Class 8 Hindi Malhar Chapter 7 मत बाँधो notes and book solutions with easy explanations, question answers, important meanings and NCERT-based study material for CBSE students.
मत बाँधो
कक्षा 6 हिंदी मल्हार | कविता के नोट्स और पुस्तक समाधान

कविता
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?
अग्नि सदा धरती पर जलती
धूम गगन में मँडराता है!
सपनों में दोनों ही गति हैं
उड़ कर आँखों में आता है!
इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!
मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आएगा।
स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!
नभ तक जाने से मत रोको
धरती से इसको मत बाँधो!
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो!
— महादेवी वर्मा
कविता का सरल सार
कवयित्री कहती हैं कि सपनों को रोकना या उनकी गति बाँधना नहीं चाहिए। सपने मनुष्य को आगे बढ़ने, कुछ नया करने और जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देते हैं।
कवयित्री ने सपनों की तुलना पंखों वाले पक्षी से की है। जैसे पक्षी को उड़ने की स्वतंत्रता चाहिए, वैसे ही सपनों को भी आगे बढ़ने की स्वतंत्रता चाहिए।
अच्छे सपने केवल कल्पना नहीं होते। वे विचारों के रूप में जन्म लेते हैं और मेहनत तथा प्रयास से वास्तविकता बन सकते हैं। ऐसे सपने समाज और धरती को बेहतर बनाने में सहायता कर सकते हैं।
कविता का मुख्य संदेश
- सपनों को स्वतंत्र रूप से देखने और पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।
- सपने जीवन में नई दिशा और प्रेरणा देते हैं।
- कल्पना और स्वतंत्र विचार प्रगति के लिए उपयोगी हैं।
- अच्छे सपने मेहनत और लगन से वास्तविकता बन सकते हैं।
- मनुष्य को अपने और दूसरों के सपनों का सम्मान करना चाहिए।
कवयित्री से परिचय
कठिन शब्दों के सरल अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| सौरभ | सुगंध |
| नभ | आकाश |
| धूलि | धूल |
| गति | चलने या आगे बढ़ने की अवस्था |
| आरोहण | ऊपर की ओर जाना |
| अवरोहण | ऊपर से नीचे की ओर आना |
| विचरण | घूमना |
| दीप्ति | चमक या प्रकाश |
| भू | धरती |
| शिल्प | कला, कौशल या निर्माण की कला |
मेरी समझ से
1. आप इनमें से कविता का मुख्य भाव किसे समझते हैं?
- सपने मात्र कल्पनाएँ हैं
- सपनों को भूल जाना चाहिए
- सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए
- सपने देखना अच्छी बात है
2. ‘मत बाँधो’ कविता किसकी स्वतंत्रता की बात करती है?
- प्रेम की
- शिक्षा की
- सपनों की
- अधिकारों की
3. “इन सपनों के पंख न काटो” पंक्ति में सपनों के ‘पंख’ होने की कल्पना क्यों की गई है?
- सपने जीवन में कुछ नया करने की प्रेरणा देते हैं
- सपने सफलता की ऊँचाइयों तक ले जाते हैं
- सपने पंखों की तरह उड़ान भर भ्रमण करवाते हैं
- सपने पंखों की तरह कोमल और अनेक प्रकार के होते हैं
4. “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प” पंक्ति में ‘स्वर्ग’ से आप क्या समझते हैं?
- जहाँ किसी प्रकार का शारीरिक कष्ट न हो
- जहाँ अतुलनीय धन-संपत्ति हो
- जहाँ परस्पर सहयोग एवं सद्भाव हो
- जहाँ सभी प्राणी एक-दूसरे के प्रति संवेदनशील हों
5. यदि बीज धूल में गिर जाए तो क्या हो सकता है?
- वह बहुत तेजी से उड़ सकता है
- वह और गहरा हो सकता है
- उसकी उड़ान रुक सकती है
- वह बढ़कर पौधा बन सकता है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “सौरभ उड़ जाता है नभ में
फिर वह लौट कहाँ आता है?
बीज धूलि में गिर जाता जो
वह नभ में कब उड़ पाता है?”
(ख) “मुक्त गगन में विचरण कर यह
तारों में फिर मिल जायेगा,
मेघों से रंग औ’ किरणों से
दीप्ति लिए भू पर आएगा।”
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदर्भ से मिलाइए।
| क्रम | कविता की पंक्ति | सही भाव या संदर्भ |
|---|---|---|
| 1 | इन सपनों के पंख न काटो इन सपनों की गति मत बाँधो! | किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता। उसी प्रकार सपनों को रोकने से कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो सकती हैं। |
| 2 | सपनों में दोनों ही गति हैं उड़कर आँखों में आता है! | सपनों में ऊपर उठने और व्यवहार में वापस आने की विशेषता होती है। |
| 3 | इसका आरोहण मत रोको इसका अवरोहण मत बाँधो! | सपनों के उठने और व्यवहार में वापस आने में बाधा नहीं डालनी चाहिए। |
| 4 | नभ तक जाने से मत रोको धरती से इसको मत बाँधो! | सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से नहीं रोकना चाहिए। |
| 5 | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा! | रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकते हैं। |
सोच-विचार के लिए
(क) कविता में ‘मत बाँधो’, ‘पंख न काटो’ आदि संबोधन किसके लिए किए गए होंगे?
(ख) कविता में सपनों की गति न बाँधने की बात क्यों कही गई होगी?
(ग) कविता में सौरभ, बीज, धुआँ, अग्नि जैसे उदाहरणों के माध्यम से सपनों को इनसे भिन्न बताते हुए उसे विशेष बताया गया है। आपकी दृष्टि में इन सबसे अलग सपनों की और कौन-सी विशेषताएँ हो सकती हैं?
(घ) कविता में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ दोनों के महत्व की बात की गई है। उदाहरण देकर बताइए कि आपने ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ को कब-कब सार्थक होते देखा?
(ङ) “सपनों में दोनों ही गति है/उड़कर आँखों में आता है!” क्या आप सहमत हैं कि सपने ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन जाते हैं? अपने अनुभव या आस-पास के अनुभवों से कोई उदाहरण दीजिए।
शीर्षक
कविता का शीर्षक है ‘मत बाँधो’। यदि आपको इस कविता को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए आप एक नया संसार बनाना चाहते हैं। उस संसार में आप क्या-क्या रखना चाहेंगे और क्या-क्या नहीं? अपने उत्तर का कारण भी बताइए।
(ख) कविता में शिल्प और कला के महत्व की बात की गई है। कलाएँ हमारे आस-पास की दुनिया को सुंदर बनाती हैं। आप अपने जीवन को सुंदर बनाने के लिए कौन-सी कला सीखना चाहेंगे? उससे आपका जीवन कैसे सुंदर बनेगा? अनुमान करके बताइए।
(ग) “सौरभ उड़ जाता है नभ में / फिर वह लौट कहाँ आता है?” यदि आपके पास अपने बीते हुए समय में लौटने का अवसर मिले तो आप बीते हुए समय में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहेंगे?
(घ) “बीज धूल में गिर जाता जो / वह नभ में कब उड़ पाता है?” यदि सपने बीज की तरह हों तो उन्हें उगने के लिए किन चीजों की आवश्यकता होगी? (संकेत— धूप अर्थात मेहनत, पानी अर्थात लगन आदि।)
(ङ) “स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा!” यदि अच्छे सपनों या विचारों से स्वर्ग बनाया जा सकता है तो बुरे सपनों अथवा विचारों से क्या होता होगा? बुरे सपनों या विचारों से कैसे बचा जा सकता है?
(च) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” कल्पना कीजिए कि हर किसी को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की पूरी स्वतंत्रता मिल जाए, तब दुनिया कैसी होगी? आपके अनुसार उस दुनिया में कौन-सी बातें महत्वपूर्ण होंगी?
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो!” आपके विचार से यह सुझाव है? आदेश है? प्रार्थना है? या कुछ और है? यह बात किससे कही जा रही है?
कविता की रचना
(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ समाहित हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| क्रम | कविता की विशेषताएँ | सही पंक्ति |
|---|---|---|
| 1 | एक-दूसरे के विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 2. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! |
| 2 | एक ही शब्द का प्रयोग बार-बार किया गया है। | 4. इन सपनों के पंख न काटो |
| 3 | समानार्थी शब्दों का प्रयोग किया गया है। | 6. दीप्ति लिए भू पर आएगा। / स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा! |
| 4 | प्रश्न पूछा गया है। | 1. वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 5 | संबोधन का प्रयोग किया गया है। | 5. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! |
| 6 | सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है। | 3. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! |
शब्दों की बात
“इसका आरोहण मत रोको
इसका अवरोहण मत बाँधो!”
(क) नीचे दिए रिक्त स्थान में ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ का उपयुक्त प्रयोग करके वाक्यों को पूरा कीजिए।
- पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर _____________ कर विजय प्राप्त की।
- नदियाँ विशाल पर्वतों से _____________ करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
- अंक गणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया _____________ क्रम कहलाती है।
- आरोहण
- अवरोहण
- अवरोहण
इसी प्रकार से ‘आरोहण’ और ‘अवरोहण’ शब्दों के प्रयोग को देखते हुए आप भी कुछ सार्थक वाक्य बनाइए।
(ख) नीचे दी गई कविता की पंक्तियों के रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए—
“वह नभ में कब उड़ पाता है?”
“धूम गगन में मँडराता है।”
‘नभ’ और ‘गगन’ समान अर्थ वाले शब्द हैं। रेखांकित शब्दों के समानार्थी शब्दों का प्रयोग करते हुए कुछ नई पंक्तियों की रचना कीजिए और देखिए कि पंक्तियों में लय बनाए रखने के लिए और किन परिवर्तनों की आवश्यकता पड़ती है?
“आकाश में सपनों की उड़ान,
आसमान में नई पहचान।”
(ग) कविता में ‘मत’ शब्द के साथ ‘बाँधो’, ‘काटो’ क्रिया लगाई गई है। आप ‘मत’ के साथ कौन-कौन सी क्रियाएँ लगाना चाहेंगे? लिखिए। (संकेत— ‘मत डरो’)
(घ) आपकी भाषा में ‘बाँधने’ के लिए और कौन-कौन सी क्रियाएँ हैं? अपने समूह में चर्चा करके लिखिए और उनसे वाक्य बनाइए। (संकेत— जोड़ना)
उदाहरण: माँ ने दोनों रस्सियों को जोड़ दिया।
(ङ) ‘मत’ शब्द को उलट कर लिखने से शब्द बनता है ‘तम’ जिसका अर्थ है ‘अँधेरा’। कविता में से कुछ ऐसे और शब्द छाँटिए जिन्हें उलट कर लिखने से अर्थ देने वाले शब्द बनते हैं।
काल परिवर्तन
“सौरभ उड़ जाता है नभ में”
उपर्युक्त पंक्ति को ध्यान से देखिए। इस पंक्ति की क्रिया ‘जाता है’ से पता चलता है कि यह वर्तमान काल में लिखी गई है। यदि हम इसी पंक्ति को भूतकाल और भविष्य काल में लिखें तो यह निम्नलिखित प्रकार से लिखी जाएगी—
भूतकाल— सौरभ उड़ गया है नभ में
भविष्य काल— सौरभ उड़ जाएगा नभ में
कविता में वर्तमान काल में लिखी गई ऐसी अनेक पंक्तियाँ आई हैं। उन पंक्तियों को कविता में से ढूँढ़कर भूतकाल और भविष्य काल में लिखिए।
| वर्तमान काल | भूतकाल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| सौरभ उड़ जाता है नभ में। | सौरभ उड़ गया नभ में। | सौरभ उड़ जाएगा नभ में। |
| धूम गगन में मँडराता है। | धूम गगन में मँडराया। | धूम गगन में मँडराएगा। |
| आँखों में आता है। | आँखों में आया। | आँखों में आएगा। |
| दीप्ति लिए भू पर आएगा। | दीप्ति लिए भू पर आया। | दीप्ति लिए भू पर आएगा। |
शब्दकोश से
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प”
शब्दकोश के अनुसार ‘शिल्प’ शब्द के निम्नलिखित अर्थ हैं— हाथ से कोई चीज बनाकर तैयार करने का काम, कला संबंधी व्यवसाय, दक्षता, कौशल, निर्माण, सर्जन, सृष्टि, रचना आदि।
अब शब्दकोश से ‘शिल्प’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित शब्दों के अर्थ खोजकर लिखिए—
- शिल्पकार, शिल्पी, शिल्पजीवी, शिल्पकारक, शिल्पिक या शिल्पकारी
- शिल्पकला
- शिल्पकौशल
- शिल्पगृह या शिल्पगेह
- शिल्पविद्या
- शिल्पशाला या शिल्पालय
- शिल्पकार या शिल्पी: कला या वस्तु बनाने वाला व्यक्ति।
- शिल्पकला: वस्तुएँ बनाने की कला।
- शिल्पकौशल: शिल्प बनाने की दक्षता।
- शिल्पगृह या शिल्पगेह: शिल्प से जुड़ा स्थान।
- शिल्पविद्या: शिल्प बनाने का ज्ञान।
- शिल्पशाला या शिल्पालय: शिल्प बनाने या सीखने का स्थान।
आपकी बात
(क) कविता में गति को न बाँधने की बात कही गई है। आप ‘बाँधने’ का प्रयोग किन-किन स्थितियों या वस्तुओं के लिए करते हैं? बताइए। (संकेत— गाँठ बाँधना)
(ख) ‘स्वर्ग’ शब्द से आशय है ‘सुखद स्थान’। अर्थात वह स्थान जहाँ सुख, शांति, समृद्धि और आनंद की अनुभूति हो। अपने घर, आस-पड़ोस और विद्यालय को सुखद स्थान बनाने के लिए आप क्या-क्या प्रयास करेंगे? सूची बनाइए और घर के सदस्यों के साथ साझा कीजिए।
- सबसे प्रेम और सम्मान से बात करूँगा/करूँगी।
- स्वच्छता रखूँगा/रखूँगी।
- जरूरतमंदों की सहायता करूँगा/करूँगी।
- पेड़-पौधों की देखभाल करूँगा/करूँगी।
- विद्यालय की वस्तुओं की रक्षा करूँगा/करूँगी।
(ग) कविता में सपनों की बात की गई है। आपका कौन-सा सपना ऐसा है जो यदि सच हो जाए तो वह दूसरों की सहायता कर सकता है? उसके विषय में बताइए।
पाठ से आगे
चर्चा-परिचर्चा
“सपनों में दोनों ही गति है/उड़कर आँखों में आता है।”
किसी एक के द्वारा देखा गया सपना बहुत से लोगों का सपना भी बन जाता है, जैसे— हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा भारत को स्वतंत्र कराने का सपना सभी भारतीयों का सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से ऐसे सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप अन्य लोगों को भी जोड़ना चाहेंगे।
सृजन
(क) विराम चिह्न का फेरबदल—
रोको मत, जाने दो
रोको, मत जाने दो
नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। आप किन चित्रों के लिए ‘रोको मत, जाने दो’ या ‘रोको, मत जाने दो’ का प्रयोग करेंगे? दिए गए रिक्त स्थान में लिखिए और इन चित्रों को शीर्षक भी दीजिए।
| स्थिति | वाक्य | शीर्षक |
|---|---|---|
| छुट्टियाँ समाप्त | रोको मत, जाने दो | विद्यालय जाने का समय |
| सैनिक जाने को तैयार | रोको मत, जाने दो | कर्तव्य की ओर प्रस्थान |
| तुम मत जाओ | रोको, मत जाने दो | रुकने का आग्रह |
(ख) कविता आगे बढ़ाएँ
नीचे दी गई पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुए अपनी एक कविता तैयार कीजिए।
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो।
इन सपनों को आगे बढ़ने दो,
नई राहों पर चढ़ने दो।
मेहनत से इनको सजने दो,
जीवन को सुंदर बनने दो।
(ग) खोया-पाया
मान लीजिए आपका सपना कहीं खो गया है। उसके खो जाने की रिपोर्ट तैयार करें। आपको स्कूल प्रशासन को यह रिपोर्ट भेजनी है। इसके लिए स्कूल प्रशासन के नाम एक पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय/महोदया,
विषय: मेरे सपने के खो जाने के संबंध में।
महोदय/महोदया,
मेरा सपना मेहनत की कमी और निराशा के कारण मुझसे दूर हो गया है। मैं उसे फिर से पाने के लिए नियमित मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ प्रयास करूँगा/करूँगी।
धन्यवाद।
भवदीय
एक विद्यार्थी
वाद-विवाद
(क) कक्षा में पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह बनाकर एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है— “व्यक्ति को बाँध सकते हैं उसके विचार और कल्पना को नहीं।”
एक समूह विषय के विपक्ष में और दूसरा समूह विषय के पक्ष में अपना तर्क देगा। जैसे—
समूह 1— व्यक्ति की कल्पना और विचारों पर नियंत्रण आवश्यक है।
समूह 2— स्वतंत्र विचार और कल्पना प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है।
(ख) विद्यार्थी वाद-विवाद के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।
देखना-सुनना-समझना
(क) “धूम गगन में मँडराता है।”
सुगंध का अनुभव सूँघकर किया जाता है। धुएँ को देखा जा सकता है। वायु का अनुभव स्पर्श द्वारा किया जा सकता है और अनुभवों को बोलकर भी कहा या बताया जा सकता है जैसे कि कोई कमेंट्री कर रहा हो।
जो व्यक्ति देख पाने में सक्षम नहीं है, आप उन्हें निम्नलिखित स्थितियों का अनुभव कैसे करवा सकते हैं—
- वर्षा की बूँदों का
- धुएँ के उड़ने का
- खेल के रोमांच का
(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव
विद्यार्थियों के बराबर-बराबर संख्या में दो दल बनाइए। दलों के नाम रखें— कल्पना और आकांक्षा। ‘कल्पना’ दल से एक प्रतिभागी आगे आए और मूक अभिनय के माध्यम से इस कविता की किसी भी पंक्ति का भाव प्रस्तुत करें। ‘आकांक्षा’ दल के प्रतिभागियों को पहचानकर बताना होगा कि अभिनय में किस पंक्ति की बात की जा रही है।
आपदा प्रबंधन
(क) कक्षा में अपने शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए कि क्या-क्या करेंगे यदि—
- कहीं अचानक आग लग जाए
- आपके क्षेत्र में बाढ़ आ जाए
- भूकंप आ जाए
- आग लगने पर घबराएँ नहीं, सुरक्षित स्थान पर जाएँ और अग्निशमन सेवा को सूचना दें।
- बाढ़ आने पर ऊँचे और सुरक्षित स्थान पर जाएँ तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- भूकंप के समय मजबूत मेज के नीचे बैठें और खिड़कियों तथा भारी वस्तुओं से दूर रहें।
(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूँगा या करूँगी?” — एक सूची या चित्र आधारित योजना बनाइए।
- मैं शांत रहूँगा/रहूँगी।
- बड़ों और शिक्षकों के निर्देश मानूँगा/मानूँगी।
- सुरक्षित स्थान पर जाऊँगा/जाऊँगी।
- जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता माँगूँगा/माँगूँगी।
- दूसरों की सुरक्षित सहायता करूँगा/करूँगी।
शिल्प
“स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प
भूमि को सिखलायेगा!”
हमारे देश में हजारों वर्षों से अनगिनत शिल्प प्रचलित हैं। उनके बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए शिल्प-कार्यों को उनके सही अर्थों या व्याख्या से मिलाइए—
| क्रम | शिल्प-कार्य | सही अर्थ या व्याख्या |
|---|---|---|
| 1 | काष्ठ शिल्प | लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ आदि बनाना |
| 2 | मृत्तिका शिल्प | मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ और सजावटी चीजें बनाना |
| 3 | धातुशिल्प | ताँबा, पीतल, लोहे जैसी धातुओं से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ आदि बनाना |
| 4 | काँच शिल्प | काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ और रंगीन खिड़कियाँ आदि बनाना |
| 5 | वस्त्र शिल्प | कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य |
| 6 | कागज शिल्प | कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे और पेपर मेशी बनाना |
| 7 | पत्थर शिल्प | संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना और मंदिरों की सजावट करना |
| 8 | चमड़ा शिल्प | चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग और अन्य उपयोगी वस्तुएँ बनाना |
| 9 | बाँस और बेंत शिल्प | बाँस और बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे आदि बनाना |
| 10 | मोती एवं आभूषण शिल्प | रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके आदि गहने बनाना |
| 11 | लाख शिल्प | लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे और अन्य सजावटी वस्तुएँ बनाना |
| 12 | शीशा शिल्प | कपड़ों या सजावट की वस्तुओं में शीशे जोड़ना या जड़ाई करना |
| 13 | चित्रकला शिल्प | पारंपरिक चित्रकलाओं जैसे मधुबनी, गोंड, वरली आदि से कलाकृतियाँ बनाना |
| 14 | नक्काशी | लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिजाइन बनाना |
(ख) अपने विद्यालय या परिवार के साथ हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान या कार्यशाला का भ्रमण कीजिए और उस हस्तशिल्प के बारे में एक रिपोर्ट बनाइए।
अथवा
राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की नीचे दी गई वेबसाइट में आपको कौन-सा हस्तशिल्प या कलाकृति सबसे अच्छी लगी और क्यों, उसके विषय में लिखिए।

झरोखे से
अभी आपने जो कविता पढ़ी उसे महादेवी वर्मा ने लिखा है। अब पढ़िए इन्हीं के द्वारा लिखी एक कहानी ‘गिल्लू’ का अंश।
मेरे पास बहुत से पशु-पक्षी हैं और उनका मुझसे लगाव भी कम नहीं है, परंतु उनमें से किसी को मेरे साथ मेरी थाली में खाने की हिम्मत हुई है, ऐसा मुझे स्मरण नहीं आता।
गिल्लू इनमें अपवाद था। मैं जैसे ही खाने के कमरे में पहुँचती, वह खिड़की से निकलकर आँगन की दीवार, बरामदा पार करके मेज पर पहुँच जाता और मेरी थाली में बैठ जाना चाहता। बड़ी कठिनाई से मैंने उसे थाली के पास बैठना सिखाया जहाँ बैठकर वह मेरी थाली में से एक-एक चावल उठाकर बड़ी सफाई से खाता रहता। काजू उसका प्रिय खाद्य था और कई दिन काजू न मिलने पर वह अन्य खाने की चीजें या तो लेना बंद कर देता या झूले से नीचे फेंक देता था।
साझी समझ
‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरी पढ़िए और अपने साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
पाठ का त्वरित पुनरावर्तन
कविता: मत बाँधो
कवयित्री: महादेवी वर्मा
मुख्य विषय: सपनों की स्वतंत्रता
मुख्य संदेश: अच्छे सपनों और स्वतंत्र विचारों को आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए।
मुख्य प्रतीक: पंख सपनों की उड़ान और स्वतंत्रता के प्रतीक हैं।
आरोहण: ऊपर की ओर जाना।
अवरोहण: ऊपर से नीचे की ओर आना।
शिल्प: कला, कौशल या निर्माण की कला।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न
1. कविता का मुख्य संदेश क्या है?
2. कवयित्री ने सपनों के लिए ‘पंख’ शब्द का प्रयोग क्यों किया है?
3. सपनों की गति क्यों नहीं बाँधनी चाहिए?
4. आरोहण और अवरोहण का अर्थ क्या है?
5. कविता में ‘स्वर्ग’ किसका प्रतीक है?
6. अच्छे सपने समाज के लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं?
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