Class 7 Hindi Malhar Chapter 8 Notes | बिरजू महाराज से साक्षात्कार

Class 7 Hindi Malhar Chapter 8 “बिरजू महाराज से साक्षात्कार” notes with easy explanation, summary, word meanings, important points and NCERT question answers for quick revision and exam preparation.

बिरजू महाराज से साक्षात्कार | कक्षा 7 हिन्दी मल्हार पाठ 8

बिरजू महाराज से साक्षात्कार

कक्षा 7 हिन्दी – मल्हार | पाठ 8

पाठ का सरल सारांश

यह पाठ प्रसिद्ध कथक नर्तक पंडित बिरजू महाराज के साथ हुए एक साक्षात्कार पर आधारित है। इसमें उनके बचपन, संघर्ष, कथक की शिक्षा, संगीत और नृत्य के प्रति प्रेम, परिवार, कथक की परंपरा, विभिन्न नृत्य शैलियों और बच्चों के लिए उनकी सीख के बारे में जानकारी मिलती है।

  • बिरजू महाराज को कथक की कला अपने परिवार से विरासत में मिली थी।
  • बचपन में उनके परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
  • उनकी माँ ने कठिन समय में उनका बहुत साथ दिया और अभ्यास करते रहने के लिए प्रेरित किया।
  • उन्होंने कथक की शिक्षा अपने पिता अच्छन महाराज तथा चाचा शंभू महाराज और लच्छू महाराज से प्राप्त की।
  • बिरजू महाराज के अनुसार नृत्य के लिए संगीत और लय की समझ बहुत आवश्यक है।
  • उन्होंने कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसकी प्रस्तुति में नए प्रयोग किए।
  • वे संगीत, नृत्य, गायन, वादन, चित्रकला और मशीनों में भी रुचि रखते थे।
  • उन्होंने बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार संगीत और कला सीखने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • वे मानते थे कि लय बच्चों में अनुशासन, संतुलन और तालमेल विकसित करती है।
  • वे लड़कियों के आत्मनिर्भर बनने के लिए शिक्षा और किसी न किसी हुनर को आवश्यक मानते थे।

महत्वपूर्ण बातें

नाम

पंडित बिरजू महाराज

मुख्य कला

कथक नृत्य

गुरु

अच्छन महाराज, शंभू महाराज और लच्छू महाराज

मुख्य संदेश

अभ्यास, लय, अनुशासन और अपनी रुचि के अनुसार कला सीखना।

कठिन शब्द और सरल अर्थ

शब्दसरल अर्थ
विरासतपूर्वजों से मिली परंपरा या संपत्ति
साधनालगातार अभ्यास
संघर्षकठिन परिस्थितियों में प्रयास
आजीविकाजीवन चलाने का साधन
प्रशिक्षणसीखने की व्यवस्थित प्रक्रिया
परंपरापीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आने वाली रीति
शास्त्रीयनियमों और परंपराओं पर आधारित
सामूहिकसमूह से संबंधित
लयताल और गति का क्रम
भाव-भंगिमाहाव-भाव द्वारा भाव प्रकट करना
आत्मनिर्भरअपने काम के लिए स्वयं सक्षम

पाठ से प्रश्न और उत्तर

मेरी समझ से

नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा?
□ वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे।
□ वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्वपूर्ण नहीं मानते थे।
□ वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।
□ वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
उत्तर: वे नृत्य के प्रति शिष्य की लगन और समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।
(2) “जीवन में उतार चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए?
□ पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।
□ कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।
□ किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।
□ नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
उत्तर: पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा और जीवन में सुख-सुविधाओं के साथ कठिन समय भी आया।
(3) बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए?
□ संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।
□ कला संबंधी विषयों से जुड़ा होना बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
□ कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
□ वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।
उत्तर: कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है और यह बच्चों के बौद्धिक विकास में सहायक है।
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर: हमने वे उत्तर चुने क्योंकि पाठ में बिरजू महाराज ने अभ्यास, कला, लय और बच्चों के विकास के महत्व को स्पष्ट किया है।

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही संदर्भ या अवधारणाओं से मिलाइए।

शब्दसही संदर्भ / अवधारणा
1. कर्नाटक संगीत शैलीभारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है।
2. घरानासंगीत या नृत्य की विशिष्ट शैली को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला समुदाय या परंपरा।
3. शास्त्रीय संगीतभारत की प्राचीन गायन-वादन तथा गीत-नृत्य-अभिनय परंपरा का महत्वपूर्ण अंग, जिसमें नियमों की प्रधानता होती है।
4. हिंदुस्तानी संगीत शैलीभारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है।
5. कर्णछेदनहिंदू धर्म के सोलह संस्कारों में एक, जो कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है।
6. लोक नृत्यकिसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य।
याद रखें: कर्नाटक संगीत दक्षिण भारत से और हिंदुस्तानी संगीत मुख्यतः उत्तर भारत से संबंधित है।

शीर्षक

इस पाठ का शीर्षक ‘बिरजू महाराज से साक्षात्कार’ है। यदि आप इस साक्षात्कार को कोई अन्य नाम देना चाहते हैं तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा? लिखिए।
संकेत उत्तर: मैं इसका नाम “बिरजू महाराज की कला-यात्रा” रखूँगा क्योंकि पाठ में उनके जीवन, संघर्ष, कथक, संगीत और विचारों के बारे में बताया गया है।

पंक्तियों पर चर्चा

“तुम नौकरी में बँट जाओगे। तुम्हारे अंदर का नर्तक पूरी तरह पनप नहीं पाएगा।”
अर्थ: नौकरी के कारण समय कम हो सकता है और नृत्य के अभ्यास के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा।
“नृत्य में शरीर, ध्यान और तपस्या का साधन होता है।”
अर्थ: नृत्य के लिए शरीर, मन का ध्यान और लगातार अभ्यास आवश्यक है।
“कथक में गर्दन को हल्के से हिलाया जाता है, चिराग की लौ के समान।”
अर्थ: कथक में गर्दन की गति बहुत कोमल और धीरे होती है।

सोच-विचार के लिए

1. साक्षात्कार को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए।

(क) बिरजू महाराज नृत्य का औपचारिक प्रशिक्षण आरंभ होने से पहले ही कथक कैसे सीख गए थे?
घर में कथक का वातावरण था। वे अपने परिवार के लोगों को देखकर कथक सीख गए थे।
(ख) नृत्य सीखने के लिए संगीत की समझ होना क्यों अनिवार्य है?
क्योंकि नृत्य में लय और ताल का बहुत महत्व होता है और लय संगीत का आधार है।
(ग) नृत्य के अतिरिक्त बिरजू महाराज को और किन-किन कार्यों में रुचि थी?
उन्हें गाने, बजाने, मशीनें ठीक करने और चित्र बनाने में रुचि थी।
(घ) बिरजू महाराज ने बच्चों की शिक्षा और रुचियों के बारे में अभिभावकों से क्या कहा है?
उन्होंने कहा कि बच्चों की रुचि हो तो उन्हें कला और लय के साथ खेलने तथा सीखने का अवसर देना चाहिए।

2. पाठ में से उन प्रसंगों की पहचानकर उन पर चर्चा कीजिए, जिनसे पता चलता है कि—

(क) बिरजू महाराज बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
उन्होंने नृत्य के साथ गायन और वादन किया। उन्हें मशीनों और चित्रकला में भी रुचि थी।
(ख) बिरजू महाराज को नृत्य की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी माँ का बहुत योगदान रहा।
उनकी माँ ने कठिन आर्थिक समय में उनका साथ दिया और उनसे कहा कि भोजन मिले या न मिले, अभ्यास जरूर करो।
(ग) बिरजू महाराज महिलाओं के लिए समानता के पक्षधर थे।
उन्होंने अपनी बेटियों को कथक सिखाया और कहा कि लड़कियों के पास शिक्षा या कोई हुनर अवश्य होना चाहिए ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

शब्दों की बात

(क) उपसर्ग और प्रत्यय

शब्दविभाजनप्रकार
अदृश्यअ + दृश्यउपसर्ग
आवरणआ + वरणउपसर्ग
प्रशिक्षणप्र + शिक्षणउपसर्ग
सीमितसीमा + इतप्रत्यय
सुंदरतासुंदर + ताप्रत्यय
भारतीयभारत + ईयप्रत्यय
सामूहिकसमूह + इकप्रत्यय

(ख) नीचे दो तबले हैं, एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता से नए शब्द बनाइए।

शब्दांशमूल शब्दनया शब्द
आनामआ + नाम = आनाम
सुगंधसु + गंध = सुगंध
अमर्यादाअ + मर्यादा = अमर्यादा
ईयराष्ट्रराष्ट्र + ईय = राष्ट्रीय
इकखंडखंड + इक = खंडिक
तासाधारणसाधारण + ता = साधारणता
इतश्रमश्रम + इत = श्रमित

(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।

उत्तर:
शब्दवाक्य
आधुनिकआज आधुनिक तकनीक का प्रयोग हो रहा है।
पारंपरिककथक एक पारंपरिक नृत्य है।
भारतीयभारत की भारतीय संस्कृति बहुत समृद्ध है।
सामूहिकहमने सामूहिक रूप से कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

शब्दों का प्रभाव

1. “कुछ कथक डर गए किंतु उन कथकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथकों के कथक में मग्न हो गए।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाकर वाक्य पढ़िए और पहचानिए कि क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर: ‘इतना’ शब्द हटाने पर वाक्य का प्रभाव कम हो जाता है। ‘इतना’ शब्द कला की विशेष शक्ति और प्रभाव को अधिक स्पष्ट करता है।
पाठ में आए हुए वाक्यों में से ऐसे ही कुछ और शब्द ढूँढ़कर उन्हें रेखांकित कीजिए जिनके प्रयोग से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है?
संकेत उत्तर: बहुत, इतना, खूब, ही, केवल, धीरे-धीरे जैसे शब्द वाक्य के प्रभाव को बढ़ाते हैं।

पाठ से आगे – कला का संसार

(क) बिरजू महाराज— “कथक की पुरानी परंपरा को तो कायम रखा है। हाँ, उसके प्रस्तुतिकरण में बदलाव किए हैं।” इस कथन को ध्यान में रखते हुए लिखिए कि कथक की प्रस्तुतियों में किस प्रकार के परिवर्तन आए हैं?
कथक की पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसकी प्रस्तुति में नए भाव-भंगिमाएँ और आधुनिक कवियों की रचनाएँ शामिल की गईं। प्रस्तुति का तरीका भी बदला।
(ख) लोकनृत्य और शास्त्रीय नृत्य में क्या अंतर है? लिखिए।
लोकनृत्य सामान्यतः समूह में मनोरंजन के लिए किया जाता है। शास्त्रीय नृत्य निश्चित नियमों और परंपराओं के अनुसार किया जाता है तथा इसमें प्रशिक्षण और अभ्यास आवश्यक होता है।
(ग) “बैरिगिया नाला जुलुम जोर,
नौ कथिक नचावें तीन चोर।
जब तबला बोले धीन-धीन,
तब एक-एक पर तीन-तीन।”
इस पाठ में हरिया गाँव में गाए जाने वाले उपर्युक्त पद का उल्लेख है। आप अपने क्षेत्र में गाए जाने वाले किसी लोकगीत को कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
संकेत उत्तर: विद्यार्थी अपने क्षेत्र का कोई प्रसिद्ध लोकगीत कक्षा में समूह के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं।

साक्षात्कार की रचना

साक्षात्कार में किसी व्यक्ति के जीवन, कार्य, उपलब्धियों, रुचियों और विचारों के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं। एक अच्छे साक्षात्कार के लिए पहले से तैयारी, शोध, संवेदनशीलता और धैर्य आवश्यक है।
(क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
व्यक्ति के जीवन और कार्य के बारे में जानकारी एकत्र की गई होगी और उनसे पूछे जाने वाले प्रश्न तैयार किए गए होंगे।
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
मैं उनके पुरस्कारों, पसंदीदा नृत्य रचनाओं, विद्यार्थियों और भविष्य की योजनाओं से जुड़े प्रश्न जोड़ना चाहूँगा।
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
मैं उनके काम, रोज की दिनचर्या, कठिनाइयों, अनुभवों, परिवार और काम से जुड़ी रुचियों के बारे में प्रश्न पूछूँगा।

सृजन

आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन होने जा रहा है।
(क) आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए।
कथक भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है। इसमें भाव-भंगिमा, लय, ताल और पैरों की गति का विशेष महत्व है। कथक की कई घरानेदार परंपराएँ हैं।
(ख) इस कार्यक्रम की सूचना देने के लिए एक विज्ञापन तैयार कीजिए।
विद्यालय में कथक नृत्य कार्यक्रम
हमारे विद्यालय में कथक नृत्य का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
सभी विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक सादर आमंत्रित हैं।
दिनांक: ____________
समय: ____________
स्थान: ____________
(ग) यदि इस नृत्य कार्यक्रम में कोई दृष्टिबाधित दर्शक है और वह नृत्य का आनंद लेना चाहे तो इसके लिए विद्यालय की ओर से क्या व्यवस्था की जानी चाहिए?
उसके लिए बैठने की उचित व्यवस्था करनी चाहिए और नृत्य की गतिविधियों का मौखिक वर्णन करने वाला व्यक्ति होना चाहिए।

आज की पहेली

“अगर नर्तक को सुर-ताल की समझ है तो वह जान पाएगा कि यह लहरा ठीक नहीं है, इसके माध्यम से नृत्य अंगों में प्रवेश नहीं करेगा।”

संगीत में लय को प्रदर्शित करने के लिए ताल का सहारा लिया जाता है। ताल कई मात्रा समूहों का संयुक्त रूप होता है। संगीत के समय को मापने की सबसे छोटी इकाई मात्रा है।

एक विद्यार्थी ने अपनी डायरी में अपने विद्यालय के किसी एक दिन का उल्लेख किया है। उस उल्लेख में संगीत की कुछ तालों के नाम आए हैं। आप उन तालों के नाम ढूँढ़िए—
उत्तर:
रूपक
लक्ष्मी
तिलवाड़ा
दादरा
झमरा
दीपचंदी
कहरवा

झरोखे से – शब्द पहेली

नीचे दी गई शब्द पहेली में से संगीत की तालों के नाम ढूँढ़कर लिखिए।

ती झ रू ल भ ि त
न च प ं च म ी क ल
म ल क ह र वा
ल इ झू म रा ड़ा
दी प चं दी दा त
ड़ च क र द ढ़
ए म ल घ रा क
तालों के नाम: कहरवा, झूमरा, दीपचंदी, दादरा तथा अन्य पाठ में आए तालों के नाम।

नृत्य की छटाएँ

बिरजू महाराज ने भारत के विभिन्न राज्यों के शास्त्रीय नृत्यों का उल्लेख किया है।

1. भरतनाट्यम

भरतनाट्यम भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है। इसका संबंध तमिलनाडु से है। इसमें भाव, राग और ताल का विशेष महत्व है।

2. कथकली

कथकली दक्षिण भारत की नृत्य-नाट्य परंपरा है। इसमें संगीत, नृत्य और नाटक का सुंदर मेल होता है। इसके विषय महाकाव्यों और पुराणों की कहानियों पर आधारित होते हैं।

3. कथक

कथक ब्रजभूमि की रासलीला से संबंधित पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य है। इसका नाम ‘कथिक’ से लिया गया है। कथक में विभिन्न घरानों का विकास हुआ।

4. कुचिपुड़ी

कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश की पारंपरिक शास्त्रीय नृत्य शैली है। इसकी प्रस्तुति प्रार्थना से शुरू होती है। इसके साथ कर्नाटक संगीत की संगत होती है।

5. मणिपुरी नृत्य

मणिपुरी नृत्य मणिपुर की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य शैली है। इसमें हाथ के हाव-भाव और पैरों की गति का विशेष महत्व है।

6. ओडिसी नृत्य

ओडिसी ओडिशा की प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य शैली है। इसका मुख्य आकर्षण त्रिभंग मुद्रा है।

7. मोहिनीअट्टम

मोहिनीअट्टम का उद्भव केरल में हुआ। इसमें कोमल भाव, चेहरे की अभिव्यक्ति और हस्त-मुद्राओं का विशेष महत्व है।

अभ्यास प्रश्न

1. कथक की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
कथक में लय, ताल, भाव-भंगिमा, पैरों की गति और विभिन्न घरानों की परंपरा प्रमुख हैं।
2. लोकनृत्य सामूहिक क्यों कहा जाता है?
क्योंकि इसे सामान्यतः लोग समूह में मिलकर करते हैं।
3. बिरजू महाराज बच्चों को संगीत सीखने के लिए क्यों प्रेरित करते थे?
क्योंकि संगीत लय, अनुशासन, संतुलन और सहयोग की भावना सिखाता है।
4. बिरजू महाराज के जीवन से हमें क्या सीख मिलती है?
हमें कठिन परिस्थितियों में भी मेहनत, अभ्यास और लगन नहीं छोड़नी चाहिए।

साझी समझ

अभी आपने शास्त्रीय नृत्यों को निकटता से जाना समझा। पाँच-पाँच विद्यार्थियों के समूह में भारत के लोक नृत्यों की सूची बनाइए और उनकी विशिष्टताओं का पता लगाइए।
लोक नृत्यराज्य/क्षेत्रविशेषता
भांगड़ापंजाबऊर्जावान समूह नृत्य
गरबागुजरातसमूह में ताल के साथ नृत्य
घूमरराजस्थानघूमते हुए सुंदर नृत्य
बिहूअसमबिहू त्योहार से संबंधित नृत्य
लावणीमहाराष्ट्रगीत और नृत्य का सुंदर मेल
नाटीहिमाचल प्रदेशसमूह में किया जाने वाला लोक नृत्य

त्वरित पुनरावृत्ति

विषययाद रखने योग्य बात
बिरजू महाराजप्रसिद्ध कथक कलाकार
कथकभारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य
गुरुअच्छन महाराज, शंभू महाराज और लच्छू महाराज
माँ का योगदानकठिन समय में अभ्यास के लिए प्रेरित किया
लयनृत्य और संगीत का महत्वपूर्ण आधार
लोक नृत्यसामूहिक और मनोरंजन से जुड़ा नृत्य
शास्त्रीय नृत्यनिश्चित नियम और परंपरा पर आधारित
बच्चों के लिए संदेशरुचि के अनुसार कला सीखने का अवसर मिलना चाहिए
लड़कियों के लिए संदेशशिक्षा और हुनर से आत्मनिर्भर बनना चाहिए

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CLASS 7 • HINDI • MALHAR

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