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मित्रलाभ

कक्षा 8 हिंदी — मल्हार

अध्याय का सारांश

मित्रलाभ पंचतंत्र से ली गई एक शिक्षाप्रद कहानी है। इस कहानी में लघुपतनक कौआ, हिरण्यक चूहा, मन्थरक कछुआ और चित्रांग हिरन की मित्रता और उनके सहयोग की कथा प्रस्तुत की गई है।

कहानी का मुख्य संदेश: सच्चे मित्र संकट के समय एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। बुद्धि, एकता, सहयोग और मित्रता के बल पर कठिन से कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।

कहानी की शुरुआत

दक्षिण देश के एक नगर में एक विशाल वटवृक्ष पर लघुपतनक नाम का कौआ रहता था। एक दिन उसने एक भयंकर व्याध को देखा। व्याध पक्षियों को पकड़ने के लिए वटवृक्ष के नीचे अनाज के दाने बिखेरकर स्वयं छिप गया।

लघुपतनक ने सभी पक्षियों को सावधान किया कि वे दानों के लालच में न आएँ। लेकिन कबूतरों का राजा चित्रग्रीव अपने साथियों के साथ वहाँ पहुँचा। दानों को देखकर वह अपने साथियों सहित जाल में फँस गया।

चित्रग्रीव की बुद्धिमानी

जाल में फँसने के बाद चित्रग्रीव ने अपने साथियों को घबराने के बजाय एकजुट होकर जाल सहित उड़ने की सलाह दी। सभी कबूतरों ने मिलकर जाल उठाया और वहाँ से उड़ गए।

सीख: एकता और सामूहिक प्रयास से बड़ी समस्या का भी सामना किया जा सकता है।

हिरण्यक और चित्रग्रीव की मित्रता

चित्रग्रीव अपने मित्र हिरण्यक चूहे के पास गया। हिरण्यक ने अपने तीखे दाँतों से जाल काटकर चित्रग्रीव और उसके सभी साथियों को मुक्त कर दिया।

चित्रग्रीव ने पहले अपने साथियों के बंधन कटवाने को कहा। इससे हिरण्यक चित्रग्रीव की उदारता और अपने साथियों के प्रति उसके दायित्व से बहुत प्रभावित हुआ।

लघुपतनक और हिरण्यक की मित्रता

लघुपतनक हिरण्यक के गुणों से प्रभावित होकर उससे मित्रता करना चाहता था। प्रारंभ में हिरण्यक ने मना किया क्योंकि कौआ और चूहा स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के शत्रु माने जाते हैं।

लघुपतनक ने विश्वास दिलाया कि वह हिरण्यक को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा। अंततः दोनों मित्र बन गए। धीरे-धीरे उनकी मित्रता बहुत गहरी हो गई।

तीन से चार मित्र

अकाल पड़ने के कारण लघुपतनक ने दूसरे स्थान पर जाने का निर्णय लिया। हिरण्यक भी उसके साथ चला गया। दोनों एक तालाब के पास पहुँचे जहाँ लघुपतनक का मित्र मन्थरक कछुआ रहता था।

कुछ समय बाद चित्रांग नाम का हिरन भी उनके पास आया। वह व्याध से बचकर आया था। चारों में मित्रता हो गई।

चित्रांग हिरन संकट में

एक दिन चित्रांग जंगल में गया और वापस नहीं लौटा। उसके मित्रों को चिंता हुई। लघुपतनक ने खोजकर देखा कि चित्रांग एक व्याध के जाल में फँसा हुआ है।

लघुपतनक ने हिरण्यक को बुलाया। हिरण्यक ने जाल काटने की तैयारी की। इसी बीच मन्थरक भी अपने मित्र की सहायता के लिए वहाँ पहुँच गया।

मन्थरक को बचाने की योजना

तभी व्याध वहाँ आ गया। हिरण को मुक्त कर दिया गया, लेकिन व्याध ने मन्थरक कछुए को पकड़ लिया और जाल में बाँधकर अपने साथ ले जाने लगा।

चारों मित्रों ने मिलकर एक योजना बनाई। चित्रांग तालाब के किनारे मरे हुए हिरन की तरह लेट गया और लघुपतनक उसके ऊपर बैठकर चोंच मारने लगा।

व्याध ने हिरन को मरा हुआ समझकर मन्थरक को जमीन पर रख दिया। इसी अवसर पर हिरण्यक ने मन्थरक का जाल काट दिया। मन्थरक तुरंत तालाब में चला गया और चित्रांग भी जंगल की ओर भाग गया।

परिणाम: चारों मित्र अपनी बुद्धि, साहस, सहयोग और एकता के कारण व्याध से बच गए।

मुख्य पात्र

लघुपतनक — कौआ

बुद्धिमान, सावधान और अपने मित्रों की सहायता करने वाला। उसने व्याध की चाल को पहले ही पहचान लिया था।

हिरण्यक — चूहा

बुद्धिमान और कुशल मित्र। उसने अपने दाँतों से जाल काटकर अपने मित्रों को संकट से मुक्त किया।

मन्थरक — कछुआ

सच्चा और संवेदनशील मित्र। वह अपने मित्र चित्रांग की सहायता के लिए स्वयं संकट में पहुँच गया।

चित्रांग — हिरन

मित्रों पर विश्वास करने वाला और उनके साथ मिलकर संकट का सामना करने वाला पात्र।

चित्रग्रीव — कबूतरों का राजा

नेतृत्व करने वाला और संकट में अपने साथियों को एकजुट रहने की सीख देने वाला।

व्याध

पक्षियों और अन्य जीवों को पकड़ने वाला शिकारी, जिसकी योजनाओं को मित्रों की बुद्धि और एकता ने विफल कर दिया।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • लघुपतनक एक बुद्धिमान कौआ था।
  • व्याध ने पक्षियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
  • चित्रग्रीव और उसके साथी जाल में फँस गए।
  • चित्रग्रीव ने एकता की शक्ति का परिचय दिया।
  • हिरण्यक ने जाल काटकर कबूतरों को मुक्त किया।
  • लघुपतनक और हिरण्यक में गहरी मित्रता हुई।
  • मन्थरक और चित्रांग भी उनके मित्र बन गए।
  • चारों मित्रों ने संकट के समय एक-दूसरे की सहायता की।
  • उनकी योजना से मन्थरक भी व्याध के बंधन से मुक्त हो गया।
  • कहानी मित्रता, एकता, सहयोग, बुद्धिमत्ता और निस्वार्थ सहायता का संदेश देती है।

अभ्यास एवं संबंधित प्रश्न-उत्तर

1. लघुपतनक ने वटवृक्ष पर रहने वाले पक्षियों को किस बात के लिए सावधान किया?
उत्तर: लघुपतनक ने पक्षियों को व्याध द्वारा बिखेरे गए अनाज के दानों को खाने से सावधान किया। उसने बताया कि ये दाने उन्हें जाल में फँसाने के लिए डाले गए हैं।
2. चित्रग्रीव और उसके साथी जाल में कैसे फँसे?
उत्तर: चित्रग्रीव और उसके साथी अनाज के दानों के लालच में आकर उन्हें चुगने लगे। तभी वे व्याध द्वारा बिछाए गए जाल में फँस गए।
3. चित्रग्रीव ने जाल में फँसने के बाद अपने साथियों को क्या सलाह दी?
उत्तर: चित्रग्रीव ने अपने साथियों को घबराने के बजाय एकजुट होकर पूरी शक्ति से जाल सहित उड़ने की सलाह दी।
4. हिरण्यक ने चित्रग्रीव के साथियों को पहले मुक्त क्यों किया?
उत्तर: चित्रग्रीव ने कहा कि उसके साथी अपने घर-बार छोड़कर उसके साथ आए हैं। इसलिए उनका सुख-सुविधा देखना उसका धर्म है। उसकी इस निस्वार्थ भावना से प्रभावित होकर हिरण्यक ने पहले उसके साथियों के बंधन काटे।
5. हिरण्यक ने लघुपतनक से मित्रता करने में संकोच क्यों किया?
उत्तर: हिरण्यक ने संकोच इसलिए किया क्योंकि कौआ और चूहा स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के शत्रु माने जाते हैं। उसे डर था कि लघुपतनक उसे नुकसान पहुँचा सकता है।
6. लघुपतनक ने हिरण्यक का विश्वास कैसे जीता?
उत्तर: लघुपतनक ने हिरण्यक को विश्वास दिलाया कि वह उसके बिल में प्रवेश नहीं करेगा और उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाएगा। उसने धैर्यपूर्वक मित्रता का आग्रह किया और उसके विश्वास का सम्मान किया।
7. चित्रांग चारों मित्रों के साथ कैसे जुड़ा?
उत्तर: चित्रांग व्याध से बचकर तालाब के पास पहुँचा। उसके संकट को देखकर लघुपतनक, हिरण्यक और मन्थरक ने उसकी सहायता की। इसके बाद चित्रांग की भी तीनों से गहरी मित्रता हो गई।
8. चित्रांग के जाल में फँसने पर लघुपतनक ने क्या किया?
उत्तर: लघुपतनक चित्रांग को खोजते हुए उसके पास पहुँचा और उसे धीरज बँधाया। फिर वह हिरण्यक को अपने साथ लेकर आया ताकि हिरण्यक अपने दाँतों से जाल काटकर चित्रांग को मुक्त कर सके।
9. मन्थरक स्वयं संकट में क्यों पड़ गया?
उत्तर: मन्थरक अपने मित्र चित्रांग को संकट में देखकर उसकी सहायता करने के लिए वहाँ पहुँच गया। इसी कारण व्याध ने उसे पकड़ लिया और जाल में बाँधकर अपने साथ ले जाने लगा।
10. चारों मित्रों ने मन्थरक को बचाने के लिए क्या योजना बनाई?
उत्तर: चित्रांग तालाब के किनारे मरे हुए हिरन की तरह लेट गया। लघुपतनक उसके ऊपर बैठकर चोंच मारने लगा। व्याध ने चित्रांग को मरा हुआ समझकर मन्थरक को जमीन पर रख दिया। तभी हिरण्यक ने मन्थरक का जाल काट दिया और मन्थरक तालाब में चला गया।
11. कहानी में मित्रता की शक्ति किस प्रकार दिखाई देती है?
उत्तर: कहानी में चारों मित्र संकट के समय एक-दूसरे की सहायता करते हैं। हिरण्यक जाल काटता है, लघुपतनक योजना बनाता है, चित्रांग जोखिम उठाकर अभिनय करता है और मन्थरक अपने मित्रों के साथ खड़ा रहता है। उनके सहयोग के कारण सभी संकट से बच जाते हैं।
12. “लोभ से विवेकशक्ति नष्ट हो जाती है।” कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: चित्रग्रीव ने लघुपतनक की चेतावनी के बावजूद अनाज के दानों के लालच में आकर अपने साथियों सहित जाल में प्रवेश कर दिया। इससे स्पष्ट होता है कि लालच के कारण व्यक्ति सावधानी और विवेक को भूल सकता है।
13. “एकता में शक्ति है” — कहानी के आधार पर समझाइए।
उत्तर: चित्रग्रीव और उसके साथी जाल में फँसने के बाद एकजुट होकर जाल सहित उड़ गए। बाद में चारों मित्रों ने मिलकर मन्थरक को व्याध से बचाया। इसलिए कहानी एकता और सामूहिक प्रयास की शक्ति को स्पष्ट करती है।
14. इस कहानी से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि सच्चे मित्र संकट के समय साथ देते हैं। हमें मित्रों की सहायता के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। एकता, बुद्धिमत्ता, सहयोग और निस्वार्थ भावना से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है।
15. “सच्चा मित्र वही है जो संकट में साथ दे।” कहानी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: लघुपतनक, हिरण्यक, मन्थरक और चित्रांग ने संकट के समय एक-दूसरे का साथ दिया। उन्होंने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना अपने मित्रों को बचाने के लिए प्रयास किया। इसलिए चारों की मित्रता सच्ची मित्रता का उदाहरण है।

कहानी से मिलने वाली जीवन-मूल्य की सीख

  • मित्रता: सच्चा मित्र कठिन समय में साथ देता है।
  • एकता: मिलकर किया गया प्रयास अधिक प्रभावी होता है।
  • सहयोग: हमें जरूरत के समय दूसरों की सहायता करनी चाहिए।
  • बुद्धिमत्ता: कठिन परिस्थितियों में धैर्य से उपाय खोजना चाहिए।
  • निस्वार्थता: अपने हित से पहले मित्रों की सहायता करना सच्ची मित्रता है।
  • सावधानी: लालच में आकर बिना सोचे कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए।

कहानी का संदेश

“सच्ची मित्रता, एकता, बुद्धिमत्ता और सहयोग से कठिन से कठिन संकट से भी मुक्ति पाई जा सकती है।”