Class 8 Hindi Malhar Chapter 9 आदमी का अनुपात notes and book solutions with easy explanations, question answers, important meanings and NCERT-based study material for CBSE students.
कक्षा 8 हिंदी मल्हार
अध्याय 9 – आदमी का अनुपात
कवि – गिरिजा कुमार माथुर
Notes, सरल व्याख्या और Book Solutions
आदमी का अनुपात – सरल परिचय
‘आदमी का अनुपात’ कविता में कवि गिरिजा कुमार माथुर ने कमरे से लेकर घर, मोहल्ले, नगर, प्रदेश, देश, पृथ्वी और ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया है। इससे यह समझाया गया है कि विशाल ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य बहुत छोटा है।
इसके बावजूद मनुष्य ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास के कारण अपने चारों ओर दीवारें खड़ी करता है और दूसरों पर अधिकार जमाना चाहता है। कविता मनुष्य को अपने छोटेपन को समझने और अधिक उदार, सहिष्णु तथा सहयोगी बनने की प्रेरणा देती है।
कविता
कमरे से छोटे—
कमरा है घर में
घर है मुहल्ले में
मुहल्ला नगर में
नगर है प्रदेश में
प्रदेश कई देश में
देश कई पृथ्वी पर
अनगिन नक्षत्रों में
पृथ्वी एक छोटी
करोड़ों में एक ही
सबको समेटे है
परिधि नभ गंगा की
लाखों ब्रह्मांडों में
अपना एक ब्रह्मांड
हर ब्रह्मांड में
कितनी ही पृथ्वियाँ
कितनी ही भूमियाँ
कितनी ही सृष्टियाँ
यह है अनुपात
आदमी का विराट से
इस पर भी आदमी
ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास
लीन
संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है
अपने को दूजे का स्वामी बताता है
देशों की कौन कहे
एक कमरे में
दो दुनिया रचाता है।
— गिरिजा कुमार माथुर
कवि से परिचय
गिरिजा कुमार माथुर
गिरिजा कुमार माथुर का जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में हुआ था। उनके पिता देवीचरण माथुर भी कविताएँ लिखते थे। गिरिजा कुमार माथुर आकाशवाणी में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के अतिरिक्त उन्होंने कई नाटक, गीत, कहानी और निबंध भी लिखे।
उनकी अनेक कृतियाँ प्रकाशित हैं, जिनमें ‘मंजीर’, ‘नाश और निर्माण’, ‘धूप के धान’, ‘शिलापंख चमकीले’ और ‘मैं वक्त के हूँ सामने’ प्रमुख हैं। उन्होंने प्रसिद्ध भावांतर गीत ‘होंगे कामयाब’ की भी रचना की थी।
कविता का सरल भावार्थ
दो व्यक्ति एक कमरे में रहते हैं। कमरा घर का हिस्सा है, घर मोहल्ले का, मोहल्ला नगर का, नगर प्रदेश का और प्रदेश देश का। इस प्रकार मनुष्य का जीवन एक बहुत बड़े सामाजिक और भौगोलिक विस्तार का छोटा-सा हिस्सा है।
पृथ्वी भी अनगिनत नक्षत्रों के बीच बहुत छोटी है। एक ब्रह्मांड में अनेक पृथ्वियाँ, भूमियाँ और सृष्टियाँ होने की कल्पना की गई है। इससे ब्रह्मांड की विशालता और मनुष्य के छोटेपन का अनुपात सामने आता है।
इतना छोटा होने के बावजूद मनुष्य ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास में फँस जाता है। वह दूसरों से अलगाव की दीवारें बनाता है और स्वयं को दूसरों का स्वामी समझने लगता है।
कवि यह दिखाते हैं कि देशों के बीच की सीमाएँ तो समझ में आती हैं, लेकिन एक ही कमरे में रहने वाले दो व्यक्ति भी अपने बीच अलग-अलग दुनिया बना लेते हैं। यही मनुष्य की संकीर्णता है।
कविता का मुख्य संदेश
- ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य बहुत छोटा है।
- मनुष्य को अपने छोटेपन और सीमाओं को समझना चाहिए।
- ईर्ष्या, अहंकार, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास से दूर रहना चाहिए।
- दूसरों पर अधिकार जमाने के बजाय सहयोग और सह-अस्तित्व को अपनाना चाहिए।
- मानवता का विस्तार विचारों और व्यवहार की विशालता से होता है।
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
- पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण
- ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
- सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
- समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
(2) कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
- पृथ्वी और सूर्य
- देश और नगर
- घर और कमरा
- मानव और ब्रह्मांड
(3) कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
- त्याग, ज्ञान और प्रेम में
- सेवा और परोपकार में
- ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
- उदारता, धर्म और न्याय में
(4) कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
- वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।
- वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
- वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
- वह अपने छोटेपन को भूलकर अहंकारी हो जाता है।
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।”
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”
मिलकर करें मिलान
नीचे दो स्तंभ दिए गए हैं। अपने समूह में चर्चा करके स्तंभ 1 की पंक्तियों का मिलान स्तंभ 2 में दिए गए सही अर्थ से कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. संख्यातीत शंख सी दीवारें | मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ |
| 2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक | पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत |
| 3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा | मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ |
| 4. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे | सीमित स्थान में भी अलगाव की प्रवृत्ति |
| 5. परिधि नभ गंगा की | ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक |
| 6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता | मनुष्य के संकुचित होने का प्रतीक |
1 → मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ
2 → पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत
3 → मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
4 → सीमित स्थान में भी अलगाव की प्रवृत्ति
5 → ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक
6 → मनुष्य के संकुचित होने का प्रतीक
अनुपात
इस कविता में ‘मानव’ और ‘ब्रह्मांड’ के उदाहरण द्वारा व्यक्ति के अल्पत्व और सृष्टि की विशालता के अनुपात को दिखाया गया है। अपने साथियों के साथ मिलकर विचार कीजिए कि मानव को ब्रह्मांड जैसा विस्तार पाने के लिए इनमें से किन-किन गुणों या मूल्यों की आवश्यकता होगी? आपने ये गुण क्यों चुने, यह भी साझा कीजिए।
सोच-विचार के लिए
(क) कविता के अनुसार मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
(ख) यदि आपको इस कविता की एक पंक्ति को दीवार पर लिखना हो, जो आपको प्रतिदिन प्रेरित करे तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
(ग) कवि ने मानव की सीमाओं और कमियों की ओर ध्यान दिलाया है, लेकिन कहीं भी क्रोध नहीं दिखाया। आपको इस कविता का भाव कैसा लगा—व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
(घ) आपके अनुसार ‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर से जुड़ा काम है या कुछ और भी हो सकता है? अपने विचारानुसार समझाइए।
(ङ) मानवता के विकास में सहयोग, समर्पण और सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ और घृणा जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से कहीं अधिक प्रभावी हैं। उदाहरण देकर बताइए कि सहिष्णुता या सहयोग के कारण समाज में कैसे परिवर्तन आए हैं?
सहअस्तित्व, विस्तार, सौहार्द, विविधता, वर्चस्व, ईर्ष्या, लघुता, अहंकार, विशालता, सत्ता, संतुलन, मतभेद, सीमाबद्धता, विरोध, समावेशिता, स्वार्थ, अविश्वास, स्वतंत्रता, सहनशीलता, शांति, मानव
अनुमान और कल्पना
(क) मान लीजिए कि आप एक दिन के लिए पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित कर सकते हैं। अब आप मानव की कौन-कौन सी आदतों को बदलना चाहेंगे? क्यों?
(ख) यदि आप अंतरिक्ष यात्री बन जाएँ और ब्रह्मांड के किसी दूसरे भाग में जाएँ तो आप किस स्थान (कमरा, घर, नगर आदि) को सबसे अधिक याद करेंगे और क्यों?
(ग) मान लीजिए कि एक बच्चा या बच्ची कविता में उल्लिखित सभी सीमाओं को पार कर सकता या सकती है—वह कहाँ तक जाएगा या जाएगी और क्या देखेगा या देखेगी? एक कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत लिखिए।
(घ) इस कविता को पढ़ने के बाद, आप स्वयं को ब्रह्मांड के अनुपात में कैसा अनुभव करते हैं? एक अनुच्छेद लिखिए— “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
(ङ) मान लीजिए कि किसी दूसरे संसार से आपके पास संदेश आया है कि उसे पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता है। आप किसे भेजना चाहेंगे और क्यों?
(च) कविता में “ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ” जैसी प्रवृत्तियों की चर्चा की गई है। कल्पना कीजिए कि एक दिन के लिए ये भाव सभी व्यक्तियों में समाप्त हो जाएँ तो उससे समाज में क्या-क्या परिवर्तन होगा?
(छ) यदि आपको इस कविता का एक पोस्टर बनाना हो जिसमें इसके मूल भाव—‘विराटता और लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’—दर्शाया जाए तो आप क्या चित्र, प्रतीक और शब्द उपयोग करेंगे? संक्षेप में बताइए।
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘सृष्टि’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए।
सृजन
(क) कविता में कमरे से लेकर ब्रह्मांड तक का विस्तार दिखाया गया है। इस क्रम को अपनी तरह से एक रेखाचित्र, सीढ़ी या ‘मानसिक-चित्रण’ (माइंड-मैप) द्वारा प्रदर्शित कीजिए। प्रत्येक स्तर पर कुछ विशेषताएँ लिखिए, जैसे—पास-पड़ोस की एक विशेष बात, नगर का कोई स्थान, देश की विविधता आदि। उसके नीचे एक पंक्ति में इस प्रश्न का उत्तर लिखिए— “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
(ख) अगर इसी कविता की तरह कोई कहानी लिखनी हो जिसका नाम हो ‘ब्रह्मांड में मानव’ तो उसको आरंभ कैसे करेंगे? कुछ वाक्य लिखिए।
(ग) ‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। अगर आपसे कहा जाए कि आप एक ऐसी दुनिया बनाइए जिसमें कोई दीवार न हो तो वह कैसी होगी? उसका वर्णन कीजिए।
(घ) एक चित्र-श्रृंखला बनाइए जिसमें ये क्रम दिखे— आदमी, कमरा, घर, पड़ोसी, क्षेत्र, नगर, देश, पृथ्वी, ब्रह्मांड। प्रत्येक चित्र में आकार का अनुपात दिखाया जाए जिससे यह स्पष्ट हो कि आदमी कितना छोटा है।
कविता की रचना
‘दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे—’ इन पंक्तियों में ‘—’ चिह्न पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस चिह्न को पहले कहीं देखा है? इस चिह्न को ‘निदेशक चिह्न’ कहते हैं। यह एक प्रकार का विराम चिह्न है जो किसी बात को आगे बढ़ाने या स्पष्ट करने के लिए उपयोग होता है। यह किसी विषय की अतिरिक्त जानकारी, जैसे—व्याख्या, उदाहरण या उद्धरण देने के लिए उपयोग होता है। इस कविता में इस चिह्न का प्रयोग एक ठहराव, सोच का संकेत और आगे आने वाले महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया गया है। यह संकेत देता है कि अब कुछ ऐसा कहा जाने वाला है जो पाठक को सोचने पर विवश करेगा।
इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे—अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’ है, बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं आदि।
(क) अपने समूह के साथ मिलकर कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ झलकती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
| क्रम | कविता की विशेषताएँ | सही पंक्ति |
|---|---|---|
| 1 | सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गया है। | कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 2 | मुहावरे का प्रयोग किया गया है। | संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है |
| 3 | छोटे से बड़े की ओर विस्तार देने के लिए शब्दों को दोहराया गया है। | कमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में… |
| 4 | प्रश्न शैली में व्यंग्य किया गया है। | देशों की कौन कहे / एक कमरे में दो दुनिया रचाता है |
| 5 | अतिशयोक्ति से भरा कथन है (बढ़ा-चढ़ाकर कहना)। | संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है |
| 6 | मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्य किया गया है। | अपने को दूजे का स्वामी बताता है |
कविता का सौंदर्य
(क) कविता में अलग-अलग प्रकार से ब्रह्मांड की विशालता को व्यक्त किया गया है। उनकी पहचान कीजिए।
(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है” “अपने को दूजे का स्वामी बताता है” “एक कमरे में दो दुनिया रचाता है” कविता में ये सारी क्रियाएँ मनुष्य के लिए आई हैं। आप अपने अनुसार कविता में नई क्रियाओं का प्रयोग करके कविता की रचना कीजिए।
मनुष्य हाथ मिलाता है
मनुष्य प्रेम बाँटता है
मनुष्य साथ निभाता है
मनुष्य भेद मिटाता है
मनुष्य संसार सजाता है।
विशेषण और विशेष्य
“पृथ्वी एक छोटी” — यहाँ ‘छोटी’ शब्द ‘पृथ्वी’ की विशेषता बता रहा है। इसलिए ‘छोटी’ विशेषण है और ‘पृथ्वी’ विशेष्य है।
अब आप नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों को पहचानकर लिखिए—
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| दो व्यक्ति कमरे में | दो | व्यक्ति |
| अनगिन नक्षत्रों में | अनगिन | नक्षत्रों |
| लाखों ब्रह्मांडों में | लाखों | ब्रह्मांडों |
| अपना एक ब्रह्मांड | एक | ब्रह्मांड |
| संख्यातीत शंख सी | संख्यातीत | शंख |
| एक कमरे में | एक | कमरे |
| दो दुनिया रचाता है | दो | दुनिया |
आपके शब्द
“सबको समेटे है / परिधि नभ गंगा की”
आपने ‘आकाशगंगा’ शब्द सुना और पढ़ा होगा। लेकिन कविता में ‘नभ गंगा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है। आप भी अपने समूह में मिलकर इसी प्रकार दो शब्दों को मिलाकर नए शब्द बनाइए।
नभ + गंगा = नभ गंगा
जल + धारा = जलधारा
राज + कुमार = राजकुमार
देव + आलय = देवालय
पुस्तक + आलय = पुस्तकालय
हिम + आलय = हिमालय
आपके प्रश्न
“हर ब्रह्मांड में / कितनी ही पृथ्वियाँ / कितनी ही भूमियाँ / कितनी ही सृष्टियाँ”
क्या आपके मस्तिष्क में कभी इस प्रकार के प्रश्न आते हैं? अवश्य आते होंगे। अपने समूह के साथ मिलकर अपने मन में आने वाले प्रश्नों की सूची बनाइए। अपने शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता से इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़ने का प्रयास कीजिए।
- ब्रह्मांड कितना बड़ा है?
- क्या पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रहों पर जीवन है?
- कितनी आकाशगंगाएँ हैं?
- तारे कैसे बनते हैं?
- क्या ब्रह्मांड हमेशा से ऐसा ही था?
आपकी बात
(क) कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो—जैसे काम का बोझ अधिक और समय कम।
(ख) आप अपने परिवार, विद्यालय या मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे ला सकते हैं? कुछ उपाय सोचकर लिखिए। (संकेत—किसी को अनदेखा न करना, सबकी सहायता करना आदि)
(ग) ‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’—इस पंक्ति को पढ़कर आपके मन में क्या भाव आता है? आप इस अनोखी पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए क्या-क्या करेंगे?
(घ) कविता हमें ‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ के प्रति सचेत करती है। आप अपने किन-किन गुणों को प्रबल करेंगे ताकि आपमें ऐसा भाव न आए?
(ङ) अपने जीवन में ऐसी तीन ‘दीवारों’ के विषय में सोचिए जो आपने स्वयं खड़ी की हैं (जैसे—डर, संकोच आदि)। फिर एक योजना बनाइए कि उन्हें कैसे तोड़ेंगे? क्या समाज में भी ऐसी दीवारें होती हैं? उन्हें गिराने में हम कैसे सहायता कर सकते हैं?
संख्यातीत शंख
“संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है।” शंख का अर्थ यहाँ बहुत बड़ी संख्या से जुड़ा है। नीचे भारतीय संख्या प्रणाली तालिका दी गई है।
| हिंदी संख्या | गणितीय संख्या | 10 की घात |
|---|---|---|
| एक (इकाई) | 1 | 10⁰ |
| दस (दहाई) | 10 | 10¹ |
| सौ (सैकड़ा) | 100 | 10² |
| सहस्र (हजार) | 1,000 | 10³ |
| दस हजार | 10,000 | 10⁴ |
| लाख | 1,00,000 | 10⁵ |
| दस लाख | 10,00,000 | 10⁶ |
| करोड़ | 1,00,00,000 | 10⁷ |
| दस करोड़ | 10,00,00,000 | 10⁸ |
| अरब | 1,00,00,00,000 | 10⁹ |
| दस अरब | 10,00,00,00,000 | 10¹⁰ |
| खरब | 1,00,00,00,00,000 | 10¹¹ |
| दस खरब | 10,00,00,00,00,000 | 10¹² |
| नील | 1,00,00,00,00,00,000 | 10¹³ |
| दस नील | 10,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁴ |
| पद्म | 1,00,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁵ |
| दस पद्म | 10,00,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁶ |
| शंख | 1,00,00,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁷ |
| दस शंख | 10,00,00,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁸ |
| महाशंख | 1,00,00,00,00,00,00,00,00,000 | 10¹⁹ |
तालिका के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर खोजिए—
1. जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
2. महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
3. एक लाख में कितने हजार होते हैं?
4. उपर्युक्त तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
5. दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
एक अरब = 1,00,00,00,000
योग = 1,10,00,00,000
अर्थात एक अरब दस करोड़।
समावेशन और समानता
जैसे पृथ्वी अनगिनत नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह विशेष आवश्यकता वाला हो या न हो, समाज का एक महत्वपूर्ण भाग है।
एक समूह चर्चा आयोजित करें जिसमें सभी मानवों के लिए समान अवसरों की आवश्यकता पर बल दिया जाए। (भले ही उनका जेंडर, आय, मत, विश्वास, शारीरिक रूप, रंग या आकार-प्रकार आदि कैसा भी हो)
आज की पहेली
पता लगाइए कि कौन-सा अंतरिक्ष यान कौन-से ग्रह पर जाएगा—
झरोखे से
आइए, अब पढ़ते हैं प्रसिद्ध गीत ‘होंगे कामयाब’।
होंगे कामयाब
होंगे कामयाब
हम होंगे कामयाब… एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब… एक दिन
होगी शांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर
होगी शांति चारों ओर… एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब… एक दिन
नहीं डर किसी का आज
नहीं भय किसी का आज
नहीं डर किसी का आज के दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब… एक दिन
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ… एक दिन
मन में है विश्वास
पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब… एक दिन
भावांतर
— गिरिजा कुमार माथुर
यह गीत विश्वास, शांति, साहस और मिल-जुलकर आगे बढ़ने की भावना व्यक्त करता है। इसमें विश्वास रखा गया है कि एक दिन लोग साथ-साथ चलेंगे और समाज में शांति स्थापित होगी।
अध्याय का त्वरित पुनरावर्तन
- पाठ: आदमी का अनुपात
- कक्षा: 8
- पुस्तक: मल्हार
- अध्याय: 9
- कवि: गिरिजा कुमार माथुर
- मुख्य विषय: मानव और ब्रह्मांड का अनुपात
- मुख्य समस्या: मनुष्य का अहंकार, स्वार्थ, ईर्ष्या, घृणा और अविश्वास
- मुख्य संदेश: मनुष्य को संकीर्णता छोड़कर सहयोग, सहिष्णुता, समानता और शांति अपनानी चाहिए।
याद रखने योग्य बातें
- मनुष्य ब्रह्मांड की तुलना में बहुत छोटा है।
- पृथ्वी भी विशाल ब्रह्मांड का एक छोटा हिस्सा है।
- मनुष्य अपने अहंकार के कारण दूसरों से दूरी बनाता है।
- “दीवारें उठाना” केवल वास्तविक दीवारें नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक सीमाओं का भी प्रतीक है।
- कविता मनुष्य को विशाल दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देती है।
- सहयोग और सहिष्णुता समाज को बेहतर बनाते हैं।
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