Class 8 Hindi Malhar Chapter 5 कबीर के दोहे Notes and Book Solutions | NCERT CBSE

Class 8 Hindi Malhar Chapter 5 कबीर के दोहे notes and book solutions with easy explanations, question answers, important meanings and NCERT-based study material for CBSE students.

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कबीर के दोहे

Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Notes and Book Solutions

पाठ का परिचय

कबीर को करघे पर बुनाई करते हुए दर्शाती ऐतिहासिक चित्रकला

कबीर को करघे पर बुनाई करते हुए दर्शाती ऐतिहासिक चित्रकला

कबीर मध्यकाल के प्रसिद्ध संत, कवि और समाज सुधारक थे। वे सरल भाषा में जीवन की सच्चाइयों को समझाते थे। उनके दोहों में सत्य, गुरु का महत्व, मधुर वाणी, संतुलित जीवन, अच्छी संगति, विवेक और आत्म-सुधार जैसे महत्वपूर्ण विचार मिलते हैं।

कबीर का जीवन साधारण था। वे करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ-साथ ऐसी कविताएँ रचते थे जो आज भी लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।

कबीर के दोहे

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।
जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।
कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।

कवि से परिचय

कबीर एक प्रसिद्ध संत और कवि थे। माना जाता है कि उनका जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था। वे करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ-साथ कविता भी रचते थे।

कबीर की रचनाएँ हमें जीवन की सच्चाई समझने, सही और गलत में अंतर करने तथा अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः कबीर ग्रंथावली में संकलित हैं।

कबीर ने अपनी रचनाओं में सरल भाषा का प्रयोग किया। उनके दोहे आज भी लोगों द्वारा गाए और पढ़े जाते हैं।

दोहे का सरल अर्थ

1. साँच बराबर तप नहीं

कबीर कहते हैं कि सत्य का पालन करने से बड़ा कोई तप नहीं है और झूठ बोलने से बड़ा कोई पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य होता है, उसके हृदय में ईश्वर का वास होता है।

2. बड़ा हुआ तो क्या हुआ

केवल बड़ा या ऊँचा होना पर्याप्त नहीं है। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, लेकिन राहगीर को उसकी छाया नहीं मिलती और उसके फल भी बहुत ऊपर होते हैं। इसलिए मनुष्य को बड़ा होने के साथ दूसरों के काम भी आना चाहिए।

3. गुरु गोविंद दोऊ खड़े

कबीर गुरु के महत्व को बताते हैं। गुरु ही हमें ईश्वर और सही ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता रखना चाहिए।

4. अति का भला न बोलना

किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती। बहुत अधिक बोलना, बहुत अधिक चुप रहना, बहुत अधिक वर्षा या बहुत अधिक धूप सभी हानिकारक हो सकते हैं। जीवन में संतुलन आवश्यक है।

5. ऐसी बानी बोलिए

हमें ऐसी मधुर और शांत भाषा बोलनी चाहिए जिससे दूसरों को खुशी मिले और हमारा मन भी शांत रहे।

6. निंदक नियरे राखिए

जो व्यक्ति हमारी गलतियाँ बताता है, वह हमें सुधारने में सहायता कर सकता है। इसलिए उचित आलोचना को बुरा मानने के बजाय उससे सीखना चाहिए।

7. साधू ऐसा चाहिए

सूप अनाज में से उपयोगी दाने रखता है और बेकार चीजों को अलग कर देता है। उसी प्रकार हमें भी अच्छी बातों को अपनाना और बुरी बातों को छोड़ना चाहिए।

8. कबिरा मन पंछी भया

मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, उसके विचार और व्यवहार भी उसी प्रकार प्रभावित होते हैं। इसलिए अच्छी संगति चुनना बहुत आवश्यक है।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।” इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?

श्रम का महत्त्व
गुरु का महत्त्व
ज्ञान का महत्त्व
भक्ति का महत्त्व
समाधान: गुरु का महत्त्व, ज्ञान का महत्त्व और भक्ति का महत्त्व।

(2) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” इस दोहे का मूल संदेश क्या है?

हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है
बारिश और धूप से बचना चाहिए
हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है
हमेशा मधुर वाणी बोलनी चाहिए
समाधान: हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है।

(3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?

समय का सदुपयोग करना
दूसरों के काम आना
परिश्रम और लगन से काम करना
सभी के प्रति उदार रहना
समाधान: दूसरों के काम आना।

(4) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं
दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है
किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है
सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है
समाधान: दूसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है।

(5) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।” इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

सत्य और झूठ में कोई अंतर नहीं होता है
सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है
बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं
सत्य महत्त्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है
समाधान: सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है तथा सत्य महत्त्वपूर्ण जीवन मूल्य है।

(6) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।” यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?

आलोचना से बचना चाहिए
आलोचकों को दूर रखना चाहिए
आलोचकों को पास रखना चाहिए
आलोचकों की निंदा करनी चाहिए
समाधान: आलोचकों को पास रखना चाहिए।

(7) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ााय।।” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?

मन की कल्पनाओं का
सुख-सुविधाओं का
विवेक और सूझ-बूझ का
कठोर और क्रोधी स्वभाव का
समाधान: विवेक और सूझ-बूझ का।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

समाधान: मैंने वे उत्तर चुने हैं जो दोहों के मुख्य संदेश से मेल खाते हैं। कबीर ने गुरु, सत्य, संतुलन, मधुर वाणी, विवेक और अच्छी संगति का महत्व बताया है।

मिलकर करें मिलान

(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।

क्रमस्तंभ 1सही अर्थ
1गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं।
2अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।जीवन में संतुलन महत्त्वपूर्ण है।
3ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके।
4निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमारी गलतियाँ बताते हैं।
5साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है।
6कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्त्वपूर्ण है।
7साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है।
8बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए।

(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए।

स्तंभ 1स्तंभ 2
1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।
6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
8. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।”

समाधान: इस दोहे में कबीर कहते हैं कि मन बहुत चंचल होता है। मनुष्य जिस प्रकार के लोगों के साथ रहता है, उसी प्रकार के विचार और आदतें उसके अंदर आ सकती हैं। इसलिए अच्छी संगति करनी चाहिए।

(ख) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।” इसका क्या अर्थ समझ में आया?

समाधान: सत्य बोलना और सत्य का साथ देना सबसे बड़ा तप है। झूठ बोलना पाप के समान है। जिसके मन में सच्चाई होती है, उसके मन में ईश्वर का वास माना गया है।

सोच-विचार के लिए

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।

समाधान: मेरे विचार में गुरु बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि गुरु हमें ज्ञान देते हैं और सही मार्ग दिखाते हैं। इसीलिए कबीर ने गुरु के प्रति विशेष सम्मान व्यक्त किया है।

(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।

समाधान: मनुष्य में विनम्रता, दया, उदारता, ईमानदारी, सहयोग की भावना और दूसरों के काम आने की इच्छा होनी चाहिए।

(ग) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।

समाधान: हाँ, शब्दों का प्रभाव बोलने वाले और सुनने वाले दोनों पर पड़ता है। मधुर शब्द मन को शांत करते हैं, जबकि कठोर शब्द दुख पहुँचा सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी मित्र को प्रोत्साहित करने पर उसका आत्मविश्वास बढ़ सकता है।

(ङ) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय॥” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।

समाधान: अच्छी संगति से अच्छे विचार और आदतें विकसित होती हैं। बुरी संगति से गलत आदतें भी लग सकती हैं। उदाहरण के लिए, मेहनती मित्रों के साथ रहने से पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ सकती है।

दोहे की रचना

“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” इन दो पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे—दोहोों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक-समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।

(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें—

(1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।

समाधान: ऐसी पंक्तियों में समान ध्वनि से आरंभ होने वाले शब्दों को खोजकर लिखा जा सकता है।

(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है।

समाधान: उदाहरण के रूप में दोहों में दोहराव वाले शब्दों को पहचानकर लिखा जा सकता है।

(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है, एक ही पंक्ति में आए हैं।

समाधान: ऐसी पंक्ति खोजते समय समान ध्वनि वाले निकट शब्दों पर ध्यान देना चाहिए।

(4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग किया गया है।

समाधान: ‘सार’ और ‘थोथा’ जैसे विपरीत अर्थ वाले शब्दों को पहचानना चाहिए।

(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है।

समाधान: “जैसे पेड़ खजूर” में व्यक्ति की तुलना खजूर के पेड़ से की गई है।

(6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है।

समाधान: “मन पंछी” में मन को पंछी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

(7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है।

समाधान: पुराने समय की भाषा और वर्तनी में आज की हिंदी से कुछ अंतर दिखाई देता है।

(8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।

समाधान: “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय” में सूप के उदाहरण से विवेकशील व्यक्ति का गुण समझाया गया है।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

समाधान: विद्यार्थी अपने समूह में दोहों की भाषा, लय, तुलना, दोहराव और उदाहरण जैसी विशेषताओं की सूची बनाकर कक्षा में प्रस्तुत करें।

अनुमान और कल्पना से

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।”

यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?

समाधान: मैं गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त करता क्योंकि गुरु मुझे ज्ञान और सही दिशा देते हैं।

यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?

समाधान: लोगों को ज्ञान और सही मार्गदर्शन प्राप्त करने में बहुत कठिनाई होती।

(ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।”

यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

समाधान: बहुत अधिक बोलने से लोग परेशान हो सकते हैं और बहुत अधिक चुप रहने से विचार व्यक्त करना कठिन हो सकता है।

यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?

समाधान: अधिक वर्षा से बाढ़ आ सकती है और कम वर्षा से पानी की कमी तथा सूखे की समस्या हो सकती है।

आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?

समाधान: पढ़ाई, नींद, आँखों और दैनिक कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”

झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

समाधान: झूठ से विश्वास कम हो सकता है और संबंधों में समस्या पैदा हो सकती है।

कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?

समाधान: मैं शिक्षक को विनम्रता से बताऊँगा कि मुझे गलत अंक मिले हैं और सही मूल्यांकन करने का अनुरोध करूँगा।

(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”

यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?

समाधान: झगड़े कम होंगे, आपसी सम्मान बढ़ेगा और लोगों के बीच शांति तथा सहयोग बढ़ेगा।

क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटुवचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।

समाधान: किसी गलत या खतरनाक कार्य को तुरंत रोकने के लिए दृढ़ शब्दों का प्रयोग करना पड़ सकता है, लेकिन भाषा अपमानजनक नहीं होनी चाहिए।

(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।”

यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?

समाधान: मैं समझाऊँगा कि सच्ची महानता दूसरों के काम आने, विनम्र रहने और अच्छे कार्य करने में है।

खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।

समाधान: उनसे फल, पानी, रेशा और अन्य उपयोगी वस्तुएँ मिलती हैं। वे पर्यावरण के लिए भी उपयोगी हैं।

आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?

समाधान: ईमानदारी, जिम्मेदारी, अनुशासन, सहयोग, विनम्रता और नेतृत्व की भावना पर ध्यान दूँगा।

(च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।”

यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा?

समाधान: मुझे अपनी गलतियाँ समझने और उन्हें सुधारने का अवसर मिलेगा।

यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?

समाधान: लोगों को अपनी गलतियाँ पता नहीं चलेंगी और उनमें सुधार करना कठिन होगा।

(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”

कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?

समाधान: मैं अच्छी बातों को अपनाऊँगा और गलत या अनुपयोगी बातों को सोच-समझकर छोड़ दूँगा।

यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

समाधान: हम गलत जानकारी या गलत विचारों को भी सच मान सकते हैं और नुकसान उठाना पड़ सकता है।

(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।”

यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?

समाधान: मैं अपने मन को किसी शांत और सुंदर प्राकृतिक स्थान पर ले जाना चाहूँगा ताकि प्रकृति का आनंद ले सकूँ।

संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?

समाधान: संगति हमारे विचारों, आदतों, भाषा और व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।

वाद-विवाद

“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।। ”

(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्त्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।

समाधान: यह दोहा आज भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवन में संतुलन आवश्यक है। विद्यार्थी पक्ष और विपक्ष में अपने तर्क तैयार करके चर्चा कर सकते हैं।

(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे—

पक्ष – वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।

विपक्ष – अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।

समाधान: दोनों विचारों का उद्देश्य संतुलित व्यवहार की आवश्यकता को समझना है।

(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।

समाधान: विद्यार्थी वाद-विवाद के दौरान दिए गए मुख्य तर्क अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखें।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए।

श्रेणीपाठ से जुड़े शब्द
दोहे और कहावतेंदोहे, कहावत
बानीमधुर वाणी, वचन
कबीरसंत, कवि, गुरु, ज्ञान

दोहे और कहावतें

“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”

इस दोहे की दूसरी पंक्ति से प्रसिद्ध कहावत “जैसा संग वैसा रंग” का भाव मिलता है।

अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।

समाधान के उदाहरण:
  • मेहनत का फल मीठा होता है।
  • जहाँ चाह वहाँ राह।
  • एकता में बल है।
  • जैसी करनी वैसी भरनी।

सबकी प्रस्तुति

पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए—

  • गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।
  • भाव-नृत्य प्रस्तुति।
  • कविता पाठ करना।
  • संगीत के साथ प्रस्तुति करना।
  • अभिनय करना।
समाधान: विद्यार्थी “ऐसी बानी बोलिए” दोहे पर छोटा अभिनय कर सकते हैं। एक विद्यार्थी क्रोध में कठोर शब्द बोलता है और दूसरा विद्यार्थी उसे मधुर भाषा के महत्व के बारे में समझाता है।

आपकी बात

(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।

समाधान का उदाहरण: मेरे शिक्षक ने मुझे पढ़ाई में मेहनत करने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा दी है। उन्होंने मेरी गलतियों को समझाकर मुझे सुधारने में सहायता की।

(ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।

समाधान का उदाहरण: मेरे मित्र ने बताया कि मैं काम जल्दी-जल्दी करता हूँ। मैंने उसकी बात समझी और काम को ध्यान से करने का प्रयास किया।

(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे—मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहार को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।

समाधान का उदाहरण: हाँ, अच्छे मित्रों के साथ रहने से मुझे समय पर पढ़ाई करने और अनुशासन में रहने की प्रेरणा मिली।

सृजन

(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत—किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।)

समाधान का उदाहरण:
एक बार विद्यालय में खेल प्रतियोगिता हो रही थी। मेरी टीम जीतने के लिए एक नियम तोड़ना चाहती थी। मैंने उन्हें समझाया कि जीत से अधिक महत्वपूर्ण ईमानदारी है। हमने नियमों का पालन किया। हम प्रतियोगिता में नहीं जीत सके, लेकिन शिक्षक ने हमारी ईमानदारी की प्रशंसा की। उस दिन मुझे समझ आया कि सत्य का साथ देना ही सच्ची जीत है।

(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।

समाधान का उदाहरण:
मेरे प्रेरणादायक शिक्षक हमेशा हमें मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़ने की सीख देते हैं। वे हमारी गलतियाँ बताते हैं और उन्हें सुधारने का अवसर देते हैं। वे केवल पुस्तक का ज्ञान ही नहीं देते बल्कि अच्छे व्यवहार और अनुशासन का महत्व भी समझाते हैं। उनके मार्गदर्शन से मुझे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

कबीर हमारे समय में

(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।

समाधान:
  • पर्यावरण संरक्षण
  • जल संरक्षण
  • मोबाइल का सही उपयोग
  • सोशल मीडिया
  • साइबर सुरक्षा
  • शिक्षा
  • आपसी सद्भाव
  • ईमानदारी

(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।

समाधान का उदाहरण:
मोबाइल ज्ञान का साधन है, इसका सही उपयोग करो।
समय बचाकर पढ़ाई करो, जीवन को सुंदर बनाओ।

साइबर सुरक्षा और दोहे

(क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?

समाधान: निजी जानकारी का गलत उपयोग हो सकता है, धोखाधड़ी हो सकती है और हमारी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

(ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?

समाधान: इंटरनेट पर हर जानकारी सही नहीं होती। सूचना के स्रोत की जाँच करनी चाहिए, विश्वसनीय वेबसाइट देखनी चाहिए और संदिग्ध लिंक या संदेश से बचना चाहिए।

आज के समय में

नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए।

अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया — “संगति का असर जीवन पर पड़ता है।”

समाधान: “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”

एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा — “हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।”

समाधान: “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।”

कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा — “बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो।”

समाधान: “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।”

सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा — “इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।”

समाधान: “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।”

रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।

समाधान: “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।”

आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा — “आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।”

समाधान: “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।”

खोजबीन के लिए

अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।

समाधान: विद्यार्थी अपने शिक्षक के मार्गदर्शन में कबीर का कोई उपयुक्त भजन या गीत खोजें और उसकी प्रस्तुति कक्षा में करें।

पाठ के मुख्य शब्द

शब्दसरल अर्थ
साँचसत्य
तपसाधना
पापगलत या बुरा कार्य
हिरदेहृदय या मन
बलिहारीसमर्पित होना
अतिबहुत अधिक
आपाअहंकार या अपना अभिमान
सीतलशांत और ठंडा
निंदकदूसरों की कमियाँ बताने वाला
निर्मलशुद्ध और साफ
सारमुख्य या उपयोगी भाग
थोथाजिसमें उपयोगी तत्व न हो
संगतिसाथ या मित्रों का प्रभाव

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बातें

  • कबीर प्रसिद्ध संत और कवि थे।
  • कबीर ने सत्य को बहुत महत्वपूर्ण माना।
  • गुरु को ज्ञान और मार्गदर्शन देने वाला बताया गया है।
  • मनुष्य को बड़ा होने के साथ दूसरों के काम आना चाहिए।
  • जीवन में किसी भी चीज की अति उचित नहीं है।
  • मधुर वाणी से स्वयं और दूसरों को शांति मिलती है।
  • आलोचना से अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर मिल सकता है।
  • हमें सूप की तरह अच्छी बातों को अपनाकर बुरी बातों को छोड़ना चाहिए।
  • अच्छी संगति हमारे विचारों और व्यवहार को अच्छा बना सकती है।
  • कबीर के दोहे आज के जीवन में भी उपयोगी हैं।

अध्याय का सार

“कबीर के दोहे” पाठ में कबीर ने जीवन को सही और सरल ढंग से जीने के लिए अनेक महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। वे सत्य को सबसे बड़ा तप मानते हैं और झूठ को पाप के समान बताते हैं। वे गुरु के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि गुरु ही ईश्वर का मार्ग दिखाते हैं।

कबीर यह भी बताते हैं कि केवल बड़ा या संपन्न होना पर्याप्त नहीं है। मनुष्य को दूसरों के काम आना चाहिए। वे जीवन में संतुलन रखने और मधुर भाषा बोलने की शिक्षा देते हैं। आलोचक हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारने में सहायता कर सकते हैं। इसलिए उचित आलोचना को स्वीकार करना चाहिए।

कबीर सूप का उदाहरण देकर समझाते हैं कि हमें उपयोगी और अच्छी बातों को अपनाना चाहिए तथा गलत बातों को छोड़ देना चाहिए। वे अच्छी संगति के महत्व पर भी जोर देते हैं। इस प्रकार कबीर के दोहे सत्य, विनम्रता, विवेक, मधुर वाणी, संतुलन और अच्छे आचरण का संदेश देते हैं।

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