class 8 Hindi vyakarn

कक्षा 8 हिंदी व्याकरण – संक्षिप्त नोट्स

CBSE Class 8 Hindi Grammar | सरल परिभाषाएँ, मुख्य बिंदु और उदाहरण

1. अपठित बोध

अपठित गद्यांश

ऐसा गद्यांश जिसे विद्यार्थी ने पहले न पढ़ा हो, अपठित गद्यांश कहलाता है। इसे पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में देने होते हैं।

उदाहरण: पेड़ हमें फल, छाया और शुद्ध वायु देते हैं। वे पर्यावरण को संतुलित रखते हैं। इसलिए हमें पेड़ लगाने चाहिए।
मुख्य भाव: पेड़ हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए आवश्यक हैं।

ध्यान दें: गद्यांश को ध्यान से पढ़ें, उत्तर उसी में खोजें और अनावश्यक बातें न लिखें।

अपठित पद्यांश

ऐसी कविता या काव्य-पंक्तियाँ जिन्हें पहले न पढ़ा गया हो, अपठित पद्यांश कहलाती हैं। इनके प्रश्नों में भाव, संदेश, शब्दार्थ और कविता का मुख्य विचार पूछा जा सकता है।

उदाहरण:
मेहनत से खिलते हैं फूल,
मेहनत से मिलते हैं फल।
भाव: परिश्रम करने से सफलता प्राप्त होती है।

2. भाषा, बोली, लिपि और व्याकरण

  • भाषा: विचारों और भावों को व्यक्त करने का साधन। उदाहरण – हिंदी, अंग्रेज़ी।
  • बोली: किसी क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा का स्थानीय रूप। उदाहरण – ब्रज, अवधी।
  • लिपि: भाषा लिखने के लिए प्रयुक्त चिह्नों की व्यवस्था। उदाहरण – हिंदी की लिपि देवनागरी है।
  • व्याकरण: भाषा को शुद्ध रूप से बोलने और लिखने के नियमों का ज्ञान।
उदाहरण: “सीमा स्कूल जाती है।” यह शुद्ध वाक्य है।

3. वर्ण-विचार

वर्ण भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई है। वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

  • स्वर: जिनका उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता से होता है। जैसे – अ, आ, इ, ई, उ।
  • व्यंजन: जिनके उच्चारण में स्वर की सहायता ली जाती है। जैसे – क, ख, ग, च, त।
  • अनुस्वार (ं): अंग, संकल्प।
  • अनुनासिक (ँ): माँ, चाँद।
  • विसर्ग (ः): प्रायः, दुःख।

4. शब्द-विचार

वर्णों के सार्थक समूह को शब्द कहते हैं। जैसे – घर, पुस्तक, विद्यालय।

अर्थ के आधार पर

  • सार्थक शब्द: जिनका कोई अर्थ हो। जैसे – कमल, पानी।
  • निरर्थक शब्द: जिनका स्वतंत्र रूप से कोई निश्चित अर्थ न हो। जैसे – चाय-वाय में “वाय”।

उत्पत्ति के आधार पर

  • तत्सम: संस्कृत से बिना विशेष परिवर्तन के आए शब्द – अग्नि, सूर्य।
  • तद्भव: संस्कृत से रूप बदलकर बने शब्द – अग्नि से आग, दंत से दाँत।
  • देशज: स्थानीय बोलियों से प्रचलित शब्द – खटिया, झटपट।
  • विदेशज: दूसरी भाषाओं से आए शब्द – किताब, स्कूल, अदालत।

रचना के आधार पर

  • रूढ़: जिनके खंडों से अर्थ स्पष्ट नहीं होता – घर, नाक।
  • यौगिक: दो सार्थक शब्दों से बने – विद्यालय (विद्या + आलय)।
  • योगरूढ़: जिनका विशेष अर्थ प्रचलित हो – पंकज (कमल)।

5. संज्ञा

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, समूह या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।

प्रकारअर्थउदाहरण
व्यक्तिवाचकविशेष व्यक्ति या स्थान का नामराम, दिल्ली
जातिवाचकपूरी जाति या वर्ग का नामलड़का, नदी
भाववाचकभाव, गुण या अवस्थामिठास, बचपन
समूहवाचकसमूह का बोधसेना, झुंड
द्रव्यवाचकपदार्थ या द्रव्य का नामसोना, पानी
वाक्य: रीना ने बगीचे में फूल देखे।
संज्ञाएँ – रीना, बगीचे, फूल।

6. लिंग

संज्ञा के जिस रूप से पुरुष या स्त्री जाति का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।

  • पुल्लिंग: लड़का, राजा, घोड़ा, लेखक।
  • स्त्रीलिंग: लड़की, रानी, घोड़ी, लेखिका।
उदाहरण: अच्छा लड़का → अच्छी लड़की।
लिंग बदलने पर वाक्य में संबंधित शब्दों का रूप भी बदल सकता है।

7. वचन

शब्द के जिस रूप से एक या अनेक का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।

  • एकवचन: पुस्तक, बच्चा, नदी।
  • बहुवचन: पुस्तकें, बच्चे, नदियाँ।
उदाहरण: लड़की पढ़ती है। → लड़कियाँ पढ़ती हैं।

8. कारक

संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से संबंध बताने वाले रूप को कारक कहते हैं। कारक-चिह्न संबंध पहचानने में सहायता करते हैं।

कारकमुख्य चिह्नउदाहरण
कर्तानेराम ने खाना खाया।
कर्मकोसीमा ने मोहन को बुलाया।
करणसे, के द्वारावह कलम से लिखता है।
संप्रदानके लिए, कोमाँ ने बच्चे के लिए फल खरीदे।
अपादानसेपेड़ से पत्ता गिरा।
संबंधका, के, कीयह रीना की पुस्तक है।
अधिकरणमें, परकिताब मेज पर है।
संबोधनहे!, अरे!, ओ!हे मित्र! मेरी बात सुनो।

9. सर्वनाम

संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।

प्रकारउदाहरण
पुरुषवाचकमैं, हम, तुम, आप, वह
निश्चयवाचकयह, वह
अनिश्चयवाचककोई, कुछ
प्रश्नवाचककौन, क्या, किसने
संबंधवाचकजो, सो; जैसा, वैसा
निजवाचकस्वयं, खुद, अपना
उदाहरण: मोहन स्कूल गया। वह समय पर पहुँचा। यहाँ “वह” सर्वनाम है।

10. विशेषण

जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, वे विशेषण कहलाते हैं।

  • गुणवाचक: अच्छा, सुंदर, मीठा। उदाहरण – मीठा आम।
  • संख्यावाचक: एक, दो, पहला। उदाहरण – तीन बच्चे।
  • परिमाणवाचक: थोड़ा, अधिक, पर्याप्त। उदाहरण – थोड़ा पानी।
  • सार्वनामिक: यह, वह, कौन-सा। उदाहरण – यह पुस्तक मेरी है।

जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है, उसे विशेष्य कहते हैं। “लाल फूल” में “लाल” विशेषण और “फूल” विशेष्य है।

11. क्रिया

जिस शब्द से किसी काम के करने, होने या अवस्था का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं।

उदाहरण: पढ़ना, दौड़ना, सोना, होना।
सीमा गाना गाती है। – “गाती है” क्रिया है।
  • सकर्मक क्रिया: जिसका प्रभाव किसी कर्म पर पड़ता है। उदाहरण – राधा पुस्तक पढ़ती है।
  • अकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण – बच्चा सोता है।

धातु: क्रिया का मूल रूप। जैसे – लिखना की धातु “लिख”, पढ़ना की धातु “पढ़”।

12. काल

क्रिया के जिस रूप से काम के होने का समय पता चले, उसे काल कहते हैं।

कालउदाहरण
वर्तमान कालमैं पुस्तक पढ़ता हूँ।
भूतकालमैंने पुस्तक पढ़ी।
भविष्यत् कालमैं पुस्तक पढ़ूँगा।

13. अविकारी शब्द – अव्यय

जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष या काल के कारण परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।

  • क्रियाविशेषण: धीरे, जल्दी, आज। उदाहरण – वह धीरे चलता है।
  • संबंधबोधक: के पास, के ऊपर, के सामने। उदाहरण – घर के सामने पेड़ है।
  • समुच्चयबोधक: और, लेकिन, क्योंकि। उदाहरण – मैं गया, लेकिन वह नहीं मिला।
  • विस्मयादिबोधक: वाह!, अरे!, ओह! उदाहरण – वाह! कितना सुंदर दृश्य है।
  • निपात: भी, ही, तो जैसे शब्द। उदाहरण – मैं भी चलूँगा।

14. संधि

दो वर्णों के पास आने पर उनमें होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को संधि कहते हैं।

  • स्वर संधि: दो स्वरों के मिलने से परिवर्तन। उदाहरण – विद्या + आलय = विद्यालय।
  • व्यंजन संधि: व्यंजन के मेल से परिवर्तन। उदाहरण – सत् + जन = सज्जन।
  • विसर्ग संधि: विसर्ग (ः) के बाद वर्ण आने पर परिवर्तन। उदाहरण – मनः + योग = मनोयोग।
संधि-विच्छेद में संधि से बने शब्द को अलग-अलग मूल शब्दों में बाँटा जाता है।

15. समास

दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया समास कहलाती है। समास से बने शब्द को समस्त पद कहते हैं।

समास का प्रकारउदाहरण और विग्रह
अव्ययीभावप्रतिदिन – प्रत्येक दिन
तत्पुरुषराजपुत्र – राजा का पुत्र
कर्मधारयनीलकमल – नीला है जो कमल
द्विगुनवरत्न – नौ रत्नों का समूह
द्वंद्वमाता-पिता – माता और पिता
बहुव्रीहिदशानन – दस मुख हैं जिसके (रावण)

16. पद-परिचय

वाक्य में प्रयुक्त किसी शब्द का व्याकरणिक परिचय देना पद-परिचय कहलाता है। इसमें शब्द का भेद, लिंग, वचन, पुरुष, काल आदि की जानकारी दी जाती है, जहाँ लागू हो।

वाक्य: सुंदर फूल खिला है।
“सुंदर” – गुणवाचक विशेषण।
“फूल” – जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन।
“खिला है” – क्रिया, वर्तमान काल।

17. वाक्य

शब्दों का ऐसा व्यवस्थित समूह जो पूरा अर्थ प्रकट करे, वाक्य कहलाता है।

अर्थ के आधार पर वाक्य के प्रकार

  • विधानवाचक: आज मौसम अच्छा है।
  • निषेधवाचक: मैं आज नहीं जाऊँगा।
  • प्रश्नवाचक: तुम कहाँ जा रहे हो?
  • आज्ञावाचक: कृपया बैठ जाइए।
  • इच्छावाचक: ईश्वर तुम्हें सफल करे।
  • विस्मयादिबोधक: वाह! तुम जीत गए!
  • संदेहवाचक: शायद आज वर्षा हो।

रचना के आधार पर: सरल वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य होता है; संयुक्त वाक्य में समान स्तर के उपवाक्य जुड़े होते हैं; मिश्र वाक्य में एक प्रधान और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।

सरल – रीना पढ़ती है।
संयुक्त – रीना पढ़ती है और मोहन लिखता है।
मिश्र – जो लड़का खड़ा है, वह मेरा भाई है।

18. वाक्य संबंधी अशुद्धियाँ

वाक्य में व्याकरण, लिंग, वचन, काल या शब्द-प्रयोग की गलती होने पर वाक्य अशुद्ध हो सकता है।

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
सीता बाजार गया।सीता बाजार गई।
लड़के खेल रहा है।लड़के खेल रहे हैं।
मेरे को पानी चाहिए।मुझे पानी चाहिए।
वह मेरे से बड़ा है।वह मुझसे बड़ा है।
राम और श्याम आया।राम और श्याम आए।

याद रखें: कर्ता और क्रिया के लिंग, वचन तथा पुरुष में उचित मेल होना चाहिए।

19. अलंकार

काव्य की सुंदरता बढ़ाने वाले विशेष शब्द-प्रयोग या अर्थ-प्रयोग अलंकार कहलाते हैं।

  • अनुप्रास अलंकार: एक वर्ण की बार-बार आवृत्ति।
    उदाहरण – चंचल चपला चमक रही।
  • उपमा अलंकार: किसी की तुलना “सा, सी, समान, जैसे” आदि से।
    उदाहरण – उसका मुख चाँद-सा सुंदर है।
  • रूपक अलंकार: उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप।
    उदाहरण – जीवन एक संग्राम है।
  • मानवीकरण अलंकार: निर्जीव वस्तु या प्रकृति को मानव के गुण देना।
    उदाहरण – हवा गुनगुनाती हुई चली।
  • अतिशयोक्ति अलंकार: किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना।
    उदाहरण – आँसुओं की नदी बह गई।

20. मुहावरे और लोकोक्तियाँ

मुहावरा

ऐसा प्रचलित वाक्यांश जिसका अर्थ सामान्य शब्दार्थ से अलग होता है।

  • आँखों का तारा: बहुत प्यारा। उदाहरण – रीमा अपने माता-पिता की आँखों का तारा है।
  • नाक कटना: अपमान होना। उदाहरण – गलत काम से परिवार की नाक कटती है।
  • हाथ-पाँव फूलना: घबरा जाना। उदाहरण – कठिन प्रश्न देखकर उसके हाथ-पाँव फूल गए।
  • दाँत खट्टे करना: बुरी तरह पराजित करना।

लोकोक्ति

अनुभव पर आधारित ऐसा प्रचलित कथन जो कोई सीख या जीवन-सत्य बताता है।

  • जैसी करनी वैसी भरनी: कर्मों के अनुसार फल मिलता है।
  • एकता में बल है: मिल-जुलकर रहने में शक्ति है।
  • जहाँ चाह वहाँ राह: दृढ़ इच्छा से रास्ता मिल जाता है।
  • नाच न जाने आँगन टेढ़ा: अपनी कमी का दोष दूसरों पर लगाना।

21. शब्द-भंडार

पर्यायवाची शब्द

समान या मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द।

सूर्य – रवि, भानु | जल – पानी, नीर | पृथ्वी – धरती, भूमि

विलोम शब्द

विपरीत अर्थ वाले शब्द।

दिन – रात | लाभ – हानि | सुख – दुःख | नया – पुराना

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

जो पढ़ाता है – शिक्षक
जो देश से प्रेम करता है – देशभक्त
जो कभी न मरे – अमर
जो दूसरों का भला करे – परोपकारी

अनेकार्थी शब्द

एक शब्द के एक से अधिक अर्थ हो सकते हैं।

कर – हाथ / टैक्स; फल – खाने का फल / परिणाम; पत्र – पत्ता / चिट्ठी

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

सुनने में समान या बहुत मिलते-जुलते, लेकिन अर्थ और वर्तनी में अलग शब्द।

दिन – दिवस; दीन – गरीब
ओर – दिशा; और – तथा
कुल – वंश; कूल – किनारा

22. अनुच्छेद-लेखन

किसी एक विषय पर क्रमबद्ध और जुड़े हुए वाक्यों में लिखी गई संक्षिप्त रचना अनुच्छेद कहलाती है।

अच्छा अनुच्छेद लिखने के नियम

  • विषय का स्पष्ट परिचय दें।
  • एक ही मुख्य विचार पर लिखें।
  • सरल, शुद्ध और जुड़े हुए वाक्य लिखें।
  • अंत में निष्कर्ष या संदेश दें।
उदाहरण: स्वच्छता का महत्त्व
स्वच्छता हमारे जीवन का आवश्यक हिस्सा है। स्वच्छ वातावरण से हम अनेक बीमारियों से बच सकते हैं। हमें अपने घर, विद्यालय और आसपास की जगहों को साफ रखना चाहिए। कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में डालना चाहिए। स्वच्छता केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

23. पत्र-लेखन

पत्र के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं:

  • औपचारिक पत्र: प्रधानाचार्य, अधिकारी या किसी संस्था को लिखा जाता है।
  • अनौपचारिक पत्र: मित्रों और परिवार के सदस्यों को लिखा जाता है।

औपचारिक पत्र का प्रारूप

प्रेषक का पता
दिनांक
प्राप्तकर्ता का पद और पता
विषय: पत्र लिखने का कारण
महोदय/महोदया,
पत्र का मुख्य विषय और अनुरोध।
धन्यवाद।
भवदीय/भवदीया
नाम

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप

पता
दिनांक
प्रिय मित्र/प्रिय भाई,
सप्रेम नमस्कार। पत्र का मुख्य भाग और कुशल-क्षेम।
शेष शुभ।
तुम्हारा मित्र/तुम्हारी मित्र
नाम

24. निबंध-लेखन

किसी विषय पर विचारों को विस्तारपूर्वक और क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करने वाली रचना निबंध कहलाती है।

निबंध के मुख्य भाग

  1. प्रस्तावना: विषय का परिचय।
  2. विषय-विस्तार: विषय का महत्त्व, कारण, लाभ, हानि या उदाहरण।
  3. उपसंहार: निष्कर्ष, सुझाव या संदेश।
उदाहरण: समय का महत्त्व
समय हमारे जीवन की अमूल्य संपत्ति है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। जो विद्यार्थी समय का सही उपयोग करते हैं, वे पढ़ाई और अन्य कार्यों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हमें समय-सारणी बनाकर काम करना चाहिए और आलस्य से बचना चाहिए। समय का सम्मान करना सफलता की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
अध्ययन सुझाव: प्रत्येक विषय की परिभाषा समझें, उदाहरण पढ़ें और लिखते समय शुद्ध वर्तनी तथा सही विराम-चिह्नों का ध्यान रखें।