Class 8 Hindi Malhar Chapter 1 स्वदेश Notes and Book Solutions | NCERT CBSE

Class 8 Hindi Malhar Chapter 1 स्वदेश notes and book solutions with easy explanations, question answers and NCERT-based study material for CBSE students.

कक्षा 8 हिंदी मल्हार

अध्याय 1 — स्वदेश

कवि — गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

पाठ का आकार:

स्वदेश — पूरी कविता

वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
जो जीवित जोश जगा न सका,
उस जीवन में कुछ सार नहीं।

जो चल न सका संसार-संग,
उसका होता संसार नहीं।
जिसने साहस को छोड़ दिया,
वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
जिससे न जाति-उद्धार हुआ,
होगा उसका उद्धार नहीं॥

जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥

जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी॥

जिसने कि खजाने खोले हैं,
नव रत्न दिए हैं लासानी।
जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥

उस पर है नहीं पसीजा जो,
क्या है वह भू का भार नहीं।
निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।

है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥

सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥

— गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’

स्वदेश और देश-प्रेम से जुड़ी तस्वीरें

भारत का राष्ट्रीय ध्वज
भारत का राष्ट्रीय ध्वज
गांधी आश्रम का चरखा
गांधी आश्रम में रखा चरखा

अध्याय का सारांश

‘स्वदेश’ कविता में कवि गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ ने देश-प्रेम की भावना को बहुत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है।

कवि कहते हैं कि जिस व्यक्ति के हृदय में अपने देश के लिए प्रेम नहीं है, उसका हृदय पत्थर के समान है। केवल जीवित रहना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन में उत्साह, साहस, भावनाएँ और अच्छे कार्य भी होने चाहिए।

कवि अपने देश की मिट्टी, अन्न, जल, माता-पिता, भाई-बंधु और प्राकृतिक संपदा के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। वे बताते हैं कि हमारा देश हमें बहुत कुछ देता है, इसलिए हमें भी उसके प्रति प्रेम और जिम्मेदारी रखनी चाहिए।

कविता हमें साहसी बनने, समाज के साथ आगे बढ़ने और देश के लिए उपयोगी कार्य करने की प्रेरणा देती है। देश-प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि अच्छे कार्यों और देश की उन्नति में योगदान देने से दिखाई देता है।

कवि से परिचय

गयाप्रसाद शुक्ल सनेही

गयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’ (1883–1972) हिंदी के प्रसिद्ध कवि थे।

उन्होंने ब्रजभाषा में कविता लिखना शुरू किया और बाद में खड़ी बोली के श्रेष्ठ कवियों में अपना स्थान बनाया।

उन्होंने राष्ट्र-प्रेम के साथ-साथ किसान, मजदूर और सामाजिक कुरीतियों जैसे विषयों पर भी कविताएँ लिखीं।

उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘त्रिशूल तरंग’, ‘राष्ट्रीय मंत्र’ और ‘कृषक क्रंदन’ शामिल हैं।

मुख्य बातें

  • कविता का मुख्य विषय देश-प्रेम है।
  • कवि के अनुसार देश-प्रेम हृदय को संवेदनशील और भावपूर्ण बनाता है।
  • जीवन में जोश और उत्साह होना आवश्यक है।
  • सफलता के लिए साहस और इच्छाशक्ति जरूरी है।
  • हमें अपने देश, उसकी मिट्टी और संसाधनों का सम्मान करना चाहिए।
  • देश-प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि अच्छे कार्य करने की प्रेरणा भी है।
  • कविता में तुक मिलाने और शब्दों की विशेष व्यवस्था से लय और प्रभाव बढ़ा है।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उपयुक्त उत्तर के सम्मुख तारा (✱) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

1. “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है—
  • सामाजिकता से
  • संवेदनहीनता से
  • कठोरता से
  • नैतिकता से
उत्तर:
संवेदनहीनता से और कठोरता से।
2. निम्नलिखित में से कौन-सा विषय इस कविता का मुख्य भाव है?
  • देश की प्रगति
  • देश के प्रति प्रेम
  • देश की सुरक्षा
  • देश की स्वतंत्रता
उत्तर:
देश के प्रति प्रेम।
3. “हम हैं जिसके राजा-रानी” — इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है?
  • देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
  • देश की शासन व्यवस्था के लिए
  • देश के समस्त नागरिकों के लिए
  • देश के सभी प्राणियों के लिए
उत्तर:
देश के समस्त नागरिकों के लिए।
4. कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
  • जिसमें साहस की कमी है
  • जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
  • जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
  • जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
उत्तर:
जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।
उत्तर:
बिना साहस के कठिनाइयों को पार करके लक्ष्य प्राप्त करना कठिन होता है।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।
उत्तर:
जो व्यक्ति उत्साह से जीवन नहीं जीता और दूसरों में भी उत्साह नहीं जगाता, उसका जीवन अर्थहीन हो जाता है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।
उत्तर:
कवि अपने देश की महानता और उसकी ज्ञान-संपदा की प्रशंसा करते हैं, जिसकी ओर विद्वान और पूरी दुनिया आकर्षित होती है।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
उत्तर:
मनुष्य के पास अपनी मेहनत, साहस और इच्छाशक्ति जैसे साधन हैं। केवल हथियार ही शक्ति का साधन नहीं हैं।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।

स्तंभ 1सही मिलानस्तंभ 2 का भाव
1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं।3जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो, वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकता।
2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं।4जो स्वयं के साथ दूसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते, उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है।
3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी।1जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है।
4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं।2जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

पंक्तियों पर चर्चा

(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को॥”
उत्तर:
जीवन और मृत्यु निश्चित हैं। समय लगातार आगे बढ़ रहा है। इसलिए मनुष्य को जीवन का सदुपयोग करना चाहिए।
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
उत्तर:
कवि कहते हैं कि हमारे पास मेहनत, साहस और इच्छाशक्ति जैसे साधन हैं। इसलिए हमें देश के लिए अच्छे कार्य करने चाहिए।
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
उत्तर:
जिस हृदय में प्रेम, भावनाएँ और देश के प्रति लगाव नहीं है, वह संवेदनहीन हृदय पत्थर के समान है।

सोच-विचार के लिए

(क) “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है?
उत्तर:
राजा-रानी देश के नागरिकों को कहा गया है, क्योंकि देश की भूमि और संसाधनों पर नागरिकों का अधिकार और जिम्मेदारी दोनों हैं।
(ख) ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति ‘संसार-संग’ नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है?
उत्तर:
‘संसार-संग’ चलने का अर्थ है समाज के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना। जो व्यक्ति समाज से अलग रहता है, वह दूसरों का सहयोग और अनुभव प्राप्त नहीं कर पाता।
(ग) “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं।” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
जो व्यक्ति अपनी मातृभूमि के प्रति संवेदनशील नहीं है, वह देश के लिए बोझ के समान है।
(घ) कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
उत्तर:
देश-प्रेम का अर्थ अपने देश से प्रेम करना, उसके लोगों और संसाधनों का सम्मान करना तथा देश की प्रगति के लिए ईमानदारी से काम करना है।
(ङ) यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
उत्तर:
कविता में सरल भाषा, लय, तुकांत शब्द, पुनरावृत्ति, प्रेरणादायक भाव और प्रभावशाली उदाहरणों का प्रयोग किया गया है।

अनुमान और कल्पना से

(क) “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
उत्तर:
यहाँ देश की प्राकृतिक संपदा, ज्ञान, संस्कृति, कला और प्राकृतिक संसाधनों जैसे खजानों की बात की गई होगी।
(ख) “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा?
उत्तर:
‘उगे-बढ़े’ शब्द देश के नागरिकों के लिए कहा गया है, क्योंकि वे इसी देश की मिट्टी में जन्म लेकर बड़े हुए हैं।
(ग) “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा?
उत्तर:
पत्थर को भावनाहीन माना जाता है। इसलिए जिस व्यक्ति के मन में देश-प्रेम और संवेदना नहीं है, उसके हृदय को पत्थर कहा गया है।
(घ) कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा है। वो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या कहेंगे?
उत्तर:
पत्थर कहेगा कि वह नदी की धारा, वर्षा, धूप और समय के कारण बदलता रहा। मैं उससे कहूँगा कि उसके जीवन से हमें धैर्य और कठिन परिस्थितियों में टिके रहने की सीख मिलती है।
(ङ) देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि को संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर:
जल, वन, नदियाँ, वन्यजीव, मिट्टी, ऐतिहासिक स्मारक और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षण की आवश्यकता है, क्योंकि ये हमारे देश की संपत्ति हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक हैं।

कविता की रचना

“दाना-पानी” और “राजा-रानी” में अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता को तुक मिलाना कहते हैं।

(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
उत्तर:
तुक मिलाने से कविता में लय, मधुरता और सुनने में आनंद पैदा होता है। कविता आसानी से याद भी रहती है।
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
उत्तर:
कविता में पुनरावृत्ति, तुकांत शब्द, सरल भाषा, लय, प्रश्नात्मक शैली और प्रभावशाली उपमाओं का प्रयोग किया गया है।

आपकी कविता

देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए—

वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
एक सरल उदाहरण:

जो देश की सेवा करता है,
वह कभी बेकार नहीं।
जो मेहनत से देश सँवारता,
उसका कोई पार नहीं।

जो प्रकृति की रक्षा करता,
उससे बढ़कर प्यार नहीं।

भाषा की बात

(क) शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए—
उदाहरण:

स्वदेश, स्वदेशी, स्वदेश-प्रेम, स्वदेश-प्रेमी, स्वदेश-भक्ति, स्वदेश-भक्त, स्वदेश-वासी, स्वदेश-निर्मित, स्वदेश-अभिमान, मातृभूमि, राष्ट्र, देशभक्ति।

(ख) विराम चिह्नों को समझें

“जो चल न सका संसार-संग”
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”

कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत— ‘जो चल न सका संसार के संग’)

उत्तर:

जो चल न सका संसार के संग।

बहती जिसमें रस की धार नहीं।

पाया जिसमें दाना और पानी।

हैं माता और पिता बंधु जिसमें।

हम हैं जिसके राजा और रानी।

जिससे न जाति का उद्धार हुआ।

(ग) शब्द-मित्र

“है जान एक दिन जाने को”
“है काल-दीप जलता हरदम”

उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि ‘है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे—

‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल-दीप हरदम जलता है।’

अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियाँ चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।

उत्तर:

मूल: है काल-दीप जलता हरदम।

परिवर्तित: काल-दीप हरदम जलता है।

मूल: है जान एक दिन जाने को।

परिवर्तित: जान एक दिन जाने को है।

‘है’ को पहले रखने से कविता में अधिक लय और काव्यात्मकता आती है।

अब नीचे दी गई पंक्ति में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्ति को पुनः लिखिए।

“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी॥”

उत्तर:

“हैं ज्ञानी भी जिस पर मरते,
है दुनिया जिस पर दीवानी॥”

(घ) समानार्थी शब्द

कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
शब्दसमानार्थी शब्द
भूपृथ्वी, धरा
दीपदीपक, प्रदीप
हृदयदिल, जी
तलवारकृपाण, असि
दुनियासंसार, जग
पत्थरपाषाण, पाहन

कविता का शीर्षक

“वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?

उत्तर:
मैं शीर्षक “जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” चुनूँगा/चुनूँगी, क्योंकि पूरी कविता देश-प्रेम के महत्व को बताती है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) नीचे कुछ चित्र दिए गए हैं। उन चित्रों पर सही (✓) का चिह्न लगाइए जिन्हें आप ‘स्वदेश प्रेम’ की श्रेणी में रखना चाहेंगे?
उत्तर लिखने का आधार:

जिन कार्यों में देश की सेवा, प्रकृति की रक्षा, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, स्वच्छता, ईमानदारी और नागरिक जिम्मेदारी दिखाई दे, उन्हें स्वदेश-प्रेम की श्रेणी में रखा जा सकता है।

(ख) अब आप अपने उत्तर के पक्ष में तर्क भी दीजिए।
उत्तर:
स्वदेश-प्रेम केवल देश के बारे में अच्छी बातें करना नहीं है। देश की स्वच्छता रखना, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना, नियमों का पालन करना और ईमानदारी से अपना काम करना भी देश-प्रेम है।

हमारे अस्त्र-शस्त्र

“सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”

देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं। आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?

स्वदेश प्रेमीअस्त्र-शस्त्र
विद्यार्थीज्ञान, शिक्षा और कलम
अध्यापकज्ञान, संस्कार और शिक्षा
कृषकहल, मेहनत और खेती
चिकित्सकचिकित्सा-ज्ञान, सेवा और करुणा
वैज्ञानिकज्ञान, अनुसंधान और विज्ञान
श्रमिकमेहनत, कौशल और श्रम
पत्रकारसच्ची जानकारी, कलम और निर्भीकता

अपनी भाषा अपने गीत

(क) कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
गतिविधि:
विद्यार्थी अपनी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में देश-प्रेम की एक कविता या गीत खोजकर उसकी जानकारी कक्षा में साझा करें।
(ख) किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्‍मक प्रस्तुति भी करें।
गतिविधि:
समूह बनाकर किसी देश-प्रेम से जुड़े गीत का सामूहिक गायन प्रस्तुत करें।

तिरंगा झंडा — कब प्रसन्न और कब उदास

भारत का तिरंगा झंडा
राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगे झंडे को प्रसन्नता हुई होगी।
उदाहरण उत्तर:

तिरंगे को प्रसन्न करने वाले कार्य: मैंने स्कूल में नियमों का पालन किया, कक्षा साफ रखी, किसी की सहायता की और पानी व्यर्थ नहीं बहाया।

तिरंगे को उदास करने वाले कार्य: यदि मैंने कूड़ा फैलाया, पानी या बिजली व्यर्थ की या किसी सार्वजनिक वस्तु को नुकसान पहुँचाया, तो ये गलत कार्य होंगे।

झरोखे से

आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।

खादी के धागे-धागे में
अपनेपन का अभिमान भरा,
माता का इसमें मान भरा,
अन्यायी का अपमान भरा;

खादी के रेशे-रेशे में
अपने भाई का प्यार भरा,
माँ-बहनों का सत्कार भरा,
बच्चों का मधुर दुलार भरा;

खादी की रजत चंद्रिका जब,
आकर तन पर मुसकाती है,
तब नवजीवन की नई ज्योति
अंतस्तल में जग जाती है;

साझी समझ

आपने ‘स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
उत्तर:

‘स्वदेश’ में देश की मिट्टी, लोगों और मातृभूमि के प्रति प्रेम व्यक्त किया गया है। ‘खादी गीत’ में खादी, स्वदेशी भावना, आत्मसम्मान और देशवासियों के प्रेम को व्यक्त किया गया है। दोनों कविताएँ लोगों में देश के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना जगाती हैं।

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग कर आप देश-प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित रचनाएँ पढ़ सकते हैं—

त्वरित पुनरावृत्ति

बिंदुयाद रखने योग्य बात
कविता का नामस्वदेश
कविगयाप्रसाद शुक्ल ‘सनेही’
मुख्य भावदेश-प्रेम
पत्थर हृदयजिसमें स्वदेश का प्यार नहीं है
मुख्य संदेशदेश से प्रेम करें और देश की प्रगति में योगदान दें।
मुख्य गुणसाहस, जोश, संवेदना, मेहनत और देश-प्रेम
काव्य विशेषतातुक, लय, पुनरावृत्ति और प्रभावशाली भाषा

महत्वपूर्ण शब्दार्थ

शब्दसरल अर्थ
स्वदेशअपना देश
जोशउत्साह
सारमहत्त्व या अर्थ
साहसहिम्मत
उद्धारभलाई या मुक्ति
भावमन की भावना
रस-धारभावनाओं की धारा
लासानीअनुपम, अद्भुत
निस्संशयबिना संदेह के
काल-दीपसमय रूपी दीपक
परवानेदीपक पर जलने वाले पतंगे
भूपृथ्वी या धरती
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