class 7 Hindi vyakarn

कक्षा 7 हिंदी व्याकरण – संक्षिप्त नोट्स

CBSE Class 7 Hindi Grammar

सरल परिभाषाएँ, महत्त्वपूर्ण नियम और उदाहरण

भाग 1: अपठित बोध

1. अपठित गद्यांश

परिभाषा: ऐसा गद्यांश जिसे पहले न पढ़ा गया हो, अपठित गद्यांश कहलाता है। इसे पढ़कर प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।

हल करने के तरीके

  • गद्यांश को ध्यान से दो बार पढ़ें।
  • मुख्य विचार और महत्त्वपूर्ण शब्द पहचानें।
  • उत्तर गद्यांश के आधार पर अपने शब्दों में लिखें।
  • उचित शीर्षक दें और पूरे वाक्यों में उत्तर लिखें।

उदाहरण

जल हमारे जीवन का आधार है। हम जल का उपयोग पीने, खाना बनाने और सफाई करने में करते हैं। वर्षा का जल धरती के लिए बहुत उपयोगी है। हमें जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए और वर्षा जल का संरक्षण करना चाहिए।

प्रश्न: हमें जल का संरक्षण क्यों करना चाहिए?

उत्तर: जल जीवन का आधार है, इसलिए हमें इसका संरक्षण करना चाहिए।

2. अपठित पद्यांश

परिभाषा: ऐसी कविता या काव्य-पंक्तियाँ जिन्हें पहले न पढ़ा गया हो, अपठित पद्यांश कहलाती हैं।

हल करने के तरीके

  • कविता को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
  • कविता का मुख्य भाव समझें।
  • कठिन शब्दों का अर्थ संदर्भ से समझें।
  • प्रश्नों के उत्तर कविता के आधार पर दें।

उदाहरण

मेहनत से खिलते हैं फूल,
ज्ञान से मिटती है भूल।
समय का जो सम्मान करे,
सफलता उसके कदम चूमे।

प्रश्न: सफलता पाने के लिए क्या करना चाहिए?

उत्तर: सफलता पाने के लिए मेहनत करनी चाहिए और समय का सम्मान करना चाहिए।

भाग 2: हिंदी व्याकरण

3. भाषा और व्याकरण

भाषा: विचारों और भावों को व्यक्त करने का माध्यम भाषा कहलाता है।

उदाहरण: हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत।

व्याकरण: भाषा को शुद्ध रूप से बोलने और लिखने के नियमों का ज्ञान कराने वाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है।

अशुद्ध: बच्चे मैदान में खेलता है।
शुद्ध: बच्चे मैदान में खेलते हैं।

4. वर्ण-विचार

वर्ण: भाषा की सबसे छोटी ध्वनि को वर्ण कहते हैं। वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

स्वर: जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता से होता है।

उदाहरण: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

व्यंजन: जिन वर्णों के उच्चारण में स्वर की सहायता ली जाती है।

उदाहरण: क, ख, ग, च, ज, ट, त, प, म, य, र, ल, व, स, ह।

मात्रा: स्वरों के लिखित चिह्नों को मात्रा कहते हैं।

स्वरमात्राउदाहरण
आाराम
इिदिन
ईीदीप
उुपुल
ऊूफूल
एेखेल
ऐैबैल
ओोमोर
औौकौआ

5. शब्द-विचार

शब्द: वर्णों के ऐसे समूह को शब्द कहते हैं जिसका कोई अर्थ हो।

सार्थक शब्द: जिनका अर्थ हो। उदाहरण: घर, जल, पुस्तक।

निरर्थक शब्द: जिनका स्वतंत्र रूप से निश्चित अर्थ न हो। उदाहरण: चाय-वाय में “वाय”।

उत्पत्ति के आधार पर

  • तत्सम: अग्नि, सूर्य, रात्रि।
  • तद्भव: आग, सूरज, रात।
  • देशज: खटिया, झोपड़ी।
  • विदेशज: स्कूल, किताब, साबुन।

रचना के आधार पर

  • रूढ़: घर, नाक।
  • यौगिक: विद्यालय (विद्या + आलय)।
  • योगरूढ़: दशानन (दस मुखों वाला, रावण)।

6. वर्तनी

परिभाषा: शब्दों को भाषा के निर्धारित नियमों के अनुसार सही ढंग से लिखना वर्तनी कहलाता है।
अशुद्धशुद्ध
आर्शीवादआशीर्वाद
उज्जवलउज्ज्वल
कृप्याकृपया
परिक्षापरीक्षा
आवश्यकताआवश्यकता
स्वास्थस्वास्थ्य
याद रखें: लिखते समय मात्रा, अनुस्वार, अनुनासिक और संयुक्ताक्षर पर ध्यान दें।

7. संज्ञा

परिभाषा: किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं।

संज्ञा के प्रमुख भेद

  • व्यक्तिवाचक: किसी विशेष व्यक्ति या स्थान का नाम। उदाहरण: राहुल, भारत।
  • जातिवाचक: पूरी जाति या वर्ग का नाम। उदाहरण: लड़का, नदी।
  • भाववाचक: गुण, भाव या अवस्था का नाम। उदाहरण: मिठास, बचपन।
  • समूहवाचक: समूह का बोध। उदाहरण: सेना, झुंड।
  • द्रव्यवाचक: पदार्थ का नाम। उदाहरण: पानी, दूध, सोना।

8. लिंग (संज्ञा के विकार)

परिभाषा: संज्ञा के जिस रूप से पुरुष या स्त्री जाति का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं।

लिंग के दो मुख्य भेद हैं।

  • पुल्लिंग: लड़का, राजा, घोड़ा, पिता।
  • स्त्रीलिंग: लड़की, रानी, घोड़ी, माता।
पुल्लिंगस्त्रीलिंग
शेरशेरनी
अध्यापकअध्यापिका
सेवकसेविका
पुत्रपुत्री
नायकनायिका

9. वचन

परिभाषा: शब्द के जिस रूप से एक या अनेक होने का पता चले, उसे वचन कहते हैं।
  • एकवचन: एक व्यक्ति या वस्तु। उदाहरण: पुस्तक, लड़की।
  • बहुवचन: एक से अधिक व्यक्ति या वस्तुएँ। उदाहरण: पुस्तकें, लड़कियाँ।
एकवचनबहुवचन
लड़कालड़के
बच्चाबच्चे
लड़कीलड़कियाँ
नदीनदियाँ
वस्तुवस्तुएँ
पुस्तकपुस्तकें

10. कारक

परिभाषा: संज्ञा या सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों से संबंध बताने वाले रूप को कारक कहते हैं।
कारकमुख्य चिह्नउदाहरण
कर्तानेराम ने खाना खाया।
कर्मकोसीता ने मोहन को बुलाया।
करणसे, द्वाराउसने कलम से लिखा।
संप्रदानके लिएमाँ ने बच्चे के लिए भोजन बनाया।
अपादानसेपेड़ से पत्ता गिरा।
संबंधका, की, केयह रीना की पुस्तक है।
अधिकरणमें, परपुस्तक मेज पर है।
संबोधनहे, अरे, ओहे मित्र! इधर आओ।

11. सर्वनाम

परिभाषा: संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।

उदाहरण: मैं, हम, तुम, आप, वह, यह, कौन, कोई।

प्रमुख भेद

  • पुरुषवाचक: मैं, तुम, वह।
  • निश्चयवाचक: यह मेरी पुस्तक है।
  • अनिश्चयवाचक: कोई बाहर खड़ा है।
  • प्रश्नवाचक: कौन आया?
  • संबंधवाचक: जो मेहनत करता है, वह सफल होता है।
  • निजवाचक: मैं अपना काम स्वयं करता हूँ।

12. विशेषण

परिभाषा: जो शब्द संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, उन्हें विशेषण कहते हैं।

उदाहरण: सुंदर फूल, मीठा आम, पाँच विद्यार्थी।

विशेषण के भेद

  • गुणवाचक: अच्छा लड़का, मीठा फल।
  • संख्यावाचक: चार पुस्तकें, पहला स्थान।
  • परिमाणवाचक: थोड़ा पानी, अधिक दूध।
  • सार्वनामिक: यह पुस्तक मेरी है।
पहचान: “यह पुस्तक” में “यह” सार्वनामिक विशेषण है, जबकि “यह मेरी है” में “यह” सर्वनाम है।

13. क्रिया

परिभाषा: जिस शब्द से किसी काम के करने या होने का पता चले, उसे क्रिया कहते हैं।

उदाहरण: पढ़ना, लिखना, दौड़ना, सोना।

क्रिया के प्रमुख भेद

  • सकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म की आवश्यकता होती है। उदाहरण: रीना पुस्तक पढ़ती है।
  • अकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म की आवश्यकता नहीं होती। उदाहरण: बच्चा सोता है।

धातु: क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। उदाहरण: पढ़ना — पढ़, लिखना — लिख।

14. काल

परिभाषा: क्रिया के जिस रूप से काम के होने के समय का पता चलता है, उसे काल कहते हैं।
  • वर्तमान काल: मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।
  • भूतकाल: मैंने पुस्तक पढ़ी।
  • भविष्यत् काल: मैं पुस्तक पढ़ूँगा।

काल पहचानने के लिए क्रिया के रूप और समय बताने वाले शब्दों पर ध्यान दें।

15. वाच्य

परिभाषा: क्रिया के जिस रूप से कर्ता, कर्म या भाव की प्रधानता का पता चले, उसे वाच्य कहते हैं।
  • कर्तृवाच्य: राम पत्र लिखता है।
  • कर्मवाच्य: राम द्वारा पत्र लिखा जाता है।
  • भाववाच्य: मुझसे चला नहीं जाता।

16. अव्यय

परिभाषा: जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन आदि के कारण परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं।
  • क्रियाविशेषण: वह धीरे चलता है।
  • संबंधबोधक: पुस्तक मेज के ऊपर है।
  • समुच्चयबोधक: राम और श्याम आए।
  • विस्मयादिबोधक: वाह! कितना सुंदर दृश्य है!
  • निपात: वह भी आएगा।

17. संधि

परिभाषा: दो वर्णों के पास आने पर होने वाले ध्वनि-परिवर्तन को संधि कहते हैं।

मुख्य भेद

  • स्वर संधि: विद्या + आलय = विद्यालय।
  • व्यंजन संधि: सत् + जन = सज्जन।
  • विसर्ग संधि: मनः + हर = मनोहर।

संधि-विच्छेद: संधि से बने शब्द को अलग करना। उदाहरण: विद्यालय = विद्या + आलय।

18. समास

परिभाषा: दो या अधिक शब्दों को मिलाकर संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया समास कहलाती है।

समस्त पद: समास से बना शब्द।

समास-विग्रह: समस्त पद का विस्तार।

समासउदाहरण
अव्ययीभावप्रतिदिन = प्रत्येक दिन
तत्पुरुषराजपुत्र = राजा का पुत्र
कर्मधारयनीलकमल = नीला कमल
द्विगुनवरत्न = नौ रत्नों का समूह
द्वंद्वमाता-पिता = माता और पिता
बहुव्रीहिदशानन = दस मुखों वाला

19. उपसर्ग एवं प्रत्यय

उपसर्ग

जो शब्दांश किसी शब्द के आरंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन करता है, उसे उपसर्ग कहते हैं।
अ + सत्य = असत्य
सु + गंध = सुगंध
प्र + हार = प्रहार
अप + मान = अपमान

प्रत्यय

जो शब्दांश किसी शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है, उसे प्रत्यय कहते हैं।
सुंदर + ता = सुंदरता
मित्र + ता = मित्रता
अपना + पन = अपनापन
पढ़ + आई = पढ़ाई
याद रखें: उपसर्ग शब्द के पहले और प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़ता है।

20. वाक्य

परिभाषा: शब्दों का ऐसा समूह जो पूरा अर्थ प्रकट करे, वाक्य कहलाता है।

उदाहरण: विद्यार्थी विद्यालय में पढ़ते हैं।

अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद

  • विधानवाचक: सूर्य पूर्व से निकलता है।
  • निषेधवाचक: मैं आज नहीं जाऊँगा।
  • प्रश्नवाचक: तुम कहाँ रहते हो?
  • आज्ञावाचक: कृपया बैठ जाइए।
  • इच्छावाचक: तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो!
  • विस्मयादिबोधक: वाह! कितना सुंदर फूल है!
  • संदेहवाचक: शायद आज वर्षा हो।

21. वाक्य अशुद्धियाँ एवं संशोधन

परिभाषा: व्याकरण के नियमों के अनुसार अशुद्ध वाक्य को सही करना वाक्य-संशोधन कहलाता है।
अशुद्ध वाक्यशुद्ध वाक्य
सीता बाजार गया।सीता बाजार गई।
बच्चे खेल रहा है।बच्चे खेल रहे हैं।
मैं स्कूल जाता हैं।मैं स्कूल जाता हूँ।
राम और श्याम आया।राम और श्याम आए।
वह मेरे को बुलाया।उसने मुझे बुलाया।
हम कल बाजार जाएगा।हम कल बाजार जाएँगे।

नियम: लिंग, वचन, काल, सर्वनाम, कारक और क्रिया का सही प्रयोग करें।

22. विराम-चिह्न

परिभाषा: वाक्य को स्पष्ट बनाने और ठहराव या भाव प्रकट करने वाले चिह्न विराम-चिह्न कहलाते हैं।
चिह्ननामउदाहरण
।पूर्ण विरामराम घर गया।
,अल्प विरामराम, श्याम और मोहन आए।
?प्रश्नवाचकतुम कहाँ जा रहे हो?
!विस्मयादिबोधकवाह! बहुत अच्छा।
;अर्ध विरामवह आया; लेकिन रुका नहीं।
“ ”उद्धरण चिह्नमाँ ने कहा, “पढ़ाई करो।”
( )कोष्ठकदिल्ली (भारत की राजधानी) प्रसिद्ध है।

23. मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ

मुहावरे

ऐसा प्रचलित वाक्यांश जिसका अर्थ सामान्य अर्थ से अलग हो, मुहावरा कहलाता है।
मुहावराअर्थवाक्य
आँखों का ताराबहुत प्यारारीना अपने माता-पिता की आँखों का तारा है।
हाथ बँटानासहायता करनामैंने माँ के काम में हाथ बँटाया।
नाक कटनाअपमान होनागलत काम से परिवार की नाक कट गई।
कमर कसनातैयार होनाहमने परीक्षा के लिए कमर कस ली।
नौ दो ग्यारह होनाभाग जानाचोर नौ दो ग्यारह हो गया।
दाँत खट्टे करनाबुरी तरह हरानाहमारी टीम ने विरोधियों के दाँत खट्टे कर दिए।

लोकोक्तियाँ

अनुभव या जीवन की सीख बताने वाले प्रचलित कथन को लोकोक्ति कहते हैं।
लोकोक्तिअर्थ
जैसी करनी वैसी भरनीकर्मों के अनुसार फल मिलता है।
जहाँ चाह वहाँ राहदृढ़ इच्छा से रास्ता मिल जाता है।
एकता में बल हैमिल-जुलकर रहने से शक्ति बढ़ती है।
नाच न जाने आँगन टेढ़ाअपनी कमी का दोष दूसरों पर डालना।
बूंद-बूंद से घड़ा भरता हैछोटे प्रयासों से बड़ी सफलता मिलती है।

24. शब्द-भंडार

पर्यायवाची शब्द

समान या मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द पर्यायवाची कहलाते हैं।

शब्दपर्यायवाची
सूर्यरवि, भानु, सूरज
चंद्रमाचाँद, शशि, इंदु
पृथ्वीधरती, भूमि, धरा
जलपानी, नीर, वारि
वायुहवा, पवन, समीर
मित्रसखा, दोस्त
वनजंगल, अरण्य
कमलपंकज, सरोज, नीरज

विलोम शब्द

विपरीत अर्थ वाले शब्द विलोम कहलाते हैं।

शब्दविलोम
सुखदुख
दिनरात
सत्यअसत्य
लाभहानि
आरंभअंत
आशानिराशा
स्वतंत्रपरतंत्र
उन्नतिअवनति

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

वाक्यांशएक शब्द
जो पढ़ना-लिखना जानता होसाक्षर
जो पढ़ना-लिखना न जानता होनिरक्षर
जो देश से प्रेम करता होदेशभक्त
जो कभी न मरेअमर
जो सब कुछ जानता होसर्वज्ञ
जो उपकार मानता होकृतज्ञ
जो उपकार न मानेकृतघ्न

अनेकार्थी शब्द

जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें अनेकार्थी शब्द कहते हैं।

शब्दअर्थ
कलबीता या आने वाला दिन, मशीन
फलखाने का फल, परिणाम
हारआभूषण, पराजय
पत्रचिट्ठी, पत्ता
अंकसंख्या, गोद, परीक्षा के अंक
करहाथ, कर (टैक्स)

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

मिलते-जुलते उच्चारण लेकिन अलग अर्थ वाले शब्दों को श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहते हैं।

शब्दअर्थशब्दअर्थ
दिनदिवसदीनगरीब
ओरदिशाऔरतथा
कुलवंशकूलकिनारा
मेलमिलापमैलगंदगी

भाग 3: हिंदी लेखन कौशल

25. संवाद-लेखन

परिभाषा: दो या अधिक व्यक्तियों के बीच बातचीत को लिखित रूप में प्रस्तुत करना संवाद-लेखन कहलाता है।

मुख्य नियम

  • संवाद विषय के अनुसार हों।
  • भाषा सरल और स्वाभाविक हो।
  • प्रत्येक वक्ता की बात अलग लिखें।
  • अनावश्यक बातचीत से बचें।

उदाहरण: परीक्षा की तैयारी

राहुल: क्या तुमने परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी?
मोहन: हाँ, मैंने सभी विषयों का समय-निर्धारण कर लिया है।
राहुल: तुम रोज कितने घंटे पढ़ते हो?
मोहन: मैं रोज तीन घंटे पढ़ता हूँ और कठिन प्रश्नों का अभ्यास करता हूँ।
राहुल: यह अच्छी आदत है। मैं भी आज से समय पर पढ़ाई करूँगा।

26. अनुच्छेद-लेखन

परिभाषा: किसी एक विषय पर विचारों को क्रमबद्ध रूप से एक ही अनुच्छेद में लिखना अनुच्छेद-लेखन कहलाता है।

नियम

  • विषय का संक्षिप्त परिचय दें।
  • मुख्य विचारों को क्रम से लिखें।
  • सरल और स्पष्ट वाक्य लिखें।
  • अंत में निष्कर्ष दें।

उदाहरण: समय का महत्त्व

समय हमारे जीवन का बहुत महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। जो विद्यार्थी समय पर पढ़ाई करते हैं, वे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। समय का सही उपयोग करने से हमारे काम व्यवस्थित रहते हैं। हमें पढ़ाई, खेल और आराम के लिए समय निर्धारित करना चाहिए। समय का सदुपयोग सफलता की कुंजी है।

अभ्यास के विषय

  • स्वच्छता का महत्त्व
  • मेरा विद्यालय
  • पर्यावरण संरक्षण
  • जल बचाओ
  • खेलों का महत्त्व

27. निबंध-लेखन

परिभाषा: किसी विषय पर अपने विचारों और तथ्यों को विस्तारपूर्वक क्रमबद्ध ढंग से लिखना निबंध-लेखन कहलाता है।

निबंध के तीन भाग

  • भूमिका: विषय का परिचय।
  • विषय-विस्तार: विषय से संबंधित मुख्य बातें।
  • उपसंहार: निष्कर्ष या संदेश।

उदाहरण: पर्यावरण संरक्षण

भूमिका

पर्यावरण हमारे चारों ओर उपस्थित वायु, जल, मिट्टी, पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से मिलकर बनता है। स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण आवश्यक है।

विषय-विस्तार

आज प्रदूषण, वनों की कटाई और जल की बर्बादी पर्यावरण के लिए बड़ी समस्याएँ हैं। हमें अधिक पेड़ लगाने चाहिए, पानी बचाना चाहिए और प्लास्टिक का कम उपयोग करना चाहिए। कूड़ा हमेशा उचित स्थान पर डालना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी हमारा कर्तव्य है।

उपसंहार

पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। छोटे-छोटे प्रयासों से हम पृथ्वी को स्वच्छ और सुरक्षित बना सकते हैं।

अभ्यास के विषय

  • मेरा प्रिय त्योहार
  • स्वतंत्रता दिवस
  • समय का महत्त्व
  • जल संरक्षण
  • पुस्तकों का महत्त्व

28. पत्र-लेखन

परिभाषा: अपने विचार, समाचार या अनुरोध किसी व्यक्ति या संस्था तक लिखित रूप में पहुँचाने का माध्यम पत्र कहलाता है।

पत्र के प्रकार

  • अनौपचारिक पत्र: मित्रों और परिवार के सदस्यों को लिखा जाता है।
  • औपचारिक पत्र: प्रधानाचार्य, अधिकारी या संस्था को लिखा जाता है।

अनौपचारिक पत्र का प्रारूप

प्रेषक का पता
दिनांक

प्रिय मित्र,
सप्रेम नमस्कार।

पत्र लिखने का कारण और मुख्य संदेश।

तुम्हारा मित्र,
नाम

उदाहरण: मित्र को जन्मदिन पर बुलाने के लिए पत्र

24, शांति नगर
देहरादून
10 अक्टूबर 2026

प्रिय मित्र राहुल,

सप्रेम नमस्कार!

मेरा जन्मदिन 15 अक्टूबर को है। इस अवसर पर शाम 5 बजे मेरे घर पर एक छोटी-सी पार्टी रखी गई है। मैं चाहता हूँ कि तुम भी इस खुशी में शामिल हो। हम मिलकर खेलेंगे और आनंद करेंगे।

अपने माता-पिता से अनुमति लेकर समय पर आना।

तुम्हारा मित्र,
अमन

औपचारिक पत्र का प्रारूप

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
विद्यालय का नाम और पता।

दिनांक: __________

विषय: पत्र लिखने का कारण।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि अपनी समस्या या अनुरोध स्पष्ट रूप से लिखें।

धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी,
नाम
कक्षा 7

उदाहरण: अवकाश के लिए प्रार्थना-पत्र

सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय,
आदर्श विद्यालय।

विषय: बीमारी के कारण अवकाश हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मुझे बुखार होने के कारण विद्यालय आने में असमर्थता है। अतः आपसे अनुरोध है कि मुझे दो दिन का अवकाश प्रदान करने की कृपा करें।

धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी,
अमन
कक्षा 7
अध्ययन सुझाव: प्रत्येक विषय की परिभाषा समझें, उदाहरण पढ़ें और स्वयं वाक्य बनाकर अभ्यास करें। वर्तनी, संधि, समास, कारक और वाक्य-संशोधन पर नियमित ध्यान दें। लेखन कौशल में प्रारूप, भाषा और विचारों का क्रम बनाए रखें।

नोट: ये कक्षा 7 के स्तर के लिए संक्षिप्त हिंदी व्याकरण नोट्स हैं। नई NCERT पुस्तकों और विद्यालय के निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार विषयों का क्रम या गहराई अलग हो सकती है।