क्या लिखूँ?
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी | कक्षा 9 हिंदी | पाठ के नोट्स एवं पुस्तक समाधान
अध्याय सारांश
‘क्या लिखूँ?’ पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का एक रोचक और आत्मपरक निबंध है। इसमें लेखक निबंध लिखने की प्रक्रिया, विषय-चयन, सामग्री-संग्रह, रूपरेखा, शैली और भावों के बारे में अपने विचार प्रस्तुत करते हैं।
लेखक को नमिता और अमिता के लिए दो विषयों पर निबंध लिखना है— ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’। लेखक आदर्श निबंध लिखने के लिए विभिन्न निबंधकारों और आचार्यों के विचारों को याद करता है। इसी क्रम में वह मानटेन की अनुभव-आधारित और स्वच्छंद लेखन-पद्धति को उपयोगी मानता है।
लेखक बताता है कि दूर की वस्तुएँ या परिस्थितियाँ अक्सर अधिक सुंदर लगती हैं। तरुणों को भविष्य अच्छा लगता है, जबकि वृद्धों को अतीत सुखद लगता है। इसी प्रकार समाज में सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है, क्योंकि समय के साथ नए दोष और नई सुधार-आवश्यकताएँ पैदा होती रहती हैं।
लेख का मुख्य संदेश है कि अच्छा निबंध केवल नियमों से नहीं बनता। लेखक के वास्तविक अनुभव, विचार, भावनाएँ और सहज अभिव्यक्ति भी निबंध को जीवंत और प्रभावशाली बनाती हैं।
पाठ के छोटे और आसान नोट्स
1. लेखक
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार थे। उनका जन्म 1894 में खैरागढ़, राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनका निधन 1971 में हुआ।
2. प्रमुख रचनाएँ
पंच-पात्र, पद्म-वन, प्रबंध पारिजात, कुछ बिखरे पन्ने, अशदल, शतदल, झलमला, त्रिवेणी, विश्व साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श और हिंदी उपन्यास साहित्य आदि।
3. निबंध के दो प्रमुख अंग
- सामग्री – विषय से संबंधित विचार और जानकारी।
- शैली – विचारों को व्यक्त करने का ढंग।
4. आदर्श निबंध के लिए आवश्यक बातें
- विषय का चयन
- सामग्री का संग्रह
- विचारों का चिंतन
- रूपरेखा निर्माण
- उचित शैली
- भावों का विस्तार
- सुसंगत लेखन
- प्रभावी समापन
5. मानटेन की पद्धति
मानटेन ने अपने देखे, सुने और अनुभव किए हुए जीवन को निबंधों में लिखा। उनकी शैली सहज, स्वच्छंद और अनुभव-आधारित थी।
6. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’
दूर की वस्तु या परिस्थिति हमें अक्सर अधिक अच्छी लगती है क्योंकि हमें उसकी वास्तविक कठिनाइयों का अनुभव नहीं होता।
7. तरुण और वृद्ध
तरुण भविष्य को उज्ज्वल मानते हैं, जबकि वृद्ध अपने अतीत को सुखद समझते हैं। दोनों वर्तमान से किसी न किसी कारण असंतुष्ट रहते हैं।
8. समाज-सुधार
समाज में सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है। समय के साथ नए दोष उत्पन्न होते हैं और उन्हें दूर करने के लिए नए सुधारों की आवश्यकता होती है।
9. भाषा के मुख्य बिंदु
- समास
- उपसर्ग
- प्रत्यय
- भाव-विस्तार
- एक शब्द अनेक
- लोकोक्ति
पाठ में आया पद्य
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।
यह अमीर खुसरो की प्रसिद्ध अनमेलियों में से एक उदाहरण है। लेखक इसका प्रयोग एक ही लेख में अनेक विषयों को समेटने की अपनी कठिनाई समझाने के लिए करता है।
अभ्यास – मेरे उत्तर, मेरे तर्क
पृष्ठ 31–35
1. “हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” निबंध में ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
(ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
(ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
(घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
यहाँ ‘हैट’ लेखक के भावों और ‘खूँटी’ विषय का प्रतीक है। लेखक बताता है कि निबंध में विषय से अधिक लेखक के भाव महत्वपूर्ण होते हैं।
2. “उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
(ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
(ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
(घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
लेखक मानटेन की अनुभव-आधारित और स्वच्छंद लेखन-पद्धति को अपनाने का निर्णय करता है।
3. “तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
(ख) ज्ञान और शिक्षा
(ग) परिश्रम और उपलब्धि
(घ) अभिलाषा और अनुभव
तरुण भविष्य की अभिलाषा रखते हैं, जबकि वृद्ध अपने अनुभवों से अतीत को सुखद मानते हैं।
4. निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
(ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
(ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
(घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चारों स्त्रियों की इच्छाओं को पूरा किया था। लेखक इसी उदाहरण से एक साथ दो विषयों पर लिखने की बात समझाता है।
5. निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
(ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
(ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
(घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
हर युग में नए दोष पैदा होते हैं, इसलिए समाज-सुधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।
मेरी समझ, मेरे विचार
1. निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लेखक के मन में एक विशेष मानसिक स्थिति आती है और भाव अपने-आप उमड़ते हैं, जिससे लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है। इसके विपरीत बख्शी जी कहते हैं कि उन्हें निबंध लिखने के लिए सोचना, चिंतन करना और मेहनत करनी पड़ती है।
2. लेखक के अनुसार वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर दोनों की असंतुष्टि के कारण भिन्न हैं। आपके विचार से उनकी असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
तरुण भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं, इसलिए उन्हें वर्तमान में कमियाँ दिखाई देती हैं। वृद्ध अपने पुराने समय को अच्छा मानते हैं और वर्तमान में हुए बदलावों से असंतुष्ट हो सकते हैं।
3. नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके द्वारा सुझाए गए विषयों पर निबंध लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
नमिता ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और अमिता ‘समाज-सुधार’ पर निबंध लिखवाना चाहती हैं। लेखक को दोनों विषयों पर पर्याप्त सामग्री जुटाने, रूपरेखा बनाने और कम समय में लंबे निबंध तैयार करने में कठिनाई होती है।
4. निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप किसी भी विषय पर निबंध लिखने से पहले किस तरह की तैयारी करते हैं?
आचार्यों ने निबंध छोटा और सुंदर रखने, सामग्री एकत्र करने, विचारों को व्यवस्थित करने, रूपरेखा बनाने और भाषा में प्रवाह रखने की युक्तियाँ सुझाई हैं। मैं विषय का अध्ययन करता/करती हूँ, मुख्य बिंदु लिखता/लिखती हूँ और फिर रूपरेखा बनाकर निबंध लिखता/लिखती हूँ।
5. मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
देखने, सुनने और अनुभव करने से लेखक को वास्तविक जीवन की सामग्री मिलती है। इससे निबंध अधिक स्वाभाविक, सच्चा, रोचक और प्रभावशाली बनता है।
निबंध लिखने की कला
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ ‘बाँधना’ है। निबंध गद्य की वह विधा है जिसमें किसी विषय पर अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है।
विषय चयन → प्रेरणा → सामग्री संग्रह → रूपरेखा निर्माण → शैली निर्धारण → भाव-विस्तार → लेखन → समापन
दिए गए आरेख के आधार पर एक निबंध लिखिए। अगर आपको निबंध लेखन का कोई और ढंग बेहतर लगता है तो उसे ऐसे ही आरेख से दर्शाइए और बताइए कि आपको वह ढंग क्यों बेहतर लगता है?
निबंध लिखने के लिए सबसे पहले विषय का चयन करना चाहिए। इसके बाद विषय से संबंधित सामग्री एकत्र करनी चाहिए। फिर मुख्य बिंदुओं की रूपरेखा बनानी चाहिए। इसके बाद उचित शैली में विचारों और भावों का विस्तार करते हुए निबंध लिखना चाहिए। अंत में प्रभावी ढंग से निबंध का समापन करना चाहिए।
भाव-विस्तार
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक”
युवा पीढ़ी नई सोच और परिवर्तन में विश्वास करती है। किसी समस्या के समाधान के लिए वह जल्दी बदलाव चाहती है। इसके विपरीत वृद्ध लोग अपने अनुभव और परंपराओं को अधिक महत्व देते हैं। इसलिए तरुण परिवर्तन के समर्थक और वृद्ध अतीत की अच्छी परंपराओं के संरक्षक दिखाई देते हैं।
“जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
जो व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों से दूर रहता है, उसे जीवन बहुत सुंदर दिखाई देता है। वास्तविक संघर्षों का सामना करने पर ही जीवन की कठिनाइयों का पता चलता है। इसलिए दूर से दिखाई देने वाली वस्तु वास्तविकता से अधिक अच्छी लग सकती है।
“मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
समाज समय के साथ बदलता रहता है। नए समय में नई समस्याएँ और दोष पैदा होते हैं। इसलिए हर युग में समाज को बेहतर बनाने के लिए सुधारों की आवश्यकता रहती है।
“आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
युवा वर्तमान को बदलकर भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं। लेकिन जब वे वृद्ध होंगे, तो उन्हें अपना युवा समय याद आएगा और वे उसी समय को सुखद अतीत मानेंगे। इस प्रकार पीढ़ियों की सोच समय के साथ बदलती रहती है।
“निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
छोटे निबंध में विचारों को संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता है। अनावश्यक विस्तार से निबंध की सुंदरता और प्रभाव कम हो सकता है।
मेरा अनुभव
इस निबंध में लेखक को दो विषयों (‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ और ‘समाज-सुधार’) पर निबंध लिखने थे। पिछली कक्षाओं में आपने भी बहुत से विषयों पर अनुच्छेद, संवाद और निबंध लिखे हैं। आपको किन विषयों पर लिखना सरल या कठिन लगा और क्यों?
मुझे अपने अनुभवों से जुड़े विषयों पर लिखना सरल लगता है, क्योंकि उनके बारे में विचार आसानी से आते हैं। जिन विषयों के बारे में जानकारी कम हो, उन पर लिखना कठिन लगता है क्योंकि पहले सामग्री जुटानी पड़ती है।
1. निबंध में बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि कई महान व्यक्तियों के नाम आए हैं। इनके विषय में जानकारी एकत्रित करके संक्षेप में बताइए कि इन्होंने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए।
- महात्मा बुद्ध: अहिंसा, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया।
- महावीर स्वामी: अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का संदेश दिया।
- नागार्जुन: बौद्ध दर्शन के महान आचार्य थे।
- शंकराचार्य: अद्वैत दर्शन का प्रचार किया।
- कबीर: जाति-पाँति और धार्मिक आडंबरों का विरोध किया।
- गुरु नानक: समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश दिया।
2. निबंध में उल्लिखित महान व्यक्तियों ने अपने द्वारा किए गए कार्यों से समाज को एक नई दिशा दिखाई। हमारे आस-पास और भी ऐसे व्यक्ति और संस्थाएँ हैं जो स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, विशेष आवश्यकता समूह (दिव्यांगजन) आदि के लिए कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
हमारे आसपास कई स्वयंसेवी संस्थाएँ और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा, पर्यावरण, गरीबों की सहायता और दिव्यांगजनों के लिए काम करते हैं। उदाहरण के लिए, स्वयंसेवी संस्थाएँ बच्चों को शिक्षा देती हैं, वृक्षारोपण करती हैं और जरूरतमंद लोगों की सहायता करती हैं। ऐसे कार्य समाज को अधिक समान और संवेदनशील बनाते हैं।
3. आपको ‘समाज-सुधार’ करने का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे करना चाहेंगे? लिखिए।
मैं शिक्षा को सभी बच्चों तक पहुँचाना, स्वच्छता बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना, लड़कियों और लड़कों को समान अवसर देना तथा दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान की भावना बढ़ाना चाहूँगा/चाहूँगी। इसके लिए जागरूकता अभियान, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और शिक्षा संबंधी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
4. भारतीय ज्ञान साहित्य में अनेक स्थानों पर नैतिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात की गई है। इस विषय पर अपने शिक्षक के साथ मिलकर चर्चा कीजिए।
जीवन में केवल भौतिक सफलता पर्याप्त नहीं है। नैतिक मूल्यों, आत्मसंयम, मानवता और व्यावहारिक समझ के साथ जीवन जीने से संतुलन बना रहता है। भारतीय ज्ञान परंपरा भी अच्छे आचरण और संतुलित जीवन को महत्व देती है।
लोकोक्ति और अनुभव
1. ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ एक लोकोक्ति है। लोक में प्रचलित लोकप्रिय वाक्य या वाक्यांश को लोकोक्ति कहते हैं, जो किसी विशेष अर्थ या सीख को व्यक्त करता है। लोकोक्ति भाषा को समृद्ध करती तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में सहायता करती है। यह लोगों के अनुभव, विश्वास और मूल्यों को दर्शाती है। आपने यह लोकोक्ति भी सुनी होगी— ‘आम के आम गुठलियों के दाम’। अब आप इस लोकोक्ति और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास
हमने घर और विद्यालय में निकलने वाले जैविक कचरे से खाद बनाने का प्रयास किया। सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते और अन्य जैविक पदार्थों को एक स्थान पर एकत्र किया। कुछ समय बाद इनसे अच्छी जैविक खाद तैयार हुई। इससे कचरा भी कम हुआ और पौधों के लिए उपयोगी खाद भी मिली। सचमुच, इसे ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ कहा जा सकता है।
2. “जब ढोल के पास बैठे हुए लोगों के कान के पर्दे फटते रहते हैं, तब दूर किसी नदी के तट पर संध्या समय, किसी दूसरे के कान में वही शब्द मधुरता का संचार कर देते हैं।” आपने पढ़ा कि ढोल के पास बैठे व्यक्ति की अपेक्षा दूर बैठे व्यक्ति के लिए ढोल की आवाज़ का अनुभव भिन्न है। अपने अनुभव के आधार पर किसी ऐसी घटना का उल्लेख अपनी डायरी में कीजिए, जब किसी वस्तु, व्यक्ति या संस्था के विषय में दूर से आपका अनुमान कुछ और रहा हो, पर निकट से आपका अनुभव बिल्कुल अलग रहा हो।
डायरी लेखन
आज मैं एक विद्यालय के बारे में बहुत अच्छी बातें सुनकर वहाँ गया/गई। दूर से मुझे लगा कि वहाँ केवल पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता होगा। लेकिन वहाँ पहुँचकर पता चला कि विद्यालय में खेल, कला, संगीत और अन्य गतिविधियों को भी बहुत महत्व दिया जाता है। मेरा पहले का अनुमान गलत निकला। इस अनुभव से मुझे समझ आया कि किसी वस्तु या संस्था के बारे में केवल दूर से राय नहीं बनानी चाहिए।
व्याकरण की बात – समास
समास का अर्थ है संक्षेप। दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को समस्त पद कहते हैं। समस्त पद को अलग-अलग करना समास-विग्रह कहलाता है।
| समास | मुख्य पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्पुरुष | उत्तरपद प्रधान | रसोईघर = रसोई के लिए घर |
| कर्मधारय | पूर्वपद विशेषण, उत्तरपद विशेष्य | नीलकमल = नीले रंग का कमल |
| द्विगु | पूर्वपद संख्यावाची | तिरंगा = तीन रंगों का समाहार |
| बहुव्रीहि | दोनों पद गौण, किसी अन्य का संकेत | पीतांबर = पीला है अंबर जिसका |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान | भाई-बहन = भाई और बहन |
| अव्ययीभाव | पूर्वपद अव्यय | यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार |
निबंध में ऐसे अनेक सामासिक शब्द आए हैं। उन शब्दों को ढूँढ़कर उनका समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए। आपकी समझ के लिए एक उदाहरण तालिका में दिया गया है। पाठ से अन्य उदाहरण चुनकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
| सामासिक पद | समास-विग्रह | समास का नाम |
|---|---|---|
| निबंधशास्त्र | निबंध का शास्त्र | तत्पुरुष |
| समाज-सुधार | समाज का सुधार | तत्पुरुष |
| अतीत-गौरव | अतीत का गौरव | तत्पुरुष |
| नव-वधू | नई वधू | कर्मधारय |
| त्रिवेणी | तीन वेणियों का समाहार | द्विगु |
| दिनोदिन | दिनों-दिन | अव्ययीभाव |
| भाई-बहन | भाई और बहन | द्वंद्व |
उपसर्ग एवं प्रत्यय
उपसर्ग वे सार्थक लघुतम खंड हैं जो शब्दों के आरंभ में लगकर नए शब्द बनाते हैं। प्रत्यय शब्दों के अंत में लगकर नए शब्द बनाते हैं।
1. निबंध से उपसर्ग और प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
| शब्द | विभाजन | प्रकार |
|---|---|---|
| दुर्बोध | दुर् + बोध | उपसर्ग |
| अनादि | अन + आदि | उपसर्ग |
| सुधारक | सुधार + क | प्रत्यय |
| कठिनाई | कठिन + आई | प्रत्यय |
2. नीचे दिए गए वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए—
• निबंध लिखना बड़ी __________ (कठिन…) की बात है।
• वर्तमान से दोनों को __________ (…संतोष) होता है।
• वाक्यों में कुछ __________ (…स्पष्ट…) भी चाहिए, क्योंकि यह __________ (…स्पष्ट…) या __________ (…बोध…) गंभीरता ला देती है।
• निबंध लिखना बड़ी कठिनाई की बात है।
• वर्तमान से दोनों को असंतोष होता है।
• वाक्यों में कुछ अस्पष्टता भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता गंभीरता ला देती है।
3. नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाकर लिखिए। आपकी सहायता के लिए एक उदाहरण नीचे दिया गया है।
मधुर, सुधार, सुंदर, गति, समाज
| मूल शब्द | नया शब्द |
|---|---|
| मधुर | मधुरता |
| सुधार | सुधारक |
| सुंदर | सुंदरता |
| गति | प्रगति |
| समाज | सामाजिक |
भाव – एक शब्द अनेक
इस पाठ में अनेक ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिनके अर्थ परस्पर मिलते-जुलते हैं। उदाहरण के लिए, विचार-मनन-चिंतन या सुहावने-मधुर-मनमोहक। पाठ में से ऐसे शब्द ढूँढ़िए तथा वाक्य प्रयोग के द्वारा उनके अर्थ स्पष्ट कीजिए।
| शब्द | वाक्य प्रयोग |
|---|---|
| विचार | मैंने समस्या पर विचार किया। |
| मनन | हमें अपने कार्यों का मनन करना चाहिए। |
| चिंतन | चिंतन से सही निर्णय लेने में सहायता मिलती है। |
| सुहावना | आज मौसम बहुत सुहावना है। |
| मधुर | उसकी आवाज बहुत मधुर है। |
| मनमोहक | पहाड़ों का दृश्य मनमोहक था। |
रचनात्मक गतिविधियाँ
1. “खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला। आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।” पाठ में अमीर खुसरो की यह प्रसिद्ध अनमेलियाँ आई है। अनमेलियाँ एक प्रकार की हास्य-व्यंग्यपूर्ण काव्य शैली है जिसमें असंगत वाक्यों एवं विपरीत स्थितियों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है। अमीर खुसरो आम लोगों के मन को बहलाने व हँसाने के उद्देश्य से ऐसे प्रयोग किया करते थे। आप उनके द्वारा रचित अन्य अनमेलियों, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से ढूँढ़कर संकलन कीजिए।
अमीर खुसरो की पहेलियाँ, मुकरियाँ और अनमेलियाँ मनोरंजक लोक-साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं। विद्यार्थी शिक्षक या पुस्तकालय की सहायता से कुछ उदाहरण एकत्र कर अपनी कॉपी में लिख सकते हैं।
2. कक्षा में ‘युवा और वृद्ध — दो पीढ़ियों के पीढ़ीगत अंतर’ पर वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
वाद-विवाद में दो पक्ष बनाए जा सकते हैं। एक पक्ष युवाओं की नई सोच और परिवर्तन की आवश्यकता के पक्ष में विचार रखेगा। दूसरा पक्ष वृद्धों के अनुभव, परंपरा और ज्ञान के महत्व को बताएगा। अंत में यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि युवा ऊर्जा और वृद्ध अनुभव मिलकर समाज को बेहतर बना सकते हैं।
भाषा संगम
• इनके अतिरिक्त यदि आप ‘निबंध’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
उदाहरण के लिए अंग्रेज़ी में Essay, उर्दू में मज़मून और संस्कृत में निबंधः कहा जाता है।
• उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
विद्यार्थी अपने घर में बोली जाने वाली मातृभाषा में वाक्य “निबंध लिखने के पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।” लिख सकते हैं।
मैं क्यों लिखता हूँ? – अज्ञेय
पाठ के अंत में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के लेख ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ का अंश दिया गया है। अज्ञेय के अनुसार लेखक कई बार अपने भीतर की मानसिक विवशता और प्रेरणा को समझने के लिए लिखता है। लिखना उसे अपनी आंतरिक स्थिति को पहचानने और उससे मुक्त होने में सहायता देता है।
पाठ में आए साहित्यकार
| साहित्यकार | संक्षिप्त परिचय |
|---|---|
| बाणभट्ट | प्रसिद्ध संस्कृत गद्य लेखक और ‘कादंबरी’ के रचनाकार। |
| श्रीहर्ष | प्रसिद्ध संस्कृत कवि। |
| अमीर खुसरो | प्रसिद्ध कवि, संगीतज्ञ और लोकभाषा के लोकप्रिय रचनाकार। |
| सेनापति | रीतिकाल के प्रसिद्ध हिंदी कवि। |
| महात्मा गांधी | समाज-सुधार, सत्य और अहिंसा के प्रमुख समर्थक। |
| ए.जी. गार्डिनर | प्रसिद्ध अंग्रेज़ी निबंधकार। |
| शेक्सपीयर | विश्वप्रसिद्ध अंग्रेज़ी नाटककार और कवि। |
| मानटेन | अनुभव-आधारित व्यक्तिगत निबंध लेखन के प्रसिद्ध लेखक। |
शब्द-संपदा – आसान अर्थ
| शब्द | सरल अर्थ |
|---|---|
| स्फूर्ति | उत्साह, फुर्ती |
| आवेग | अचानक उत्पन्न प्रेरणा |
| यथार्थ | वास्तविक, सत्य |
| उत्थित | उठा हुआ, उत्पन्न |
| रहस्य | गुप्त बात |
| विज्ञ | जानकार, विद्वान |
| सम्मति | सहमति, राय |
| अनुसंधान | खोज, जाँच-पड़ताल |
| दुर्बोध | जिसे समझना कठिन हो |
| गांभीर्य | गंभीरता, गहराई |
| गुत्थी | उलझन, कठिनाई |
| पद्धति | तरीका, प्रणाली |
| पाश्चात्य | पश्चिमी |
| उदात्त | महान, श्रेष्ठ |
| अभिव्यक्ति | विचार या भाव प्रकट करना |
| समावेश | शामिल करना |
| संध्या | शाम का समय |
| कोलाहल | बहुत अधिक शोर |
| विषाद | उदासी |
| कलरव | मधुर ध्वनि |
त्वरित पुनरावृत्ति
- ‘क्या लिखूँ?’ के लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।
- यह पाठ निबंध लेखन की प्रक्रिया को समझाता है।
- निबंध के दो प्रमुख अंग हैं – सामग्री और शैली।
- मानटेन ने अपने अनुभवों को निबंधों में महत्व दिया।
- दूर की वस्तुएँ अक्सर अधिक सुहावनी लगती हैं।
- तरुण भविष्य को और वृद्ध अतीत को अधिक सुखद मानते हैं।
- समाज-सुधार की आवश्यकता हर युग में रहती है।
- पाठ में समास, उपसर्ग और प्रत्यय की जानकारी दी गई है।
- अच्छा निबंध सहज, प्रभावशाली और अनुभव-आधारित होना चाहिए।