भारति, जय, विजय करे!
कक्षा 9 हिंदी
कवि – सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
अध्याय 10अध्याय-सार
“भारति, जय, विजय करे!” सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की देशप्रेम से ओत-प्रोत
प्रेरणादायक कविता है। कवि भारतमाता की विजय और समृद्धि की कामना करता है।
कवि भारतभूमि को “कनक-शस्य-कमलधरे” कहकर उसकी कृषि-संपन्नता और सुंदरता को
प्रस्तुत करता है। समुद्र को भारतमाता के चरण धोने वाला, गंगा को गले का हार
और हिमालय को मुकुट के रूप में चित्रित किया गया है।
कविता में भारत की नदियों, पर्वतों, वनों, फूलों और खेतों के प्राकृतिक सौंदर्य
के साथ उसकी ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को भी दर्शाया गया है।
“प्रणव ओंकार” और अनेक दिशाओं में गूँजती ध्वनियाँ भारत की आध्यात्मिक तथा
सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं।
पूरी कविता
भारति, जय, विजय करे!
कनक-शस्य-कमलधरे!
लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल मिलि
धोता शुचि चरण युगल
स्तव कर बहु-अर्थ-भरे!
तरु-तृण-वृन-लता वसन,
अचल में खचित सुमन;
गंगा ज्योतिर्जल-कण
धवल धार हार गले।
मुकुट शुभ्र हिम-तुषार,
प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!
भारति, जय, विजय करे!
कवि-परिचय : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
जन्म
1899, महिषादल, बंगाल
मूल निवास
गढ़ाकोला, उन्नाव, उत्तर प्रदेश
भाषाएँ
संस्कृत, बंगला और अंग्रेज़ी का स्वाध्याय से ज्ञान
निधन
1961
निराला छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। उन्होंने मुक्त छंद का प्रयोग किया।
उनकी रचनाओं में प्रकृति, विद्रोह, क्रांति, प्रेम, दर्शन और पीड़ितों के प्रति
गहरी सहानुभूति दिखाई देती है।
प्रमुख काव्य-कृतियाँ – अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते।
संक्षिप्त नोट्स
मुख्य भाव
देशप्रेम और राष्ट्रगौरव
भारत की समृद्धि
सोने जैसी फसलें और कृषि-संपन्नता
प्रकृति
समुद्र, गंगा, हिमालय, वन, लता और फूल
संस्कृति
विविध विचार, स्वर, पर्व और परंपराएँ
ज्ञान
ओंकार भारत की आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक
भाषा
संस्कृतनिष्ठ और सामासिक शब्दों से समृद्ध
कविता के प्रमुख काव्य-चित्र
| काव्य-चित्र | अर्थ |
|---|
| भारत माता के चरण | समुद्र का जल भारतमाता के चरणों को धोता है। |
| भारत का वस्त्र | पेड़, तिनके, वन और लताएँ वस्त्र के समान हैं। |
| गंगा का हार | गंगा की धवल जलधारा गले के हार जैसी है। |
| हिमालय का मुकुट | हिमालय भारत के सिर पर सुंदर मुकुट जैसा दिखाई देता है। |
| ओंकार | भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक। |
मेरे उत्तर मेरे तर्क
निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?
1
“भारति, जय, विजयकरे” कविता में विशेष रूप से—
(क) भारत की भौगोलिक संरचना की प्रशस्ति की गई है।
(ख) भारत की सांस्कृतिक विविधता बताई गई है।
(ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
(घ) भारत के खनिज पदार्थों के बारे में बताया गया है।
उत्तर: (ग) भारत के ज्ञान, प्रकृति और संपन्नता की प्रशंसा की गई है।
कविता में प्रकृति, कृषि, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का वर्णन है।
2
“कनक-शस्य-कमल धरे” पंक्ति का भावार्थ है—
(क) भारत की धन-धान्य संपन्नता
(ख) भारत की नदियों का सौंदर्य
(ग) भारत के लोक-जीवन की सुंदरता
(घ) भारत की सैन्य शक्ति और औद्योगिक विकास
उत्तर: (क) भारत की धन-धान्य संपन्नता।
3
समस्त विश्व में भारत के महत्त्व का उद्घोष करने वाली पंक्तियाँ हैं—
(क) गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले
(ख) गर्जितोर्मि सागर-जल / मिलि धोता शुचि चरण युगल
(ग) भारति, जय, विजयकरे / कनक-शस्य-कमलधरे!
(घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!
उत्तर: (घ) ध्वनित दिशाएँ उदार / शतमुख-शतरव-मुखरे!
4
कविता की भाषा और शैली किस विशेषता से संपन्न है?
(क) सरल, बोल-चाल की भाषा
(ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त
(ग) सरस और हास्य-व्यंग्यपूर्ण
(घ) संवादात्मक और विश्लेषणात्मक
उत्तर: (ख) संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त।
5
भारत के वस्त्रों में ‘तरु-तृण-वृन-लता’ और गले में ‘गंगा-धारा’ को चित्रित कर कवि किस प्रकार की चेतना का संदेश देते हैं?
(क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक
(ख) राष्ट्रीयता और देशप्रेम
(ग) ऐतिहासिक और भौगोलिक
(घ) सामाजिक और राजनीतिक
उत्तर: (क) पर्यावरणीय और सांस्कृतिक।
अर्थ और भाव
1
“लंका पदतल शतदल,
गर्जितोर्मि सागर-जल मिलि
धोता शुचि चरण युगल!”
भाव:
कवि भारत को देवी के रूप में देखते हैं। भारतमाता के चरणों के नीचे लंका
कमल के समान है और समुद्र की गरजती लहरें उनके पवित्र चरणों को धोती हैं।
इससे भारत की भव्यता और गौरव प्रकट होता है।
2
“प्राण प्रणव ओंकार,
ध्वनित दिशाएँ उदार,
शतमुख-शतरव-मुखरे!”
भाव:
भारत की दिशाओं में ओंकार की पवित्र ध्वनि और अनेक प्रकार के स्वर गूँज रहे हैं।
यह भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।
मेरी समझ मेरे विचार
1
कविता में कवि की किस भावना की अभिव्यक्ति मिलती है?
उत्तर:
कविता में कवि की गहरी देशभक्ति, भारत के प्रति गर्व और भारत की विजय की कामना
की अभिव्यक्ति मिलती है।
2
कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किस प्रकार किया गया है? क्या आप मानते हैं कि प्रकृति का संरक्षण करना भी देशप्रेम का काम है? क्यों?
उत्तर:
कवि ने समुद्र, गंगा, हिमालय, वन, पेड़, लता और फूलों के माध्यम से भारत का
प्राकृतिक सौंदर्य दिखाया है। हाँ, प्रकृति का संरक्षण देशप्रेम है क्योंकि
प्रकृति देश की अमूल्य संपत्ति है।
3
“कनक-शस्य-कमलधरे!” पंक्ति भारतभूमि की किन-किन विशेषताओं की ओर संकेत कर रही है?
उत्तर:
यह भारत की कृषि-संपन्नता, धन-धान्य, उपजाऊ भूमि और सुंदरता की ओर संकेत करती है।
4
“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट बताया गया है, क्यों?
उत्तर:
हिमालय भारत के उत्तर में ऊँचा और भव्य दिखाई देता है। बर्फ से ढका होने के कारण
वह मुकुट की तरह सुंदर और गौरवशाली लगता है।
कविता का सौंदर्य
नीचे दी गई पंक्तियों में कवि ने चित्रात्मक भाषा का प्रयोग करते हुए भारतभूमि
का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया है—
“भारति, जय, विजयकरे!
कनक-शस्य-कमलधरे!”
| विशेषता | कविता की पंक्ति |
|---|
| प्रकृति का मानवीकरण | “धोता शुचि चरण युगल” |
| आलंकारिक प्रयोग | “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” |
| समस्त पद / सामासिक पद | “कनक-शस्य-कमलधरे” |
| संस्कृतनिष्ठ भाषा | “प्राण प्रणव ओंकार” |
मेरी समझ मेरे विचार – आगे के प्रश्न
1
स्वतंत्रता-पूर्व लिखी इस कविता में भारत को ज्ञान, कृषि और संस्कृति के प्रतीक/परिचायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वर्तमान संदर्भ में यदि आपको भारत को एक नए रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिले तो आप भारत की किन विशेषताओं और विविधताओं को सम्मिलित करेंगे?
उत्तर:
मैं भारत की वैज्ञानिक प्रगति, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान, कृषि, शिक्षा,
लोकतंत्र, विविध भाषाओं, कला, संस्कृति, खेल और प्राकृतिक संपदा को शामिल करूँगा।
2
“शतमुख-शतरव-मुखरे!” पंक्ति में भारत के विविध पर्व, उत्सव और रीति-रिवाज किस प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करते हैं?
उत्तर:
भारत में अलग-अलग क्षेत्रों के पर्व और परंपराएँ अलग हैं, फिर भी सभी लोग मिलकर
उन्हें मनाते हैं। इससे विविधता में एकता और राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
3
भारत को सुदृढ़ करने में इसकी प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के महत्त्व को बताते हुए संक्षिप्त लेख लिखिए।
उत्तर:
प्रकृति हमें जल, वायु और भोजन देती है। संस्कृति हमें अपनी पहचान और मूल्यों से
जोड़ती है। ज्ञान-परंपरा हमें अनुभव और नई पीढ़ी को सीख देती है। इन तीनों की
रक्षा भारत को मजबूत बनाती है।
4
कविता में गंगा को भारत के स्वच्छ और श्वेत हार एवं हिमालय को मुकुट के रूप में अभिव्यक्त किया गया है। वर्तमान संदर्भ में बताइए कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन ने हमारी नदियों और हिमालय को किस प्रकार प्रभावित किया है?
उत्तर:
प्रदूषण से नदियों का जल गंदा हो रहा है। जलवायु परिवर्तन से हिमालयी हिमनदों,
जलस्रोतों और पर्वतीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए स्वच्छता और
पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है।
विविध रंग भारत के
आप अपने कक्षा-समूह में मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित एक पावरपॉइंट प्रस्तुति / पोस्टर/चार्ट/कोलाज तैयार कीजिए और इसे अपनी कक्षा में दिखाइए। आप भारत के विभिन्न राज्यों पर केंद्रित पावरपॉइंट प्रस्तुति /पोस्टर/चार्ट/कोलाज भी बना सकते हैं।
मॉडल गतिविधि:
किसी भी पाँच राज्यों को चुनकर उनकी भाषा, भोजन, वेशभूषा, लोकनृत्य, पर्व,
कला और प्रमुख स्थल दिखाएँ। अंत में “विविधता में एकता” का संदेश दें।
1
मान लीजिए आपको भारत को एक मनुष्य के रूप में कल्पित करते हुए सुसज्जित करने का अवसर मिले तो आप अपने राज्य के किन सांस्कृतिक, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चिह्नों, पुष्पों आदि का प्रयोग कर उसकी साज-सज्जा करेंगे?
मॉडल उत्तर:
मैं अपने राज्य की पारंपरिक वेशभूषा, स्थानीय आभूषण, लोककला, प्रमुख पुष्प और
सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रयोग कर भारतमाता को सजाऊँगा/सजाऊँगी। इससे अपने
राज्य की संस्कृति का प्रतिनिधित्व होगा।
2
भारत पर आधारित एक डाक टिकट, पोस्टर या पुस्तक के लिए आवरण पृष्ठ बनाइए और बताइए कि आप उसमें किन-किन प्रतीकों को सम्मिलित करेंगे और क्यों?
मॉडल उत्तर:
मैं तिरंगा, हिमालय, गंगा, कमल, खेत, भारत का मानचित्र और विभिन्न सांस्कृतिक
प्रतीकों को शामिल करूँगा। ये भारत की प्रकृति, कृषि, एकता और संस्कृति को दर्शाते हैं।
3
नदी की यात्रा – गंगा नदी की अपने उद्गम से लेकर बंगाल की खाड़ी में विलीन होने तक की पूरी यात्रा के बीच में आने वाली प्राकृतिक, सांस्कृतिक, भाषिक आदि विशेषताओं का वर्णन करते हुए एक रोचक यात्रा-वृत्तांत लिखिए। (संकेत– पर्वतीय सौंदर्य से लेकर गंगासागर तक की संस्कृति इत्यादि)
मॉडल उत्तर:
गंगा की यात्रा हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र से आरंभ होती है। मार्ग में वह अनेक
नगरों, गाँवों और तीर्थस्थलों से होकर गुजरती है। उसके किनारे अलग-अलग भाषाएँ,
भोजन, वेशभूषा और धार्मिक परंपराएँ दिखाई देती हैं। वाराणसी और प्रयागराज जैसे
स्थानों पर गंगा से जुड़ी गहरी सांस्कृतिक आस्था दिखाई देती है। अंत में गंगा
बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है।
व्याकरण की बात – बहुभाषी देश हमारा
भारत की एक विशेषता उसकी बहुभाषिकता है। यदि आपको एक सचेत नागरिक के रूप में भारत से अपनी मातृभाषा में संवाद का अवसर मिले तो आप किन विषयों पर और क्या-क्या संवाद करना चाहेंगे? इन संवादों को अपनी मातृभाषा और हिंदी में लिखिए। (संकेत– समाज, पर्यावरण, संस्कृति आदि।)
मॉडल उत्तर:
मैं समाज, पर्यावरण, शिक्षा और संस्कृति जैसे विषयों पर संवाद करना चाहूँगा।
पर्यावरण पर हम पेड़ लगाने, जल बचाने और स्वच्छता बनाए रखने की बात कर सकते हैं।
संस्कृति पर हम अपनी भाषाओं और परंपराओं के संरक्षण पर चर्चा कर सकते हैं।
नोट: विद्यार्थी इसी संवाद को अपनी मातृभाषा में भी लिखें।
मातृभाषा और भाव
“स्तव कर बहु-अर्थ-भरे” उपर्युक्त पंक्ति में भारत की प्रशंसा विविध अर्थों में की गई है। आप भी अपनी मातृभाषा में भारत की स्तुति के लिए एक कविता की रचना कीजिए और उसका भावार्थ हिंदी में भी लिखिए।
मॉडल कविता:
मेरा भारत प्यारा है,
सबसे न्यारा हमारा है।
पर्वत, नदियाँ, खेत सुहाने,
इसके रंग हैं मन को भाने।
हिंदी भावार्थ:
भारत अपनी प्राकृतिक सुंदरता, विविध संस्कृति और एकता के कारण अत्यंत सुंदर
और प्रिय देश है। विद्यार्थी इसे अपनी मातृभाषा में स्वयं भी लिख सकते हैं।
समास – समस्त पद एवं विग्रह
समास का अर्थ है संक्षेप। दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को
समस्त पद कहते हैं। समस्त पद को अलग-अलग करके उसका अर्थ बताना समास-विग्रह कहलाता है।
कविता में से चुनकर कुछ सामासिक पद (शब्द) नीचे दिए गए हैं। उनके समास-विग्रह अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
शतदल, ज्योतिर्जल, शतमुख, सागरजल
| समस्त पद | समास-विग्रह |
|---|
| शतदल | शत हैं दल जिसके — कमल |
| ज्योतिर्जल | ज्योति के समान जल / प्रकाशमय जल |
| शतमुख | शत हैं मुख जिसके |
| सागरजल | सागर का जल |
अलंकार – समझ और प्रयोग
अनुप्रास अलंकार
जब किसी वर्ण की बार-बार आवृत्ति होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
रूपक अलंकार
जब उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप कर दिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
उत्तर:
“शतमुख-शतरव-मुखरे!” — ‘श’ वर्ण की पुनरावृत्ति।
“ध्वनित दिशाएँ उदार” — ध्वनि-सौंदर्य उत्पन्न होता है।
(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
उत्तर:
“मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” — हिमालय को भारत का मुकुट माना गया है।
“गंगा ज्योतिर्जल-कण / धवल धार हार गले” — गंगा को भारतमाता के गले का हार माना गया है।
मिलकर लें शपथ
“तरु-तृण-वृन-लता वसन/अचल में खचित सुमन” वन, लता, पुष्प आदि भारत के अमूल्य प्राकृतिक संसाधन हैं। इनके संरक्षण के लिए सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियमों के बारे में सूचना एकत्रित कीजिए और वन संरक्षण के लिए बनाए नियमों पर विचार कीजिए।
मॉडल उत्तर:
वन और वन्यजीव संरक्षण के लिए भारत में विभिन्न कानून और नियम बनाए गए हैं।
हमें पेड़ों की कटाई रोकनी चाहिए, अधिक से अधिक पौधे लगाने चाहिए, वन्यजीवों की
रक्षा करनी चाहिए और जंगलों में कचरा नहीं फैलाना चाहिए।
भाषा संगम
“कनक-शस्य-कमलधरे” कविता में आए ‘शस्य’ शब्द का अर्थ ‘उपज’ भी होता है। नीचे ‘उपज’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
| भाषा | उपज / शस्य के लिए शब्द |
|---|
| हिंदी | उपज, पैदावार, फसल |
| संस्कृत | शस्यम् |
| पंजाबी | उपज, पैदावार |
| उर्दू | पैदावार |
| कश्मीरी | पैदावार |
| सिंधी | उपज, पैदावार |
| मराठी | पीक |
| गुजराती | ऊपज, पेदाश |
| कोंकणी | पीक |
| नेपाली | उपज |
| बांग्ला | फसल |
| असमिया | शस्य, खेती, फसल |
| ओड़िया | फसल, खेती |
| तेलुगु | पंट |
| तमिल | विळैच्चल |
| मलयालम | विळव |
| कन्नड़ | फसल |
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘शस्य’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उत्तर: English में ‘शस्य/फसल’ के लिए Crop शब्द प्रयोग होता है।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
उत्तर: विद्यार्थी अपने क्षेत्र की मातृभाषा में “शस्य का अर्थ उपज या फसल है”
लिखें।
अतिरिक्त पठन – जय जय भारतमाता
जय जय भारतमाता!
तेरा बाहर भी घर जैसा रहा प्यार ही पाता।
ऊँचा हिया हिमालय तेरा
उसमें कितना दर्द भरा
फिर भी आग दबाकर अपनी
रखता है वह हमें हरा
सौ सोतों से फूट-फूटकर पानी टूटा आता
जय जय भारतमाता!
– मैथिलीशरण गुप्त
देशप्रेम से संबंधित अन्य कविताएँ पुस्तकालय, इंटरनेट से खोजकर पढ़िए और किसी एक कविता का कक्षा में वाचन भी कीजिए।
गतिविधि: विद्यार्थी देशप्रेम की कोई कविता चुनकर उसका भावपूर्वक वाचन करें।
इस कविता की तरह ही संस्कृतनिष्ठ शब्दावली से युक्त निराला की एक अन्य कविता, ‘वर दे, वीणावादिनि वर दे!’ पुस्तकालय, इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
गतिविधि: कविता पढ़कर उसमें आए संस्कृतनिष्ठ शब्दों की सूची बनाइए।
शब्द-संपदा
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|
| भारति / भारती | सरस्वती, वाणी, भारतमाता |
| कनक | सोना |
| शस्य | फसल, अनाज, उपज |
| पदतल | पैरों के नीचे का भाग |
| शतदल | कमल |
| गर्जितोर्मि | गरजती हुई लहरें |
| शुचि | पवित्र, स्वच्छ |
| युगल | जोड़ा |
| स्तव | प्रशंसा, स्तुति |
| तरु | पेड़ |
| तृण | घास, तिनका |
| लता | बेल |
| वसन | वस्त्र |
| अचल | अंचल, प्रदेश का भाग |
| खचित | जड़ा हुआ, अंकित |
| सुमन | फूल |
| ज्योतिर्जल | प्रकाशमय जल |
| धवल | सफेद, उजला |
| धार | जल की धारा |
| शुभ्र | उज्ज्वल, सफेद |
| हिम | बर्फ |
| तुषार | बर्फ, पाला |
| प्राण | जीवन, साँस |
| प्रणव | ओंकार, ॐ |
| ओंकार | ॐ की पवित्र ध्वनि |
| उदार | विशाल, दयालु |
| शतमुख | सौ मुख वाला |
| शतरव | अनेक प्रकार की ध्वनियाँ |
| मुखर | ध्वनि करने वाला, बोलता हुआ |
परीक्षा के लिए अतिरिक्त अभ्यास
1
“भारति, जय, विजयकरे!” का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: भारत के प्रति देशप्रेम और भारत की विजय की कामना।
2
कवि ने गंगा को किस रूप में प्रस्तुत किया है?
उत्तर: भारतमाता के गले के धवल हार के रूप में।
3
कवि ने हिमालय को क्या कहा है?
उत्तर: भारत का मुकुट।
4
“कनक-शस्य” का क्या अर्थ है?
उत्तर: सोने जैसी चमकने वाली फसलें।
5
कविता में समुद्र का क्या कार्य बताया गया है?
उत्तर: समुद्र भारतमाता के पवित्र चरणों को धोता है।
6
कविता की भाषा कैसी है?
उत्तर: संस्कृतनिष्ठ, काव्यात्मक और सामासिक शब्दों से समृद्ध।
7
कविता में भारत की कौन-कौन सी प्राकृतिक वस्तुएँ आई हैं?
उत्तर: समुद्र, गंगा, हिमालय, पेड़, तृण, लता और फूल।
8
कविता में “ओंकार” किसका प्रतीक है?
उत्तर: भारत की आध्यात्मिक चेतना का।
एक नज़र में पूरा अध्याय
| बिंदु | याद रखने योग्य बात |
|---|
| कवि | सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ |
| मुख्य भावना | देशप्रेम और राष्ट्रगौरव |
| कनक-शस्य | सोने जैसी फसलें |
| गंगा | भारत के गले का हार |
| हिमालय | भारत का मुकुट |
| समुद्र | भारत के चरण धोने वाला |
| ओंकार | आध्यात्मिक चेतना |
| भाषा | संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त |
| प्रमुख अलंकार | अनुप्रास और रूपक |
| मुख्य संदेश | भारत की प्रकृति, संस्कृति और ज्ञान का सम्मान तथा संरक्षण |