Class 6 Hindi Chapter 4 – हार की जीत | Notes, Solutions & Worksheet

Class 6 Hindi मल्हार Chapter 4 हार की जीत – आसान नोट्स, सारांश, शब्दार्थ, NCERT पुस्तक के प्रश्न-उत्तर, अतिरिक्त प्रश्न और worksheet। कहानी को सरल भाषा में समझें और परीक्षा की तैयारी करें।

कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 4 हार की जीत – Notes and Solutions

हार की जीत

कक्षा 6 हिंदी – मल्हार

अध्याय 4 | सरल एवं बच्चों के लिए आसान Notes & Solutions

🌟 अध्याय का सारांश

“हार की जीत” प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन की प्रेरक कहानी है। इस कहानी के मुख्य पात्र बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और उनका प्रिय घोड़ा सुलतान हैं।

बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान से बहुत प्रेम था। वे उसकी देखभाल करते और रोज़ उस पर सवारी करते थे। खड्गसिंह नाम का एक प्रसिद्ध डाकू सुलतान को देखकर उसे पाने की इच्छा करने लगा।

एक दिन खड्गसिंह ने अपाहिज का रूप बनाकर बाबा भारती से सहायता माँगी। बाबा भारती ने दया करके उसे घोड़े पर बैठा लिया। अवसर पाकर खड्गसिंह ने घोड़ा छीन लिया।

बाबा भारती ने घोड़ा वापस माँगने के बजाय केवल यह प्रार्थना की कि खड्गसिंह इस घटना को किसी के सामने न बताए। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को इस घटना का पता चला तो वे गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे।

बाबा भारती की इस महान सोच ने खड्गसिंह के मन को बदल दिया। उसके अंदर पश्चाताप जागा और वह रात में सुलतान को वापस बाबा भारती के अस्तबल में बाँध गया।

मुख्य संदेश: सच्ची दया, विश्वास और अच्छे विचार बुरे व्यक्ति के मन को भी बदल सकते हैं। कहानी सिखाती है कि दूसरों की सहायता करने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।

📖 पूरी कहानी – हार की जीत

घोड़ा

घोड़े का चित्र – Wikimedia Commons

माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता। वह घोड़ा बड़ा सुंदर था, बड़ा बलवान।

उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में न था। बाबा भारती उसे सुलतान कह कर पुकारते, अपने हाथ से खरहरा करते, खुद दाना खिलाते और देख-देखकर प्रसन्न होते थे।

उन्होंने रुपया, माल, असबाब, ज़मीन आदि अपना सब-कुछ छोड़ दिया था, यहाँ तक कि उन्हें नगर के जीवन से भी घृणा थी। अब गाँव से बाहर एक छोटे-से मंदिर में रहते और भगवान का भजन करते थे।

“मैं सुलतान के बिना नहीं रह सकूँगा”, उन्हें ऐसी भ्रांति-सी हो गई थी। वे उसकी चाल पर लट्टू थे। कहते, “ऐसे चलता है जैसे मोर घटा को देखकर नाच रहा हो।” जब तक संध्या समय सुलतान पर चढ़कर आठ-दस मील का चक्कर न लगा लेते, उन्हें चैन न आता।

खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। होते-होते सुलतान की कीर्ति उसके कानों तक भी पहुँची। उसका हृदय उसे देखने के लिए अधीर हो उठा।

एक दिन वह दोपहर के समय बाबा भारती के पास पहुँचा और नमस्कार करके बैठ गया। बाबा भारती ने पूछा, “खड्गसिंह, क्या हाल है?”

खड्गसिंह ने सिर झुकाकर उत्तर दिया, “आपकी दया है।”

“कहो, इधर कैसे आ गए?”

“सुलतान की चाह खींच लाई।”

“विचित्र जानवर है। देखोगे तो प्रसन्न हो जाओगे।”

“मैंने भी बड़ी प्रशंसा सुनी है।”

“उसकी चाल तुम्हारा मन मोह लेगी!”

“कहते हैं देखने में भी बहुत सुंदर है।”

“क्या कहना! जो उसे एक बार देख लेता है, उसके हृदय पर उसकी छवि अंकित हो जाती है।”

“बहुत दिनों से अभिलाषा थी, आज उपस्थित हो सका हूँ।”

बाबा भारती और खड्गसिंह दोनों अस्तबल में पहुँचे। बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से। उसने सैकड़ों घोड़े देखे थे, परंतु ऐसा बाँका घोड़ा उसकी आँखों से कभी न गुजरा था।

सोचने लगा, ‘भाग्य की बात है। ऐसा घोड़ा खड्गसिंह के पास होना चाहिए था। इस साधु को ऐसी चीज़ों से क्या लाभ?’

कुछ देर तक आश्चर्य से चुपचाप खड़ा रहा। इसके पश्चात उसके हृदय में हलचल होने लगी। बालकों की-सी अधीरता से बोला, “परंतु बाबाजी, इसकी चाल न देखी तो क्या?”

बाबा भारती भी मनुष्य ही थे। अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुँह से सुनने के लिए उनका हृदय भी अधीर हो गया। घोड़े को खोलकर बाहर लाए और उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगे। एकाएक उचककर सवार हो गए, घोड़ा हवा से बातें करने लगा।

उसकी चाल को देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया। वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर वह अपना अधिकार समझता था। उसके पास बाहुबल था, आदमी थे और बेरहमी थी।

जाते-जाते उसने कहा, “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा।”

बाबा भारती डर गए। अब उन्हें रात को नींद न आती। सारी रात अस्तबल की रखवाली में कटने लगी। प्रतिक्षण खड्गसिंह का भय लगा रहता, परंतु कई मास बीत गए और वह न आया। यहाँ तक कि बाबा भारती कुछ असावधान हो गए और इस भय को स्वप्न के भय की नाईं मिथ्या समझने लगे।

संध्या का समय था। बाबा भारती सुलतान की पीठ पर सवार होकर घूमने जा रहे थे। इस समय उनकी आँखों में चमक थी, मुख पर प्रसन्नता। कभी घोड़े के शरीर को देखते, कभी उसके रंग को और मन में फूले न समाते थे।

सहसा एक ओर से आवाज़ आई, “ओ बाबा, इस कंगले की सुनते जाना।”

आवाज़ में करुणा थी। बाबा ने घोड़े को रोक लिया। देखा, एक अपाहिज वृक्ष की छाया में पड़ा कराह रहा है। बोले, “क्यों तुम्हें क्या कष्ट है?”

अपाहिज ने हाथ जोड़कर कहा, “बाबा, मैं दुखियारा हूँ। मुझ पर दया करो। रामावाला यहाँ से तीन मील है, मुझे वहाँ जाना है। घोड़े पर चढ़ा लो, परमात्मा भला करेगा।”

“वहाँ तुम्हारा कौन है?”

“दुर्गादत्त वैद्य का नाम आपने सुना होगा। मैं उनका सौतेला भाई हूँ।”

बाबा भारती ने घोड़े से उतरकर अपाहिज को घोड़े पर सवार किया और स्वयं उसकी लगाम पकड़कर धीरे-धीरे चलने लगे। सहसा उन्हें एक झटका-सा लगा और लगाम हाथ से छूट गई।

उनके आश्चर्य का ठिकाना न रहा, जब उन्होंने देखा कि अपाहिज घोड़े की पीठ पर तनकर बैठा है और घोड़े को दौड़ाए लिए जा रहा है। उनके मुख से भय, विस्मय और निराशा से मिली हुई चीख निकल गई। वह अपाहिज डाकू खड्गसिंह था।

बाबा भारती कुछ देर तक चुप रहे और कुछ समय पश्चात कुछ निश्चय करके पूरे बल से चिल्लाकर बोले, “ज़रा ठहर जाओ।”

खड्गसिंह ने यह आवाज़ सुनकर घोड़ा रोक लिया और उसकी गरदन पर प्यार से हाथ फेरते हुए कहा, “बाबाजी, यह घोड़ा अब न दूँगा।”

“परंतु एक बात सुनते जाओ।”

खड्गसिंह ठहर गया।

बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, “यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है। मैं तुमसे इसे वापस करने के लिए न कहूँगा। परंतु खड्गसिंह, केवल एक प्रार्थना करता हूँ, इसे अस्वीकार न करना; नहीं तो मेरा दिल टूट जाएगा।”

“बाबाजी, आज्ञा कीजिए। मैं आपका दास हूँ, केवल यह घोड़ा न दूँगा।”

“अब घोड़े का नाम न लो। मैं तुमसे इस विषय में कुछ न कहूँगा। मेरी प्रार्थना केवल यह है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।”

खड्गसिंह का मुँह आश्चर्य से खुला रह गया। उसे लगा था कि उसे घोड़े को लेकर यहाँ से भागना पड़ेगा, परंतु बाबा भारती ने स्वयं उसे कहा कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना।

इससे क्या प्रयोजन सिद्ध हो सकता है? खड्गसिंह ने बहुत सोचा, बहुत सिर मारा, परंतु कुछ समझ न सका। हारकर उसने अपनी आँखें बाबा भारती के मुख पर गड़ा दीं और पूछा, “बाबाजी, इसमें आपको क्या डर है?”

सुनकर बाबा भारती ने उत्तर दिया, “लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।”

यह कहते-कहते उन्होंने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो।

बाबा भारती चले गए। परंतु उनके शब्द खड्गसिंह के कानों में उसी प्रकार गूँज रहे थे। सोचता था, ‘कैसे ऊँचे विचार हैं, कैसा पवित्र भाव है!’

उन्हें इस घोड़े से प्रेम था, इसे देखकर उनका मुख फूल की नाईं खिल जाता था। कहते थे, “इसके बिना मैं रह न सकूँगा।” इसकी रखवाली में वे कई रात सोए नहीं। भजन-भक्ति न कर रखवाली करते रहे।

परंतु आज उनके मुख पर दुख की रेखा तक दिखाई न पड़ती थी। उन्हें केवल यह खयाल था कि कहीं लोग गरीबों पर विश्वास करना न छोड़ दें।

रात के अँधेरे में खड्गसिंह बाबा भारती के मंदिर में पहुँचा। चारों ओर सन्नाटा था। आकाश में तारे टिमटिमा रहे थे। थोड़ी दूर पर गाँवों के कुत्ते भौंक रहे थे। मंदिर के अंदर कोई शब्द सुनाई न देता था।

खड्गसिंह सुलतान की बाग पकड़े हुए था। वह धीरे-धीरे अस्तबल के फाटक पर पहुँचा। फाटक खुला पड़ा था। किसी समय वहाँ बाबा भारती स्वयं लाठी लेकर पहरा देते थे, परंतु आज उन्हें किसी चोरी, किसी डाके का भय न था।

खड्गसिंह ने आगे बढ़कर सुलतान को उसके स्थान पर बाँध दिया और बाहर निकलकर सावधानी से फाटक बंद कर दिया। इस समय उसकी आँखों में पश्चाताप के आँसू थे।

रात्रि का तीसरा पहर बीत चुका था। चौथा पहर आरंभ होते ही बाबा भारती ने अपनी कुटिया से बाहर निकल ठंडे जल से स्नान किया। उसके पश्चात, इस प्रकार जैसे कोई स्वप्न में चल रहा हो, उनके पाँव अस्तबल की ओर बढ़े।

परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई। साथ ही घोर निराशा ने पाँव को मन-मन-भर का भारी बना दिया। वे वहीं रुक गए।

घोड़े ने अपने स्वामी के पाँवों की चाप को पहचान लिया और ज़ोर से हिनहिनाया। अब बाबा भारती आश्चर्य और प्रसन्नता से दौड़ते हुए अंदर गए और अपने घोड़े के गले से लिपटकर इस प्रकार रोने लगे मानो कोई पिता बहुत दिन से बिछड़े पुत्र से मिल रहा हो।

बार-बार उसकी पीठ पर हाथ फेरते, बार-बार उसके मुँह पर थपकियाँ देते। और कहते थे, “अब कोई गरीबों की सहायता से मुँह न मोड़ेगा।”

थोड़ी देर के बाद जब वह अस्तबल से बाहर निकले तो उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे। ये आँसू उसी भूमि पर ठीक उसी जगह गिर रहे थे, जहाँ बाहर निकलने के बाद खड्गसिंह खड़ा होकर रोया था।

दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।

— सुदर्शन

📘 पाठ से – मेरी समझ से

आइए, अब हम ‘हार की जीत’ कहानी को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं।

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए—

(1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?
ƒ बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
ƒ बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
ƒ बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
 बाबा भारती असावधान हो गए।
(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?
ƒ बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
 बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
ƒ बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
ƒ बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर: क्योंकि कहानी में बाबा भारती घोड़े की चोरी के बाद कुछ समय के लिए असावधान हो गए थे और वे अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरों से सुनना चाहते थे।

✍️ लेखक से परिचय

सुदर्शन

यह कहानी हिंदी की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है और इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक सुदर्शन ने लिखा है। सुदर्शन का वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था।

उन्होंने पहली कहानी तब लिखी थी जब ये आप ही की तरह छठी कक्षा में पढ़ते थे। सुदर्शन ने कहानियों के अतिरिक्त कविताएँ, लेख, नाटक और उपन्यास भी लिखे। इसके अलावा उन्होंने अनेक फ़िल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे।

लेखक: सुदर्शन
वास्तविक नाम: बदरीनाथ भट्ट
जन्म: 1896
निधन: 1983

🏷️ शीर्षक

(क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।

उत्तर: बाबा भारती का घोड़ा चोरी हो गया था, इसलिए वे बाहर से हार गए। लेकिन उनकी दया और अच्छे विचारों ने खड्गसिंह का हृदय बदल दिया। इस तरह अंत में बाबा भारती की जीत हुई।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

उत्तर: मैं इसका नाम “विश्वास की शक्ति” रखूँगा क्योंकि बाबा भारती के विश्वास और अच्छे विचारों ने खड्गसिंह को बदल दिया।

(ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?

उत्तर: बाबा भारती ने खड्गसिंह से वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा।

💬 पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए—

“भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।”
अर्थ: बाबा भारती अपना खाली समय सुलतान की देखभाल में लगाते थे।
“बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।”
अर्थ: बाबा भारती को अपने सुंदर घोड़े पर गर्व था और खड्गसिंह उसे देखकर बहुत चकित हुआ।
“वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।”
अर्थ: खड्गसिंह अपनी पसंद की चीज़ को बलपूर्वक पाने की आदत रखता था।
“बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।”
अर्थ: बाबा भारती बहुत दुखी और भयभीत थे, फिर भी उन्होंने घोड़ा वापस माँगने के बजाय एक बड़ी बात कही।
“उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
अर्थ: बाबा भारती को लगा कि सुलतान वापस नहीं आया होगा और अस्तबल की ओर जाना व्यर्थ है।

🤔 सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

“दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।”

(क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?

उत्तर: बाबा भारती और खड्गसिंह के आँसुओं का मेल हुआ था।

(ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?

उत्तर: बाबा भारती के आँसू खुशी और भावुकता के थे, जबकि खड्गसिंह के आँसू पश्चाताप के थे।

⏰ दिनचर्या

(क) कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।

उत्तर: बाबा भारती सुबह उठकर स्नान करते, भगवान का भजन करते और मंदिर की देखभाल करते। वे सुलतान को दाना खिलाते और उसकी सफाई करते। शाम को सुलतान पर सवार होकर आठ-दस मील घूमते। रात में विश्राम करते और भगवान का स्मरण करते।

(ख) अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।

उत्तर: मैं सुबह जल्दी उठता हूँ। स्नान और नाश्ता करके विद्यालय जाता हूँ। विद्यालय से आकर भोजन करता हूँ और गृहकार्य करता हूँ। शाम को खेलता हूँ। रात को भोजन करके पढ़ाई करता हूँ और समय पर सो जाता हूँ।

📝 कहानी की रचना

(क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।

उत्तर: मुझे बाबा भारती की दया, गरीबों पर विश्वास और खड्गसिंह के हृदय परिवर्तन की बात पसंद आई।

(ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे— शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।

उत्तर: कहानी के संवाद सरल, स्वाभाविक और प्रभावशाली हैं। संवादों से पात्रों के भाव और स्वभाव अच्छी तरह समझ में आते हैं।

🌈 मुहावरे कहानी से

(क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं— लट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।

मुहावरासरल अर्थ
लट्टू होनाबहुत अधिक मोहित होना
हृदय पर साँप लोटनाबहुत ईर्ष्या होना
फूले न समानाबहुत खुश होना
मुँह मोड़ लेनासंबंध या ध्यान हटाना
मुख खिल जानाबहुत प्रसन्न होना
न्योछावर कर देनापूरी तरह समर्पित कर देना

(ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।

लट्टू होना: राहुल नई साइकिल देखकर उस पर लट्टू हो गया।
हृदय पर साँप लोटना: मित्र को पुरस्कार मिलता देखकर उसके हृदय पर साँप लोट गया।
फूले न समाना: पुरस्कार पाकर रीना फूले न समाई।
मुँह मोड़ लेना: हमें जरूरतमंदों से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।
मुख खिल जाना: अच्छे परिणाम देखकर माता-पिता का मुख खिल गया।
न्योछावर कर देना: सैनिक देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देते हैं।

👥 कैसे-कैसे पात्र

इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं— बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए—

पात्रगुण / विशेषताएँ
बाबा भारती दयालु, धार्मिक, प्रेमी, सहृदय, विश्वास करने वाले
डाकू खड्गसिंह बाहुबली, कठोर, लालची, अंत में पश्चाताप करने वाला
सुलतान घोड़ा सुंदर, बलवान, तेज, आकर्षक

दिए गए भाव

चकित अधीर डर प्रसन्नता करुणा निराशा
आपने जो शब्द लिखे हैं, वे किसी की विशेषता, गुण और प्रकृति के बारे में बताने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।

🌟 पाठ से आगे – सुलतान की कहानी

मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए।

संकेत— आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैं — मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ…..

सुलतान की कहानी:
मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ। बाबा भारती मुझे बहुत प्यार करते थे। वे स्वयं मुझे दाना खिलाते और मेरी देखभाल करते थे। मैं भी अपने मालिक से बहुत प्रेम करता था। एक दिन खड्गसिंह मुझे छल से अपने साथ ले गया। बाबा भारती ने उसे रोकने के बजाय गरीबों की सहायता के बारे में सोचा। उनकी महान बातों से खड्गसिंह को पश्चाताप हुआ और वह मुझे वापस अस्तबल में बाँध गया। मुझे अपने मालिक के पास लौटकर बहुत खुशी हुई।

💭 मन के भाव

(क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था—

भावकौन अनुभव कर रहा था?कब?
चकितखड्गसिंहजब उसने सुलतान को पहली बार देखा।
अधीरखड्गसिंहजब वह सुलतान को देखने के लिए उत्सुक था।
डरबाबा भारतीजब उन्हें खड्गसिंह से घोड़ा छिनने का भय था।
प्रसन्नताबाबा भारतीजब वे सुलतान के साथ रहते थे और बाद में उसे वापस पाकर।
करुणाबाबा भारतीजब उन्होंने अपाहिज को देखा।
निराशाबाबा भारतीजब उन्हें लगा कि सुलतान वापस नहीं आया।

(ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।

उत्तर: मैं चकित तब होता हूँ जब कोई नई चीज़ देखता हूँ। डर मुझे किसी खतरे के समय लगता है। प्रसन्नता सफलता मिलने पर होती है। करुणा किसी दुखी व्यक्ति को देखकर होती है। निराशा तब होती है जब मेरी मेहनत का अच्छा परिणाम नहीं मिलता।

🌬️ झरोखे से

आप जानते ही हैं कि लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। आइए, उनकी लिखी एक कविता पढ़ते हैं—

वह चली हवा

वह चली हवा,
वह चली हवा।

न त देखे
न मैं देखूँ
पर पत्तों ने तो देख लिया
वरना वे खुशी मनाते क्यों?

वह चली हवा,
वह चली हवा।

— सुदर्शन

🤝 साझी समझ

आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा? आपस में चर्चा कीजिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर: मुझे कविता में हवा का सुंदर वर्णन अच्छा लगा। हवा दिखाई नहीं देती, लेकिन पत्तों की हलचल से उसके चलने का पता चलता है।

🔎 खोजबीन के लिए

सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें व समझें।

⭐ त्वरित पुनरावृत्ति

प्रश्नउत्तर
कहानी के लेखक कौन हैं?सुदर्शन
बाबा भारती के घोड़े का नाम क्या था?सुलतान
खड्गसिंह कौन था?एक प्रसिद्ध डाकू
खड्गसिंह ने घोड़ा कैसे छीना?अपाहिज का रूप बनाकर।
बाबा भारती ने खड्गसिंह से क्या माँगा?घटना किसी को न बताने का वचन।
खड्गसिंह का हृदय क्यों बदला?बाबा भारती की महान सोच और दया से।
सुलतान को कौन वापस लाया?खड्गसिंह
कहानी का मुख्य संदेश क्या है?दया, विश्वास और अच्छे विचार मनुष्य को बदल सकते हैं।

📚 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दसरल अर्थ
लहलहातेहरे-भरे
अर्पणसमर्पित करना
खरहरा करनाघोड़े के शरीर को साफ करना
कीर्तियश / प्रसिद्धि
अभिलाषाइच्छा
बाँकासुंदर और आकर्षक
अधीरउतावला / बेचैन
बाहुबलशारीरिक शक्ति
करुणादया
पश्चातापगलती पर दुख होना
निराशाआशा समाप्त होने का भाव
प्रकटजाहिर / सामने लाना

💡 कहानी से मिलने वाली सीख

  • हमें जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।
  • हमें दूसरों पर विश्वास करना सीखना चाहिए।
  • अच्छे विचार किसी बुरे व्यक्ति को भी बदल सकते हैं।
  • हमें अपनी गलती का पश्चाताप करके उसे सुधारना चाहिए।
  • दया और मानवता सबसे बड़ी शक्तियाँ हैं।
  • हमें गरीब और कमजोर लोगों की सहायता से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।

कक्षा 6 हिंदी मल्हार अध्याय 4 के लिए यह आसान और उपयोगी worksheet अभ्यास के लिए तैयार की गई है।इसमें पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न, शब्दार्थ और समझ पर आधारित प्रश्न शामिल हैं।

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