Class 6 hindi vyakarn

कक्षा 6 हिंदी व्याकरण – संपूर्ण नोट्स

CBSE Class 6 Hindi Grammar

सरल भाषा में परिभाषाएँ, उदाहरण और लेखन कौशल

भाग 1: अपठित बोध

1. अपठित गद्यांश

परिभाषा: ऐसा गद्यांश जिसे विद्यार्थी ने पहले न पढ़ा हो, उसे अपठित गद्यांश कहते हैं। इसे पढ़कर उससे संबंधित प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में देने होते हैं।

गद्यांश हल करने की विधि

  • गद्यांश को ध्यान से दो बार पढ़ें।
  • समझें कि गद्यांश किस विषय पर है।
  • प्रश्नों में पूछे गए मुख्य शब्दों को पहचानें।
  • उत्तर गद्यांश के आधार पर दें।
  • उत्तर छोटे, स्पष्ट और पूरे वाक्यों में लिखें।
  • यदि शीर्षक पूछा जाए, तो गद्यांश के मुख्य विचार के अनुसार शीर्षक दें।

उदाहरण

पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं। वे हमें फल, फूल, लकड़ी और छाया देते हैं। पेड़ वायु को शुद्ध करते हैं और अनेक पक्षियों को आश्रय देते हैं। हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए।

प्रश्न और उत्तर

1. पेड़ हमें क्या-क्या देते हैं?

उत्तर: पेड़ हमें फल, फूल, लकड़ी और छाया देते हैं।

2. पेड़ किसे शुद्ध करते हैं?

उत्तर: पेड़ वायु को शुद्ध करते हैं।

3. हमें पेड़ों के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और उनकी रक्षा करनी चाहिए।

4. इस गद्यांश का उचित शीर्षक क्या होगा?

उत्तर: पेड़ों का महत्त्व।

2. अपठित पद्यांश

परिभाषा: ऐसी कविता या काव्य-पंक्तियाँ जिन्हें विद्यार्थी ने पहले न पढ़ा हो, उन्हें अपठित पद्यांश कहते हैं। इसमें कविता का भाव समझकर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।

पद्यांश हल करने की विधि

  • कविता को ध्यान से पढ़ें।
  • कठिन शब्दों का अर्थ संदर्भ से समझने का प्रयास करें।
  • कविता का मुख्य भाव पहचानें।
  • उत्तर कविता की पंक्तियों के आधार पर लिखें।
  • यदि भावार्थ पूछा जाए, तो कविता का अर्थ सरल भाषा में लिखें।

उदाहरण

मेहनत करने वालों की, कभी हार नहीं होती। लगन और विश्वास से, हर मंजिल दूर नहीं होती।

प्रश्न और उत्तर

1. कविता में किन लोगों की बात की गई है?

उत्तर: कविता में मेहनत करने वाले लोगों की बात की गई है।

2. मंजिल पाने के लिए किन गुणों की आवश्यकता है?

उत्तर: मंजिल पाने के लिए मेहनत, लगन और विश्वास की आवश्यकता है।

3. कविता से क्या शिक्षा मिलती है?

उत्तर: कविता से शिक्षा मिलती है कि हमें कठिनाइयों से घबराए बिना मेहनत करते रहना चाहिए।

भाग 2: हिंदी व्याकरण

3. भाषा, लिपि और व्याकरण

भाषा

परिभाषा: अपने विचारों, भावों और बातों को दूसरों तक पहुँचाने के साधन को भाषा कहते हैं।

उदाहरण: हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत, पंजाबी।

भाषा के मुख्य रूप

1. मौखिक भाषा: जब हम बोलकर अपने विचार प्रकट करते हैं।

उदाहरण: दो मित्रों का आपस में बातचीत करना।

2. लिखित भाषा: जब हम लिखकर अपने विचार प्रकट करते हैं।

उदाहरण: पत्र, पुस्तक या संदेश लिखना।

3. सांकेतिक भाषा: जब हम संकेतों या हाव-भाव से अपनी बात समझाते हैं।

उदाहरण: यातायात पुलिस का हाथ से संकेत देना।

लिपि

परिभाषा: भाषा को लिखने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उनके व्यवस्थित रूप को लिपि कहते हैं।
  • हिंदी की लिपि — देवनागरी
  • अंग्रेज़ी की लिपि — रोमन
  • पंजाबी की लिपि — गुरुमुखी

व्याकरण

परिभाषा: भाषा को शुद्ध रूप से बोलने, पढ़ने और लिखने के नियमों का ज्ञान कराने वाले शास्त्र को व्याकरण कहते हैं।
उदाहरण:
अशुद्ध: राम स्कूल जाती है।
शुद्ध: राम स्कूल जाता है।

व्याकरण से भाषा में शुद्धता और स्पष्टता आती है।

4. वर्ण-विचार

वर्ण: भाषा की सबसे छोटी ध्वनि, जिसके और छोटे सार्थक ध्वनि-खंड नहीं किए जा सकते, वर्ण कहलाती है।

उदाहरण: अ, आ, क, ख, ग।

वर्णमाला: वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

वर्ण के मुख्य भेद

1. स्वर

जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के किया जाता है, उन्हें स्वर कहते हैं।

उदाहरण: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

अं और अः को क्रमशः अनुस्वार और विसर्ग कहा जाता है। विद्यालय की पुस्तकों में इन्हें स्वर-वर्णों के साथ भी पढ़ाया जा सकता है।

2. व्यंजन

जिन वर्णों का उच्चारण स्वरों की सहायता से होता है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।

उदाहरण: क, ख, ग, घ, च, छ, ज, ट, त, प, म, य, र, ल, व, श, स, ह।

मात्राएँ

स्वरों के लिखित चिह्नों को मात्राएँ कहते हैं।

स्वरमात्राउदाहरण
अकोई मात्रा नहींकमल
आाराम
इिदिन
ईीदीप
उुपुल
ऊूफूल
एेखेल
ऐैबैल
ओोमोर
औौकौआ

5. शब्द-विचार

शब्द: वर्णों के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिसका कोई अर्थ हो।

उदाहरण: घर, जल, पुस्तक, विद्यालय।

अर्थ के आधार पर शब्द

1. सार्थक शब्द: जिनका कोई अर्थ हो।

उदाहरण: नदी, बच्चा, सुंदर।

2. निरर्थक शब्द: जिनका स्वतंत्र रूप से कोई निश्चित अर्थ न हो।

उदाहरण: चाय-वाय में “वाय”।

उत्पत्ति के आधार पर शब्द

1. तत्सम: संस्कृत से बिना विशेष परिवर्तन के आए शब्द।

उदाहरण: अग्नि, सूर्य, रात्रि।

2. तद्भव: संस्कृत से बदलकर हिंदी में आए शब्द।

उदाहरण: आग, सूरज, रात।

3. देशज: स्थानीय बोलियों या देश में प्रचलित स्रोतों से बने शब्द।

उदाहरण: खटिया, झोपड़ी।

4. विदेशज: दूसरी भाषाओं से हिंदी में आए शब्द।

उदाहरण: स्कूल, किताब, साबुन।

रचना के आधार पर शब्द

1. रूढ़ शब्द: जिनके खंड करने से उनके प्रचलित अर्थ का स्पष्ट ज्ञान नहीं होता।

उदाहरण: घर, नाक।

2. यौगिक शब्द: दो या अधिक सार्थक शब्दों से मिलकर बने शब्द।

उदाहरण: विद्यालय (विद्या + आलय), राजपुत्र (राजा + पुत्र)।

3. योगरूढ़ शब्द: जो कई शब्दों से मिलकर बने हों, लेकिन किसी विशेष अर्थ में प्रसिद्ध हों।

उदाहरण: दशानन — दस मुखों वाला; सामान्यतः रावण के लिए प्रयुक्त।

6. संज्ञा

परिभाषा: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, पदार्थ, समूह या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण: मोहन, दिल्ली, पुस्तक, गाय, मिठास।

संज्ञा के भेद

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम।

उदाहरण: सीता, भारत, गंगा, हिमालय।

2. जातिवाचक संज्ञा

किसी पूरी जाति या वर्ग का बोध कराने वाला शब्द।

उदाहरण: लड़का, नदी, शहर, पक्षी।

3. भाववाचक संज्ञा

किसी भाव, गुण, अवस्था या दशा का बोध कराने वाला शब्द।

उदाहरण: ईमानदारी, सुंदरता, बचपन, मिठास।

4. समूहवाचक संज्ञा

किसी समूह का बोध कराने वाला शब्द।

उदाहरण: सेना, झुंड, भीड़, कक्षा।

5. द्रव्यवाचक संज्ञा

किसी पदार्थ या द्रव्य का बोध कराने वाला शब्द।

उदाहरण: पानी, सोना, चाँदी, दूध।

पहचानने की युक्ति: यदि शब्द किसी का नाम बताए, तो देखें कि वह विशेष नाम है, पूरी जाति का नाम है, भाव बताता है, समूह बताता है या पदार्थ का नाम है।

7. संज्ञा के विकार

संज्ञा के रूप में लिंग, वचन और कारक के कारण परिवर्तन हो सकता है। इन्हें संज्ञा के विकार कहा जाता है।

लड़का — लड़के (वचन के कारण)
लड़का — लड़की (लिंग के कारण)
राम ने — राम को (कारक-चिह्न के कारण)

मुख्य विकार

  • लिंग: संज्ञा के जिस रूप से पुरुष या स्त्री जाति का बोध होता है।
  • वचन: संज्ञा के जिस रूप से एक या अनेक का बोध होता है।
  • कारक: संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध बताने वाला रूप।

8. वचन

परिभाषा: शब्द के जिस रूप से एक या अनेक होने का पता चले, उसे वचन कहते हैं।

वचन के दो भेद हैं।

1. एकवचन: जिससे एक व्यक्ति या वस्तु का बोध हो।

उदाहरण: बच्चा, पुस्तक, लड़की, नदी।

2. बहुवचन: जिससे एक से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं का बोध हो।

उदाहरण: बच्चे, पुस्तकें, लड़कियाँ, नदियाँ।

एकवचन से बहुवचन

एकवचनबहुवचन
लड़कालड़के
बच्चाबच्चे
लड़कीलड़कियाँ
नदीनदियाँ
पुस्तकपुस्तकें
वस्तुवस्तुएँ
मातामाताएँ
बहूबहुएँ
ध्यान दें: सभी शब्दों के बहुवचन एक ही नियम से नहीं बनते। वाक्य में भी शब्द का सही रूप चुनना आवश्यक है।

9. कारक

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के अन्य शब्दों से जो संबंध होता है, उसे कारक कहते हैं।

कारक के आठ भेद पढ़ाए जाते हैं।

कारकचिह्नउदाहरण
कर्तानेराम ने खाना खाया।
कर्मकोसीता ने मोहन को बुलाया।
करणसे, के द्वाराउसने कलम से लिखा।
संप्रदानके लिए, कोमाँ ने बच्चे के लिए खाना बनाया।
अपादानसेपेड़ से पत्ता गिरा।
संबंधका, की, केयह मोहन की पुस्तक है।
अधिकरणमें, परपुस्तक मेज पर है।
संबोधनहे!, अरे!, ओ!हे मित्र! इधर आओ।

आसान पहचान

  • काम कौन कर रहा है? — कर्ता
  • काम किस पर हो रहा है? — कर्म
  • किस साधन से काम हुआ? — करण
  • किसके लिए काम हुआ? — संप्रदान
  • अलग होने या स्रोत का भाव? — अपादान
  • किसका, किसकी, किसके? — संबंध
  • कहाँ या किस स्थान पर? — अधिकरण
  • किसे पुकारा जा रहा है? — संबोधन
ध्यान दें: कारक-चिह्न वाक्य के अर्थ के अनुसार पहचाने जाते हैं। केवल चिह्न देखकर निर्णय करना हमेशा पर्याप्त नहीं होता।

10. सर्वनाम

परिभाषा: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहते हैं।

उदाहरण: मैं, हम, तुम, आप, वह, यह, कौन, कोई।

सर्वनाम के प्रमुख भेद

1. पुरुषवाचक सर्वनाम: बोलने वाले, सुनने वाले या जिसके बारे में बात हो, उसका बोध कराते हैं।

  • उत्तम पुरुष: मैं, हम
  • मध्यम पुरुष: तुम, आप
  • अन्य पुरुष: वह, वे, यह, ये

2. निश्चयवाचक सर्वनाम: किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करते हैं।

उदाहरण: यह मेरी पुस्तक है। वह मेरा घर है।

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम: किसी अनिश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध कराते हैं।

उदाहरण: कोई दरवाजे पर है। कुछ गिर गया है।

4. प्रश्नवाचक सर्वनाम: प्रश्न पूछने के लिए प्रयुक्त होते हैं।

उदाहरण: कौन आया? तुमने क्या खरीदा?

5. संबंधवाचक सर्वनाम: दो वाक्यांशों या कथनों के बीच संबंध बताते हैं।

उदाहरण: जो मेहनत करता है, वह सफल होता है।

6. निजवाचक सर्वनाम: अपनेपन या स्वयं का बोध कराते हैं।

उदाहरण: मैं अपना काम स्वयं करता हूँ।

11. विशेषण

परिभाषा: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।

उदाहरण: सुंदर फूल, मीठा आम, पाँच बच्चे।

यहाँ सुंदर, मीठा और पाँच विशेषण हैं।

विशेषण के प्रमुख भेद

1. गुणवाचक विशेषण: गुण या दोष बताए।

उदाहरण: अच्छा लड़का, मीठा फल, लंबा पेड़।

2. संख्यावाचक विशेषण: संख्या या क्रम बताए।

उदाहरण: चार किताबें, पहला स्थान, कई विद्यार्थी।

3. परिमाणवाचक विशेषण: मात्रा बताए।

उदाहरण: थोड़ा पानी, अधिक दूध, पर्याप्त भोजन।

4. सार्वनामिक विशेषण: सर्वनाम जैसे शब्द जब संज्ञा के साथ आकर उसकी ओर संकेत करें।

उदाहरण: यह पुस्तक मेरी है। वह लड़का खेल रहा है।

ध्यान दें: “यह मेरी है” में “यह” सर्वनाम है, जबकि “यह पुस्तक” में “यह” सार्वनामिक विशेषण है।

12. क्रिया

परिभाषा: जिस शब्द से किसी काम के करने, होने या अवस्था का पता चले, उसे क्रिया कहते हैं।

उदाहरण: खाना, पढ़ना, सोना, दौड़ना, हँसना।

वाक्य: रीना पुस्तक पढ़ती है। यहाँ “पढ़ती है” क्रिया है।

क्रिया के भेद

1. सकर्मक क्रिया: जिस क्रिया का प्रभाव किसी कर्म पर पड़ता है।

उदाहरण: मोहन आम खाता है।

प्रश्न: मोहन क्या खाता है? — आम।

2. अकर्मक क्रिया: जिस क्रिया को पूरा अर्थ देने के लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती।

उदाहरण: बच्चा सोता है। पक्षी उड़ता है।

धातु

क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं।

  • लिखना — लिख
  • पढ़ना — पढ़
  • चलना — चल
  • खाना — खा

13. काल

परिभाषा: क्रिया के जिस रूप से काम के होने के समय का पता चलता है, उसे काल कहते हैं।

काल के तीन मुख्य भेद हैं।

1. वर्तमान काल: काम अभी हो रहा है या वर्तमान से संबंधित है।

  • मैं पढ़ता हूँ।
  • रीना खाना खा रही है।
  • बच्चे खेलते हैं।

2. भूतकाल: काम पहले हो चुका है या पहले हुआ था।

  • मैं कल बाजार गया।
  • रीना ने खाना खाया।
  • बच्चे खेल रहे थे।

3. भविष्यत् काल: काम आगे होने वाला है।

  • मैं कल बाजार जाऊँगा।
  • रीना खाना खाएगी।
  • बच्चे खेलेंगे।
याद रखें: काल पहचानने के लिए क्रिया के रूप और वाक्य में दिए गए समय-सूचक शब्दों, जैसे आज, कल, पहले, कल सुबह, को ध्यान से देखें।

14. वाच्य

परिभाषा: क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि वाक्य में कर्ता, कर्म या भाव में से किसकी प्रधानता है, उसे वाच्य कहते हैं।

वाच्य के तीन भेद हैं।

1. कर्तृवाच्य: जिसमें कर्ता की प्रधानता होती है।

उदाहरण: राम पत्र लिखता है।

2. कर्मवाच्य: जिसमें कर्म की प्रधानता होती है।

उदाहरण: राम द्वारा पत्र लिखा जाता है।

3. भाववाच्य: जिसमें काम या भाव की प्रधानता होती है, और कर्ता की क्षमता या असमर्थता का भाव भी हो सकता है।

उदाहरण: मुझसे अब चला नहीं जाता।

कक्षा 6 में वाच्य की प्रारंभिक पहचान और सरल उदाहरणों पर विशेष ध्यान दें।

15. अव्यय या अविकारी शब्द

परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष या कारक के कारण परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं।

उदाहरण: आज, यहाँ, वहाँ, धीरे, लेकिन, और, अरे।

अव्यय के प्रमुख भेद

1. क्रियाविशेषण: क्रिया की विशेषता बताए।

उदाहरण: वह धीरे चलता है। रीना आज आएगी।

2. संबंधबोधक: शब्दों के बीच संबंध बताए।

उदाहरण: मेज के ऊपर पुस्तक है। घर के पास मंदिर है।

3. समुच्चयबोधक: शब्दों या वाक्यों को जोड़ें।

उदाहरण: राम और श्याम आए। मैं गया, लेकिन वह नहीं मिला।

4. विस्मयादिबोधक: अचानक उत्पन्न भाव प्रकट करें।

उदाहरण: वाह! कितना सुंदर दृश्य है। अरे! तुम यहाँ कैसे?

16. संधि

परिभाषा: दो वर्णों के पास आने पर उनमें होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को संधि कहते हैं।

उदाहरण: विद्या + आलय = विद्यालय।

संधि के मुख्य भेद

1. स्वर संधि: दो स्वरों के मिलने से परिवर्तन होता है।

  • विद्या + आलय = विद्यालय
  • महा + ईश = महेश

2. व्यंजन संधि: व्यंजनों के मिलने से परिवर्तन होता है।

  • सत् + जन = सज्जन
  • जगत् + नाथ = जगन्नाथ

3. विसर्ग संधि: विसर्ग (ः) के बाद आने वाले वर्ण के कारण परिवर्तन होता है।

  • मनः + हर = मनोहर
  • निः + आशा = निराशा

संधि-विच्छेद में संधि से बने शब्द को उसके मूल भागों में अलग किया जाता है।

उदाहरण: विद्यालय = विद्या + आलय।

17. समास

परिभाषा: दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने संक्षिप्त शब्द को समास कहते हैं।

उदाहरण: राजा का पुत्र = राजपुत्र।

समास में बने शब्द को समस्त पद तथा उसका विस्तार समास-विग्रह कहलाता है।

समास के प्रमुख भेद

1. अव्ययीभाव समास: जिसमें पहला पद प्रधान होता है और पूरा शब्द प्रायः अव्यय की तरह प्रयोग होता है।

उदाहरण: प्रतिदिन = प्रत्येक दिन।

2. तत्पुरुष समास: जिसमें दूसरा पद प्रधान होता है और बीच के कारक-चिह्न का लोप हो जाता है।

उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र।

3. कर्मधारय समास: जिसमें एक पद दूसरे की विशेषता बताता है।

उदाहरण: नीलकमल = नीला कमल।

4. द्विगु समास: जिसमें पहला पद संख्यावाचक होता है और समूह का बोध कराता है।

उदाहरण: नवरत्न = नौ रत्नों का समूह।

5. द्वंद्व समास: जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं।

उदाहरण: माता-पिता = माता और पिता।

6. बहुव्रीहि समास: जिसमें समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु का बोध कराता है।

उदाहरण: दशानन = दस मुखों वाला, अर्थात् रावण।

18. उपसर्ग

परिभाषा: जो शब्दांश किसी शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देता है, उसे उपसर्ग कहते हैं।
अ + सत्य = असत्य
सु + गंध = सुगंध
प्र + हार = प्रहार
अप + मान = अपमान
नि + डर = निडर

कुछ सामान्य उपसर्ग

उपसर्गउदाहरण
अअयोग्य
अन्अनजान
सुसुगंध
दुदुर्गुण
प्रप्रगति
उपउपवन
प्रतिप्रतिदिन
निर्निर्भय
अपअपमान
परापराजय
याद रखें: उपसर्ग शब्द के आरंभ में जुड़ता है।

19. प्रत्यय

परिभाषा: जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।
सुंदर + ता = सुंदरता
अपना + पन = अपनापन
पढ़ + आई = पढ़ाई
दूध + वाला = दूधवाला

प्रत्यय के सामान्य उदाहरण

मूल शब्दप्रत्ययनया शब्द
सुंदरतासुंदरता
मित्रतामित्रता
अपनापनअपनापन
पढ़आईपढ़ाई
लिखआवटलिखावट
दूधवालादूधवाला
याद रखें: उपसर्ग पहले जुड़ता है, जबकि प्रत्यय अंत में जुड़ता है।

20. वाक्य-विचार

वाक्य: शब्दों का ऐसा समूह जो पूरा अर्थ प्रकट करे, वाक्य कहलाता है।

उदाहरण: बच्चे मैदान में खेल रहे हैं।

शब्दों का ऐसा समूह जो पूरा अर्थ न दे, उसे अधूरा वाक्यांश कहा जा सकता है।

उदाहरण: मैदान में बच्चे।

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

1. विधानवाचक वाक्य: किसी बात का सामान्य कथन करे।

उदाहरण: सूर्य पूर्व से निकलता है।

2. निषेधवाचक वाक्य: किसी काम के न होने का बोध कराए।

उदाहरण: मैं आज स्कूल नहीं जाऊँगा।

3. प्रश्नवाचक वाक्य: प्रश्न पूछे।

उदाहरण: तुम कहाँ जा रहे हो?

4. आज्ञावाचक वाक्य: आदेश, अनुरोध या सलाह दे।

उदाहरण: कृपया बैठ जाइए।

5. इच्छावाचक वाक्य: इच्छा, आशीर्वाद या कामना प्रकट करे।

उदाहरण: तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो!

6. विस्मयादिबोधक वाक्य: आश्चर्य, खुशी, दुख या अन्य तीव्र भाव प्रकट करे।

उदाहरण: वाह! कितना सुंदर फूल है!

7. संदेहवाचक वाक्य: संदेह या संभावना प्रकट करे।

उदाहरण: शायद आज वर्षा हो।

21. विराम-चिह्न

परिभाषा: लिखते समय रुकने, प्रश्न पूछने, भाव प्रकट करने और वाक्य को स्पष्ट बनाने के लिए जिन चिह्नों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विराम-चिह्न कहते हैं।
विराम-चिह्ननामप्रयोग
।पूर्ण विरामवाक्य समाप्त होने पर
,अल्प विरामथोड़ी देर रुकने पर
;अर्ध विरामअपेक्षाकृत अधिक ठहराव के लिए
?प्रश्नवाचक चिह्नप्रश्न के अंत में
!विस्मयादिबोधक चिह्नआश्चर्य, खुशी आदि के लिए
:विवरण चिह्नआगे सूची या विवरण देने के लिए
“ ”उद्धरण चिह्नकिसी के कथन को ज्यों का त्यों लिखने में
( )कोष्ठकअतिरिक्त जानकारी देने में
–योजक चिह्नजुड़े हुए शब्दों या पदों में, जहाँ आवश्यक हो

उदाहरण

  • राम स्कूल जाता है।
  • तुम कहाँ रहते हो?
  • वाह! कितना सुंदर चित्र है!
  • माँ ने कहा, “समय पर पढ़ाई करो।”

22. अशुद्ध वाक्यों का संशोधन

परिभाषा: अशुद्ध वाक्य को व्याकरण के नियमों के अनुसार सही करना वाक्य-संशोधन कहलाता है।

वाक्य में लिंग, वचन, पुरुष, काल, कारक या शब्द-प्रयोग की गलती हो सकती है।

सामान्य अशुद्धियाँ

अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
सीता बाजार गया।सीता बाजार गई।
बच्चे खेल रहा है।बच्चे खेल रहे हैं।
मैं स्कूल जाता हैं।मैं स्कूल जाता हूँ।
वह मेरे को बुलाया।उसने मुझे बुलाया।
राम और श्याम आया।राम और श्याम आए।
मेरे को पानी चाहिए।मुझे पानी चाहिए।
वह पुस्तक पढ़ती था।वह पुस्तक पढ़ती थी।
हम कल बाजार जाएगा।हम कल बाजार जाएँगे।

वाक्य शुद्ध करने के नियम

  • कर्ता के अनुसार क्रिया का सही रूप रखें।
  • लिंग और वचन का ध्यान रखें।
  • सर्वनाम का सही प्रयोग करें।
  • कारक-चिह्न सही लगाएँ।
  • वाक्य का अर्थ स्पष्ट रखें।

23. मुहावरे और लोकोक्तियाँ

मुहावरा

परिभाषा: ऐसा प्रचलित वाक्यांश जिसका अर्थ उसके शब्दों के सामान्य अर्थ से अलग होता है, मुहावरा कहलाता है।
मुहावराअर्थवाक्य
आँखों का ताराबहुत प्यारामोहन अपनी माँ की आँखों का तारा है।
दाँत खट्टे करनाबुरी तरह हरानाहमारी टीम ने विरोधी टीम के दाँत खट्टे कर दिए।
नाक कटनाअपमान होनागलत काम से परिवार की नाक कट गई।
हाथ बँटानासहायता करनामैंने माँ के काम में हाथ बँटाया।
नौ दो ग्यारह होनाभाग जानाचोर पुलिस को देखकर नौ दो ग्यारह हो गया।
कमर कसनातैयार होनाविद्यार्थियों ने परीक्षा के लिए कमर कस ली।
सिर पर चढ़ानाबहुत अधिक छूट देनाबच्चे को इतना सिर पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
पानी-पानी होनालज्जित होनागलती पकड़े जाने पर वह पानी-पानी हो गया।

लोकोक्ति

परिभाषा: अनुभव या जीवन की सीख बताने वाले प्रचलित कथन को लोकोक्ति कहते हैं।
लोकोक्तिअर्थ
जैसी करनी वैसी भरनीकर्मों के अनुसार फल मिलता है।
एकता में बल हैमिल-जुलकर रहने से शक्ति बढ़ती है।
जहाँ चाह वहाँ राहदृढ़ इच्छा से रास्ता मिल जाता है।
अधजल गगरी छलकत जाएकम ज्ञान वाला व्यक्ति अधिक दिखावा करता है।
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी कमी का दोष दूसरों पर डालना।
बूंद-बूंद से घड़ा भरता हैथोड़े-थोड़े प्रयास से बड़ी उपलब्धि मिलती है।
दूर के ढोल सुहावनेदूर की चीजें अधिक अच्छी लगती हैं।
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेतअवसर निकल जाने के बाद पछताने से लाभ नहीं होता।
अंतर: मुहावरे का प्रयोग सामान्यतः वाक्य के एक भाग के रूप में होता है, जबकि लोकोक्ति प्रायः एक पूर्ण कथन या सीख होती है।

24. शब्द-भंडार

शब्द-भंडार का अर्थ है भाषा में प्रयुक्त होने वाले शब्दों का ज्ञान। इसमें पर्यायवाची, विलोम, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द, अनेकार्थी शब्द और श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द शामिल हो सकते हैं।

पर्यायवाची शब्द

एक जैसे या मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं।

शब्दपर्यायवाची
सूर्यरवि, सूरज, भानु
चंद्रमाचाँद, शशि, इंदु
पृथ्वीधरती, भूमि, धरा
जलपानी, नीर, वारि
वायुहवा, पवन, समीर
वनजंगल, अरण्य
मित्रसखा, दोस्त, सुहृद
राजानरेश, भूप, नृप
कमलपंकज, सरोज, नीरज
घरगृह, भवन, निवास

विलोम शब्द

विपरीत अर्थ वाले शब्द विलोम कहलाते हैं।

शब्दविलोम
दिनरात
सुखदुख
अच्छाबुरा
नयापुराना
सत्यअसत्य
लाभहानि
आशानिराशा
आरंभअंत
उजालाअँधेरा
स्वतंत्रपरतंत्र

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

वाक्यांशएक शब्द
जो पढ़ना-लिखना जानता होसाक्षर
जो पढ़ना-लिखना न जानता होनिरक्षर
जो दूसरों की सहायता करेसहायक
जो देश से प्रेम करता होदेशभक्त
जो कभी न मरेअमर
जो सब कुछ जानता होसर्वज्ञ
जो ईश्वर में विश्वास रखता होआस्तिक
जो ईश्वर में विश्वास न रखता होनास्तिक
जो उपकार मानता होकृतज्ञ
जो उपकार न मानेकृतघ्न

अनेकार्थी शब्द

जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं।

शब्दअर्थ
कलबीता हुआ दिन, आने वाला दिन, मशीन
फलखाने का फल, परिणाम
हारगले का आभूषण, पराजय
पत्रचिट्ठी, पत्ता
अंकसंख्या, गोद, परीक्षा के अंक
करहाथ, टैक्स
आमएक फल, सामान्य

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

जिन शब्दों का उच्चारण मिलता-जुलता हो, लेकिन अर्थ अलग-अलग हों, उन्हें श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहा जाता है।

शब्दअर्थशब्दअर्थ
दिनदिवसदीनगरीब
ओरदिशाऔरतथा
कुलवंशकूलकिनारा
सुतपुत्रसूतधागा
मेलमिलापमैलगंदगी

भाग 3: हिंदी लेखन कौशल

25. अनुच्छेद-लेखन

परिभाषा: किसी एक विषय पर अपने विचारों को क्रमबद्ध रूप से एक ही अनुच्छेद में लिखना अनुच्छेद-लेखन कहलाता है।

अनुच्छेद लिखने के नियम

  • विषय को अच्छी तरह समझें।
  • शुरुआत में विषय का परिचय दें।
  • बीच में मुख्य बातें और उदाहरण लिखें।
  • अंत में निष्कर्ष या सीख लिखें।
  • छोटे और स्पष्ट वाक्यों का प्रयोग करें।
  • एक ही अनुच्छेद में विषय से जुड़ी बातें रखें।
  • अनावश्यक बातें न लिखें।

उदाहरण: पेड़ों का महत्त्व

पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक हैं। वे हमें फल, फूल, लकड़ी और छाया देते हैं। पेड़ वातावरण को स्वच्छ रखने में सहायता करते हैं। अनेक पक्षी पेड़ों पर अपना घोंसला बनाते हैं। पेड़ वर्षा और प्रकृति के संतुलन में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज वनों की कटाई के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है। इसलिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और उनकी देखभाल करनी चाहिए। पेड़ों की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

अभ्यास के विषय

  • मेरा विद्यालय
  • मेरा प्रिय मित्र
  • स्वच्छता का महत्त्व
  • समय का सदुपयोग
  • पर्यावरण संरक्षण
  • खेलों का महत्त्व

26. पत्र-लेखन

पत्र अपने विचार, समाचार या संदेश किसी व्यक्ति तक पहुँचाने का लिखित माध्यम है।

पत्र के दो मुख्य प्रकार हैं।

1. अनौपचारिक पत्र: परिवार के सदस्यों, मित्रों या परिचितों को लिखा जाता है।

2. औपचारिक पत्र: प्रधानाचार्य, अधिकारी या किसी संस्था को लिखा जाता है।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप

प्रेषक का पता

दिनांक

प्रिय मित्र / पूजनीय माता-पिता,

सप्रेम नमस्कार।

पत्र लिखने का कारण और मुख्य बात।

अंत में शुभकामनाएँ या स्नेह।

तुम्हारा मित्र / तुम्हारी पुत्री

नाम

उदाहरण: मित्र को जन्मदिन पर आमंत्रित करने के लिए पत्र

24, शांति नगर
देहरादून

10 अक्टूबर 2026

प्रिय मित्र राहुल,

सप्रेम नमस्कार!

मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि मेरा जन्मदिन 15 अक्टूबर को है। इस अवसर पर शाम 5 बजे मेरे घर पर एक छोटी-सी पार्टी रखी गई है। मैं चाहता हूँ कि तुम इस कार्यक्रम में अवश्य आओ। हम सब मिलकर खेलेंगे और खूब आनंद करेंगे।

अपने माता-पिता से अनुमति लेकर समय पर आ जाना। तुम्हारे आने से मेरी खुशी और बढ़ जाएगी।

तुम्हारा मित्र,
अमन

औपचारिक पत्र का प्रारूप

प्रेषक का पता

दिनांक

सेवा में,

पदनाम / अधिकारी का नाम

संस्था का नाम और पता

विषय: पत्र लिखने का कारण।

महोदय / महोदया,

सविनय निवेदन है कि मुख्य बात स्पष्ट और विनम्र भाषा में लिखें।

धन्यवाद।

भवदीय / सधन्यवाद

नाम

कक्षा (यदि आवश्यक हो)

उदाहरण: बीमारी के कारण अवकाश के लिए प्रधानाचार्य को पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
आदर्श विद्यालय, देहरादून।

दिनांक: 10 अक्टूबर 2026

विषय: बीमारी के कारण अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मुझे बुखार होने के कारण मैं विद्यालय आने में असमर्थ हूँ। डॉक्टर ने मुझे दो दिन आराम करने की सलाह दी है। अतः आपसे अनुरोध है कि मुझे 10 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक दो दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी,
अमन
कक्षा 6

27. निबंध-लेखन

परिभाषा: किसी विषय पर अपने विचारों, तथ्यों और अनुभवों को क्रमबद्ध रूप से विस्तार में लिखना निबंध-लेखन कहलाता है।

निबंध सामान्यतः तीन भागों में लिखा जाता है।

  • भूमिका: विषय का परिचय।
  • विषय-विस्तार: विषय से संबंधित मुख्य बातें, उदाहरण और महत्त्व।
  • उपसंहार: निष्कर्ष, संदेश या सुझाव।

उदाहरण: मेरा विद्यालय

भूमिका

मेरे विद्यालय का नाम आदर्श विद्यालय है। यह मेरे घर के पास स्थित है। मुझे अपने विद्यालय से बहुत प्यार है।

विषय-विस्तार

मेरे विद्यालय की इमारत सुंदर और साफ-सुथरी है। यहाँ पढ़ाई के लिए बड़े कमरे, पुस्तकालय और खेल का मैदान है। हमारे शिक्षक बहुत मेहनती और सहयोगी हैं। वे हमें पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार की शिक्षा भी देते हैं। विद्यालय में समय-समय पर खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती हैं। मुझे अपने मित्रों के साथ विद्यालय में पढ़ना और खेलना अच्छा लगता है।

उपसंहार

मेरा विद्यालय मुझे ज्ञान और अच्छे संस्कार देता है। मैं अपने विद्यालय का नाम रोशन करना चाहता हूँ। मुझे अपने विद्यालय पर गर्व है।

कक्षा 6 के लिए निबंध के अभ्यास-विषय

  • मेरा प्रिय त्योहार
  • स्वतंत्रता दिवस
  • गणतंत्र दिवस
  • मेरा प्रिय शिक्षक
  • मेरा प्रिय खेल
  • जल संरक्षण
  • स्वच्छ भारत
  • समय का महत्त्व
  • मेरा प्रिय पशु
  • पुस्तकें हमारी मित्र
अध्ययन सुझाव: पहले परिभाषाएँ समझें, फिर उदाहरण पढ़ें और अंत में अभ्यास प्रश्न हल करें। संधि, समास, कारक, सर्वनाम और काल में नियमों को याद करने के साथ-साथ वाक्यों में उनका प्रयोग करना भी सीखें।

नोट: यह कक्षा 6 के लिए एक व्यापक आधारभूत अध्ययन-सामग्री है। विद्यालय और निर्धारित NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार कुछ व्याकरण-विषय अलग कक्षाओं में पढ़ाए जा सकते हैं।

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