Class 6 Hindi Chapter 5 – रहीम के दोहे | Notes, Solutions & Worksheet

Class 6 Hindi मल्हार Chapter 5 रहीम के दोहे – आसान नोट्स, सारांश, शब्दार्थ, NCERT पुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न और worksheet। दोहों का सरल अर्थ समझें और परीक्षा की तैयारी करें।

कक्षा 6 हिंदी मल्हार पाठ 5 – रहीम के दोहे | Study CBSE

रहीम के दोहे

कक्षा 6 हिंदी मल्हार | पाठ 5

सरल, रंगीन और बच्चों के लिए उपयोगी पाठ-नोट्स

📚 पाठ का सारांश

इस पाठ में कवि रहीम के नीति और जीवन-मूल्यों से जुड़े सात दोहे दिए गए हैं। इन दोहों में रहीम ने छोटी-बड़ी वस्तुओं का महत्व, परोपकार, प्रेम और संबंधों की रक्षा, सम्मान, विपत्ति से मिलने वाली सीख, सोच-समझकर बोलने तथा सच्चे मित्रों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संदेश दिया है।

रहीम समझाते हैं कि किसी भी छोटी वस्तु को बेकार नहीं समझना चाहिए। पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते। इसी प्रकार सज्जन लोग दूसरों के हित के लिए अपनी संपत्ति का उपयोग करते हैं। प्रेम का संबंध धागे के समान होता है, जिसे टूटने के बाद पहले जैसा जोड़ना कठिन होता है।

कवि यह भी बताते हैं कि सम्मान, मनुष्य और मोती के लिए ‘पानी’ अर्थात् अपनी विशेष चमक या प्रतिष्ठा बहुत आवश्यक है। थोड़े समय की विपत्ति से हमें अपने हितैषी और विरोधी लोगों की पहचान हो जाती है। इसलिए हमें मधुर और सोच-समझकर बोलना चाहिए तथा विपत्ति में साथ देने वाले मित्रों को सच्चा मित्र मानना चाहिए।

🌿 पाठ के मुख्य संदेश

  • छोटी वस्तुओं का भी अपना महत्व होता है।
  • हमें अपनी संपत्ति का उपयोग दूसरों की सहायता के लिए करना चाहिए।
  • प्रेम और संबंधों को सावधानी से सँभालना चाहिए।
  • अपना सम्मान बनाए रखना चाहिए।
  • विपत्ति में सच्चे मित्रों की पहचान होती है।
  • हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए।
  • हर व्यक्ति और वस्तु का अपना महत्व होता है।

🖼️ पाठ से संबंधित चित्र

प्रकृति और जीवन से जुड़ा चित्र

चित्र: प्रकृति और जीवन से सीख लेने की प्रेरणा

📝 रहीम के दोहे

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।

तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सज्जान।।

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।।

रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।

रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जती खात कपाल।।

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।

— अब्दुर्रहीम खानखाना

संदर्भ— रहीम ग्रंथावली (सं.) विद्यानिवास मिश्र

👨‍🏫 कवि से परिचय

रहीम भक्तिकाल के एक प्रसिद्ध कवि थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म 16वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने नीति, भक्ति और प्रेम संबंधी रचनाएँ कीं। उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में कविताएँ लिखी हैं। रहीम रामायण, महाभारत आदि प्रसिद्ध ग्रंथों के अच्छे जानकार थे। उनकी मृत्यु 17वीं शताब्दी में हुई थी। आज भी आम जन-जीवन में उनके दोहे बहुत लोकप्रिय हैं।

📖 पाठ से — मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जती खात कपाल।” दोहे का भाव है—

☐ सोच-समझकर बोलना चाहिए।
☐ मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
☐ धीरे-धीरे बोलना चाहिए।
☐ सदा सच बोलना चाहिए।
★ सही उत्तर: सोच-समझकर बोलना चाहिए।
कारण: जीभ बिना सोचे बोल देती है, लेकिन उसके कारण व्यक्ति को परेशानी हो सकती है।

(2) “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।” इस दोहे का भाव क्या है?

☐ तलवार सुई से बड़ी होती है।
☐ सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
☐ तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
☐ हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
★ सही उत्तर: हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।
कारण: सुई छोटे काम में उपयोगी है और तलवार उस काम को नहीं कर सकती।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर: पहले दोहे में सोच-समझकर बोलने की सीख दी गई है। दूसरे दोहे में बताया गया है कि छोटी और बड़ी सभी वस्तुओं की अपनी-अपनी उपयोगिता होती है।

🤝 मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।

स्तंभ 1स्तंभ 2
1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।
1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।

3. प्रेम और रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।
2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।
बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।
सही भाव: सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।
3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सज्जान।।
सही भाव: सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।
सही मिलान:
1 → 3
2 → 2
3 → 1

💬 पंक्तियों पर चर्चा

नीचे दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए—

(क) “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय।
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय।।”

सरल भावार्थ: थोड़े समय की विपत्ति भी अच्छी होती है, क्योंकि उससे हमें पता चल जाता है कि कौन हमारा हितैषी है और कौन हमारा अहित चाहता है।

(ख) “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जती खात कपाल।।”

सरल भावार्थ: जीभ बिना सोचे कुछ भी बोल देती है, लेकिन उसके गलत शब्दों का परिणाम व्यक्ति को ही भुगतना पड़ता है। इसलिए सोच-समझकर बोलना चाहिए।

🤔 सोच-विचार के लिए

1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।”

(क) इस दोहे में ‘मिले’ के स्थान पर ‘जुड़े’ और ‘छिटकाय’ के स्थान पर ‘चटकाय’ शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे—

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय।।

इसी प्रकार पहले दोहे में ‘डारि’ के स्थान पर ‘डार’, ‘तलवारि’ के स्थान पर ‘तरवार’ और चौथे दोहे में ‘मानुष’ के स्थान पर ‘मानस’ का उपयोग भी प्रचलित हैं। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर: भाषा समय, स्थान और बोलने वाले लोगों के अनुसार बदलती रहती है। अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों के उच्चारण और रूप अलग हो सकते हैं। इसी कारण इन शब्दों के दूसरे रूप भी प्रचलित हैं।

(ख) इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।

उत्तर: धागा बहुत नाजुक होता है। टूटने पर उसमें गाँठ पड़ जाती है। इसी प्रकार प्रेम का संबंध टूटने पर दोबारा जुड़ तो सकता है, लेकिन पहले जैसा नहीं रहता।

अन्य उदाहरण: काँच का गिलास। टूटे हुए काँच को जोड़ने पर भी उसमें दरार दिखाई देती है।

2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सज्जान।।”

इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?

उत्तर: इस दोहे में परोपकार और त्याग के गुण की बात की गई है। पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते।

प्रकृति से सीख: हमें दूसरों की सहायता करनी चाहिए, निःस्वार्थ भाव से काम करना चाहिए और अपनी वस्तुओं का उपयोग दूसरों के लाभ के लिए करना चाहिए।

🔤 शब्दों की बात

शब्द-संपदा

कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए।

कविता में आए शब्दमातृभाषा में समानार्थक शब्द
तरुवरपेड़ / वृक्ष
बिपतिविपत्ति / संकट
छिटकायअलग करके / तोड़कर
सज्जानसज्जन / अच्छे लोग
सरवरतालाब / जलाशय
साँचेसच्चे
कपालमाथा / सिर

शब्द एक अर्थ अनेक

“रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून।। ”

इस दोहे में ‘पानी’ शब्द के तीन अर्थ हैं— सम्मान, जल, चमक। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए।

शब्दतीन अलग-अलग अर्थ
कलबीता हुआ दिन, आने वाला दिन, मशीन
पत्रचिट्ठी, पत्ता, पृष्ठ
करहाथ, टैक्स, करना
फलखाने वाला फल, परिणाम, लाभ

🌟 पाठ से आगे — आपकी बात

“रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।।”

इस दोहे का भाव है— न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है। चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई, सबके अपने-अपने आकार-प्रकार हैं और सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्व है। सिलाई का काम सुई से ही किया जा सकता है, तलवार से नहीं। सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का। कोई वस्तु हो या व्यक्ति, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए।

गतिविधि

अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।

उदाहरण:
छोटा दीपक रात में, दूर करे अँधियार।
छोटी चीज़ें काम की, समझो इनका सार।।

🎵 सरगम

1. दोहों की रिकॉर्डिंग

रहीम, कबीर, तुलसी आदि के दोहे आपने दृश्य-श्रव्य माध्यमों से कई बार सुने होंगे। कक्षा में आपने दोहे भी बड़े मनोयोग से गाए होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग की। रिकॉर्डिंग सामान्य मोबाइल से की जा सकती है। इन्हें अपने दोस्तों के साथ समूह में या अकेले गा सकते हैं। यदि संभव हो तो वाद्ययंत्रों के साथ भी गायन करें। रिकॉर्डिंग के बाद दोहे स्वयं भी सुनें और लोगों को भी सुनाएँ।

2. दोहा अंत्याक्षरी

रहीम, वृंद, कबीर, तुलसी, बिहारी आदि के दोहे आज भी जनजीवन में लोकप्रिय हैं। दोहों का प्रयोग लोग अपनी बात पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए करते हैं। अपने समूह में मिलकर दोहे एकत्र कीजिए और अंत्याक्षरी खेलिए। इस कार्य में आप इंटरनेट, पुस्तकालय तथा अपने शिक्षकों या अभिभावकों की सहायता ले सकते हैं।

कक्षा-गतिविधि: अपने समूह में कम-से-कम पाँच दोहे एकत्र कीजिए और उनका अर्थ समझाकर सुनाइए।

🧩 आज की पहेली

1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम।
उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।

उत्तर देखें

उत्तर: नमक

2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार।
टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।

उत्तर देखें

उत्तर: माचिस की डिबिया और तीलियाँ

🔍 खोजबीन के लिए

रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, समझें और अपनी कॉपी में लिखें।

गतिविधि: रहीम के किसी एक अन्य दोहे को चुनिए। उसे अपनी कॉपी में लिखिए और उसका सरल अर्थ अपने शब्दों में लिखिए।

📌 कठिन शब्द और सरल अर्थ

शब्दसरल अर्थ
तरुवरपेड़
सरवरतालाब
संपतिधन या संपत्ति
सज्जनअच्छे व्यक्ति
बिपतिविपत्ति या संकट
हितभलाई
अनहितबुराई या नुकसान
कपालमाथा
साँचेसच्चे
मीतमित्र
छिटकायअलग करके या झटके से तोड़कर
ऊबरैबच पाता है या वापस ठीक हो पाता है

🧠 त्वरित पुनरावृत्ति

  • रहीम के दोहों में नीति, प्रेम, परोपकार और जीवन की सीख मिलती है।
  • सुई और तलवार के उदाहरण से छोटी वस्तुओं का महत्व बताया गया है।
  • पेड़ और सरोवर दूसरों के हित में काम करते हैं।
  • प्रेम का संबंध धागे के समान नाजुक होता है।
  • पानी का अर्थ सम्मान, जल और चमक भी हो सकता है।
  • विपत्ति में सच्चे मित्रों की पहचान होती है।
  • हमें सोच-समझकर बोलना चाहिए।

© Study CBSE | कक्षा 6 हिंदी मल्हार | रहीम के दोहे

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कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 5 के लिए यह आसान और उपयोगी worksheet अभ्यास के लिए तैयार की गई है।इसमें पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न, शब्दार्थ और समझ पर आधारित प्रश्न शामिल हैं।

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