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Class 7 Hindi Malhar – स्वामीभक्त सुमुख

स्वामीभक्त सुमुख

कक्षा 7 हिंदी — मल्हार

केवल पढ़ने के लिए

पढ़ने के लिए — सरल रूप में

प्राचीन समय की बात है। मानसरोवर में बहुत-से हंस रहते थे। उन हंसों में दो स्वर्ण हंस बहुत प्रसिद्ध थे। उनमें से एक हंस उनका राजा था और दूसरा उसका सेनापति था। सेनापति का नाम सुमुख था।

सुमुख अपने राजा के प्रति बहुत निष्ठावान और स्वामीभक्त था। वह हमेशा अपने स्वामी की रक्षा और सेवा के लिए तैयार रहता था।

एक दिन वाराणसी के राजा को स्वर्ण हंसों के बारे में पता चला। वह उन सुंदर हंसों को पकड़ना चाहता था। उसने एक सुंदर सरोवर बनवाया और वहाँ हंसों को आकर्षित करने की व्यवस्था की।

कुछ समय बाद हंस उस सरोवर में पहुँच गए। राजा ने हंसों को पकड़ने के लिए एक निषाद को भेजा। निषाद ने सरोवर में जाल बिछा दिया।

एक दिन हंसों के राजा का पैर जाल में फँस गया। हंसराज ने अपने साथियों को वहाँ से उड़ जाने के लिए कहा, ताकि वे बच सकें। सभी हंस वहाँ से उड़ गए।

लेकिन सुमुख अपने स्वामी को छोड़कर नहीं गया। वह अपने राजा के पास ही रहा। हंसराज ने उसे भी वहाँ से चले जाने के लिए कहा, लेकिन सुमुख ने अपने स्वामी का साथ छोड़ने से मना कर दिया।

सुमुख ने कहा कि वह अपने स्वामी को संकट में छोड़कर नहीं जा सकता। यदि अपने स्वामी की सेवा करते हुए उसके प्राण भी चले जाएँ, तो यह उसके लिए गर्व की बात होगी।

सुमुख की स्वामीभक्ति देखकर निषाद बहुत प्रभावित हुआ। उसके मन में परिवर्तन आया और उसने दोनों हंसों को मुक्त कर दिया।

हंसराज और सुमुख निषाद के साथ राजा के पास पहुँचे। निषाद ने राजा को पूरी घटना बताई। राजा भी सुमुख की स्वामीभक्ति से बहुत प्रभावित हुआ।

इस प्रकार सुमुख ने अपने व्यवहार से यह सिद्ध किया कि सच्चा सेवक कठिन समय में भी अपने स्वामी का साथ नहीं छोड़ता।

मुख्य पात्र

हंसराज

हंसों के राजा और सुमुख के स्वामी।

सुमुख

हंसराज का स्वामीभक्त सेनापति।

निषाद

हंसों को पकड़ने के लिए भेजा गया व्यक्ति।

पाठ का सार

“स्वामीभक्त सुमुख” एक ऐसी कथा है जिसमें सुमुख की अपने स्वामी के प्रति अटूट निष्ठा दिखाई गई है। जब हंसराज जाल में फँस जाते हैं, तब सुमुख उन्हें छोड़कर भागने के बजाय उनके पास ही रहता है। वह अपने स्वामी के लिए अपने प्राण तक देने को तैयार रहता है। उसकी स्वामीभक्ति देखकर निषाद का हृदय बदल जाता है और वह दोनों हंसों को मुक्त कर देता है।

मुख्य सीख: सच्ची निष्ठा और स्वामीभक्ति की पहचान कठिन समय में होती है। हमें अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार और निष्ठावान रहना चाहिए।

आसान नोट्स

स्वामीभक्त: अपने स्वामी के प्रति निष्ठावान व्यक्ति।
सुमुख: हंसराज का स्वामीभक्त सेनापति।
निषाद: हंसों को पकड़ने के लिए भेजा गया व्यक्ति।
निष्ठा: विश्वास और लगन से साथ निभाना।
कर्तव्य: वह काम जिसे करना हमारा दायित्व है।
संकट: कठिन या परेशानी की स्थिति।
मुक्त: बंधन से छूटा हुआ।

अभ्यास 1 — सही विकल्प चुनिए

1. सुमुख कौन था?
□ हंसराज का मित्र
□ हंसराज का सेनापति
□ निषाद का साथी
□ वाराणसी का राजा
2. हंसराज कहाँ रहते थे?
□ जंगल में
□ समुद्र में
□ मानसरोवर में
□ नगर में
3. हंसराज किसमें फँस गए थे?
□ पिंजरे में
□ जाल में
□ गुफा में
□ पेड़ में
4. हंसराज ने दूसरे हंसों को क्या करने के लिए कहा?
□ लड़ने के लिए
□ वापस आने के लिए
□ वहाँ से उड़ जाने के लिए
□ निषाद को पकड़ने के लिए
5. सुमुख ने अपने स्वामी को छोड़ने से क्यों मना किया?
□ वह डर गया था
□ वह रास्ता भूल गया था
□ वह स्वामीभक्त था
□ उसे उड़ना नहीं आता था
6. सुमुख की स्वामीभक्ति देखकर किसका हृदय बदल गया?
□ हंसराज का
□ निषाद का
□ दूसरे हंसों का
□ सैनिकों का

अभ्यास 2 — सही या गलत

1. सुमुख हंसराज का सेनापति था। __________
2. हंसराज जाल में फँस गए थे। __________
3. सुमुख अपने स्वामी को छोड़कर भाग गया। __________
4. सुमुख अपने स्वामी के लिए प्राण देने को तैयार था। __________
5. निषाद सुमुख की स्वामीभक्ति से प्रभावित हुआ। __________
6. अंत में दोनों हंस मुक्त हो गए। __________

अभ्यास 3 — रिक्त स्थान भरिए

1. मानसरोवर में बहुत-से __________ रहते थे।
2. हंसराज का सेनापति __________ था।
3. हंसराज __________ में फँस गए थे।
4. सुमुख अपने __________ को छोड़कर नहीं गया।
5. हंसों को पकड़ने के लिए __________ भेजा गया था।
6. सुमुख की स्वामीभक्ति देखकर निषाद का __________ बदल गया।

अभ्यास 4 — लघु उत्तरीय प्रश्न

1. सुमुख कौन था?
सुमुख हंसराज का सेनापति और बहुत स्वामीभक्त हंस था।
2. हंसराज जाल में कैसे फँसे?
निषाद ने हंसों को पकड़ने के लिए सरोवर में जाल बिछाया था। उसी जाल में हंसराज फँस गए।
3. हंसराज ने दूसरे हंसों को क्या आदेश दिया?
उन्होंने दूसरे हंसों को वहाँ से उड़ जाने और अपनी जान बचाने का आदेश दिया।
4. सुमुख ने अपने स्वामी का साथ क्यों नहीं छोड़ा?
क्योंकि सुमुख अपने स्वामी के प्रति बहुत निष्ठावान और स्वामीभक्त था।
5. निषाद सुमुख से क्यों प्रभावित हुआ?
सुमुख अपने स्वामी के लिए अपने प्राण तक देने को तैयार था। उसकी स्वामीभक्ति देखकर निषाद प्रभावित हुआ।
6. अंत में हंसराज और सुमुख के साथ क्या हुआ?
निषाद ने दोनों हंसों को मुक्त कर दिया।

अभ्यास 5 — सोचिए और लिखिए

1. सुमुख के चरित्र की दो विशेषताएँ लिखिए।
2. सुमुख को स्वामीभक्त क्यों कहा गया है?
3. यदि आप सुमुख की जगह होते, तो क्या करते?
4. इस कहानी से आपको क्या सीख मिलती है?

अभ्यास 6 — शब्द और अर्थ

शब्दअर्थ
स्वामीभक्तअपने स्वामी के प्रति निष्ठावान
निष्ठाविश्वास और लगन
सेनापतिसेना का प्रमुख
संकटकठिन परिस्थिति
निषादशिकारी / हंस पकड़ने वाला व्यक्ति
मुक्तबंधन से छूटा हुआ
प्राणजीवन
आज्ञाआदेश

अभ्यास 7 — विलोम शब्द

शब्दविलोम
मुक्तबंधा हुआ
आनाजाना
जीवनमृत्यु
सुखदुःख
अच्छाबुरा

अभ्यास 8 — सुमुख का चरित्र-चित्रण

सुमुख एक निष्ठावान, साहसी और कर्तव्यपरायण हंस था। वह अपने स्वामी हंसराज से बहुत प्रेम करता था। संकट के समय उसने अपने स्वामी का साथ नहीं छोड़ा। वह अपने स्वामी के लिए अपने प्राण तक देने को तैयार था।

अब सुमुख की कोई चार विशेषताएँ लिखिए:

1. ______________________________

2. ______________________________

3. ______________________________

4. ______________________________

अभ्यास 9 — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. “स्वामीभक्त सुमुख” कहानी का सार अपने शब्दों में लिखिए।
2. सुमुख की स्वामीभक्ति से निषाद पर क्या प्रभाव पड़ा?
3. “सच्ची निष्ठा की पहचान कठिन समय में होती है।” कहानी के आधार पर समझाइए।

अभ्यास 10 — मूल्य आधारित प्रश्न

यदि आपका कोई मित्र कठिन परिस्थिति में हो और दूसरे लोग उसे छोड़कर चले जाएँ, तो आप क्या करेंगे?
क्या केवल सुख के समय साथ देना ही सच्ची मित्रता है? अपने विचार लिखिए।

त्वरित पुनरावृत्ति

प्रश्नउत्तर
सुमुख कौन था?हंसराज का सेनापति।
हंसराज कहाँ रहते थे?मानसरोवर में।
हंसराज किसमें फँसे?जाल में।
सुमुख ने क्या किया?अपने स्वामी का साथ नहीं छोड़ा।
निषाद क्यों प्रभावित हुआ?सुमुख की स्वामीभक्ति देखकर।
कहानी की मुख्य सीख क्या है?कठिन समय में भी निष्ठा और कर्तव्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

स्वयं जाँच

मैं कर सकता/सकती हूँहाँअभ्यास चाहिए
मैं कहानी का सार बता सकता/सकती हूँ।□□
मैं सुमुख की विशेषताएँ बता सकता/सकती हूँ।□□
मैं कठिन शब्दों के अर्थ बता सकता/सकती हूँ।□□
मैं कहानी की सीख समझा सकता/सकती हूँ।□□