Class 8 Hindi Malhar Chapter 1 स्वदेश notes and book solutions with easy explanations, question answers and NCERT-based study material for CBSE students.
कक्षा 8 हिंदी मल्हार
अध्याय 1 — स्वदेश
कवि — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
स्वदेश — पूरी कविता
— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
स्वदेश और देश-प्रेम से जुड़ी तस्वीरें

अध्याय का सारांश
‘स्वदेश’ कविता में कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ ने देश-प्रेम की भावना को बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है।
कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति के हृदय में अपने देश के लिए प्रेम नहीं है, उसका हृदय पत्थर के समान है। केवल जीवित रहना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में उत्साह, साहस, भावनाएँ और अच्छे कार्य भी होने चाहिए।
कवि अपने देश की मिट्टी, अन्न, जल, माता-पिता, भाई-बंधु और प्राकृतिक संपदा के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। वे बताते हैं कि हमारा देश हमें बहुत कुछ देता है, इसलिए हमें भी उसके प्रति प्रेम और जिम्मेदारी रखनी चाहिए।
कविता हमें साहसी बनने, समाज के साथ आगे बढ़ने और देश के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देती है। देश-प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अच्छे कार्यों और देश की उन्नति में योगदान देने से दिखाई देता है।
कवि से परिचय

गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे।
उन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना शुरू किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया।
उन्होंने राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर और सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी कविताएँ लिखीं।
उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘त्रिशूल तरंग’, ‘राष्ट्रीय मंत्र’ और ‘कृषक क्रंदन’ शामिल हैं।
मुख्य बातें
- कविता का मुख्य विषय देश-प्रेम है।
- कवि के अनुसार देश-प्रेम हृदय को संवेदनशील और भावपूर्ण बनाता है।
- जीवन में जोश और उत्साह होना आवश्यक है।
- सफलता के लिए साहस और इच्छाशक्ति जरूरी है।
- हमें अपने देश, उसकी मिट्टी और संसाधनों का सम्मान करना चाहिए।
- देश-प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि अच्छे कार्य करने की प्रेरणा भी है।
- कविता में तुक मिलाने और शब्दों की विशेष व्यवस्था से लय और प्रभाव बढ़ा है।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (✱) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता से
- देश की प्रगति
- देश के प्रति प्रेम
- देश की सुरक्षा
- देश की स्वतंत्रता
- देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
- देश की शासन व्यवस्था के लिए
- देश के समस्त नागरिकों के लिए
- देश के सभी प्राणियों के लिए
- जिसमें साहस की कमी है
- जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
- जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
- जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | सही मिलान | स्तंभ 2 का भाव |
|---|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | 3 | जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | 4 | जो स्वयं के साथ दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | 1 | जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | 2 | जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
पंक्तियों पर चर्चा
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥”
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
सोच-विचार के लिए
अनुमान और कल्पना से
कविता की रचना
“दाना-पानी” और “राजा-रानी” में अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को तुक मिलाना कहते हैं।
आपकी कविता
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो देश की सेवा करता है,
वह कभी बेकार नहीं।
जो मेहनत से देश सँवारता,
उसका कोई पार नहीं।
जो प्रकृति की रक्षा करता,
उससे बढ़कर प्यार नहीं।
भाषा की बात
(क) शब्द से जुड़े शब्द
स्वदेश, स्वदेशी, स्वदेश-प्रेम, स्वदेश-प्रेमी, स्वदेश-भक्ति, स्वदेश-भक्त, स्वदेश-वासी, स्वदेश-निर्मित, स्वदेश-अभिमान, मातृभूमि, राष्ट्र, देशभक्ति।
(ख) विराम चिह्नों को समझें
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)
जो चल न सका संसार के संग।
बहती जिसमें रस की धार नहीं।
पाया जिसमें दाना और पानी।
हैं माता और पिता बंधु जिसमें।
हम हैं जिसके राजा और रानी।
जिससे न जाति का उद्धार हुआ।
(ग) शब्द-मित्र
“है काल-दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे—
‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल-दीप हरदम जलता है।’
अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियाँ चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
मूल: है काल-दीप जलता हरदम।
परिवर्तित: काल-दीप हरदम जलता है।
मूल: है जान एक दिन जाने को।
परिवर्तित: जान एक दिन जाने को है।
‘है’ को पहले रखने से कविता में अधिक लय और काव्यात्मकता आती है।
अब नीचे दी गई पंक्ति में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्ति को पुनः लिखिए।
“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥”
“हैं ज्ञानी भी जिस पर मरते,
है दुनिया जिस पर दीवानी॥”
(घ) समानार्थी शब्द
| शब्द | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| भू | पृथ्वी, धरा |
| दीप | दीपक, प्रदीप |
| हृदय | दिल, जी |
| तलवार | कृपाण, असि |
| दुनिया | संसार, जग |
| पत्थर | पाषाण, पाहन |
कविता का शीर्षक
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
पाठ से आगे
आपकी बात
जिन कार्यों में देश की सेवा, प्रकृति की रक्षा, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, स्वच्छता, ईमानदारी और नागरिक जिम्मेदारी दिखाई दे, उन्हें स्वदेश-प्रेम की श्रेणी में रखा जा सकता है।
हमारे अस्त्र-शस्त्र
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
| स्वदेश प्रेमी | अस्त्र-शस्त्र |
|---|---|
| विद्यार्थी | ज्ञान, शिक्षा और कलम |
| अध्यापक | ज्ञान, संस्कार और शिक्षा |
| कृषक | हल, मेहनत और खेती |
| चिकित्सक | चिकित्सा-ज्ञान, सेवा और करुणा |
| वैज्ञानिक | ज्ञान, अनुसंधान और विज्ञान |
| श्रमिक | मेहनत, कौशल और श्रम |
| पत्रकार | सच्ची जानकारी, कलम और निर्भीकता |
अपनी भाषा अपने गीत
तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास
तिरंगे को प्रसन्न करने वाले कार्य: मैंने स्कूल में नियमों का पालन किया, कक्षा साफ रखी, किसी की सहायता की और पानी व्यर्थ नहीं बहाया।
तिरंगे को उदास करने वाले कार्य: यदि मैंने कूड़ा फैलाया, पानी या बिजली व्यर्थ की या किसी सार्वजनिक वस्तु को नुकसान पहुँचाया, तो ये गलत कार्य होंगे।
झरोखे से
आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।
साझी समझ
‘स्वदेश’ में देश की मिट्टी, लोगों और मातृभूमि के प्रति प्रेम व्यक्त किया गया है। ‘खादी गीत’ में खादी, स्वदेशी भावना, आत्मसम्मान और देशवासियों के प्रेम को व्यक्त किया गया है। दोनों कविताएँ लोगों में देश के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जगाती हैं।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं—
- सारे जहाँ से अच्छा: वीडियो देखें
- दीवानों की हस्ती: वीडियो देखें
- झाँसी की रानी: वीडियो देखें
त्वरित पुनरावृत्ति
| बिंदु | याद रखने योग्य बात |
|---|---|
| कविता का नाम | स्वदेश |
| कवि | गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ |
| मुख्य भाव | देश-प्रेम |
| पत्थर हृदय | जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं है |
| मुख्य संदेश | देश से प्रेम करें और देश की प्रगति में योगदान दें। |
| मुख्य गुण | साहस, जोश, संवेदना, मेहनत और देश-प्रेम |
| काव्य विशेषता | तुक, लय, पुनरावृत्ति और प्रभावशाली भाषा |
महत्वपूर्ण शब्दार्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| स्वदेश | अपना देश |
| जोश | उत्साह |
| सार | महत्त्व या अर्थ |
| साहस | हिम्मत |
| उद्धार | भलाई या मुक्ति |
| भाव | मन की भावना |
| रस-धार | भावनाओं की धारा |
| लासानी | अनुपम, अद्भुत |
| निस्संशय | बिना संदेह के |
| काल-दीप | समय रूपी दीपक |
| परवाने | दीपक पर जलने वाले पतंगे |
| भू | पृथ्वी या धरती |
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