class 9 hindi Chapter 12 notes and book solutions

100%

घर की याद

कक्षा 9 हिंदी

कवि — भवानीप्रसाद मिश्र

अध्याय-सार

‘घर की याद’ भवानीप्रसाद मिश्र की अत्यंत भावपूर्ण कविता है। कवि ने यह कविता सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय जेल में रहते हुए लिखी थी। जेल में बंद कवि को लगातार बरसते सावन के पानी को देखकर अपने घर और परिवार की बहुत याद आती है।

कवि अपने माता-पिता, भाइयों, बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों को याद करता है। उसे अपने पिता की साहसपूर्ण तथा संवेदनशील छवि, माँ के प्रेम और दृढ़ता तथा भाई-बहनों का स्नेह याद आता है। वह कल्पना करता है कि घर पर उसके माता-पिता उसकी चिंता कर रहे होंगे।

कवि सावन के बादलों को अपना संदेशवाहक बनाकर परिवार को सांत्वना देने का आग्रह करता है। वह चाहता है कि बादल उसके परिवार को यह न बताएँ कि वह जेल में दुखी है। वह अपने माता-पिता को आश्वस्त करना चाहता है कि वह ठीक है।

कविता में घर की याद, परिवार का प्रेम, वियोग, अकेलापन, त्याग, संघर्ष और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं। लगातार गिरता पानी कवि की बेचैनी और भावुकता को और गहरा करता है।

त्वरित नोट्स

कवि परिचय

  • भवानीप्रसाद मिश्र का जन्म सन् 1913 में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में हुआ।
  • वे कवि होने के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे।
  • सन् 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें जेल हुई।
  • जेल में रहते हुए उन्होंने ‘घर की याद’ लिखी।
  • उनका प्रमुख कविता-संग्रह ‘बुनी हुई रस्सी’ है, जिस पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • सन् 1985 में उनका निधन हुआ।

मुख्य भाव

  • घर की याद: जेल में रहते हुए कवि को अपने घर की बहुत याद आती है।
  • परिवार का स्नेह: माता-पिता, भाई-बहन कवि की स्मृतियों में जीवित हैं।
  • वियोग: घर से दूर होने के कारण कवि को गहरा दुख होता है।
  • प्रकृति: वर्षा, बादल, हवा और पेड़ कवि की भावनाओं को व्यक्त करते हैं।
  • त्याग: कवि अपने दुख को परिवार से छिपाकर उन्हें सांत्वना देना चाहता है।

पूरी कविता — घर की याद

आज पानी गिर रहा है,
बहुत पानी गिर रहा है,
रात-भर गिरता रहा है,
प्राण मन घिरता रहा है,
अब सबेरा हो गया है,
कब सबेरा हो गया है,
ठीक से मैंने न जाना,
बहुत सोकर सिर्फ माना—
क्योंकि बादल की अँधेरी,
है अभी तक भी घनेरी,
अभी तक चुपचाप है सब,
रातवाली छाप है सब,
गिर रहा पानी झरा-झर,
हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर,
काँपते हैं प्राण थर-थर,
बहुत पानी गिर रहा है,
घर नजर में तिर रहा है।
घर कि मुझसे दूर है जो,
घर खुशी का पूर है जो,
घर कि घर में चार भाई,
मायके में बहिन आई,
बहिन आई बाप के घर,
हाय रे परिताप के घर!
घर की याद
आज का दिन दिन नहीं है,
क्योंकि इसका छिन नहीं है,
एक छिन सौ बरस है रे,
हाय कैसा तरस है रे,
घर कि घर में सब जुड़े हैं,
सब कि इतने कब जुड़े हैं,
चार भाई चार बहिनें
भुजा भाई प्यार बहिनें,
और माँ बिन-पढ़ी मेरी,
दुख में वह गढ़ी मेरी,
माँ कि जिसकी गोद में सिर,
रख लिया तो दुख नहीं फिर,
माँ कि जिसकी स्नेह-धारा
का यहाँ तक भी पसारा,
उसे लिखना नहीं आता,
जो कि उसका पत्र पाता।
और पानी गिर रहा है,
घर चतुर्दिक घिर रहा है,
पिताजी भोले बहादुर,
वज्र-भुज नवनीत-सा उर,
पिताजी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
जो अभी भी दौड़ जाएँ,
जो अभी भी खिलखिलाएँ,
मौत के आगे न हिचकें,
शेर के आगे न बिचकें,
बोल में बादल गरजता,
काम में झंझा लरजता,
आज गीता-पाठ करके,
दंड दो सौ साठ करके,
खूब मुगदर हिला लेकर,
मठ उनकी मिला लेकर,
जब कि नीचे आए होंगे,
नैन जल से छाए होंगे।
हाय, पानी गिर रहा है,
घर नजर में तिर रहा है,
चार भाई चार बहिनें,
भुजा भाई प्यार बहिनें,
खेलते या खड़े होंगे,
नजर उनको पड़े होंगे।
पिताजी जिनको बुढ़ापा,
एक क्षण भी नहीं व्यापा,
रो पड़े होंगे बराबर,
पाँचवें का नाम लेकर,
पाँचवाँ मैं हूँ अभागा,
जिसे सोने पर सुहागा,
पिताजी कहते रहे हैं,
प्यार में बहते रहे हैं,
आज उनके स्वर्ण बेटे,
लगे होंगे उन्हें हेठे,
क्योंकि मैं उन पर सुहागा
बँधा बैठा हूँ अभागा।
और माँ ने कहा होगा,
दुख कितना बहा होगा
आँख में किसलिए पानी,
वहाँ अच्छा है भवानी,
वह तुम्हारा मन समझकर,
और अपनापन समझकर,
गया है सो ठीक ही है
यह तुम्हारी लीक ही है,
पाँव जो पीछे हटाता,
कोख को मेरी लजाता,
इस तरह होओ न कच्चे,
रो पड़ेंगे और बच्चे।
पिताजी ने कहा होगा,
हाय, कितना सहा होगा,
कहाँ, मैं रोता कहाँ हूँ,
धीर मैं खोता, कहाँ हूँ,
गिर रहा है आज पानी,
याद आता है भवानी,
उसे थी बरसात प्यारी,
रात दिन की झड़ी झारी,
खुले सिर नंगे बदन वह,
घूमता फिरता मगन वह,
बड़े बाड़े में कि जाता,
बीज लौकी का लगाता,
तुझे बतलाता कि बेला
ने फलानी फूल झेला,
तू कि उसके साथ जाती,
आज इससे याद आती,
मैं न रोऊँगा—कहा होगा,
और फिर पानी बहा होगा।
दृश्य उसके बाद का रे,
पाँचवें की याद का रे,
भाई पागल, बहिन पागल,
और अम्मा ठीक बादल,
और भौजी और सरला,
सहज पानी सहज तरला,
शर्म से रो भी न पाएँ,
खूब भीतर छटपटाएँ,
आज ऐसा कुछ हुआ होगा
आज सबका मन चुआ होगा।
अभी पानी थम गया है,
मन निहायत नम गया है,
एक-से बादल जमे हैं,
गगन-भर फैले रमे हैं,
ढेर है उनका, न फाँकें,
जो कि किरणें झुके-झाँकें,
लग रहे हैं वे मुझे यों,
माँ कि आँगन लीप दे ज्यों;
गगन-आँगन की लुनाई
दश-दिशा के मन में समाई
दश-दिशा चुपचाप है रे,
स्वस्थ की लय छाप है रे।
झाड़ आँखें बंद करके,
साँस स्थिर मंद करके,
हिले बिन चुपके खड़े हैं,
क्षितिज पर जैसे जड़े हैं
एक पंछी बोलता है,
घाव उर के खोलता है,
आदमी के उर बिचारे,
किसलिए इतनी तृषा रे,
तृषा जरा-सा दुख कितना,
सह सकेगा क्या कि इतना,
और इस पर बस नहीं है,
बस बिना कुछ रस नहीं है।
हवा आई उड़ चला तू,
लहर आई मुड़ चला तू,
लगा झटका टूट बैठा,
गिरा नीचे फूट बैठा,
तू कि प्रिय से दूर होकर,
बह चला रे पर होकर,
दुख भर क्या पास तेरे,
अश्रु सिंचित हास तेरे!
पिताजी का वेश मुझको,
दे रहा है क्लेश मुझको,
देह एक पहाड़ जैसे,
मन कि बड़ का झाड़ जैसे,
एक पत्ता टूट जाए,
बस कि धारा फूट जाए,
एक हल्की चोट लग ले,
दूध की नदी उमग ले,
एक टहनी कम न हो ले,
कम कहाँ कि ख़म न हो ले,
ध्यान कितना फिक्र कितनी,
डाल जितनी जड़ें उतनी!
इस तरह का हाल उनका,
इस तरह का ख्याल उनका,
हवा, उनको धीर देना,
यह नहीं जी चीर देना,
हे सजीले हरे सावन,
हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें,
पाँचवें को वे न तरसें,
मैं मजे में हूँ सही है,
घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब विरस है।
किंतु उनसे यह न कहना,
उन्हें देते धीर रहना,
उन्हें कहना लिख रहा हूँ,
उन्हें कहना पढ़ रहा हूँ,
काम करता हूँ कि कहना,
नाम करता हूँ कि कहना,
चाहते हैं लोग, कहना
मत करो कुछ शोक, कहना,
और कहना मस्त हूँ मैं,
कातने में व्यस्त हूँ मैं,
वजन सत्तर सेर मेरा,
और भोजन ढेर मेरा,
कूदता हूँ, खेलता हूँ,
दुख डटकर ठेलता हूँ,
और कहना मस्त हूँ मैं,
यों न कहना अस्त हूँ मैं,
हाय रे, ऐसा न कहना,
है कि जो वैसा न कहना,
कह न देना जागता हूँ,
आदमी से भागता हूँ।
कह न देना मौन हूँ मैं,
खुद न समझूँ कौन हूँ मैं,
देखना कुछ बक न देना,
उन्हें कोई शक न देना,
हे सजीले हरे सावन,
हे कि मेरे पुण्य पावन,
तुम बरस लो वे न बरसें,
पाँचवें को वे न तरसें।

कविता के मुख्य बिंदु

बिंदुसंक्षिप्त जानकारी
कविता का स्थानजेल
समयसन् 1942 का स्वतंत्रता आंदोलन
मुख्य संवेदनाघर और परिवार की याद
प्रकृति का माध्यमसावन, बादल, वर्षा, हवा, पेड़
परिवारमाँ, पिताजी, चार भाई, चार बहिनें तथा अन्य परिजन
कवि की इच्छाबादल परिवार को कवि के ठीक होने का संदेश दें
मुख्य संदेशपरिवार का प्रेम दूरी और कठिन परिस्थितियों में भी मन को जोड़कर रखता है।

शब्द-संपदा

शब्दअर्थ
घनेरा / घनाबहुत गाढ़ा
तिरना / तरनातैरना, उतराना
परितापअत्यधिक दुख, शोक
चतुर्दिकचारों ओर
वज्रबहुत कठोर
नवनीतताजा मक्खन
उरहृदय
झंझातेज हवा या आँधी
लरजनाकाँपना, दहलना
मूठमुट्ठी-भर वस्तु या मुट्ठी
अभागाभाग्यहीन
धीरदृढ़ और गंभीर
झारीपानी रखने का टोंटीदार बर्तन
बेलाएक सुगंधित फूल
फलानी / फलानाकोई व्यक्ति या वस्तु
निहायतबहुत अधिक
लुनाईसुंदरता, सलोनापन
क्षितिजजहाँ धरती और आकाश मिले दिखाई देते हैं
तृषातीव्र इच्छा, प्यास
अश्रुआँसू
हासहँसी, प्रसन्नता
क्लेशदुख, पीड़ा
बड़बरगद का पेड़
उमगउल्लास, जोश
ख़मझुका हुआ, टेढ़ापन
विरसनीरस, अप्रिय
कातनारुई या ऊन से धागा बनाना
अस्तडूबा हुआ, समाप्त

अभ्यास — मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्‍नलिखित प्रश्‍नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयक्ु‍त क््योों लगते हैैं?

1. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता कहाँ और क््योों लिखी?
  1. विदेश से मित्र के लिए
  2. यद्धभु मि से जनता के लिए
  3. जेल से परिवार के लिए
  4. यात्रा से किसी संंबंधी के लिए
उत्तर: (ग) जेल से परिवार के लिए।
कवि 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन के समय जेल में थे और वहीं उन्हें घर-परिवार की याद आई।
2. लगातार बरसता पानी कवि के मन की किस भावना का परिचायक है?
  1. उत्साह और आवेग
  2. भय और क्रोध
  3. साहस और उमंग
  4. चिंता और बेचैनी
उत्तर: (घ) चिंता और बेचैनी।
बारिश कवि के भीतर उठती घर की याद और बेचैनी को और गहरा करती है।
3. कविता में माँ की कैसी छवि उभरती है?
  1. कमजोर और निष्क्रिय
  2. स्नेहमयी और दृढ़
  3. शिक्षित और अनुशासनप्रिय
  4. सरल और उदासीन
उत्तर: (ख) स्नेहमयी और दृढ़।
माँ कवि को प्रेम करती है, लेकिन साथ ही उसे देश के लिए किए गए त्याग पर दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।
4. “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” पंक्ति के माध्यम से पिता के व्यक्तित्व की कैसी छवि प्रस्तुत की गई है?
  1. कर्मठ और सृजनशील
  2. साहसी और पराक्रमी
  3. दृढ़ और संवेदनशील
  4. प्रसन्नचित्त और सक्रिय
उत्तर: (ग) दृढ़ और संवेदनशील।
पिता बाहर से मजबूत और साहसी हैं, लेकिन भीतर से बहुत कोमल और भावुक हैं।
5. “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए” पंक्ति किस ओर संकेत करती है?
  1. पिता की कठोरता
  2. पिता की भावुकता
  3. वर्षा की तीव्रता
  4. पिता की निर्बलता
उत्तर: (ख) पिता की भावुकता।
पिता इतने संवेदनशील हैं कि छोटी-सी चोट भी उनके भीतर भावनाओं की धारा बहा सकती है।
6. “बहिन आई बाप के घर, हाय रे परिताप के घर” पंक्ति में ‘परिताप’ शब्द से क्या संकेत मिलता है?
  1. घर का समृद्ध होना
  2. घर की सजावट
  3. घर में दुख का वातावरण
  4. घर की शांति
उत्तर: (ग) घर में दुख का वातावरण।
कवि से दूर होने के कारण परिवार के घर में उसकी याद और दुख का वातावरण है।
7. “और कहना मस्त हूँ मैं” पंक्ति में कवि का ऐसा कहना किस बात की ओर संकेत करता है?
  1. कवि अपने जीवन में बहुत खुश है।
  2. अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
  3. घर के लोगों के प्रति उदासीन है।
  4. कवि प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत है।
उत्तर: (ख) अपने दुख को परिजनों से छिपाना चाहता है।
कवि नहीं चाहता कि उसके परिवार को जेल के कष्टों की चिंता हो।
8. इस कविता में किस बात को प्रमुखता से वर्णित किया गया है?
  1. घर की शांति और सुरक्षा
  2. घर के सदस्यों के बीच का संबंध
  3. घर के निर्माण की प्रक्रिया
  4. घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा
उत्तर: (घ) घर की याद और अकेलेपन की पीड़ा।
पूरी कविता का केंद्र घर और परिवार से दूर रहने की पीड़ा है।

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्‍नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

1. कविता में वर्णित पिता के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं का वर्णन कीजिए जिनसे उनका बहुआयामी रूप सामने आता है।
पिता साहसी, मजबूत, कर्मठ और प्रसन्नचित्त हैं। वे बुढ़ापे में भी सक्रिय रहते हैं। साथ ही वे बहुत भावुक और संवेदनशील हैं तथा बेटे को याद करके दुखी होते हैं। इसलिए उनका व्यक्तित्व बहुआयामी है।
2. “दुख डटकर ठेलता हूँ” यह कथन मनुष्य के संघर्षशील स्वभाव को उजागर करता है। कविता के आधार पर बताइए कि कठिन परिस्थितियों में कवि किस प्रकार धैर्य, साहस और त्याग का परिचय देता है?
कवि जेल की कठिन परिस्थितियों को सहता है और अपने परिवार की चिंता करता है। फिर भी वह अपने दुख को परिवार से छिपाना चाहता है। वह स्वतंत्रता के उद्देश्य से पीछे नहीं हटता। यही उसका धैर्य, साहस और त्याग है।
3. कविता में बार-बार वर्षा का वर्णन कवि के भावों को किस प्रकार व्यक्त करता है?
लगातार वर्षा कवि की बेचैनी, अकेलेपन और घर की याद को व्यक्त करती है। बारिश की आवाज और अँधेरा उसके मन के दुख को और गहरा करते हैं।
4. कविता से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए और भाव स्पष्ट कीजिए जिनसे माँ की भावनात्मक मजबूती का परिचय मिलता है।
“पाँव जो पीछे हटाता,
कोख को मेरी लजाता,
इस तरह होओ न कच्चे,
रो पड़ेंगे और बच्चे।”

इन पंक्तियों में माँ कवि को कमजोर न पड़ने की प्रेरणा देती है। वह दुखी होते हुए भी उसके देशहित के निर्णय का समर्थन करती है।
5. कविता का कौन-सा अंश आपको सबसे अधिक भावनात्मक और प्रभावी लगता है और क्यों?
माँ और पिताजी की कल्पित बातचीत वाला अंश सबसे अधिक भावनात्मक लगता है, क्योंकि उसमें माता-पिता का प्रेम, बेटे की चिंता और उससे दूर रहने की पीड़ा बहुत स्वाभाविक रूप से व्यक्त हुई है।

कविता का सौंदर्य

“गिर रहा पानी झरा-झर, हिल रहे पत्ते हरा-हर,
बह रही है हवा सर-सर, काँपते हैं प्राण थर-थर”

उपर्युक्त पंक्तियों में ध्वनि को व्यक्त करने वाले शब्द कविता को सुनने और पढ़ने में प्रभावशाली बनाते हैं। “झरा-झर”, “हरा-हर”, “सर-सर” और “थर-थर” से वर्षा, पत्तों, हवा और कवि की कंपकंपी का अनुभव होता है।

कविता की विशेषताएँ

विशेषताकविता से उदाहरण
स्मृति और दृश्य बिंब“घर नजर में तिर रहा है” — घर कवि की आँखों और स्मृति में दिखाई देता है।
लोकभाषा की सहजता“एक छिन सौ बरस है रे”, “हाय कैसा तरस है रे”
पंक्तियों का दोहराव“बहुत पानी गिर रहा है”, “घर नजर में तिर रहा है”
आलंकारिक प्रयोग“वज्र-भुज नवनीत-सा उर” — उपमा का प्रयोग।
प्राकृतिक दृश्यों और भावों का संयोजनवर्षा और बादलों के साथ कवि की घर की याद और बेचैनी जुड़ी है।
संबोधनात्मकता“हे सजीले हरे सावन”

कविता की संरचना

‘घर की याद’ कवि के भीतर उठते भावों की यात्रा है। वर्षा से शुरू होकर यह यात्रा घर की स्मृतियों, माता-पिता और भाई-बहनों की याद, उनके संभावित दुख और अंत में परिवार को सांत्वना देने की कवि की इच्छा तक पहुँचती है।

पानी गिरना सबेरा घर की याद माँ की स्मृति पिता की स्मृति भाई-बहनों की याद परिवार की चिंता सावन को संदेश परिवार को सांत्वना

कविता की संरचना — प्रश्न और उत्तर

1. कविता में चित्रित ‘घर’ एक भौतिक स्थान से बढ़कर भावनाओं और संबंधों के केंद्र के रूप में चित्रित हुआ है। वर्तमान में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के संदर्भ में संयुक्त परिवार और एकल परिवार की तुलना कीजिए और कारण सहित लिखिए कि दोनों की कौन-कौन-सी बातें आपको पसंद हैं और कौन-कौन-सी नापसंद?
संयुक्त परिवार में अधिक लोग साथ रहते हैं, इसलिए सहयोग और अपनापन अधिक मिलता है। एकल परिवार में स्वतंत्रता और निजी समय अधिक मिलता है। मुझे संयुक्त परिवार में आपसी सहयोग पसंद है और एकल परिवार में स्वतंत्रता पसंद है। दोनों में जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार संतुलन आवश्यक है।
2. कविता में बार-बार पानी गिरने का वर्णन है। लगातार बारिश होती रहे तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में किस प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों में फसल खराब, खेतों में जलभराव, सड़कें टूटने और बाढ़ की समस्या हो सकती है। शहरों में जलभराव, यातायात बाधित होना, बिजली की समस्या और बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
3. कविता में सावन के बादल का प्रयोग एक संचार माध्यम के रूप में किया गया है जिसके द्वारा कवि अपने परिवार तक संदेश भेज रहा है। कक्षा में संचार के नए-पुराने माध्यमों में अंतर बताते हुए चर्चा कीजिए और लिखिए।
पुराने समय में पत्र, दूत, संदेशवाहक और प्राकृतिक माध्यमों की कल्पना से संदेश पहुँचाए जाते थे। आज मोबाइल, फोन, ई-मेल, इंटरनेट और वीडियो कॉल से संदेश तुरंत पहुँच सकता है। पुराने माध्यम धीमे थे, जबकि आधुनिक माध्यम तेज और सुविधाजनक हैं।
4. भवानीप्रसाद मिश्र ने यह कविता स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कारावास में लिखी थी। अपने शिक्षक और पुस्तकालय की सहायता से ‘भारत का स्वतंत्रता संग्राम’ विषय पर लेख लिखिए।
भारत का स्वतंत्रता संग्राम लंबे समय तक चले संघर्ष का परिणाम था। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी शासन का विरोध किया। 1857 का विद्रोह, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन इस संघर्ष के महत्वपूर्ण चरण रहे। लाखों लोगों ने त्याग और बलिदान देकर स्वतंत्रता प्राप्ति का मार्ग बनाया। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।

रचनात्मक गतिविधियाँ

1. कल्पना कीजिए कि कवि की माँ को पत्र लिखना आता है। कविता में वर्णित उनकी छवि और अनुमान के आधार पर लिखिए कि वे कवि के लिए पत्र में क्या-क्या लिखतीं?
प्रिय बेटे,
तुम्हारी बहुत याद आती है। तुम वहाँ अपना ध्यान रखना। तुम्हारे पिता और भाई-बहन तुम्हें बहुत याद करते हैं। हमें तुम्हारे देश के लिए किए गए त्याग पर गर्व है। दुखी मत होना और हिम्मत बनाए रखना। हमें विश्वास है कि तुम ठीक हो।
तुम्हारी माँ
2. कविता में माँ और पिताजी के बीच कवि के विषय में की जाने वाली बातचीत का वर्णन है। उनकी इस बातचीत को संवाद-लेखन के रूप में प्रस्तुत कीजिए।
माँ: भवानी वहाँ ठीक होगा न?
पिताजी: हाँ, वह साहसी है। वह कठिनाइयों से नहीं डरता।
माँ: फिर भी मन तो उसके लिए चिंतित रहता है।
पिताजी: हमें उसके साहस पर गर्व होना चाहिए।
माँ: सही कहते हैं। उसे अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटना चाहिए।
पिताजी: हाँ, वह देश के लिए गया है। हमें उसे हिम्मत देनी चाहिए।
3. इस कविता में कवि ने सावन के बादल को संदेशवाहक बनाया है। अगर आपको किसी प्राकृतिक उपादान के माध्यम से अपने घर, मित्र या किसी संबंधी व्यक्ति को कोई संदेश भेजना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
मैं हवा को चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि वह हर जगह पहुँचती है। कल्पना में वह मेरा संदेश अपने प्रिय व्यक्ति तक पहुँचा सकती है।

व्याकरण की बात

1. स्थानीय भाषा के शब्द

“आज सबका मन चुआ होगा।”
उपर्युक्त पंक्ति में रेखांकित शब्द कवि की क्षेत्रीय/स्थानीय भाषा का शब्द है। कविता में स्थानीय भाषा के शब्दों का सहज प्रयोग हुआ है। कविता से कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। उनमें रेखांकित शब्दों का अर्थ स्पष्ट करते हुए उनसे नए वाक्य बनाइए।
पंक्तिशब्द का अर्थनया वाक्य
एक छिन सौ बरस है रेछिन = क्षणएक छिन में सब कुछ बदल गया।
तुझे बतलाता कि बेला/ने फलानी फूल झेलाफलानी = किसी विशेष/नाम न बताई गई वस्तु या व्यक्तिफलानी लड़की आज विद्यालय नहीं आई।
और भौजी और सरला, सहज पानी सहज तरलाभौजी = भाभी; सहज = स्वाभाविक/सरलभौजी ने मुझे प्यार से बुलाया।
मन कि बड़ का झाड़ जैसेबड़ = बरगद का पेड़बरगद का बड़ पेड़ बहुत विशाल था।

2. व्याकरणिक पहचान

(क) “बहुत पानी गिर रहा है”
  • ‘पानी’ शब्द है — संज्ञा
  • ‘बहुत’ शब्द है — विशेषण
  • ‘गिर रहा है’ है — क्रिया
(ख) “पिताजी जिनको बुढ़ापा, एक क्षण भी नहीं व्यापा”
  • ‘बुढ़ापा’ शब्द है — संज्ञा
  • ‘व्यापा’ शब्द है — क्रिया
  • ‘जिनको’ शब्द है — सर्वनाम
(ग) “खुले सिर नंगे बदन वह, घूमता फिरता मगन वह”
  • ‘खुले’ शब्द है — विशेषण
  • ‘वह’ शब्द है — सर्वनाम
  • ‘बदन’ शब्द है — संज्ञा
  • ‘फिरता’ शब्द है — क्रिया
(घ) “एक पत्ता टूट जाए, बस कि धारा फूट जाए”
  • ‘एक’ शब्द है — विशेषण
  • ‘फूट जाए’ है — क्रिया
  • ‘पत्ता’ शब्द है — संज्ञा
(ङ) “हे सजीले हरे सावन, हे कि मेरे पुण्य पावन”
  • ‘सजीले’ शब्द है — विशेषण
  • ‘मेरे’ शब्द है — सर्वनाम
  • ‘सावन’ शब्द है — संज्ञा

गतिविधि — मेरा परिवार-वृक्ष

1. कवि ने कविता में अपने परिवार का उल्लेख किया है। आप भी अपना एक परिवार-वृक्ष तैयार कीजिए और प्रत्येक सदस्य के व्यक्तित्व के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए।
नमूना:
दादा-दादी/नाना-नानी → माता-पिता → भाई-बहन → मैं

परिवार का प्रत्येक सदस्य अलग गुण रखता है। कोई मेहनती है, कोई स्नेही, कोई जिम्मेदार और कोई हँसमुख। परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे का सहयोग करते हैं।
2. कविता में प्रयुक्त ध्वनि आधारित शब्द (जैसे– झरा-झर, थर-थर, सर-सर) को पढ़कर एक छोटी-सी ऑडियो रिकॉर्डिंग या मौखिक पाठ तैयार कीजिए। बताइए कि ये शब्द कविता में कैसे वातावरण का निर्माण करते हैं?
“झरा-झर” वर्षा, “सर-सर” हवा और “थर-थर” कंपकंपी का अनुभव कराते हैं। इन शब्दों से कविता में वर्षा, ठंड, उदासी और बेचैनी का जीवंत वातावरण बनता है।

भाषा संगम

“घर कि घर में सब जुड़े हैं”
नीचे ‘घर’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
भाषा‘घर’ के लिए शब्द
हिंदीमकान, गृह, निवास
संस्कृतगृहम्
पंजाबीघर
उर्दूघर
कश्मीरीगॅर
सिंधीघरु
मराठीघर
गुजरातीघर
कोंकणीघर
नेपालीघर, आवास
बांग्लाघर, बाड़ी
असमियाघर
मणिपुरीयमु
ओड़िआघर, गृह, आलय, आबास
तेलुगुइल्लु
तमिलवीडु, इल्लम
मलयालमवीडु, इल्लम
कन्नड़गृह, मने
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘घर’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
English: House / Home
उदाहरण: “घर” को अंग्रेज़ी में House या Home कहते हैं।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
अपनी मातृभाषा के अनुसार लिखें।
वाक्य: “घर में सब जुड़े हैं।”
मेरी मातृभाषा: __________
मेरी मातृभाषा में वाक्य: ______________________________
• शिक्षक की सहायता से ऐसी किसी अन्य कविता अथवा कहानी के बारे में जानकारी एकत्रित कीजिए जिसमें घर, परिवार की याद जैसी भावनाएँ चित्रित हों। साथ ही पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से उस रचना को कक्षा में पढ़कर एक संक्षिप्त प्रस्तुति दीजिए।
यह गतिविधि विद्यार्थी स्वयं करें। प्रस्तुति में रचना का नाम, लेखक, मुख्य भाव और घर/परिवार की याद से संबंधित दो-तीन बातें लिखें।
• ‘घर की याद’ कविता में कवि सावन के बादलों को दूत बना कर अपने परिवार के पास संदेश ले जाने का आग्रह करता है। प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में करने के अनेक उदाहरण साहित्य में मिलते हैं। शिक्षक, पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से ऐसी कुछ रचनाओं के बारे में पता लगाइए और बताइए कि इनमें प्रकृति के किन उपादानों को संदेशवाहक बनाया गया है?
उदाहरण के रूप में साहित्य में बादल, हवा, पवन, पक्षी और नदी को संदेशवाहक के रूप में कल्पित किया गया है। विद्यार्थी किसी एक रचना का नाम और उसमें प्रयुक्त प्राकृतिक संदेशवाहक लिखकर कक्षा में साझा कर सकते हैं।

अतिरिक्त कविता — मुख्य भाव

नीचे दी गई अतिरिक्त कविता में सुबह, चिड़ियों का गीत, ठंडी हवा, चमकते तारे और चाँद के माध्यम से ईश्वर की याद व्यक्त की गई है। कवि प्रकृति के सुंदर रूपों को देखकर सृष्टि के रचयिता को याद करता है।

जब बहुत सुबह चिड़ियाँ उठकर, कुछ गीत खुशी के गाती हैं।
कलियाँ दरवाजे खोल-खोल, जब दुनिया पर मुसकाती हैं।।
जब ठंडी-ठंडी हवा कहीं से, मस्ती ढोकर लाती है।
हे जग के सिरजनहार प्रभो! तब याद तुम्हारी आती है।।

चुपचाप चमकते तारों की, महफिल जब रात सजाती है।
जब चाँद शान से उठता है, दिल की दुनिया जग जाती है।।
कुछ पता नहीं, लेकिन जरूर, वह संदेशा कुछ पाती है।
हे जग के सिरजनहार प्रभो! तब याद तुम्हारी आती है!!

कवि — रामनरेश त्रिपाठी

परीक्षा के लिए त्वरित पुनरावृत्ति

  • ‘घर की याद’ के कवि — भवानीप्रसाद मिश्र
  • कविता की केंद्रीय संवेदना — घर और परिवार की याद
  • कविता लिखने का समय — 1942 का स्वतंत्रता आंदोलन
  • कविता लिखने का स्थान — जेल
  • मुख्य प्राकृतिक तत्व — वर्षा, बादल, हवा, पेड़
  • बादल को कवि ने — संदेशवाहक बनाया है।
  • माँ — स्नेहमयी और दृढ़
  • पिताजी — साहसी, मजबूत और भावुक
  • “वज्र-भुज नवनीत-सा उर” — पिता के बाहरी बल और अंदर की कोमलता का संकेत।
  • “दुख डटकर ठेलता हूँ” — कठिनाइयों से संघर्ष करने का भाव।
  • “एक छिन सौ बरस है रे” — वियोग में समय बहुत लंबा लगना।
  • “घर नजर में तिर रहा है” — स्मृति में घर का जीवंत हो उठना।
  • “और कहना मस्त हूँ मैं” — कवि अपने दुख को परिवार से छिपाना चाहता है।

एक पंक्ति में अध्याय

‘घर की याद’ परिवार के प्रति गहरे प्रेम, घर से दूर रहने की पीड़ा और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य तथा त्याग बनाए रखने की मार्मिक कविता है।