Class 6 Hindi मल्हार Chapter 7 जलाते चलो – आसान नोट्स, सारांश, शब्दार्थ, NCERT पुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न और worksheet। कविता को सरल भाषा में समझें और परीक्षा की तैयारी करें।
जलाते चलो
कक्षा 6 हिंदी मल्हार | पाठ 7 | सम्पूर्ण पाठ के सरल नोट्स एवं प्रश्न-उत्तर
Study CBSE
पाठ का सारांश
कविता “जलाते चलो” में कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हमें प्रेम, दया, सेवा, परोपकार और अच्छे कार्य करते रहने की प्रेरणा देते हैं। कवि कहते हैं कि हमें अपने जीवन में प्रेम और मानवता के दीपक जलाते रहना चाहिए।
संसार में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ, दुख और अँधेरा क्यों न हो, हमें निराश नहीं होना चाहिए। हमें दूसरों की सहायता करते रहना चाहिए। यदि एक छोटा-सा दीपक भी जलता रहेगा, तो एक दिन अँधेरी रात समाप्त होकर उजाला अवश्य आएगा।
इस कविता में दीपक आशा, प्रेम, ज्ञान और अच्छे कार्यों का प्रतीक है, जबकि अँधेरा कठिनाइयों, बुराइयों और निराशा का प्रतीक है।
कविता : जलाते चलो
कवि से परिचय
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हिंदी के प्रसिद्ध कवि और बाल साहित्य के चर्चित रचनाकार थे। उन्होंने बच्चों के लिए बहुत-सी सुंदर रचनाएँ लिखीं। उनका गीत “हम सब सुमन एक उपवन के” आज भी लोकप्रिय है।
जीवनकाल : 1916–1998
कठिन शब्दों के सरल अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| स्नेह | प्रेम |
| धरा | पृथ्वी |
| तिमिर | अँधेरा |
| अमावस | अमावस्या की रात |
| पूर्णिमा | वह रात जब चाँद पूरा दिखाई देता है |
| विद्युत-दिये | बिजली से जलने वाले दीपक या बल्ब |
| सरित | नदी |
| निरंतर | लगातार |
| शिला | पत्थर या चट्टान |
| ज्योति | प्रकाश या रोशनी |
| पवन | हवा |
| निशा | रात |
| सवेरा | सुबह |
मुख्य संदेश
- हमें हमेशा अच्छे कार्य करते रहना चाहिए।
- हमें दूसरों की सहायता करनी चाहिए।
- हमें कठिनाइयों से डरना नहीं चाहिए।
- प्रेम और दया से संसार सुंदर बनता है।
- छोटी-सी अच्छी कोशिश भी बड़ा बदलाव ला सकती है।
- हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए।
पाठ से — मेरी समझ से
(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?
(2) “जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
यह वाक्य किससे कहा गया है?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए।
| शब्द | सही अर्थ या संदर्भ |
|---|---|
| 1. अमावस | 4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
| 2. पूर्णिमा | 1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| 3. विद्युत-दिये | 2. विद्युत-दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 4. युग | 3. समय, काल या युग। |
पंक्तियों पर चर्चा
सोच-विचार के लिए
कविता की रचना
- कविता की पंक्तियों में लय है।
- कविता को गाया या लय के साथ पढ़ा जा सकता है।
- कविता में तुक मिलती है।
- कविता में दीपक और अँधेरे के प्रतीकों का प्रयोग हुआ है।
- कविता आशा और उत्साह जगाती है।
- कविता में 2–4, 2–4 के क्रम में पंक्तियाँ बाँटी गई हैं।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को मिलाइए।
| स्तंभ 1 | सही मिलान |
|---|---|
| 1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। | 3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| 2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर। | 4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए। |
| 3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| 4. बिना स्नेह विद्युत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा। | 1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
अनुमान या कल्पना से
दीपक और तूफान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
शब्दों के रूप
कविता से दिए गए शब्दों के मिलते-जुलते दूसरे शब्द खोजकर लिखिए।
| दिया गया शब्द | मिलता-जुलता शब्द |
|---|---|
| 1. दिया | दीपक |
| 2. उजेला | उजाला |
| 3. अनगिन | अनगिनत |
| 4. तिमिर | अँधेरा |
| 5. निशा | रात्रि |
| 6. सवेरा | प्रभात |
अर्थ की बात
इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है?
1. बहाते चलो तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का मिलेगा।। (तट, तीर, किनारा)
2. रहेगा पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)
कभी तो निशा को मिलेगा।। (प्रातः, सुबह, सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)
प्रतीक
निशा का अर्थ है रात और सवेरा का अर्थ है सुबह। इस कविता में ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के क्या अर्थ हो सकते हैं?
- निशा: अँधेरा, दुख, बुराई और कठिनाइयाँ।
- सवेरा: उजाला, सुख, अच्छाई और सफलता।
| निशा | सवेरा |
|---|---|
|
अँधेरा अमावस तिमिर तूफान बुझना |
दिये पूर्णिमा नाव किनारा ज्योति उजेला लौ स्वर्ण जलना |
निशा: रात, अँधकार, निराशा, दुख, परेशानी।
सवेरा: सुबह, प्रकाश, आशा, खुशी, सफलता।
पंक्ति से पंक्ति
नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को सरल वाक्यों के रूप में लिखिए।
सा / सी / से का प्रयोग
‘सा’, ‘सी’ और ‘से’ का प्रयोग समानता दिखाने के लिए किया जाता है। इनके पहले योजक चिह्न (-) का प्रयोग किया जाता है।
पाँच वाक्य
- उसका चेहरा चाँद-सा चमक रहा है।
- फूल रेशम-से मुलायम हैं।
- उसकी आवाज कोयल-सी मीठी है।
- बच्चा हिरन-सा तेज दौड़ता है।
- आसमान समुद्र-सा नीला दिखाई देता है।
पाठ से आगे — आपकी बात
- मैं जरूरतमंद लोगों की सहायता करता हूँ।
- मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करता हूँ।
- मैं पेड़-पौधों की देखभाल करता हूँ।
- मैं अपने मित्रों की पढ़ाई में सहायता करता हूँ।
- मैं साफ-सफाई का ध्यान रखता हूँ।
अमावस्या और पूर्णिमा
पूर्णिमा
पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। इस समय चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी से लगभग पूरा दिखाई देता है।
अमावस्या
अमावस्या की रात चंद्रमा दिखाई नहीं देता या बहुत कम दिखाई देता है, क्योंकि उसका प्रकाशित भाग पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
शुक्ल पक्ष
अमावस्या के बाद चंद्रमा की कलाएँ धीरे-धीरे बढ़ती हैं। इन दिनों को शुक्ल पक्ष कहते हैं।
कृष्ण पक्ष
पूर्णिमा के बाद चंद्रमा की कलाएँ धीरे-धीरे घटती हैं। इन दिनों को कृष्ण पक्ष कहते हैं।
- शुक्ल पक्ष में चंद्रमा बढ़ता हुआ दिखाई देता है।
- कृष्ण पक्ष में चंद्रमा घटता हुआ दिखाई देता है।
- पूर्णिमा को पूरा चाँद दिखाई देता है।
- अमावस्या को चाँद दिखाई नहीं देता।
अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष
| नाम | पहचान |
|---|---|
| अमावस्या | चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
| पूर्णिमा | चंद्रमा पूरा दिखाई देता है। |
| कृष्ण पक्ष | पूर्णिमा के बाद चंद्रमा घटता है। |
| शुक्ल पक्ष | अमावस्या के बाद चंद्रमा बढ़ता है। |
- पूरा चंद्रमा — पूर्णिमा
- बिना दिखाई देने वाला चंद्रमा — अमावस्या
- बढ़ता हुआ चंद्रमा — शुक्ल पक्ष
- घटता हुआ चंद्रमा — कृष्ण पक्ष
तिथिपत्र — जनवरी 2023
दिए गए तिथिपत्र को देखकर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
- पूर्णिमा — 6 जनवरी, शुक्रवार।
- अमावस्या — 21 जनवरी, शनिवार।
आज की पहेली
‘पवन’ शब्द का अर्थ हवा है। नीचे दिए गए अक्षर-जाल में हवा के अलग-अलग नाम छिपे हैं।
| बा | द | ल | ई | ब |
|---|---|---|---|---|
| प | अ | नि | ल | या |
| व | क | स | मी | र |
| न | ह | वा | यु | ब |
| मा | रु | त | स | ड़ |
संभावित उत्तर
खोजबीन के लिए
कविता से संबंधित निम्नलिखित रचनाओं को पढ़िए, देखिए और समझिए।
- हम सब सुमन एक उपवन के
- बढ़े चलो
- रोज़ बदलता कैसे चाँद — भाग 1
- रोज़ बदलता कैसे चाँद — भाग 2
त्वरित पुनरावृत्ति
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| कविता के कवि कौन हैं? | द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी |
| दीपक किसका प्रतीक है? | आशा, प्रेम, ज्ञान और अच्छाई का |
| अँधेरा किसका प्रतीक है? | दुख, बुराई और कठिनाइयों का |
| पूर्णिमा को क्या दिखाई देता है? | पूरा चंद्रमा |
| अमावस्या को क्या दिखाई नहीं देता? | चंद्रमा |
| शुक्ल पक्ष में क्या होता है? | चंद्रमा की कलाएँ बढ़ती हैं। |
| कृष्ण पक्ष में क्या होता है? | चंद्रमा की कलाएँ घटती हैं। |
| कविता हमें क्या सिखाती है? | अच्छे कार्य करते रहने और निराश न होने की सीख देती है। |
कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 7 के लिए यह आसान और उपयोगी worksheet अभ्यास के लिए तैयार की गई है।इसमें पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न, शब्दार्थ और समझ पर आधारित प्रश्न शामिल हैं।
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