Class 8 Hindi Malhar Chapter 10 तरुण के स्वप्न notes and book solutions with easy explanations, question answers and NCERT-based study material for CBSE students.
कक्षा 6 हिंदी मल्हार
अध्याय 10 — तरुण के स्वप्न
लेखक: सुभाषचंद्र बोस

सुभाषचंद्र बोस
अध्याय का सारांश
“तरुण के स्वप्न” सुभाषचंद्र बोस के युवाओं को दिए गए प्रेरक संबोधन का अंश है। इसमें वे एक स्वतंत्र, समृद्ध और आदर्श समाज तथा राष्ट्र का सपना प्रस्तुत करते हैं।
नेताजी ऐसा समाज चाहते थे जिसमें प्रत्येक व्यक्ति स्वतंत्र हो, जातिभेद न हो, स्त्री और पुरुष को समान अधिकार मिलें, आर्थिक असमानता न हो और सभी को शिक्षा तथा उन्नति के समान अवसर प्राप्त हों।
वे श्रम और कर्म को सम्मान देने वाले समाज की कल्पना करते हैं। उनके अनुसार आलस्य और अकर्मण्यता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ऐसा राष्ट्र अपने समाज की आवश्यकताओं को समझेगा और आत्मनिर्भर बनेगा।
नेताजी अपना यह सपना युवाओं को सौंपते हैं। वे कहते हैं कि इस सपने को पूरा करने के लिए त्याग, कठिन परिश्रम और संकटों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
मुख्य बातें
लेखक से परिचय
सुभाषचंद्र बोस का जन्म ओड़िशा के कटक नगर में हुआ था। वे भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं में से एक थे। उन्हें पूरे देश में “नेताजी” के नाम से जाना जाता है।
उनका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र कराना था। उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया और युवाओं में देश के लिए त्याग तथा साहस की भावना जगाई।
उनके प्रसिद्ध नारों में “जय हिंद” और “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा” विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। उनकी चर्चित पुस्तक द इंडियन स्ट्रगल है।
मुख्य शब्द और अर्थ
युवा
सपना
स्वतंत्र
समृद्ध
असमानता
जो टूटा हुआ न हो
काम न करने वाला
बहुत छोटा या तुच्छ
अर्थपूर्ण
झरना
दूसरे या बाहरी समूह से संबंधित
भेंट
मेरी समझ से
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा ( ) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” इस कथन में रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
- सुभाषचंद्र बोस के लिए
- देश के तरुण वर्ग के लिए
- चित्तरंजन दास के लिए
- भारतवासियों के लिए
(2) स्वतंत्र राष्ट्र का स्वप्न साकार होगा?
- आर्थिक असमानता से
- स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
- श्रम और कर्म की मर्यादा से
- जातिभेद से
(3) “उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
- हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
- हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
- उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
- उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है
(4) जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—
- राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
- तरुणों का साहस बढ़ेगा
- राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
- राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
नीचे स्तंभ 1 में पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उन पंक्तियों से संबंधित भाव-विचार दिए गए हैं। स्तंभ 1 में दी गई पंक्तियों का स्तंभ 2 में दिए गए भाव-विचार से सही मिलान कीजिए।
| क्रम | स्तंभ 1 | सही भाव-विचार |
|---|---|---|
| 1 | “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते हैं, बैठते हैं, चलते हैं, फिरते हैं और लिखते हैं, भाषण देते हैं, काम-काज करते हैं।” | हमारी समूची दिनचर्या और आचार-विचार इसी लक्ष्य की प्राप्ति पर केंद्रित हैं। |
| 2 | “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा, सर्वोपरि वह समाज और राष्ट्र भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।” | जिस देश की योजनाएँ हमारे अपने समाज को ध्यान में रखकर बनाई जाएँगी, उस देश में किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होगा। |
| 3 | “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।” | समाज में सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर किसी तरह का बंधन या सामाजिक दबाव न हो। |
पंक्तियों पर चर्चा
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
सोच-विचार के लिए
(क) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस प्रकार के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न देखा था?
(ख) नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता के रूप में देखा?
(ग) “आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” सुभाषचंद्र बोस ने ऐसा क्यों कहा होगा?
(घ) नेताजी सुभाषचंद्र बोस के लक्ष्यों या ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
अनुमान और कल्पना से
(क) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो”, सुभाषचंद्र बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
(ख) “उस समाज में नारी मुक्त होकर समाज एवं राष्ट्र के पुरुषों की तरह समान अधिकार का उपभोग करे”, सुभाषचंद्र बोस को अपने भाषण में नारी के लिए समान अधिकारों की बात क्यों कहनी पड़ी?
(ग) आपके विचार से हमारे समाज में और कौन-कौन से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
(घ) सुभाषचंद्र बोस देश के समस्त युवा वर्ग को संबोधित करते हुए कहते हैं— “हे मेरे तरुण भाइयो!” उनका संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
(ङ) “यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” सुभाषचंद्र बोस के इस आह्वान पर श्रोताओं (युवा वर्ग) की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
शीर्षक
(क) आपने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का एक अंश पढ़ा है, इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक दिया गया है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि यह शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
(ख) यदि आपको भाषण के इस अंश को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? यह भी लिखिए।
क्योंकि पूरे भाषण में एक आदर्श और स्वतंत्र राष्ट्र की कल्पना की गई है।
(ग) सुभाषचंद्र बोस ने अपने समय की स्थितियों या समस्याओं को अपने संबोधन में स्थान दिया है। यदि आपको अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो आप किन-किन विषयों को अपने उद्बोधन में सम्मिलित करेंगे और उसका क्या शीर्षक रखेंगे?
शीर्षक: “हमारी जिम्मेदारियाँ और हमारा भविष्य”
भाषा की बात
(क) सुभाषचंद्र बोस ने अपने भाषण में संख्या, संगठन या भाव आदि का बोध कराने वाले शब्दों के साथ उनकी विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्दों का प्रयोग किया है। उनके भाषण से विशेषता अथवा गुण बताने वाले शब्द ढूँढ़कर दिए गए शब्द समूह को पूरा कीजिए—
| शब्द | विशेषता बताने वाला शब्द |
|---|---|
| सत्य | अखंड |
| समाज | स्वतंत्र / संपन्न |
| राष्ट्र | स्वाधीन |
| जीवन | क्षुद्र |
| शक्ति | असीम |
| आनंद | अपार |
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने तो उपर्युक्त विशेषताओं के साथ इन शब्दों को रखा है। आप किन विशेषताओं के साथ इन उपर्युक्त शब्दों को रखना चाहेंगे और क्यों? लिखिए।
- सत्य — अटल सत्य
- समाज — समान समाज
- राष्ट्र — समृद्ध राष्ट्र
- जीवन — सार्थक जीवन
- शक्ति — अपार शक्ति
- आनंद — सच्चा आनंद
विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग
(क) “और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र” इस वाक्यांश में रेखांकित शब्द ‘स्वाधीन’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘पराधीन’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द आगे दिए गए हैं, लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़ें बनाइए—
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. स्वीकार | अस्वीकार |
| 2. सार्थक | निरर्थक |
| 3. विषमता | समानता |
| 4. क्षुद्र | विशाल / वृहत / विराट / महान |
| 5. संपन्न | विपन्न |
| 6. अकर्मण्य | कर्मण्य / कर्मठ |
| 7. मरण | जीवन |
(ख) अब स्तंभ 1 और स्तंभ 2 के सभी शब्दों से दिए गए उदाहरण के अनुसार वाक्य बनाकर लिखिए, जैसे— “समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।”
1. मैंने यह उपहार स्वीकार किया, अस्वीकार नहीं किया।
2. मेहनत से किया गया काम सार्थक होता है, निरर्थक नहीं।
3. हमें समाज में विषमता नहीं बल्कि समानता बढ़ानी चाहिए।
4. हमें क्षुद्र सोच छोड़कर विराट दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
5. संपन्न व्यक्ति को विपन्न लोगों की सहायता करनी चाहिए।
6. कर्मठ व्यक्ति आगे बढ़ता है, जबकि अकर्मण्य व्यक्ति पीछे रह जाता है।
7. जीवन अनमोल है और मरण जीवन का अंत है।
आपकी बात
(क) आपने सुभाषचंद्र बोस के स्वप्न के बारे में जाना। आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं? लिखिए।
(ख) हमें बड़े संघर्षों के बाद स्वतंत्रता मिली है। अपनी इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं? लिखिए।
पाठ से आगे — मिलान कीजिए
(क) नीचे स्तंभ 1 में स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित कुछ तथ्य दिए गए हैं और स्तंभ 2 में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दिए गए हैं। तथ्यों का स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए। इसके लिए आप अपने शिक्षकों, अभिभावकों और पुस्तकालय तथा इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
| क्रम | तथ्य | सही नाम |
|---|---|---|
| 1 | 8 अप्रैल, 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम फेंकने वाले क्रांतिकारी, ‘शहीद-ए-आज़म’ के नाम से जाने जाते हैं। | भगत सिंह |
| 2 | ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापकों में से एक, सुभाषचंद्र बोस के राजनीतिक गुरु कहे जाते हैं। | चित्तरंजन दास |
| 3 | जेल में क्रांतिकारियों के साथ राजबंदियों के समान व्यवहार न होने के कारण क्रांतिकारियों ने 13 जुलाई 1929 से भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के तिरसठवें दिन जेल में इनका देहांत हो गया। | जतिन दास |
| 4 | इनके जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाया जाता है। | महात्मा गाँधी |
| 5 | नर्मदा नदी के तट पर इनकी एक विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ कहा जाता है। | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| 6 | 1921 में असहयोग आंदोलन में गिरफ्तार होने पर न्यायाधीश ने इनसे पिता का नाम पूछा तो इन्होंने कहा— “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता और पता कारावास है।” | चंद्रशेखर आजाद |
(ख) इनमें से एक स्वतंत्रता सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। उसे पहचान कर लिखिए।
सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास
नेताजी सुभाषचंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वाधीन संपन्न समाज की स्थापना के लिए अपने समय में अनेक प्रयास किए। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए हैं? अपनी सामाजिक अध्ययन की पाठ्यपुस्तक, अपने अनुभवों एवं पुस्तकालय की सहायता से लिखिए।
स्त्री सशक्तीकरण
(क) सुभाषचंद्र बोस ने स्त्रियों के लिए समान अधिकार की बात की है। अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि उन्हें कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
(ख) सुभाषचंद्र बोस ने ‘आजाद हिंद फौज’ का नेतृत्व किया था। उसमें एक टुकड़ी स्त्रियों की भी थी। उस टुकड़ी का नाम पता लगाकर लिखिए। उस टुकड़ी की भूमिका क्या थी? यह भी बताइए।

रानी झाँसी रेजीमेंट से संबंधित ऐतिहासिक चित्र
आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी
आप किस स्वतंत्रता सेनानी के कार्यों व विचारों से प्रभावित हैं? कारण सहित लिखिए और अभिनय (रोल प्ले) करते हुए उनके विचारों को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
स्वतंत्रता संग्राम के नारे
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”
ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में 1944 में सुभाषचंद्र बोस ने ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा’ नारे के माध्यम से आह्वान किया था। स्वाधीनता संग्राम के दौरान और भी बहुत से नारे दिए गए। ये नारे स्वतंत्रता सेनानियों के अदम्य साहस, निर्भीकता और देश-प्रेम को दर्शाते हैं।
नीचे स्तंभ 1 में कुछ नारे दिए गए हैं। नारों के सामने लिखिए कि यह किसके द्वारा दिया गया? आप पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
| नारा | स्वतंत्रता सेनानी |
|---|---|
| स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। | बाल गंगाधर तिलक |
| करो या मरो | महात्मा गाँधी |
| मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगा | चंद्रशेखर आजाद |
| इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद | भगत सिंह |
| पूर्ण स्वराज | जवाहरलाल नेहरू |
परियोजना कार्य
आप सभी राज्यों के स्वतंत्रता सेनानियों के विषय में पढ़कर उनमें से 10 महिला एवं 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्रों का संग्रह करके एक संग्रहिका तैयार कीजिए। चित्रों के नीचे उनके विशेष योगदान के बारे में एक-दो वाक्य भी लिखिए। अपनी संग्रहिका तैयार करते समय ध्यान रखिए कि आप किसी भी राज्य से एक से अधिक व्यक्ति न चुनें।
कार्य करने का तरीका:
- 10 महिला और 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानी चुनिए।
- हर व्यक्ति का चित्र लगाइए।
- उनका नाम और राज्य लिखिए।
- उनके प्रमुख योगदान के बारे में एक-दो वाक्य लिखिए।
- सभी पृष्ठों को क्रम से लगाकर संग्रहिका तैयार कीजिए।
झरोखे से
आपने जो पाठ पढ़ा है उसमें सुभाषचंद्र बोस तरुणों से अपने सपनों की बात करते हैं। अब आप नेताजी सुभाषचंद्र बोस द्वारा लिखित पत्र पढ़िए जिसमें उन्होंने गृह एवं कुटीर उद्योग पर अपने विचार व्यक्त किए हैं—
गृह उद्योग के विषय में नेताजी का एक पत्र
इस पत्र में नेताजी ने कम खर्च में मिट्टी के खिलौने और सीप के बटन जैसे गृह उद्योग शुरू करने की बात कही है। उनका विचार था कि ऐसे छोटे उद्योगों से गरीब परिवार अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि गाँवों में स्त्री-पुरुष अपने खाली समय में ऐसे काम कर सकते हैं। समिति कच्चा माल और आवश्यक साधन उपलब्ध कराकर तैयार वस्तुओं को बेचने की व्यवस्था कर सकती है।
साझी समझ
उपर्युक्त पत्र में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने गृह एवं कुटीर उद्योग की बात की है। यह पत्र देश की स्वतंत्रता से पहले लिखा गया था। अपने आस-पास के गृह एवं कुटीर उद्योगों के विषय में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए।
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी का प्रयोग करके आप सुभाषचंद्र बोस पर आधारित फिल्म देख सकते हैं।
‘आजाद हिंद फौज’ के विषय में और अधिक जानकारी जुटाइए और अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
- आजाद हिंद फौज भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी सेना थी।
- सुभाषचंद्र बोस ने इसका नेतृत्व किया।
- इसका उद्देश्य भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र कराना था।
- इसमें महिलाओं ने भी भाग लिया।
- रानी झाँसी रेजीमेंट महिलाओं की प्रसिद्ध टुकड़ी थी।
अध्याय से मिलने वाली मुख्य सीख
- हमें स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।
- सभी लोगों को समान अवसर मिलना चाहिए।
- स्त्री और पुरुष को समान अधिकार मिलने चाहिए।
- जाति और आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- मेहनत और कर्म का सम्मान करना चाहिए।
- आलस्य और अकर्मण्यता से बचना चाहिए।
- युवाओं को देश और समाज की प्रगति में योगदान देना चाहिए।
- अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत और त्याग करना चाहिए।
एक नजर में पूरा अध्याय
Prepare for your Class 8 Hindi Malhar Chapter 10 with this practice worksheet. It includes questions and exercises based on the chapter to help you revise important concepts, improve understanding, and prepare for school examinations.
class 8 hindi malhar chapter 10 tarun ke swapn notes and book solutions, class 8 hindi tarun ke swapn notes, class 8 hindi tarun ke swapn book solutions, class 8 hindi chapter 10 question answers, class 8 hindi malhar chapter 10 solutions, NCERT class 8 hindi tarun ke swapn, CBSE class 8 hindi chapter 10, class 8 hindi malhar notes, NCERT class 8 hindi malhar, CBSE Hindi Malhar book solutions