-मूल्य: स्वाभिमान, मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण
मुख्य संदेश: अच्छे कर्म और कला मनुष्य को लंबे समय तक यादगार बनाते हैं।