Class 8 Hindi Malhar Chapter 5 कबीर के दोहे notes and book solutions with easy explanations, question answers, important meanings and NCERT-based study material for CBSE students.
कबीर के दोहे
Class 6 Hindi Malhar Chapter 5 Notes and Book Solutions
पाठ का परिचय

कबीर को करघे पर बुनाई करते हुए दर्शाती ऐतिहासिक चित्रकला
कबीर मध्यकाल के प्रसिद्ध संत, कवि और समाज सुधारक थे। वे सरल भाषा में जीवन की सच्चाइयों को समझाते थे। उनके दोहों में सत्य, गुरु का महत्व, मधुर वाणी, संतुलित जीवन, अच्छी संगति, विवेक और आत्म-सुधार जैसे महत्वपूर्ण विचार मिलते हैं।
कबीर का जीवन साधारण था। वे करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ-साथ ऐसी कविताएँ रचते थे जो आज भी लोगों को जीवन के सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।
कबीर के दोहे
जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।
पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।
औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।
बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।
सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।।
जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।
कवि से परिचय
कबीर एक प्रसिद्ध संत और कवि थे। माना जाता है कि उनका जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था। वे करघे पर कपड़ा बुनते थे और साथ-साथ कविता भी रचते थे।
कबीर की रचनाएँ हमें जीवन की सच्चाई समझने, सही और गलत में अंतर करने तथा अच्छा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं। उनकी रचनाएँ मुख्यतः कबीर ग्रंथावली में संकलित हैं।
कबीर ने अपनी रचनाओं में सरल भाषा का प्रयोग किया। उनके दोहे आज भी लोगों द्वारा गाए और पढ़े जाते हैं।
दोहे का सरल अर्थ
1. साँच बराबर तप नहीं
कबीर कहते हैं कि सत्य का पालन करने से बड़ा कोई तप नहीं है और झूठ बोलने से बड़ा कोई पाप नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में सत्य होता है, उसके हृदय में ईश्वर का वास होता है।
2. बड़ा हुआ तो क्या हुआ
केवल बड़ा या ऊँचा होना पर्याप्त नहीं है। खजूर का पेड़ बहुत ऊँचा होता है, लेकिन राहगीर को उसकी छाया नहीं मिलती और उसके फल भी बहुत ऊपर होते हैं। इसलिए मनुष्य को बड़ा होने के साथ दूसरों के काम भी आना चाहिए।
3. गुरु गोविंद दोऊ खड़े
कबीर गुरु के महत्व को बताते हैं। गुरु ही हमें ईश्वर और सही ज्ञान का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता रखना चाहिए।
4. अति का भला न बोलना
किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती। बहुत अधिक बोलना, बहुत अधिक चुप रहना, बहुत अधिक वर्षा या बहुत अधिक धूप सभी हानिकारक हो सकते हैं। जीवन में संतुलन आवश्यक है।
5. ऐसी बानी बोलिए
हमें ऐसी मधुर और शांत भाषा बोलनी चाहिए जिससे दूसरों को खुशी मिले और हमारा मन भी शांत रहे।
6. निंदक नियरे राखिए
जो व्यक्ति हमारी गलतियाँ बताता है, वह हमें सुधारने में सहायता कर सकता है। इसलिए उचित आलोचना को बुरा मानने के बजाय उससे सीखना चाहिए।
7. साधू ऐसा चाहिए
सूप अनाज में से उपयोगी दाने रखता है और बेकार चीजों को अलग कर देता है। उसी प्रकार हमें भी अच्छी बातों को अपनाना और बुरी बातों को छोड़ना चाहिए।
8. कबिरा मन पंछी भया
मनुष्य जिस प्रकार की संगति करता है, उसके विचार और व्यवहार भी उसी प्रकार प्रभावित होते हैं। इसलिए अच्छी संगति चुनना बहुत आवश्यक है।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।।” इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?
(2) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” इस दोहे का मूल संदेश क्या है?
(3) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।” यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?
(4) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।।” इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
(5) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।” इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(6) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।।” यहाँ जीवन में किस दृष्टिकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?
(7) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ााय।।” इस दोहे में ‘सूप’ किसका प्रतीक है?
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए।
| क्रम | स्तंभ 1 | सही अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते हैं। |
| 2 | अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | जीवन में संतुलन महत्त्वपूर्ण है। |
| 3 | ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सके। |
| 4 | निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमारी गलतियाँ बताते हैं। |
| 5 | साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है। |
| 6 | कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्त्वपूर्ण है। |
| 7 | साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है। |
| 8 | बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | बड़ा होने के साथ व्यक्ति को उदार भी होना चाहिए। |
(ख) नीचे स्तंभ 1 में दी गई दोहों की पंक्तियों को स्तंभ 2 में दी गई उपयुक्त पंक्तियों से जोड़िए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय। | बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।। |
| 2. अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। | अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।। |
| 3. ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय। | औरन को सीतल करै, आपहुँ सीतल होय।। |
| 4. निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय। | बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय।। |
| 5. साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। | सार-सार को गहि रहै, थोथा देइ उड़ाय।। |
| 6. कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। | जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।। |
| 7. बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर। | पंथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।। |
| 8. साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। | जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।। |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।”
(ख) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप।।” इसका क्या अर्थ समझ में आया?
सोच-विचार के लिए
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” इस दोहे में गुरु को गोविंद (ईश्वर) से भी ऊपर स्थान दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
(ख) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।” इस दोहे में कहा गया है कि सिर्फ बड़ा या संपन्न होना ही पर्याप्त नहीं है। बड़े या संपन्न होने के साथ-साथ मनुष्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।
(ग) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।” क्या आप मानते हैं कि शब्दों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए।
(ङ) “जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय॥” हमारे विचारों और कार्यों पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए।
दोहे की रचना
“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।” इन दो पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं। इन चारों भागों का पहला शब्द है ‘अति’। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देंगी, जैसे—दोहोों की प्रत्येक पंक्ति को बोलने में एक-समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।
(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें—
(1) एक ही अक्षर से प्रारंभ होने वाले दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है।
(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है, एक ही पंक्ति में आए हैं।
(4) एक ही पंक्ति में विपरीतार्थक शब्दों का प्रयोग किया गया है।
(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है।
(6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है।
(7) किसी शब्द की वर्तनी थोड़ी अलग है।
(8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
अनुमान और कल्पना से
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।”
यदि आपके सामने यह स्थिति होती तो आप क्या निर्णय लेते और क्यों?
यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?
(ख) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।”
यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुप रहता है तो उसके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं?
आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?
(ग) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।”
झूठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए हैं, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?
(घ) “ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।”
यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना लें तो लोगों में क्या परिवर्तन आ सकते हैं?
क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटुवचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए।
(ङ) “बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।”
यदि कोई व्यक्ति अपने बड़े होने का अहंकार रखता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हुए उसे ‘बड़े होने या संपन्न होने’ का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएँगे?
खजूर, नारियल आदि ऊँचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं। वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते हैं? बताइए।
आप अपनी कक्षा का कक्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्यार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंगे?
(च) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।”
यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा?
यदि समाज में कोई भी एक-दूसरे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?
(छ) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।”
कल्पना कीजिए कि आपके पास ‘सूप’ जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएँगे?
यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(ज) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।”
यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों?
संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
वाद-विवाद
“अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।। ”
(क) इस दोहे का आज के समय में क्या महत्त्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक्ष में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे और दूसरे समूह के साथी इसके विपक्ष में बोलेंगे। एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।
(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपने मत के लिए तर्क प्रस्तुत करेंगे, जैसे—
पक्ष – वाणी पर संयम रखना आवश्यक है।
विपक्ष – अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है।
(ग) पक्ष और विपक्ष में प्रस्तुत तर्कों की सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए स्थानों में कबीर से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए।
| श्रेणी | पाठ से जुड़े शब्द |
|---|---|
| दोहे और कहावतें | दोहे, कहावत |
| बानी | मधुर वाणी, वचन |
| कबीर | संत, कवि, गुरु, ज्ञान |
दोहे और कहावतें
“कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय।।”
इस दोहे की दूसरी पंक्ति से प्रसिद्ध कहावत “जैसा संग वैसा रंग” का भाव मिलता है।
अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।
- मेहनत का फल मीठा होता है।
- जहाँ चाह वहाँ राह।
- एकता में बल है।
- जैसी करनी वैसी भरनी।
सबकी प्रस्तुति
पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्न प्रकार से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए—
- गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।
- भाव-नृत्य प्रस्तुति।
- कविता पाठ करना।
- संगीत के साथ प्रस्तुति करना।
- अभिनय करना।
आपकी बात
(क) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्ति के बारे में बताइए।
(ख) “निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।” क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जिनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए।
(ग) “कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।” क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे—मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहार को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।
सृजन
(क) “साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।” इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्ति ने कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। (संकेत—किसी खेल में आपकी टीम द्वारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वारा विरोध किया जाना।)
एक बार विद्यालय में खेल प्रतियोगिता हो रही थी। मेरी टीम जीतने के लिए एक नियम तोड़ना चाहती थी। मैंने उन्हें समझाया कि जीत से अधिक महत्वपूर्ण ईमानदारी है। हमने नियमों का पालन किया। हम प्रतियोगिता में नहीं जीत सके, लेकिन शिक्षक ने हमारी ईमानदारी की प्रशंसा की। उस दिन मुझे समझ आया कि सत्य का साथ देना ही सच्ची जीत है।
(ख) “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागौं पाँय।” इस दोहे को ध्यान में रखते हुए अपने किसी प्रेरणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजिए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।
मेरे प्रेरणादायक शिक्षक हमेशा हमें मेहनत और ईमानदारी से आगे बढ़ने की सीख देते हैं। वे हमारी गलतियाँ बताते हैं और उन्हें सुधारने का अवसर देते हैं। वे केवल पुस्तक का ज्ञान ही नहीं देते बल्कि अच्छे व्यवहार और अनुशासन का महत्व भी समझाते हैं। उनके मार्गदर्शन से मुझे अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
कबीर हमारे समय में
(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं। वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए।
- पर्यावरण संरक्षण
- जल संरक्षण
- मोबाइल का सही उपयोग
- सोशल मीडिया
- साइबर सुरक्षा
- शिक्षा
- आपसी सद्भाव
- ईमानदारी
(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।
मोबाइल ज्ञान का साधन है, इसका सही उपयोग करो।
समय बचाकर पढ़ाई करो, जीवन को सुंदर बनाओ।
साइबर सुरक्षा और दोहे
(क) “अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।” इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
(ख) “साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।” किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को ‘सूप’ की तरह छानने की आवश्यकता क्यों है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?
आज के समय में
नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं? घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए।
अमित का मन पढ़ाई में नहीं लगता था और वह गलत संगति में चला गया। कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया — “संगति का असर जीवन पर पड़ता है।”
एक विद्यार्थी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा — “हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।”
कक्षा में मोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको परेशान कर दिया, जबकि रमेश बिल्कुल चुप रहा। गुरुजी ने कहा — “बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो।”
सुरेश को जब ‘प्रतिभा सम्मान’ मिला तो उसने कहा — “इसमें मेरे परिश्रम के साथ मेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है।”
रीमा ने अपने गुस्से में सहकर्मी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया। बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती।
आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते हैं, लेकिन फिर आपने सोचा — “आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातों का बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए।”
खोजबीन के लिए
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनों, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
पाठ के मुख्य शब्द
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| साँच | सत्य |
| तप | साधना |
| पाप | गलत या बुरा कार्य |
| हिरदे | हृदय या मन |
| बलिहारी | समर्पित होना |
| अति | बहुत अधिक |
| आपा | अहंकार या अपना अभिमान |
| सीतल | शांत और ठंडा |
| निंदक | दूसरों की कमियाँ बताने वाला |
| निर्मल | शुद्ध और साफ |
| सार | मुख्य या उपयोगी भाग |
| थोथा | जिसमें उपयोगी तत्व न हो |
| संगति | साथ या मित्रों का प्रभाव |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बातें
- कबीर प्रसिद्ध संत और कवि थे।
- कबीर ने सत्य को बहुत महत्वपूर्ण माना।
- गुरु को ज्ञान और मार्गदर्शन देने वाला बताया गया है।
- मनुष्य को बड़ा होने के साथ दूसरों के काम आना चाहिए।
- जीवन में किसी भी चीज की अति उचित नहीं है।
- मधुर वाणी से स्वयं और दूसरों को शांति मिलती है।
- आलोचना से अपनी गलतियों को सुधारने का अवसर मिल सकता है।
- हमें सूप की तरह अच्छी बातों को अपनाकर बुरी बातों को छोड़ना चाहिए।
- अच्छी संगति हमारे विचारों और व्यवहार को अच्छा बना सकती है।
- कबीर के दोहे आज के जीवन में भी उपयोगी हैं।
अध्याय का सार
“कबीर के दोहे” पाठ में कबीर ने जीवन को सही और सरल ढंग से जीने के लिए अनेक महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। वे सत्य को सबसे बड़ा तप मानते हैं और झूठ को पाप के समान बताते हैं। वे गुरु के महत्व को समझाते हुए कहते हैं कि गुरु ही ईश्वर का मार्ग दिखाते हैं।
कबीर यह भी बताते हैं कि केवल बड़ा या संपन्न होना पर्याप्त नहीं है। मनुष्य को दूसरों के काम आना चाहिए। वे जीवन में संतुलन रखने और मधुर भाषा बोलने की शिक्षा देते हैं। आलोचक हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधारने में सहायता कर सकते हैं। इसलिए उचित आलोचना को स्वीकार करना चाहिए।
कबीर सूप का उदाहरण देकर समझाते हैं कि हमें उपयोगी और अच्छी बातों को अपनाना चाहिए तथा गलत बातों को छोड़ देना चाहिए। वे अच्छी संगति के महत्व पर भी जोर देते हैं। इस प्रकार कबीर के दोहे सत्य, विनम्रता, विवेक, मधुर वाणी, संतुलन और अच्छे आचरण का संदेश देते हैं।
Prepare for your Class 8 Hindi Malhar Chapter 5 with this practice worksheet. It includes questions and exercises based on the chapter to help you revise important concepts, improve understanding, and prepare for school examinations.
class 8 hindi malhar chapter 5 kabir ke dohe notes and book solutions, class 8 hindi kabir ke dohe notes, class 8 hindi kabir ke dohe book solutions, class 8 hindi chapter 5 question answers, class 8 hindi malhar chapter 5 solutions, NCERT class 8 hindi kabir ke dohe, CBSE class 8 hindi chapter 5, class 8 hindi malhar notes, NCERT class 8 hindi malhar, CBSE Hindi Malhar book solutions